यतींद्र मिश्र – ऐसी भी बातें होती हैं Class 9: सार और प्रश्न
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'ऐसी भी बातें होती हैं' यतींद्र मिश्र द्वारा 'भारत रत्न' लता मंगेशकर से लिया गया साक्षात्कार है, जो कक्षा 9 की गंगा का चौथा पाठ है। इसमें लता जी अपने पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर, स्वाभिमान की सीख, संघर्ष, त्योहारों, कोरस के साथियों और संगीत की असीम शक्ति के बारे में बताती हैं।
What यतींद्र मिश्र – ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार) is about
'ऐसी भी बातें होती हैं' एक साक्षात्कार है, जिसे लेखक और संगीत-प्रेमी यतींद्र मिश्र ने स्वर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर से लिया। यह एनसीईआरटी की पुस्तक गंगा (कक्षा 9) के गद्य खंड का चौथा पाठ है। पाठ-परिचय के अनुसार इंदौर में जन्मी लता जी ने पाँच वर्ष की आयु में अपने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली और जीवन-भर संगीत को समर्पित रहीं। पाठ के अभ्यास के अनुसार 1942 में पिता की मृत्यु के समय वे केवल 13 वर्ष की थीं और उन्होंने अकेले परिवार को सँभाला।
बातचीत में लता जी पिता की बिना बोले डाँटने की आदत, उनके संगीत-नाटकों, उनसे मिली स्वाभिमान की सीख, बचपन में 'संत तुकाराम' फ़िल्म की नकल, अभिनय से अरुचि, सुबह से रात तक की रेकॉर्डिंग, महाराष्ट्र के त्योहारों, दीवाली पर संगीतकारों को मिठाई देने, कोरस की लड़कियों से आत्मीय संबंध और उस्ताद अली अकबर खाँ के सरोद का तार टूटने का प्रसंग सुनाती हैं। कक्षा 9 की परीक्षा विद्यालय लेता है; खंड ग के प्रश्नों का विभाजन CBSE ने नहीं दिया, इसलिए यहाँ कक्षा 10 हिंदी जैसे प्रश्न हैं: पठित गद्यांश पर पाँच बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न।
Weightage: कक्षा 9 की वार्षिक परीक्षा (80 अंक) विद्यालय लेता है। खंड ग (पाठ्यपुस्तक गंगा) के 30 अंक हैं, पर CBSE ने इस खंड के प्रश्नों का विभाजन नहीं दिया है। इसलिए यहाँ के प्रश्न कक्षा 10 हिंदी के प्रश्न-प्रकारों (पठित अंश पर बहुविकल्पी प्रश्न, 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न) के ढाँचे पर बने हैं।Source: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम, कक्षा नवीं 2026-27
यतींद्र मिश्र – ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार): summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
आरंभ। यतींद्र मिश्र करोड़ों प्रशंसकों की ओर से लता जी ('दीदी') से प्रश्न पूछते हैं। लता जी आभार जताती हैं कि जितना प्रेम उन्हें मिला, उतना आभार वे गाकर भी शायद व्यक्त नहीं कर पाईं।
पिता की स्मृतियाँ। बचपन में शरारत करने पर पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर बच्चों को सामने खड़ा करके बस गंभीरता से देखते और पूछते, 'समझ गए न?' बिना डाँटे ही बच्चे समझ जाते और रोने लगते। पिता अपने काम और संगीत में डूबे रहते थे। उनकी ड्रामा कंपनी के नाटक रात नौ बजे शुरू होकर दो-तीन बजे तक चलते थे। वे एक राग गाते हुए किसी भी सुर को 'सा' बनाकर नया राग रच देते और फिर लौट आते। उन्होंने मराठी रंगमंच पर कर्नाटक और पंजाब का संगीत पहली बार प्रस्तुत किया।
स्वाभिमान की सीख। लता जी ने पिता से सबसे अधिक स्वाभिमान से जीना सीखा: जो सही लगे वह करो, किसी के आगे झुकने की ज़रूरत नहीं। पिता के निधन के बाद बुरे दिन भी देखे, पर माँ की भी यही सीख थी कि किसी के आगे हाथ न पसारो।
बचपन और फ़िल्में। भाई-बहन फ़िल्मों की नकल करते थे। 'संत तुकाराम' की नकल में गद्दों-तकियों से स्वर्ग बनाकर लता जी उस पर बैठकर गातीं और मीना, पंढरीनाथ और आशा अनुयायी बनकर रोते। पिता केवल धार्मिक और देशभक्ति की फ़िल्में देखने देते थे। लता जी ने छह-सात फ़िल्मों में अभिनय किया, पर मेकअप और कैमरे के सामने हँसना-रोना उन्हें कभी अच्छा नहीं लगा। 'छत्रपति शिवाजी' फ़िल्म के अंतिम गाने में उन्होंने स्वयं आग्रह करके दो पंक्तियाँ गाईं।
संघर्ष और सपने। वे सुबह से रात तक एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो दौड़तीं; उनके मन में बस परिवार की ज़रूरतें पूरी करने की चिंता रहती। बचपन में पिता और कुमार गंधर्व को मेडल लगाकर गाते देखकर वे भी मेडल पाने का सपना देखती थीं। 'आएगा आने वाला' जैसे गीत के लिए तकनीक इतनी पिछड़ी थी कि उन्हें हॉल में दूर से धीरे-धीरे माइक तक चलकर आना पड़ता था।
त्योहार और परंपराएँ। उनके घर रंगों वाली होली नहीं मनती थी; होलिका की राख और रंगपंचमी पर केसर का छिड़काव होता था। गुड़ी पड़वा, नवरात्र, दशहरा और दीवाली का अधिक महत्त्व था। दीवाली की सुबह वे वरिष्ठ संगीतकारों के घर मिठाई लेकर जातीं; नौशाद साहब ने कहा कि सब संगीतकारों को मिलकर लता को मिठाई खिलानी चाहिए, जिसने उनकी धुनों में मिठास घोली। उन्होंने मंगलागौर उत्सव और कोरस की लड़कियों (कविता, गांधारी, कल्याणी, सुमन, रेखा) से अपने आत्मीय संबंध याद किए।
संगीत की शक्ति। तानसेन की कथाओं पर वे कहती हैं कि यह निश्चित नहीं कह सकतीं, पर संगीत में असीम शक्ति है। अली अकबर खाँ के सरोद का तार टूटने पर उन्होंने कहा था, 'बहन, जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है।' अंत में लता जी कहती हैं कि उनका गाना अमर है, शरीर नहीं; उन्हें सबसे अधिक खुशी है कि उन्होंने पिता का नाम आगे बढ़ाया।
केंद्रीय भाव: लता जी का जीवन सादगी, स्वाभिमान, परिश्रम, परिवार के प्रति कर्तव्य और संगीत के प्रति समर्पण का उदाहरण है।
Themes and message
स्वाभिमान और संस्कार
लता जी ने पिता से सबसे अधिक स्वाभिमान से जीना सीखा। अच्छे-बुरे हर दिन में उन्होंने किसी के आगे हाथ नहीं पसारा। माँ की सीख भी यही थी।
From the text: 'सबसे ज्यादा तो स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा।'
पिता का प्रभाव
पिता का बिना बोले अनुशासन, उनका संगीत-प्रयोग और नैतिक दृढ़ता लता जी के व्यक्तित्व में दिखती है। उन्हें सबसे बड़ी खुशी पिता का नाम आगे बढ़ाने की है।
From the text: 'एक बात की मुझे सबसे ज्यादा खुशी है कि मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।'
परिश्रम और कर्तव्य
पिता की मृत्यु के बाद छोटी उम्र में परिवार की ज़िम्मेदारी लेकर लता जी ने सुबह से रात तक काम किया। उनके लिए परिस्थितियों से अधिक परिवार और अगले गीत की चिंता थी।
From the text: 'एक स्टूडियो से दूसरे और तीसरे स्टूडियो के चक्कर में ही पूरा दिन बीत जाता था।'
संगीत की असीम शक्ति
तानसेन की कथाओं और अली अकबर खाँ के टूटे तार के प्रसंग से लता जी मानती हैं कि सच्चे सुर में अद्भुत शक्ति होती है, जो कभी-कभी अप्रत्याशित रच देती है।
From the text: 'बहन, जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है।'
विनम्रता, कृतज्ञता और आत्मीयता
इतनी प्रसिद्धि के बाद भी लता जी कोरस की लड़कियों के साथ ज़मीन पर बैठतीं, वरिष्ठ संगीतकारों को मिठाई देने जातीं और प्रशंसकों के प्रति आभार जतातीं। शरीर की नश्वरता को वे सहज भाव से स्वीकार करती हैं।
From the text: 'मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।'
Characters
लता मंगेशकर
भारत रत्न पार्श्वगायिका; साक्षात्कार देने वाली।
- स्वाभिमानी: किसी के आगे हाथ नहीं पसारा
- परिश्रमी और कर्तव्यनिष्ठ: परिवार के लिए दिन-रात काम
- विनम्र और कृतज्ञ: प्रशंसकों और संगीतकारों के प्रति आदर
- आत्मीय: कोरस की लड़कियों के साथ ज़मीन पर बैठना
- दार्शनिक: शरीर की नश्वरता और कर्म की अमरता की बात
'अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।'
पं. दीनानाथ मंगेशकर
लता जी के पिता, गायक और ड्रामा कंपनी के संचालक।
- अनुशासनप्रिय पर स्नेही: बिना डाँटे समझा देना
- प्रयोगशील कलाकार: सुर बदलकर नया राग, मराठी मंच पर कर्नाटक-पंजाब का संगीत
- संस्कारी: केवल धार्मिक और देशभक्ति की फ़िल्में देखने देते
'समझ गए न?' और 'मेरे पिताजी कमाल के आदमी थे'।
यतींद्र मिश्र
साक्षात्कारकर्ता; कवि और संगीत-लेखक।
- आदरपूर्ण: लता जी को 'दीदी' कहते हैं
- जिज्ञासु और तैयार: रोचक, कल्पनाशील प्रश्न (टाइम मशीन वाला प्रश्न)
'अगर हम समय के चक्र (टाइम मशीन) को घुमाकर...'
नौशाद साहब और अली अकबर खाँ
प्रसंगों में आए संगीतकार।
- नौशाद: स्नेही और प्रशंसक
- अली अकबर खाँ: सुर में डूबे साधक
नौशाद का मिठाई वाला कथन; अली अकबर खाँ का टूटे तार पर कथन।
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| साक्षात्कार विधा (प्रश्नोत्तर) | यतींद्र मिश्र के प्रश्न और लता जी के उत्तर | व्यक्ति को उसके अपने शब्दों में सामने लाती है; पाठक को सीधी बातचीत का अनुभव होता है। |
| संस्मरण | 'संत तुकाराम' की नकल, दीवाली की सुबह नौशाद साहब के घर जाना | छोटे प्रसंग व्यक्तित्व को जीवंत और आत्मीय बनाते हैं। |
| आत्मीय, सहज भाषा | '(हँसते हुए) अरे! यह तो हम सब भाई-बहन बहुत करते थे।' | कोष्ठक में दिए भाव बातचीत का वातावरण दिखाते हैं। |
| कहावत | 'गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन' | मराठी कहावत से यह भाव कि जीवन अस्थायी है, पर नाम और कर्म रह जाते हैं। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
सबसे ज्यादा तो स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा।
लता मंगेशकर: पिता से क्या सीखा, इस प्रश्न के उत्तर में।
उनके जीवन का मूल संस्कार।
अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।
लता मंगेशकर (पिता की सीख): स्वाभिमान की चर्चा।
दृढ़ता और नैतिक साहस।
बहन, जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है।
उस्ताद अली अकबर खाँ: कंसर्ट में सरोद का तार टूटने के बाद।
संगीत की असीम शक्ति का संकेत।
मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।
लता मंगेशकर: साक्षात्कार के अंत में।
नश्वरता की सहज स्वीकृति; कर्म की अमरता।
मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।
लता मंगेशकर: सबसे बड़ी खुशी के बारे में।
पिता के प्रति कृतज्ञता और विनम्रता।
यतींद्र मिश्र – ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार) in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
स्वाभिमान से जीना
मान लीजिए आपका एक मित्र परीक्षा में आपसे उत्तर दिखाने को कहता है और न दिखाने पर दोस्ती तोड़ने की धमकी देता है।
लता जी के पिता की सीख आपकी कैसे मदद करेगी? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- जो सही लगे वह करो।
- किसी के आगे झुकने की ज़रूरत नहीं।
- विनम्रता से मना करना।
Answer: पिता की सीख थी कि जो सही लगे वह करो और किसी के आगे मत झुको। मैं विनम्रता से मना करूँगा और बाद में मित्र को पढ़ाई में मदद की पेशकश करूँगा।
Memory hook: सही पर टिको, दबाव में मत झुको।
सहयोगियों का सम्मान
कल्पना कीजिए कि आप विद्यालय के वार्षिकोत्सव में मुख्य गायक हैं और कोरस में आपके सहपाठी हैं।
लता जी से आप उनके साथ व्यवहार के बारे में क्या सीखेंगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- लता जी कोरस की लड़कियों के साथ ज़मीन पर बैठतीं।
- सबको घर जैसा मानतीं।
- सफलता सबकी।
Answer: लता जी कोरस की लड़कियों के साथ ज़मीन पर बैठकर बातें करती थीं। मैं भी सहपाठियों को बराबर सम्मान दूँगा, उनका आभार मानूँगा और सफलता को सबकी मानूँगा।
Memory hook: मुख्य स्वर भी कोरस के बिना अधूरा।
ऑनलाइन ठगी से सावधानी (पाठ की साइबर सुरक्षा गतिविधि)
मान लीजिए आपके दादाजी को किसी परिचित जैसी आवाज़ में फ़ोन आता है जिसमें तुरंत पैसे भेजने को कहा जाता है।
पाठ की साइबर सुरक्षा गतिविधि के आधार पर आप क्या सलाह देंगे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- आज तकनीक से आवाज़ बदली जा सकती है।
- सीधे परिचित को दूसरे नंबर पर फ़ोन करके पुष्टि।
- ओटीपी/पैसे न भेजें; शिकायत करें।
Answer: आज कृत्रिम बुद्धि से आवाज़ बदलकर ठगी होती है। मैं दादाजी से कहूँगा कि पैसे भेजने से पहले उस परिचित को उनके अपने नंबर पर फ़ोन करके पुष्टि करें और संदेह हो तो साइबर शिकायत करें।
Memory hook: आवाज़ पर नहीं, पुष्टि पर भरोसा।
Topics in this chapter
How the school exam asks यतींद्र मिश्र – ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार)
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1×5) | पिता का अनुशासन, स्वाभिमान की सीख, मंगलागौर, कोरस या अली अकबर खाँ वाले अंश पर: लता जी ने पिता से क्या सीखा, कौन-सा जीवन-मूल्य, किसी परंपरा का संकेत, कहावत का अर्थ, लता जी की छवि। | विकल्प चुनते समय लता जी के अपने शब्दों पर टिके रहें, जैसे 'स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना'। |
| लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक, 25-30 शब्द) | पिता का अनुशासन-स्नेह संतुलन, 'नाम आगे बढ़ाने' का अर्थ, सहयोगियों से संबंध, अभिनय से अरुचि, दीवाली वाला प्रसंग। | सीधा उत्तर और साक्षात्कार का एक प्रसंग। |
| व्यक्तित्व पहचानना | पंक्ति देकर लता जी का गुण चुनना: एकाग्रता, स्वाभिमान, विनम्रता, दार्शनिकता आदि। | पंक्ति का भाव पढ़कर एक सटीक गुण लिखें और कारण दें। |
| साक्षात्कार की पड़ताल और लेखन | साक्षात्कार के मुख्य बिंदु (परिचय, प्रश्नोत्तर, संस्मरण, समापन) पहचानना; औपचारिक या आत्मीय शैली; अपना साक्षात्कार बनाना; संवाद लेखन। | पाठ से उदाहरण-पंक्तियाँ दें; अपने प्रश्न क्रम से, विनम्र भाषा में लिखें। |
Tricks to remember यतींद्र मिश्र – ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार)
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
साक्षात्कार के आठ पड़ाव
पिता → स्वाभिमान → तुकाराम की नकल → अभिनय → संघर्ष और मेडल का सपना → 'आएगा आने वाला' की तकनीक → त्योहार (होली, गुड़ी पड़वा, दीवाली, मंगलागौर) → कोरस और संगीत की शक्ति।
Use it when: क्रम याद रखने के लिए।
लता जी के पाँच गुण: स्वा-प-वि-कृ-स
स्वाभिमान, परिश्रम, विनम्रता, कृतज्ञता, समर्पण।
Use it when: चरित्र/व्यक्तित्व वाले प्रश्नों में।
किसने क्या कहा
पिता: 'समझ गए न?'; नौशाद: 'तुम्हें मिठाई खिलानी चाहिए'; अली अकबर खाँ: 'बहुत सुर में तार टूट जाता है'।
Use it when: कथन-आधारित MCQ के लिए।
यतींद्र मिश्र – ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार): extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: गद्यांश 1: पिता का मौन अनुशासन
जैसे हम लोग बचपन में जब बहुत शरारत करते थे, तब पिताजी सबको बुलाकर अपने सामने खड़ा करते थे। वे बस हमको गंभीरता से देखते थे और इतने में ही हमारा रोना शुरू हो जाता था।
(1) · 1 mark · MCQ
पिताजी बच्चों को शरारत पर कैसे समझाते थे?
(क) ज़ोर से डाँटकर
(ख) केवल गंभीरता से देखकर
(ग) सज़ा देकर
(घ) खेल बंद करके(2) · 1 mark · MCQ
पिताजी को देखकर बच्चों का रोना क्यों शुरू हो जाता था?
(क) वे उन्हें मारते थे
(ख) बच्चे अपनी गलती समझ जाते थे और पिता का आदर करते थे
(ग) बच्चे बीमार थे
(घ) पिता नाराज़ होकर चले जाते थे(3) · 1 mark · MCQ
यह प्रसंग किसका प्रतीक है?
(क) केवल डर का
(ख) अनुशासन और स्नेह के संतुलन का
(ग) लापरवाही का
(घ) कठोर दंड का(4) · 1 mark · Assertion-reason
(संदर्भ: आगे बताया गया है कि पिताजी कुछ कहते नहीं थे, न डाँटते थे, फिर भी बच्चे समझ जाते थे कि उन्हें क्यों बुलाया गया है।) कथन (A): पिताजी बिना कुछ कहे बच्चों को अनुशासित कर लेते थे।
कारण (R): बच्चों के मन में पिता के प्रति गहरा सम्मान था।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।(5) · 1 mark · MCQ
'शरारत' शब्द का समानार्थी है:
(क) शिष्टता
(ख) नटखटपन
(ग) गंभीरता
(घ) उदासी
Show the answersAnswers
- (ख) केवल गंभीरता से देखकर।
- (ख) बच्चे अपनी गलती समझ जाते थे और पिता का आदर करते थे।
- (ख) अनुशासन और स्नेह के संतुलन का; इसके बाद पिता बच्चों को खेलने भेज देते थे।
- (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- (ख) नटखटपन।
Extract 2: गद्यांश 2: टूटा हुआ तार
इस पर अली अकबर भाई ने एक बड़ी मार्मिक बात कही, जो आज तक मुझे भूलती नहीं। वे बोले— “बहन, जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है।” उन्होंने अपने सुर को इतने पवित्र भाव से इतना डूबकर लगाया कि सरोद का तार टूट गया।
(1) · 1 mark · MCQ
अली अकबर खाँ कौन-सा वाद्य बजा रहे थे?
(क) सितार
(ख) सरोद
(ग) वीणा
(घ) संतूर(2) · 1 mark · MCQ
लता जी ने इस प्रसंग से संगीत के बारे में क्या निष्कर्ष निकाला?
(क) संगीत से दीपक जलते हैं
(ख) वाद्य कमज़ोर होते हैं
(ग) संगीत में असीम शक्ति होती है
(घ) सुर में बजाना कठिन नहीं(3) · 1 mark · MCQ
'मार्मिक' शब्द का अर्थ है:
(क) हृदय को छूने वाली
(ख) हास्यपूर्ण
(ग) कठोर
(घ) व्यर्थ(4) · 1 mark · MCQ
तार टूटने का कारण अली अकबर खाँ ने क्या बताया?
(क) तार पुराना था
(ख) बहुत सुर में और डूबकर बजाने से
(ग) गुस्से में बजाने से
(घ) हॉल की गर्मी से(5) · 1 mark · MCQ
इस प्रसंग से लता जी को किन कथाओं पर विश्वास करने का मन होता है?
(क) तानसेन के दीपक राग से दीये जलने और मेघ राग से वर्षा की
(ख) संत तुकाराम की
(ग) छत्रपति शिवाजी की
(घ) मंगलागौर की
Show the answersAnswers
- (ख) सरोद।
- (ग) संगीत में असीम शक्ति होती है।
- (क) हृदय को छूने वाली।
- (ख) बहुत सुर में और डूबकर बजाने से।
- (क) तानसेन के दीपक राग से दीये जलने और मेघ राग से वर्षा की।
यतींद्र मिश्र – ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार): exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: पिता से मिली सीख · 2 marks · Short answerExam level
लता जी ने अपने पिता से संगीत के अलावा क्या सीखा? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- स्वाभिमान से जीना।
- सही बात पर दृढ़ रहना, किसी के आगे न झुकना।
- हर हाल में कैसे रहना है।
Answer: लता जी ने पिता से स्वाभिमान से जीना सीखा। जो सही लगे उस पर दृढ़ रहना, किसी के आगे न झुकना और हर हालत में धैर्य से रहना, यह सीख उनके जीवन में बहुत काम आई।
Example 2: अभिनय से अरुचि · 2 marks · Short answerExam level
लता जी को फ़िल्मों में अभिनय करना क्यों अच्छा नहीं लगता था? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- मेकअप, लाइट, लोगों के सामने हँसना-रोना।
- शुरू में केवल छह-सात फ़िल्मों में अभिनय किया।
- रुचि गायन में थी।
Answer: उन्हें मेकअप करना, लाइट के सामने जाना और बहुत से लोगों के सामने कभी रोना, कभी हँसना अच्छा नहीं लगता था। उन्होंने शुरू में केवल छह-सात फ़िल्मों में अभिनय किया; उनकी रुचि गायन में थी।
Example 3: नाम आगे बढ़ाना · 2 marks · Short answerHarder exam level
'मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।' लता जी के लिए 'नाम आगे बढ़ाने' का क्या अर्थ है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- केवल प्रसिद्धि नहीं।
- पिता के संस्कार (स्वाभिमान) और संगीत-परंपरा को जीना।
- विनम्रता: 'थोड़ा ही सही'।
Answer: उनके लिए यह केवल प्रसिद्धि नहीं, बल्कि पिता के संस्कार, स्वाभिमान और संगीत-परंपरा को आगे ले जाने का उत्तरदायित्व है। 'थोड़ा ही सही' कहना उनकी विनम्रता दिखाता है।
Example 4: कोरस की लड़कियों से संबंध · 2 marks · Short answerHarder exam level
साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों, विशेषकर कोरस की लड़कियों, के साथ संबंध कैसे थे। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- आत्मीय: 'मेरे घर जैसी'।
- ज़मीन पर साथ बैठकर बातें।
- मीना की शादी में सब आए; नाम आज भी याद।
Answer: संबंध बहुत आत्मीय थे। लता जी कोरस की लड़कियों को घर जैसी मानतीं, स्टूडियो में उनके साथ ज़मीन पर बैठकर बातें करतीं और वर्षों बाद भी कविता, गांधारी जैसे नाम याद रखती थीं।
Example 5: नौशाद साहब का कथन · 2 marks · Short answerHOTS / competency
नौशाद साहब ने लता जी से मिठाई के बारे में क्या कहा? इससे क्या पता चलता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- सब संगीतकारों को लता को मिठाई खिलानी चाहिए।
- उन्होंने धुनों में मिठास घोली।
- संगीतकारों का स्नेह और लता जी के गायन का महत्त्व।
Answer: नौशाद साहब ने कहा कि सब संगीतकारों को मिलकर लता को मिठाई खिलानी चाहिए, क्योंकि उसने उनकी धुनों में मिठास घोली है। इससे लता जी के गायन का महत्त्व और संगीतकारों का स्नेह पता चलता है।
Example 6: तेरह वर्ष की ज़िम्मेदारी · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आप तेरह वर्ष की आयु में परिवार की ज़िम्मेदारी उठा रही लता जी हैं। सुबह से रात तक स्टूडियो के चक्कर में आपको कौन-सी चुनौतियाँ आतीं? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- थकान, भोजन, यात्रा-भाड़ा, सुरक्षा।
- महिलाओं के फ़िल्म में काम को अच्छा न मानना।
- परिवार की चिंता।
Answer: दिन-भर की थकान, समय पर भोजन न मिलना, यात्रा का खर्च और सुरक्षा की चिंता रहती। उस समय लड़कियों का फ़िल्मों में काम अच्छा नहीं माना जाता था, फिर भी परिवार के लिए मुझे डटे रहना पड़ता।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
'समझ गए न?' वाला प्रसंग अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक कैसे है? (25-30 शब्द) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| विषय-वस्तु: बिना डाँटे गंभीर दृष्टि से गलती समझाना (अनुशासन); फिर खेलने भेज देना (स्नेह); डर से अधिक सम्मान। | 1 |
| अभिव्यक्ति: शुद्ध, संक्षिप्त भाषा। | 1 |
संवाद लेखन (लगभग 80 शब्द, 5 अंक) (5 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रारूप: पात्रों के नाम, संवादों का क्रम। | 1 |
| विषय-वस्तु: विषय से जुड़े तथ्य और विचार। | 2 |
| प्रस्तुति: स्वाभाविकता और समापन। | 1 |
| भाषा की शुद्धता। | 1 |
Where students lose marks in यतींद्र मिश्र – ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार)
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: पिता को कठोर और डराने वाला बताना
अनुशासन को केवल डर मान लेना।
Wrong working
पिताजी बच्चों को बहुत डाँटते-मारते थे।
Right working
वे बिना कुछ कहे गंभीरता से देखते और फिर खेलने भेज देते; अनुशासन में स्नेह था।
Do this: 'न ही किसी बात पर डाँट पड़ती थी' याद रखें।
Usually costs: 1-2 अंक।
Mistake: तार टूटने को चमत्कार का सिद्ध प्रमाण बताना
लता जी की सावधान राय को अनदेखा करना।
Wrong working
लता जी कहती हैं कि तानसेन से सचमुच दीये जले थे।
Right working
वे कहती हैं कि निश्चित नहीं कह सकतीं, पर संगीत में असीम शक्ति है; इसलिए विश्वास करने का मन होता है।
Do this: 'यह निश्चित ही हुआ होगा, यह कम से कम मैं नहीं कह सकती' पर ध्यान दें।
Usually costs: विषय-वस्तु के अंक।
Mistake: लेखक और साक्षात्कार देने वाले को उलटना
विधा न समझना।
Wrong working
लता मंगेशकर ने यतींद्र मिश्र का साक्षात्कार लिया।
Right working
यतींद्र मिश्र ने लता मंगेशकर का साक्षात्कार लिया।
Do this: प्रश्न पूछने वाला = साक्षात्कारकर्ता।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: लता जी के घर रंगों वाली होली मनाने की बात लिखना
सामान्य धारणा।
Wrong working
लता जी के घर रंगों से होली खेली जाती थी।
Right working
देश-भर वाली रंगों की होली नहीं; होलिका की राख और रंगपंचमी पर केसर का हल्का छिड़काव।
Do this: पाठ के प्रसंग से उत्तर दें।
Usually costs: 1 अंक।
Practice questions on यतींद्र मिश्र – ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार)
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
लता मंगेशकर का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) मुंबई
(ख) पुणे
(ग) इंदौर
(घ) कोल्हापुरHint
पाठ-परिचय।
Answer
(ग) इंदौर।
Q2 · 1 mark · MCQExam level
पिता की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन-मूल्य का द्योतक है?
(क) संघर्ष
(ख) निराशा
(ग) भौतिकता
(घ) कर्तव्यनिष्ठाHint
पाठ के अभ्यास का प्रश्न।
Answer
(घ) कर्तव्यनिष्ठा।
Q3 · 2 marks · Short answerExam level
बचपन में लता जी और उनके भाई-बहन 'संत तुकाराम' फ़िल्म की नकल कैसे करते थे? (25-30 शब्द)
Hint
गद्दे-तकिये, स्वर्ग, अनुयायी।
Answer
मूल्य-बिंदु: गद्दे-तकिये रखकर ऊँचा स्वर्ग बनाना; लता जी ऊपर बैठकर गीत गातीं; मीना, पंढरीनाथ, आशा अनुयायी बनकर रोते; पिता के बाहर होने पर।
आदर्श उत्तर: वे घर के गद्दे-तकिये एक के ऊपर एक रखकर स्वर्ग बनाते। लता जी उस पर बैठकर गीत गातीं और मीना, पंढरीनाथ और आशा तुकाराम के अनुयायी बनकर रोते।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level
लता जी के पिता की गायकी की कौन-सी विशेषता बताई गई है? (25-30 शब्द)
Hint
'सा' बदलना।
Answer
मूल्य-बिंदु: राग गाते हुए किसी भी सुर को 'सा' बनाकर नया राग; फिर पहले राग में लौट आना; मराठी रंगमंच पर कर्नाटक और पंजाब का संगीत।
आदर्श उत्तर: वे एक राग गाते हुए किसी भी सुर को 'सा' बनाकर उसे नया राग बना देते और फिर पहले राग में लौट आते। उन्होंने मराठी मंच पर कर्नाटक और पंजाब का संगीत भी पहली बार दिया।
Q5 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'मंगलागौर' उत्सव का वर्णन कीजिए। इससे कौन-सी परंपरा उजागर होती है? (25-30 शब्द)
Hint
नई बहू, औरतें, गीत-नृत्य।
Answer
मूल्य-बिंदु: विवाह के बाद नई बहू के आने पर पूजा; पड़ोस की औरतें गीत गातीं, नाचतीं; ठेठ गँवई अंदाज़; संगीत की सामाजिक भूमिका; अब धीरे-धीरे समाप्त।
आदर्श उत्तर: नई बहू के घर आने पर होने वाली पूजा में पड़ोस की औरतें मुग्ध भाव से गातीं और नाचतीं। इससे संगीत की महत्त्वपूर्ण सामाजिक भूमिका उजागर होती है, जो अब धीरे-धीरे घट रही है।
Q6 · 1 mark · Very short answerHarder exam level
निम्नलिखित पंक्ति से लता जी का कौन-सा गुण झलकता है? 'मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।'
Hint
ध्यान एक जगह।
Answer
एकाग्रता (और समर्पण)।
Q7 · 1 mark · Assertion-reasonHOTS / competency
कथन (A): लता जी का साक्षात्कार औपचारिक कम और आत्मीय अधिक लगता है।
कारण (R): वे हँसते हुए बचपन के प्रसंग, पारिवारिक संस्मरण और भावनाएँ खुलकर साझा करती हैं।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।Hint
कोष्ठक में दिए भाव देखें।
Answer
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
Q8 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपको लता जी से तीन नए प्रश्न पूछने का अवसर मिले। आप कौन-से प्रश्न पूछेंगे और क्यों? (25-30 शब्द)
Hint
जो पाठ में नहीं पूछा गया।
Answer
मूल्य-बिंदु: तीन विनम्र, स्पष्ट प्रश्न; पाठ में न पूछे गए विषय (रियाज़ की दिनचर्या, युवा गायकों को सलाह, सबसे कठिन गीत); हर प्रश्न का कारण।
आदर्श उत्तर: मैं पूछता: आपकी रोज़ की रियाज़ कैसी थी? सबसे कठिन गीत कौन-सा लगा? युवा गायकों को क्या सलाह देंगी? इनसे उनकी साधना और अनुभव का लाभ मिलता।
Q9 · 5 marks · Long answerHarder exam level
संवाद लेखन (लगभग 80 शब्द): संगीत सीखने के इच्छुक दो मित्रों के बीच लता मंगेशकर के जीवन से प्रेरणा लेने पर संवाद लिखिए।
Hint
स्वाभिमान, परिश्रम, रियाज़।
Answer
मूल्य-बिंदु (संवाद लेखन): दो पात्रों के नाम और क्रमबद्ध संवाद; लता जी के जीवन के तथ्य (पाँच वर्ष में शिक्षा, पिता की सीख, तेरह वर्ष में ज़िम्मेदारी, दिन-भर रेकॉर्डिंग); प्रेरणा (नियमित अभ्यास, स्वाभिमान, विनम्रता); स्वाभाविक भाषा; सकारात्मक समापन; लगभग 80 शब्द।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.साक्षात्कार किसने लिया?Show answer
यतींद्र मिश्र ने।
2.लता जी के पिता का नाम?Show answer
पं. दीनानाथ मंगेशकर।
3.लता जी ने कितनी आयु में संगीत सीखना शुरू किया?Show answer
पाँच वर्ष की आयु में।
4.बचपन में किस फ़िल्म की नकल करते थे?Show answer
'संत तुकाराम'।
5.किस फ़िल्म के अंतिम गीत में लता जी ने दो पंक्तियाँ गाईं?Show answer
'छत्रपति शिवाजी'।
6.दीवाली की सुबह किसके घर का मज़ेदार प्रसंग है?Show answer
नौशाद साहब।
7.किसका सरोद का तार टूटा?Show answer
उस्ताद अली अकबर खाँ का।
8.नई बहू के आने पर होने वाला उत्सव?Show answer
मंगलागौर।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप पिता से मिली दो सीख लिख सकते हैं?
- क्या आप पिता की गायकी की दो विशेषताएँ बता सकते हैं?
- क्या आप लता जी की अभिनय से अरुचि के कारण बता सकते हैं?
- क्या आप नौशाद साहब वाला प्रसंग सुना सकते हैं?
- क्या आप अली अकबर खाँ के कथन का अर्थ समझा सकते हैं?
- क्या आप लता जी के पाँच गुण उदाहरण सहित लिख सकते हैं?
- क्या आप साक्षात्कार विधा के मुख्य बिंदु बता सकते हैं?
यतींद्र मिश्र – ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार): frequently asked questions
'ऐसी भी बातें होती हैं' किस विधा की रचना है?
यह साक्षात्कार है, जिसे यतींद्र मिश्र ने लता मंगेशकर से लिया। यह कक्षा 9 की गंगा का चौथा पाठ है।
लता मंगेशकर ने अपने पिता से सबसे अधिक क्या सीखा?
स्वाभिमान से जीना: जो सही लगे वह करो और किसी के आगे झुको नहीं; किसी के आगे हाथ न पसारो।
लता जी के पिता बच्चों को कैसे डाँटते थे?
वे बच्चों को सामने खड़ा करके बस गंभीरता से देखते और पूछते 'समझ गए न?' बिना डाँटे ही बच्चे समझ जाते, फिर पिता उन्हें खेलने भेज देते।
अली अकबर खाँ के सरोद का तार टूटने पर क्या कहा गया?
उन्होंने कहा, 'बहन, जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है।' लता जी को इससे लगा कि संगीत की शक्ति असीम है।
दीवाली पर लता जी क्या करती थीं?
पचास के दशक में कुछ वर्षों तक वे दीवाली की सुबह पाँच बजे से वरिष्ठ संगीतकारों, जैसे नौशाद साहब और अनिल विश्वास, के घर मिठाई लेकर जाती थीं।
'गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन' का क्या अर्थ है?
गाँव बह जाता है, पर नाम रह जाता है। यानी जीवन और शरीर अस्थायी हैं, पर अच्छे कर्म और नाम अमर रहते हैं।
Based on: CBSE हिंदी पाठ्यक्रम, कक्षा नवीं (आर-1 और आर-2) 2026-27; NCERT गंगा, कक्षा 9 (मार्च 2026), पाठ 4: ऐसी भी बातें होती हैं