राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (गंगा, कक्षा 9): क्रोध, विनय और व्यंग्य
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
तुलसीदास के रामचरितमानस (बालकांड) के इस अंश में शिव-धनुष टूटने की खबर सुनकर क्रोधित परशुराम जनक की सभा में आते हैं। राजा भयभीत हैं, जनक चुप रहते हैं, राम विनम्रता से कहते हैं कि धनुष तोड़ने वाला कोई आपका दास होगा, और लक्ष्मण मुसकराकर व्यंग्य करते हैं। एक ही स्थिति में तीन प्रतिक्रियाएँ दिखती हैं।
Same angry moment, three responses: Janak freezes in fear, Ram stays humble and calm, Lakshman answers with a mocking smile.
Illustration drawn for QuestionBuddy.
Understand राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: परशुराम का क्रोध, राम की विनम्रता और लक्ष्मण का व्यंग्य
पाठ का स्वरूप। यह अंश रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया है। भाषा अवधी है और छंद चौपाई-दोहा। यह कथा का आरंभिक भाग है: "देखत भृगुपति बेषु कराला" से लेकर "धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार" तक।
परशुराम का आगमन। परशुराम (भृगुपति) का भयानक वेश देखकर सभी राजा भय से व्याकुल होकर उठ खड़े होते हैं और पिता सहित अपने-अपने नाम बताकर दंडवत करते हैं। परशुराम जिसे हितैषी मानकर देखते हैं, वह समझता है कि उसकी आयु पूरी हो गई। जनक आकर सिर झुकाते हैं और सीता को बुलाकर प्रणाम करवाते हैं। विश्वामित्र दोनों भाइयों को परशुराम के चरणों में प्रणाम करवाते हैं।
क्रोध का विस्फोट। परशुराम जानते हुए भी अनजान बनकर जनक से पूछते हैं कि इतनी भीड़ क्यों है। जनक स्वयंवर का समाचार सुनाते हैं। धरती पर पड़े धनुष के टुकड़े देखकर परशुराम अत्यंत क्रोध में कठोर वचन कहते हैं: "अरे मूर्ख जनक, बता, धनुष किसने तोड़ा? जल्दी दिखा, नहीं तो आज जहाँ तक तेरा राज्य है, वहाँ तक की धरती उलट दूँगा।" जनक डर के मारे उत्तर नहीं देते। सीता की माता पछताती हैं कि विधाता ने बनी हुई बात बिगाड़ दी।
राम की विनम्रता। सबको भयभीत और सीता को डरी हुई देखकर राम, जिनके हृदय में न हर्ष है न विषाद, कहते हैं: "नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥" अर्थात् हे नाथ, शिव-धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा। मुनि कहते हैं कि सेवक वह है जो सेवा करे; शत्रु जैसा काम करने वाला तो शत्रु है।
लक्ष्मण का व्यंग्य। मुनि के वचन सुनकर लक्ष्मण मुसकराते हैं और कहते हैं कि बचपन में हमने बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया; इस धनुष पर इतनी ममता क्यों? परशुराम क्रोध से भरकर कहते हैं कि सारे संसार में प्रसिद्ध शिव का धनुष क्या धनुही के समान है?
तुलना। परशुराम का क्रोध, जनक का भय, राम की विनय और लक्ष्मण की निर्भीकता, चारों के स्वभाव अलग हैं।
केंद्रीय भाव। एक ही परिस्थिति में अलग-अलग पात्रों की प्रतिक्रियाएँ मानव-स्वभाव का सच्चा चित्र प्रस्तुत करती हैं।
राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: परशुराम का क्रोध, राम की विनम्रता और लक्ष्मण का व्यंग्य: key facts
- चार प्रतिक्रियाएँ
परशुराम क्रोध जनक भय और चुप्पी राम विनय लक्ष्मण निर्भीक व्यंग्य - पात्र-स्वभाव।
- भाषा और छंद
- अवधी
- चौपाई-दोहा
- तुलसीदास
- रामचरितमानस, बालकांड
- परिचय-प्रश्न।
- मुख्य पंक्तियाँ
- अति रिस बोले बचन कठोरा
- नाथ संभुधनु भंजनिहारा
- हृदयँ न हरषु बिषादु कछु
- उद्धृत करें।
- शब्दार्थ
भृगुपति परशुराम कराला भयानक रिस क्रोध धनुही छोटा धनुष - शब्द-प्रश्न।
How to answer राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: परशुराम का क्रोध, राम की विनम्रता और लक्ष्मण का व्यंग्य questions
संवाद के अंश या पात्र पर प्रश्न का उत्तर इस क्रम से लिखें।
- 1प्रसंग का नाम बताइए।
- 2पंक्ति या संवाद उद्धृत कीजिए।
- 3अर्थ लिखिए।
- 4पात्र का स्वभाव बताइए।
- 5अंत में क्रोध बनाम विनय का भाव लिखिए।
राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: परशुराम का क्रोध, राम की विनम्रता और लक्ष्मण का व्यंग्य in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
शांत उत्तर
मान लीजिए खेल में किसी खिलाड़ी से बल्ला टूट जाता है और कोच क्रोध में डाँटने लगते हैं, तब कप्तान शांति से कहता है, "सर, जिसने भी तोड़ा हो, वह आपका ही खिलाड़ी है; आप कहिए।"
यह किस पात्र के आचरण से मिलता है? (2-3 पंक्तियाँ)
Try it first, then show the solutionSolution
- क्रोध के सामने शांति।
- स्वयं को दास कहना।
Answer: यह राम के आचरण से मिलता है, जिन्होंने परशुराम के क्रोध के सामने विनम्रता से उत्तर दिया।
Memory hook: क्रोध का उत्तर विनय से।
Tricks to remember राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: परशुराम का क्रोध, राम की विनम्रता और लक्ष्मण का व्यंग्य
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
प-ज-रा-ल
परशुराम क्रोध, जनक भय, राम विनय, लक्ष्मण व्यंग्य।
Use it when: चार पात्र।
धनुही
छोटा धनुष: लक्ष्मण का व्यंग्य।
Use it when: प्रसंग।
न हरषु बिषादु
राम के हृदय में न हर्ष, न विषाद।
Use it when: संतुलन।
राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: परशुराम का क्रोध, राम की विनम्रता और लक्ष्मण का व्यंग्य: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: ग्रंथ · 1 mark · MCQBoard level
"राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद" किस ग्रंथ से लिया गया है?
(क) साकेत (ख) रामचरितमानस (ग) कामायनी (घ) पद्मावत
Try it first, then show the solutionSolution
- तुलसीदास की रचना।
Answer: (ख) रामचरितमानस।
Example 2: जनक का भय · 2 marks · Short answerBoard level
परशुराम के प्रश्न पर जनक उत्तर क्यों नहीं देते? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- भय।
- परशुराम का क्रोध।
Answer: परशुराम "मूर्ख जनक" कहकर कठोर स्वर में धनुष तोड़ने वाले का नाम पूछते हैं और धरती उलटने की धमकी देते हैं। इस क्रोध से डरकर जनक उत्तर नहीं दे पाते।
Example 3: राम का उत्तर · 2 marks · Short answerHarder board level
राम ने परशुराम के क्रोध पर क्या उत्तर दिया और उससे उनका कौन-सा गुण प्रकट होता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- धनुष तोड़ने वाला आपका दास।
- विनम्रता।
Answer: राम ने कहा कि शिव-धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा और आज्ञा माँगी। इससे उनकी विनम्रता और धैर्य प्रकट होते हैं; क्रोध में भी उनका संतुलन बना रहा।
Example 4: लक्ष्मण का व्यंग्य · 2 marks · Short answerHarder board level
लक्ष्मण ने धनुही का उदाहरण देकर परशुराम पर क्या व्यंग्य किया? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- बचपन में बहुत धनुहियाँ तोड़ीं।
- इतनी ममता क्यों?
Answer: लक्ष्मण ने कहा कि बचपन में हमने बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया। इस धनुष पर इतनी ममता क्यों है? यह परशुराम के क्रोध पर व्यंग्य है।
Example 5: क्रोध बनाम विनय · 4 marks · Long answerHOTS / competency
इस अंश में परशुराम, राम और लक्ष्मण के स्वभाव की तुलना कीजिए। (50-60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- परशुराम का स्वभाव (1)।
- राम का स्वभाव (1)।
- लक्ष्मण का स्वभाव (1)।
- भाषा (1)।
Answer: परशुराम शिव-धनुष टूटने पर क्रोध में कठोर वचन कहते हैं और धरती उलटने की धमकी देते हैं। राम विनम्र रहकर स्वयं को उनका दास कहते हैं और स्थिति शांत करना चाहते हैं। लक्ष्मण निर्भीक हैं और मुसकराकर धनुही का उदाहरण देकर व्यंग्य करते हैं। इस प्रकार तीनों के क्रोध, विनय और साहस के भिन्न रूप दिखते हैं।
Where students lose marks in राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: परशुराम का क्रोध, राम की विनम्रता और लक्ष्मण का व्यंग्य
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: ग्रंथ या कांड गलत लिखना
यह बालकांड का अंश है।
Wrong working
उत्तरकांड।
Right working
रामचरितमानस का बालकांड।
Do this: ग्रंथ और कांड याद रखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: वक्ता गलत बताना
व्यंग्य लक्ष्मण करते हैं।
Wrong working
राम ने धनुही वाला व्यंग्य किया।
Right working
धनुही वाला व्यंग्य लक्ष्मण ने किया।
Do this: पंक्ति और वक्ता मिलाएँ।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: राम को डरा हुआ कहना
राम संतुलित हैं।
Wrong working
राम भी डर गए।
Right working
राम के हृदय में न हर्ष है न विषाद; वे विनम्र रहे।
Do this: पंक्ति उद्धृत करें।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: भाषा अवधी न लिखना
भाषा का नाम पूछा जा सकता है।
Wrong working
भाषा ब्रज है।
Right working
भाषा अवधी है, छंद चौपाई-दोहा।
Do this: भाषा-छंद याद रखें।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- चौपाई की पंक्तियाँ ज्यों की त्यों उद्धृत कीजिए।
- क्रोध, भय, विनय और व्यंग्य के पात्र सही बताइए।
- भाषा अवधी और छंद चौपाई-दोहा लिखिए।
- पाठ केवल आरंभिक भाग है, यह ध्यान रखिए।
- अंत में चारों स्वभाव की तुलना करें।
Practice questions on राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: परशुराम का क्रोध, राम की विनम्रता और लक्ष्मण का व्यंग्य
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
परशुराम का दूसरा नाम क्या है?
(क) भृगुपति (ख) रघुपति (ग) दशरथ (घ) विश्वामित्रHint
पाठ में नाम दिए गए हैं।
Answer
(क) भृगुपति।
Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level
"अरध निमेष कलप सम बीता" से सीता की कौन-सी दशा प्रकट होती है? (25-30 शब्द)
Hint
आधा पल कल्प के समान।
Answer
परशुराम का स्वभाव सुनकर सीता को आधा पल भी कल्प (युग) के समान लगता है। यह उनकी चिंता, भय और बेचैनी को दर्शाता है।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
सीता की माता ने क्या सोचा और क्यों? (25-30 शब्द)
Hint
विधाता और बनी बात।
Answer
सीता की माता पछताती हैं कि विधाता ने बनी हुई बात बिगाड़ दी। स्वयंवर में धनुष टूटने से जो शुभ हुआ था, वह परशुराम के क्रोध से संकट में पड़ता दिखता है।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
राम के हृदय के बारे में कहा गया है "हृदयँ न हरषु बिषादु कछु"। इसका क्या अर्थ है? (25-30 शब्द)
Hint
संतुलित मन।
Answer
इसका अर्थ है कि राम के हृदय में न हर्ष है न विषाद। भयभीत सभा के बीच वे शांत और संतुलित रहते हैं, यही उनका धैर्य और गंभीरता दिखाता है।
Q5 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
यदि आप जनक की सभा में उपस्थित होते, तो इस संकट को शांत करने के लिए क्या करते? पाठ के आधार पर लिखिए। (50-60 शब्द)
Hint
राम के आचरण से सीखिए।
Answer
मैं राम की तरह विनम्र और शांत रहकर परशुराम से कहता कि धनुष तोड़ने वाला आपका ही सेवक होगा, आप आज्ञा करें। मैं भय से चुप न रहकर सत्य बताता और विश्वामित्र के माध्यम से बात सँभालता। क्रोध का उत्तर क्रोध से नहीं, धैर्य से देना चाहिए।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.इस अंश के रचयिता कौन हैं?Show answer
तुलसीदास।
2.अंश किस कांड से है?Show answer
बालकांड।
3.भाषा कौन-सी है?Show answer
अवधी।
4.धनुही वाला व्यंग्य किसका है?Show answer
लक्ष्मण का।
5.राम ने परशुराम को क्या कहा?Show answer
धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा।
6.यह गंगा का कौन-सा पाठ है?Show answer
नौवाँ पाठ।
राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद: परशुराम का क्रोध, राम की विनम्रता और लक्ष्मण का व्यंग्य: frequently asked questions
अंश का केंद्रीय भाव क्या है?
एक ही परिस्थिति में अलग-अलग पात्रों की प्रतिक्रियाएँ मानव-स्वभाव का चित्र देती हैं।
लक्ष्मण के व्यंग्य का कारण क्या है?
परशुराम का धनुष पर अत्यधिक क्रोध।
जनक की स्थिति कैसी है?
वे भय से चुप हैं।
परीक्षा में कैसे प्रश्न आते हैं?
काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले उत्तर।