रैदास के पद (गंगा, कक्षा 9): चंदन-पानी की जोड़ियाँ और अनन्य भक्ति
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
रैदास के पहले पद "अब कैसे छूटै राम रट लागी" में भक्त अपने और प्रभु के संबंध को चंदन-पानी, घन-मोर, चाँद-चकोर, दीपक-बाती, मोती-धागा और स्वामी-दास की जोड़ियों से समझाता है। दूसरे पद में वह तीर्थ-व्रत की चिंता छोड़कर केवल प्रभु-चरणों पर भरोसा करता है। दोनों पदों का भाव अनन्य भक्ति और पूर्ण समर्पण है।
Understand रैदास के पद: चंदन-पानी की जोड़ियाँ और अनन्य भक्ति
कवि-परिचय। रैदास (संत रविदास) भक्तिकाल के निर्गुण संत कवि हैं। पाठ-परिचय के अनुसार उनका जन्म काशी में हुआ और उनका जीवन-काल सन् 1388-1518 माना जाता है। उन्होंने बाह्य आडंबरों का खंडन करके मन की शुद्धता को सच्चा धर्म माना। भाषा सरल ब्रजभाषा है। उनकी रचनाएँ श्री गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल हैं और "रैदास बानी" में संकलित हैं।
पद 1: जोड़ियाँ। "अब कैसे छूटै राम रट लागी" का अर्थ है कि अब राम-नाम की रट कैसे छूट सकती है। भक्त छह जोड़ियों से संबंध बताता है:
(1) प्रभु चंदन हैं और भक्त पानी; चंदन घिसने से उसकी सुगंध पानी के अंग-अंग में समा जाती है।
(2) प्रभु वन के घन (बादल) हैं और भक्त मोर; जैसे बादल देखकर मोर नाचता है।
(3) प्रभु चाँद हैं और भक्त चकोर; चकोर चंद्रमा को एकटक निहारता रहता है।
(4) प्रभु दीपक हैं और भक्त बाती, जिनकी ज्योति दिन-रात जलती है।
(5) प्रभु मोती हैं और भक्त धागा; सोने में सुहागे के मेल जैसी चमक।
(6) प्रभु स्वामी हैं और भक्त दास।
पद 2: अनन्य निष्ठा। "जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ" का भाव है कि प्रभु संबंध तोड़ भी दें, तो भक्त नहीं तोड़ेगा; तुमसे तोड़कर वह किससे जोड़ेगा। वह तीर्थ और व्रत की चिंता नहीं करता, केवल प्रभु के चरण-कमलों का भरोसा रखता है। प्रभु जैसा कोई दूसरा देव नहीं। उसने अपना मन हरि से जोड़ लिया है और सबसे तोड़ लिया है।
अलंकार। "प्रभु जी तुम चंदन हम पानी" में प्रभु का चंदन से और भक्त का पानी से अभेद आरोप है, इसलिए रूपक अलंकार है। "जैसे चितवत चंद चकोरा" में "जैसे" वाचक के कारण उपमा है। पाठ में अनुप्रास अलंकार भी समझाया गया है।
केंद्रीय भाव। सच्ची भक्ति बाहरी कर्मकांड में नहीं, आराध्य से अटूट, अनन्य प्रेम और समर्पण में है।
रैदास के पद: चंदन-पानी की जोड़ियाँ और अनन्य भक्ति: key facts
- प्रभु और भक्त की जोड़ियाँ
- चंदन-पानी
- घन-मोर
- चाँद-चकोर
- दीपक-बाती
- मोती-धागा
- स्वामी-दास
- प्रभु पहला, भक्त दूसरा।
- कवि-परिचय
- रैदास
- काशी में जन्म
- जीवन-काल 1388-1518
- निर्गुण संत
- भक्तिकाल।
- पद 2 का भाव
- संबंध नहीं तोड़ूँगा
- तीर्थ-व्रत की चिंता नहीं
- चरण-कमलों का भरोसा
- अनन्य निष्ठा।
- अलंकार
- रूपक: प्रभु जी तुम चंदन हम पानी
- उपमा
- अनुप्रास
- उदाहरण सहित।
How to answer रैदास के पद: चंदन-पानी की जोड़ियाँ और अनन्य भक्ति questions
पद के भावार्थ या जोड़ी पर प्रश्न का उत्तर इस क्रम से लिखें।
- 1पंक्ति उद्धृत कीजिए।
- 2शब्दार्थ बताइए।
- 3जोड़ी का भाव लिखिए।
- 4अलंकार का नाम दीजिए।
- 5अंत में अनन्य भक्ति का भाव लिखिए।
रैदास के पद: चंदन-पानी की जोड़ियाँ और अनन्य भक्ति in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
सुगंध का समा जाना
मान लीजिए एक छात्र अपने शिक्षक के साथ इतने समय तक रहता है कि उसकी बोली, आदतें और सोच शिक्षक की तरह मधुर हो जाती हैं।
यह कौन-सी जोड़ी जैसा है? (2-3 पंक्तियाँ)
Try it first, then show the solutionSolution
- सुगंध का समाना।
- प्रभाव का अंग-अंग में बसना।
Answer: यह चंदन-पानी की जोड़ी जैसा है, जिसमें चंदन की सुगंध पानी के अंग-अंग में समा जाती है।
Memory hook: संगति का रंग चढ़ता है।
Tricks to remember रैदास के पद: चंदन-पानी की जोड़ियाँ और अनन्य भक्ति
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
च-घ-चा-दी-मो-स्वा
चंदन, घन, चाँद, दीपक, मोती, स्वामी।
Use it when: जोड़ियों का क्रम।
प्रभु पहले
हर जोड़ी में प्रभु पहले आते हैं।
Use it when: भाव-स्पष्टता।
तोड़ूँगा नहीं
जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ।
Use it when: पद 2 की टेक।
रैदास के पद: चंदन-पानी की जोड़ियाँ और अनन्य भक्ति: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: रैदास कौन थे · 1 mark · MCQBoard level
रैदास किस काल के कवि हैं?
(क) आदिकाल (ख) भक्तिकाल (ग) रीतिकाल (घ) आधुनिक काल
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ-परिचय में उल्लेख है।
Answer: (ख) भक्तिकाल।
Example 2: चंदन-पानी · 2 marks · Short answerBoard level
"प्रभु जी तुम चंदन हम पानी" में चंदन और पानी किसके प्रतीक हैं? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- चंदन = प्रभु।
- पानी = भक्त।
Answer: चंदन प्रभु और पानी भक्त का प्रतीक है। जैसे चंदन की सुगंध पानी के अंग-अंग में समा जाती है, वैसे ही प्रभु की भक्ति भक्त के रोम-रोम में बसी है।
Example 3: दीपक-बाती · 2 marks · Short answerHarder board level
दीपक और बाती की जोड़ी से कवि क्या कहना चाहता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- ज्योति दिन-रात।
- भक्त और प्रभु का साथ।
Answer: दीपक प्रभु और बाती भक्त है, जिनकी ज्योति दिन-रात जलती है। कवि कहना चाहता है कि प्रभु के साथ ही भक्त का जीवन प्रकाशित है और दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।
Example 4: तीर्थ-व्रत · 2 marks · Short answerHarder board level
दूसरे पद में कवि तीर्थ और व्रत के बारे में क्या कहता है और क्यों? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- चिंता नहीं।
- केवल चरणों का भरोसा।
Answer: कवि तीर्थ और व्रत की चिंता नहीं करता। उसे केवल प्रभु के चरण-कमलों का भरोसा है, क्योंकि सच्ची भक्ति बाहरी कर्मकांड में नहीं, मन के समर्पण में है।
Example 5: अनन्य भक्ति · 4 marks · Long answerHOTS / competency
दोनों पदों के आधार पर रैदास की अनन्य भक्ति का स्वरूप स्पष्ट कीजिए। (50-60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पद 1 की जोड़ियाँ (1)।
- पद 2 का समर्पण (1)।
- आडंबर का विरोध (1)।
- भाषा (1)।
Answer: पहले पद में रैदास चंदन-पानी, दीपक-बाती जैसी जोड़ियों से प्रभु और भक्त के अटूट संबंध को बताते हैं। दूसरे पद में वे कहते हैं कि प्रभु संबंध तोड़ भी दें, तो वे नहीं तोड़ेंगे और तीर्थ-व्रत की चिंता भी नहीं करेंगे। इस तरह उनकी भक्ति बाहरी आडंबर से परे पूर्ण समर्पण और अनन्य प्रेम की है।
Where students lose marks in रैदास के पद: चंदन-पानी की जोड़ियाँ और अनन्य भक्ति
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: जोड़ियों में भक्त-प्रभु उलट देना
प्रभु चंदन हैं और भक्त पानी।
Wrong working
चंदन भक्त है।
Right working
प्रभु चंदन, भक्त पानी।
Do this: प्रभु पहले, भक्त बाद में याद करें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: "घन" का अर्थ गलत लिखना
घन का अर्थ बादल है।
Wrong working
घन = हथौड़ा।
Right working
घन = बादल।
Do this: शब्दार्थ पक्के करें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: काल गलत लिखना
रैदास भक्तिकाल के कवि हैं।
Wrong working
रैदास आधुनिक काल के कवि हैं।
Right working
रैदास भक्तिकाल के निर्गुण संत कवि हैं।
Do this: कवि-काल याद करें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: अलंकार बिना उदाहरण के
उदाहरण के बिना अंक नहीं मिलते।
Wrong working
रूपक अलंकार है।
Right working
"प्रभु जी तुम चंदन हम पानी" में रूपक अलंकार है।
Do this: पंक्ति उद्धृत करें।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- छह जोड़ियों को प्रभु-भक्त क्रम से लिखिए।
- शब्दार्थ (घन, चकोर, सुहागा) अलग से दीजिए।
- पद 2 का भाव "अनन्य निष्ठा" शब्द से जोड़िए।
- अलंकार के साथ पंक्ति उद्धृत कीजिए।
- अंत में आडंबर-विरोध का उल्लेख करें।
Practice questions on रैदास के पद: चंदन-पानी की जोड़ियाँ और अनन्य भक्ति
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
"वन-घन" और "मोर" की जोड़ी में मोर किसका प्रतीक है?
(क) प्रभु (ख) भक्त (ग) कवि का गाँव (घ) संसारHint
जोड़ी में दूसरा शब्द भक्त के लिए है।
Answer
(ख) भक्त।
Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level
"मोती-धागा" की जोड़ी में कवि कौन-सा भाव व्यक्त करता है? (25-30 शब्द)
Hint
सोने में सुहागा।
Answer
प्रभु मोती और भक्त धागा है। जैसे सोने में सुहागा मिलने से चमक बढ़ती है, वैसे ही दोनों का मेल सुंदर है और भक्त प्रभु के साथ जुड़कर मूल्यवान बनता है।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
"जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ" का भाव समझाइए। (25-30 शब्द)
Hint
प्रभु और भक्त की निष्ठा।
Answer
इस पंक्ति का भाव है कि हे राम, यदि तुम संबंध तोड़ दो, तब भी मैं नहीं तोड़ूँगा। तुमसे संबंध तोड़कर मैं किससे जुड़ूँगा, इसलिए मेरी भक्ति अटल है।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
रैदास की भाषा की दो विशेषताएँ बताइए। (25-30 शब्द)
Hint
भाषा का स्वरूप।
Answer
रैदास की भाषा सरल, व्यावहारिक ब्रजभाषा है। उसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फ़ारसी के शब्द भी मिलते हैं, जिससे वह आम जन तक सहज पहुँचती है।
Q5 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
आज के संदर्भ में रैदास के पदों की क्या उपयोगिता है? अपना मत लिखिए। (50-60 शब्द)
Hint
आडंबर और सच्ची भक्ति।
Answer
आज भी दिखावे और कर्मकांड पर ज़ोर दिया जाता है। रैदास के पद सिखाते हैं कि सच्ची भक्ति मन की शुद्धता और ईमानदार समर्पण में है। अपने कार्य, रिश्तों और कर्तव्य के प्रति भी हम वैसी ही निष्ठा रख सकते हैं, जैसे भक्त प्रभु के प्रति रखता है। इसलिए ये पद आज भी प्रासंगिक हैं।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.रैदास का दूसरा नाम क्या है?Show answer
संत रविदास।
2.रैदास का जन्म कहाँ हुआ?Show answer
काशी में।
3.पहले पद की टेक क्या है?Show answer
अब कैसे छूटै राम रट लागी।
4.प्रभु कौन-सी जोड़ी में भक्त को बाती कहते हैं?Show answer
दीपक-बाती।
5.रैदास की रचनाएँ कहाँ शामिल हैं?Show answer
श्री गुरु ग्रंथ साहिब में।
6.यह गंगा का कौन-सा पाठ है?Show answer
आठवाँ पाठ।
रैदास के पद: चंदन-पानी की जोड़ियाँ और अनन्य भक्ति: frequently asked questions
पदों का मुख्य भाव क्या है?
अनन्य भक्ति और पूर्ण समर्पण।
रैदास किस प्रकार के संत थे?
निर्गुण संत कवि।
रैदास ने किसका खंडन किया?
बाह्य आडंबरों का।
परीक्षा में कैसे प्रश्न आते हैं?
काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले उत्तर।