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HindiCBSE Class 9 · सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' – भारति, जय, विजयकरे!

भारति, जय, विजयकरे! (गंगा, कक्षा 9): भारत का देवी-रूप और प्राकृतिक चित्रण

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

निराला की इस कविता में भारत एक देवी के रूप में चित्रित है: सागर उसके चरण धोता है, वन-लताएँ उसके वस्त्र हैं, गंगा गले का हार है और हिमालय श्वेत मुकुट। उसके प्राण ओंकार (प्रणव) हैं और दिशाएँ सैकड़ों स्वरों में गूँजती हैं। कवि इस देवी की जय और विजय की कामना करता है।

Notice how each part of nature becomes part of the goddess: mountain crown, river necklace, forest robe, ocean at her feet.

Illustration drawn for QuestionBuddy.

Understand भारति, जय, विजयकरे!: भारत का देवी-रूप और प्राकृतिक चित्रण

कविता का स्वरूप। यह छायावाद के प्रमुख कवि सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" की छोटी, गेय और प्रेरक कविता है। भाषा संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त है। यह गंगा के काव्य खंड का तीसरा पाठ है।

संबोधन और कामना। कवि कहता है "भारति, जय, विजयकरे!", अर्थात् हे भारत, तुम्हारी जय हो, तुम विजय करने वाली हो। "कनक-शस्य-कमलधरे" का अर्थ है कि वह सोने जैसी फ़सलें और कमल धारण करती है, जो कृषि-संपन्नता और श्रम के सौंदर्य का संकेत है।

चरणों में सागर। लंका भारत के चरणों के नीचे शतदल (सौ पंखुड़ियों वाले कमल) के समान है। गरजती लहरों वाला सागर भारत के पवित्र चरण-युगल को धोता है। सागर मानो भक्त की तरह बहु-अर्थ-भरे स्तव से भारत की स्तुति कर रहा है।

वस्त्र, आँचल और हार। पेड़, घास, वन और लताएँ भारत-माता के वस्त्र हैं और उनके आँचल में फूल जड़े हैं। गंगा के ज्योतिर्मय जल-कणों वाली उजली धारा उनके गले का हार है। यहाँ मानवीकरण और रूपक अलंकार का प्रयोग है।

मुकुट और ओंकार। हिम से ढका, चमकता हिमालय उनका श्वेत मुकुट है। उनके प्राण प्रणव (ओंकार) हैं और उदार दिशाएँ ध्वनित हैं। "शतमुख-शतरव-मुखरे" का भाव है कि सैकड़ों मुखों और सैकड़ों स्वरों में भारत गूँज रहा है, अर्थात् अनेक भाषाओं, विचारों और परंपराओं वाला देश।

काव्य-सौंदर्य। मानवीकरण, रूपक, संस्कृत शब्दों से बना गंभीर नाद-सौंदर्य और लयबद्धता इस कविता की विशेषताएँ हैं। पाठ के अभ्यास के अनुसार स्वतंत्रता-पूर्व लिखी इस कविता में भारत ज्ञान, कृषि और संस्कृति का प्रतीक है।

केंद्रीय भाव। भारत प्राकृतिक सौंदर्य, कृषि-संपन्नता, आध्यात्मिक चेतना और विविधता से भरा देश है, और कवि उसकी विजय की कामना करता है।

भारति, जय, विजयकरे!: भारत का देवी-रूप और प्राकृतिक चित्रण: key facts

देवी के अंग
चरणसागर धोता है
वस्त्रवन और लताएँ
आँचलजड़े फूल
हारगंगा
मुकुटहिमालय
प्राणओंकार
पाठ का रूपक।
कठिन शब्द
कनकसोना
शस्यफ़सल
शतदलसौ पंखुड़ियों वाला कमल
प्रणवओंकार
शुभ्रउजला
शब्दार्थ।
अलंकार
  • मानवीकरण
  • रूपक
  • संस्कृतनिष्ठ नाद-सौंदर्य
उदाहरण सहित लिखें।
केंद्रीय भाव
  • देश-वंदना
  • प्राकृतिक सौंदर्य
  • कृषि-संपन्नता
  • विविधता में एकता
भाव-प्रश्नों के लिए।

How to answer भारति, जय, विजयकरे!: भारत का देवी-रूप और प्राकृतिक चित्रण questions

कविता की व्याख्या या भाव पर प्रश्न का उत्तर इस क्रम से लिखें।

  1. 1पंक्ति या अंश का उल्लेख कीजिए।
  2. 2शब्दार्थ बताइए।
  3. 3भाव को सरल शब्दों में लिखिए।
  4. 4अलंकार या प्रतीक बताइए।
  5. 5अंत में देश-प्रेम के भाव का उल्लेख कीजिए।

भारति, जय, विजयकरे!: भारत का देवी-रूप और प्राकृतिक चित्रण in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

देश का मानवीकरण

मान लीजिए किसी विद्यालय के नाटक में एक बालिका भारत-माता बनती है, जिसके मुकुट पर हिमालय और गले में गंगा की माला बनी है और छात्र उसके चरणों में सिर झुकाते हैं।

यह कविता के किस चित्रण से मिलता है? (2-3 पंक्तियाँ)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. देश को देवी के रूप में देखना।
  2. हिमालय मुकुट और गंगा हार।

Answer: यह कविता में भारत के देवी-रूप के चित्रण से मिलता है, जिसमें हिमालय मुकुट और गंगा गले का हार है।

Memory hook: देश माँ है, माँ देवी है।

Tricks to remember भारति, जय, विजयकरे!: भारत का देवी-रूप और प्राकृतिक चित्रण

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • च-व-हा-मु

    चरण, वस्त्र, हार, मुकुट।

    Use it when: देवी के अंगों का क्रम।

  • शतदल = सौ दल

    शत का अर्थ सौ।

    Use it when: शब्दार्थ।

  • ओंकार = प्राण

    भारत के प्राण ओंकार हैं।

    Use it when: आध्यात्मिक भाव।

भारति, जय, विजयकरे!: भारत का देवी-रूप और प्राकृतिक चित्रण: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: कविता का भाव · 1 mark · MCQBoard level

"कनक-शस्य-कमलधरे" से भारत की किस विशेषता का संकेत मिलता है?
(क) युद्ध-शक्ति (ख) कृषि-संपन्नता और प्राकृतिक सौंदर्य (ग) नगरों का विकास (घ) व्यापार

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कनक = सोना, शस्य = फ़सल, कमल = सौंदर्य।

Answer: (ख) कृषि-संपन्नता और प्राकृतिक सौंदर्य।

Example 2: सागर का कार्य · 2 marks · Short answerBoard level

कविता में सागर भारत-माता के लिए क्या करता है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. चरण धोना।
  2. स्तुति करना।

Answer: गरजती लहरों वाला सागर भारत-माता के पवित्र चरणों को धोता है। वह मानो भक्त की तरह अनेक अर्थों से भरी स्तुति करता है, इसलिए सागर श्रद्धा से झुका हुआ दिखता है।

Example 3: हिमालय और गंगा · 2 marks · Short answerHarder board level

कवि ने हिमालय और गंगा को किन रूपों में चित्रित किया है और क्यों? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. हिमालय: श्वेत मुकुट।
  2. गंगा: गले का हार।
  3. देवी का रूप।

Answer: हिमालय भारत-माता का श्वेत मुकुट और गंगा की उजली धारा उनके गले का हार है। कवि ने भारत को देवी के रूप में दिखाने के लिए इन प्राकृतिक रूपों का प्रयोग किया है।

Example 4: प्रणव और दिशाएँ · 2 marks · Short answerHarder board level

"प्राण प्रणव ओंकार" से कवि क्या कहना चाहता है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रणव = ओंकार।
  2. आध्यात्मिक चेतना।

Answer: प्रणव का अर्थ ओंकार है। कवि कहता है कि भारत के प्राणों में ओंकार बसा है, अर्थात् भारत की आत्मा आध्यात्मिक चेतना से भरी है और दिशाएँ भी उसकी ध्वनि से गूँजती हैं।

Example 5: विविधता में एकता · 4 marks · Long answerHOTS / competency

"शतमुख-शतरव-मुखरे" पंक्ति का भाव समझाते हुए बताइए कि यह आज के भारत पर कैसे लागू होता है। (50-60 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. शब्दार्थ (1)।
  2. भाव: अनेक भाषाएँ और विचार (1)।
  3. आज का संदर्भ (1)।
  4. भाषा (1)।

Answer: इस पंक्ति का भाव है कि सैकड़ों मुखों से, सैकड़ों स्वरों में भारत गूँज रहा है। यह अनेक भाषाओं, विचारों और परंपराओं वाले भारत की ओर संकेत करता है। आज भी भारत में अलग-अलग भाषाएँ और संस्कृतियाँ साथ रहती हैं और सब मिलकर एक राष्ट्र बनाती हैं। इसलिए यह पंक्ति विविधता में एकता का सुंदर चित्र है।

Where students lose marks in भारति, जय, विजयकरे!: भारत का देवी-रूप और प्राकृतिक चित्रण

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: कवि का नाम गलत लिखना

    कवि निराला हैं।

    Wrong working

    यह कविता महादेवी वर्मा की है।

    Right working

    यह कविता सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" की है।

    Do this: कवि और कविता का मिलान करें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: अंगों का मिलान बिगाड़ना

    गंगा हार है और हिमालय मुकुट।

    Wrong working

    गंगा मुकुट है और हिमालय हार।

    Right working

    हिमालय श्वेत मुकुट है और गंगा गले का हार।

    Do this: च-व-हा-मु याद करें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: प्रणव का अर्थ न लिखना

    शब्दार्थ पर अंक मिलते हैं।

    Wrong working

    प्रणव = प्राण।

    Right working

    प्रणव = ओंकार।

    Do this: कठिन शब्दों की सूची दोहराएँ।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: अलंकार न बताना

    भाव-प्रश्न में अलंकार अपेक्षित है।

    Wrong working

    केवल भाव लिखना।

    Right working

    भाव के साथ मानवीकरण या रूपक बताना।

    Do this: एक अलंकार अवश्य लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

Exam tips

  • कवि का पूरा नाम "सूर्यकांत त्रिपाठी निराला" लिखिए।
  • देवी के अंगों का क्रम याद रखिए।
  • कठिन शब्दों के अर्थ अलग से लिखिए।
  • पंक्ति उद्धृत करें तो भाव अवश्य दें।
  • अंत में देश-प्रेम और विविधता का उल्लेख कीजिए।

Practice questions on भारति, जय, विजयकरे!: भारत का देवी-रूप और प्राकृतिक चित्रण

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    "शुचि चरण युगल" को कौन धोता है?
    (क) गंगा (ख) हिमालय (ग) सागर (घ) वन

    Hint

    चरणों के नीचे लंका और सागर का वर्णन देखिए।

    Answer

    (ग) सागर।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level

    "लंका शतदल" की उपमा के पीछे क्या भाव है? (25-30 शब्द)

    Hint

    शतदल का अर्थ।

    Answer

    लंका को चरणों के नीचे सौ पंखुड़ियों वाले कमल के समान बताया गया है। इससे भारत के चरणों की कोमलता और पवित्रता सूचित होती है।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level

    कविता में वन, लताओं और फूलों का चित्रण किस प्रकार हुआ है? (25-30 शब्द)

    Hint

    वस्त्र और आँचल।

    Answer

    पेड़, घास, वन और लताओं को भारत-माता के वस्त्र तथा उनके आँचल में जड़े फूलों को शृंगार बताया गया है। इससे भारत की हरी-भरी प्रकृति मानवीकरण द्वारा देवी के रूप में दिखती है।

  4. Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level

    इस कविता की भाषा में संस्कृतनिष्ठता का क्या प्रभाव है? (25-30 शब्द)

    Hint

    भाषा और लय।

    Answer

    कविता में कनक, शस्य, शतदल और प्रणव जैसे संस्कृत शब्द हैं। इनसे कविता को गंभीर नाद, लय और श्रद्धा का स्वर मिलता है, जो देश-वंदना के भाव के अनुकूल है।

  5. Q5 · 4 marks · Long answerHOTS / competency

    मान लीजिए आपको "भारति, जय, विजयकरे!" से प्रेरित होकर अपने राज्य की वंदना में चार पंक्तियाँ लिखनी हैं। अपनी योजना बताइए। (50-60 शब्द)

    Hint

    प्राकृतिक अंगों को मानवीकृत कीजिए।

    Answer

    मैं अपने राज्य को देवी मानकर लिखूँगा कि नदी उसके चरण धोती है, खेत उसके हरे वस्त्र हैं और पर्वत उसका मुकुट। इस प्रकार मैं निराला की तरह मानवीकरण और रूपक अलंकार का प्रयोग करूँगा। अंतिम पंक्ति में अपने राज्य की विविध बोलियों और परंपराओं का उल्लेख करके उसकी जय की कामना करूँगा, जिससे कविता में श्रद्धा और एकता का भाव आएगा।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.कविता किसने लिखी?Show answer

    सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" ने।

  2. 2.यह गंगा का कौन-सा पाठ है?Show answer

    काव्य खंड का तीसरा पाठ (पुस्तक का दसवाँ)।

  3. 3.गंगा किस रूप में चित्रित है?Show answer

    गले के हार के रूप में।

  4. 4.हिमालय को क्या कहा गया है?Show answer

    श्वेत मुकुट।

  5. 5.भारत के प्राण क्या हैं?Show answer

    प्रणव (ओंकार)।

  6. 6.कविता किस पंक्ति पर समाप्त होती है?Show answer

    "शतमुख-शतरव-मुखरे!"

भारति, जय, विजयकरे!: भारत का देवी-रूप और प्राकृतिक चित्रण: frequently asked questions

कविता का मुख्य भाव क्या है?

भारत की वंदना और उसकी विजय की कामना।

किन अलंकारों का प्रयोग है?

मानवीकरण और रूपक।

कनक-शस्य का अर्थ क्या है?

सोने जैसी फ़सल।

परीक्षा में कैसे प्रश्न आते हैं?

काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले उत्तर।