ऐसी भी बातें होती हैं (गंगा, कक्षा 9): पिता का प्रभाव और स्वाभिमान की सीख
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
यतींद्र मिश्र द्वारा लिए गए साक्षात्कार में लता मंगेशकर बताती हैं कि पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर बिना डाँटे केवल गंभीरता से देखकर बच्चों को समझा देते थे। उनसे उन्हें सबसे अधिक स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा मिली: जो सही लगे वह करो और किसी के आगे झुको मत। माँ की भी यही सीख थी कि किसी के आगे हाथ न पसारो।
Understand ऐसी भी बातें होती हैं: पिता का प्रभाव और स्वाभिमान की सीख
साक्षात्कार की विशेषता। साक्षात्कार में प्रश्नकर्ता और उत्तरदाता के बीच बातचीत होती है, इसलिए भाषा सहज और आत्मीय होती है। यतींद्र मिश्र करोड़ों प्रशंसकों की ओर से लता जी ("दीदी") से प्रश्न पूछते हैं। यह पाठ गंगा के गद्य खंड का चौथा पाठ है।
पिता का व्यक्तित्व। पं. दीनानाथ मंगेशकर अपने काम और संगीत में डूबे रहते थे। उनकी ड्रामा कंपनी के नाटक रात नौ बजे शुरू होकर दो-तीन बजे तक चलते थे। वे एक राग गाते हुए किसी भी सुर को "सा" बनाकर नया राग रच देते और फिर लौट आते थे। उन्होंने मराठी रंगमंच पर कर्नाटक और पंजाब का संगीत पहली बार प्रस्तुत किया।
बिना बोले डाँटना। बच्चे शरारत करते, तो पिता उन्हें सामने खड़ा करके गंभीरता से देखते और पूछते, "समझ गए न?" बिना डाँटे ही बच्चे समझ जाते और रोने लगते। यह शिक्षा का एक असरदार तरीका है, जिसमें कठोर शब्द नहीं, पिता की गंभीरता काम करती है।
स्वाभिमान की सीख। लता जी ने पिता से सबसे अधिक स्वाभिमान से जीना सीखा: "अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।" पिता के निधन के बाद बुरे दिन आए, पर माँ की सीख भी यही थी कि किसी के आगे हाथ न पसारो।
परिश्रम और कर्तव्य। वे सुबह से रात तक एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो दौड़तीं और उनके मन में परिवार की ज़रूरतें पूरी करने की चिंता रहती थी। यह कर्तव्य-बोध भी पिता और माँ के संस्कारों से जुड़ा है।
विनम्रता और कृतज्ञता। वे कहती हैं कि जितना प्रेम उन्हें मिला, उतना आभार वे गाकर भी व्यक्त नहीं कर पाईं। यह उनकी विनम्रता दिखाता है।
केंद्रीय भाव। पिता के संस्कार और स्वाभिमान की सीख ने एक बालिका को आत्मसम्मान और परिश्रम से भरा जीवन जीने का साहस दिया।
ऐसी भी बातें होती हैं: पिता का प्रभाव और स्वाभिमान की सीख: key facts
- पिता के बारे में
- पं. दीनानाथ मंगेशकर
- नाटक रात नौ बजे से दो-तीन बजे तक
- मराठी रंगमंच पर कर्नाटक और पंजाब का संगीत
- गंभीरता से देखकर समझाना
- पाठ के तथ्य।
- सबसे बड़ी सीख
- स्वाभिमान से जीना
- सही लगे वह करना
- किसी के आगे न झुकना
- हाथ न पसारना
- पिता और माँ दोनों से मिली।
- पारिवारिक संघर्ष
- पिता के बाद बुरे दिन
- माँ की सीख: हाथ न पसारो
- स्टूडियो की दौड़
- परिवार की चिंता
- पाठ के तथ्य।
- गुण
- स्वाभिमान
- परिश्रम
- कर्तव्य
- विनम्रता
- कृतज्ञता
- प्रत्येक गुण के साथ उदाहरण लिखें।
How to answer ऐसी भी बातें होती हैं: पिता का प्रभाव और स्वाभिमान की सीख questions
पिता, माँ या सीख पर प्रश्न का उत्तर इस क्रम से लिखें।
- 1प्रसंग का नाम बताइए।
- 2पाठ की पंक्ति या घटना लिखिए।
- 3उससे मिली सीख बताइए।
- 4लता जी के जीवन पर प्रभाव लिखिए।
- 5अंत में मूल्य का नाम लिखिए।
ऐसी भी बातें होती हैं: पिता का प्रभाव और स्वाभिमान की सीख in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
बिना डाँटे समझाना
मान लीजिए किसी कक्षा में शिक्षिका गृहकार्य न करने वाले छात्र को डाँटती नहीं, केवल गंभीरता से देखकर पूछती है, "समझ गए न?" और छात्र अगले दिन से नियमित कार्य लाने लगता है।
यह पाठ के किस प्रसंग से मिलता है? (2-3 पंक्तियाँ)
Try it first, then show the solutionSolution
- न डाँट, न मार।
- केवल गंभीर दृष्टि।
- छात्र का सुधार।
Answer: यह पं. दीनानाथ के बच्चों को गंभीरता से देखकर "समझ गए न?" पूछने के प्रसंग से मिलता है।
Memory hook: डाँट से नहीं, गंभीरता से सीख।
Tricks to remember ऐसी भी बातें होती हैं: पिता का प्रभाव और स्वाभिमान की सीख
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
स-प-पि
स्वाभिमान, परिश्रम, पिता।
Use it when: मुख्य शब्द।
समझ गए न?
पिता की गंभीर दृष्टि का वाक्य।
Use it when: प्रसंग याद रखने के लिए।
हाथ न पसारो
माँ की सीख: किसी के आगे हाथ न पसारो।
Use it when: माँ की शिक्षा याद रखने के लिए।
ऐसी भी बातें होती हैं: पिता का प्रभाव और स्वाभिमान की सीख: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: लेखक · 1 mark · MCQBoard level
"ऐसी भी बातें होती हैं" साक्षात्कार किसने लिया है?
(क) लता मंगेशकर (ख) यतींद्र मिश्र (ग) दीनानाथ मंगेशकर (घ) नौशाद
Try it first, then show the solutionSolution
- पाठ-परिचय में लेखक का नाम है।
Answer: (ख) यतींद्र मिश्र।
Example 2: पिता का डाँटना · 2 marks · Short answerBoard level
पिता बच्चों की शरारत पर उन्हें किस प्रकार समझाते थे? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- बिना डाँटे गंभीरता से देखना।
- प्रश्न: "समझ गए न?"
Answer: पिता बच्चों को सामने खड़ा करके गंभीरता से देखते और पूछते थे, "समझ गए न?" वे डाँटते नहीं थे, पर बच्चे बात समझ जाते थे और रोने लगते थे।
Example 3: स्वाभिमान की सीख · 2 marks · Short answerHarder board level
लता जी ने पिता से सबसे अधिक क्या सीखा और उसका क्या अर्थ है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- सबसे ज़्यादा: स्वाभिमान से जीना।
- अर्थ: सही काम करो, झुको नहीं।
Answer: लता जी ने पिता से सबसे अधिक स्वाभिमान से जीना सीखा। इसका अर्थ है कि जो बात सही लगे उसे करना चाहिए और किसी के आगे झुकने की ज़रूरत नहीं है।
Example 4: माँ की सीख · 2 marks · Short answerHarder board level
पिता के निधन के बाद माँ की शिक्षा लता जी के लिए कैसे सहायक रही होगी? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पिता के बाद कठिन दिन।
- माँ की सीख: हाथ न पसारो।
Answer: पिता के बाद बुरे दिन आए, तब माँ की सीख कि किसी के आगे हाथ न पसारो, लता जी को आत्मनिर्भर रहने और स्वाभिमान से संघर्ष करने में सहायक रही होगी।
Example 5: पिता का प्रभाव · 4 marks · Long answerHOTS / competency
पाठ के आधार पर बताइए कि लता जी के व्यक्तित्व पर पिता का प्रभाव किन रूपों में दिखता है। (50-60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- संगीत और परिश्रम (1)।
- स्वाभिमान (1)।
- गंभीरता से सीख (1)।
- कर्तव्य और परिश्रम की सीख, माता-पिता से (1)।
Answer: पिता पं. दीनानाथ अपने काम और संगीत में पूरी तरह डूबे रहते थे; उनके नाटक रात नौ बजे से दो-तीन बजे तक चलते थे। लता जी में भी यही लगन दिखती है। उनसे उन्होंने स्वाभिमान से जीना सीखा: जो सही लगे वह करो और किसी के आगे मत झुको। पिता बिना डाँटे गंभीर दृष्टि से समझा देते थे, जिससे अनुशासन मिला। माता-पिता से कर्तव्य और परिश्रम की सीख भी मिली।
Where students lose marks in ऐसी भी बातें होती हैं: पिता का प्रभाव और स्वाभिमान की सीख
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: साक्षात्कार को कहानी लिखना
पाठ की विधा साक्षात्कार है।
Wrong working
यह लता जी की लिखी कहानी है।
Right working
यह यतींद्र मिश्र द्वारा लता जी से लिया गया साक्षात्कार है।
Do this: विधा का नाम सही लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: सीख का स्रोत गलत लिखना
स्वाभिमान की सीख पिता से मिली; हाथ न पसारने की सीख माँ से भी मिली।
Wrong working
स्वाभिमान की सीख लता जी को गुरु से मिली।
Right working
लता जी ने स्वाभिमान से जीना पिता से सीखा।
Do this: सीख के साथ उसका स्रोत भी लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: पिता को कठोर बताना
पिता बिना डाँटे समझाते थे।
Wrong working
पिता बहुत मारते थे।
Right working
पिता गंभीरता से देखकर "समझ गए न?" पूछते थे।
Do this: प्रसंग उद्धृत करें।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: सीख न लिखना
प्रश्न में अक्सर सीख माँगी जाती है।
Wrong working
केवल घटना लिख देना।
Right working
घटना के बाद स्वाभिमान की सीख लिखना।
Do this: अंत में सीख जोड़ें।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- लता जी, पिता और लेखक के नाम सही लिखिए।
- "समझ गए न?" प्रसंग उद्धृत कीजिए।
- स्वाभिमान की सीख पिता से और हाथ न पसारने की सीख माँ से मिली, यह अंतर याद रखिए।
- स्वाभिमान का अर्थ लिखकर उदाहरण दीजिए।
- उत्तर के अंत में मूल्य या सीख का उल्लेख करें।
Practice questions on ऐसी भी बातें होती हैं: पिता का प्रभाव और स्वाभिमान की सीख
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
पाठ के अनुसार लता जी ने स्वाभिमान से जीना सबसे अधिक किससे सीखा?
(क) पिता से (ख) गुरु से (ग) मित्र से (घ) संगीतकारों सेHint
पिता की सीख याद कीजिए।
Answer
(क) पिता से।
Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level
पिता के नाटक किस समय शुरू होते और कब तक चलते थे? उनसे पिता की कैसी छवि बनती है? (25-30 शब्द)
Hint
समय का उल्लेख और छवि।
Answer
पिता की कंपनी के नाटक रात नौ बजे शुरू होकर दो-तीन बजे तक चलते थे। इससे वे अपने काम और संगीत में पूरी तरह डूबे रहने वाले व्यक्ति लगते हैं।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
लता जी को फ़िल्मों में अभिनय करना अच्छा क्यों नहीं लगता था? (25-30 शब्द)
Hint
मेकअप और कैमरा।
Answer
लता जी ने छह-सात फ़िल्मों में अभिनय किया, पर मेकअप और कैमरे के सामने हँसना-रोना उन्हें कभी अच्छा नहीं लगा। उनका मन अभिनय में नहीं, संगीत में था।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
लता जी ने कोरस की लड़कियों और संगीतकारों के साथ अपने संबंधों को किस रूप में याद किया है? (25-30 शब्द)
Hint
दीवाली और कोरस का प्रसंग।
Answer
दीवाली की सुबह वे वरिष्ठ संगीतकारों के घर मिठाई लेकर जाती थीं। उन्होंने कोरस की लड़कियों के साथ आत्मीय संबंधों को भी याद किया। इससे उनका स्नेह और विनम्रता प्रकट होती है।
Q5 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
आज के विद्यार्थियों के लिए इस पाठ से कौन-सी दो सीखें उपयोगी हैं? कारण सहित लिखिए। (50-60 शब्द)
Hint
स्वाभिमान और परिश्रम पर ध्यान दीजिए।
Answer
इस पाठ से पहली उपयोगी सीख स्वाभिमान की है। जो बात सही लगे उसे करना और किसी के आगे हाथ न पसारना विद्यार्थी को आत्मविश्वासी बनाता है। दूसरी सीख परिश्रम और कर्तव्य की है। लता जी ने कम आयु में परिवार की ज़िम्मेदारी निभाई, जिससे पता चलता है कि लगन और ज़िम्मेदारी से हर कठिनाई पार की जा सकती है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.साक्षात्कार किसने लिया?Show answer
यतींद्र मिश्र ने।
2.साक्षात्कार किससे लिया गया?Show answer
लता मंगेशकर से।
3.लता जी के पिता कौन थे?Show answer
पं. दीनानाथ मंगेशकर।
4.पिता किस वाक्य से बच्चों को समझाते थे?Show answer
"समझ गए न?"
5.लता जी ने पिता से सबसे अधिक क्या सीखा?Show answer
स्वाभिमान से जीना।
6.पाठ गंगा का कौन-सा पाठ है?Show answer
चौथा पाठ।
ऐसी भी बातें होती हैं: पिता का प्रभाव और स्वाभिमान की सीख: frequently asked questions
पाठ की विधा क्या है?
साक्षात्कार।
पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
स्वाभिमान, परिश्रम और कर्तव्य के साथ जीना।
लता जी माँ से क्या सीखीं?
किसी के आगे हाथ न पसारना।
परीक्षा में कैसे प्रश्न आते हैं?
गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले उत्तर।