उद्यमी नर (दिनकर): श्रम का महत्त्व, श्रमिक का अधिकार और 2025 का प्रश्न (ISC कक्षा 12)
Updated 18 October 2026 · Fact-checked
'उद्यमी नर' में दिनकर श्रम और भुजबल को नर-समाज का भाग्य कहते हैं, क्योंकि कर्मठ मनुष्य अपने परिश्रम से भाग्य स्वयं बनाता है। प्रकृति पर विजय का सुख पाने का पहला अधिकारी वह है जिसने श्रम-जल दिया। उसे पीछे छोड़ने से वह निरुत्साहित होगा, सुखों से वंचित रहेगा और समाज में असंतोष बढ़कर अधोपतन होगा।
Understand उद्यमी नर: श्रम का महत्त्व, श्रमिक का अधिकार और 2025 का पद्यांश-प्रश्न
पृष्ठभूमि। कविता रामधारी सिंह 'दिनकर' की है और काव्य मंजरी में है। यह कॉपीराइट में है, इसलिए यहाँ केवल वही पंक्तियाँ हैं जो 2025 के प्रश्न 7 में छपी थीं; व्याख्या अंक-योजना के बिंदुओं पर आधारित है। 2025 में इस पर पूरा पद्यांश-आधारित प्रश्न आया (1+2+2+5): कविता और कवि का नाम; 'नर समाज का भाग्य' किसे कहा और क्यों; सबसे पहले सुख पाने का अधिकारी कौन और क्यों; और 'उसे पीछे मत रह जाने दो' के आधार पर पीछे रह जाने के परिणाम, दो तर्कों सहित।
1. केंद्रीय भाव। कविता श्रम की महिमा का गान है। मनुष्य-समाज का भाग्य श्रम और भुजबल है; भाग्य ऊपर से नहीं मिलता, कर्मठ मनुष्य अपने परिश्रम से उसे स्वयं बनाता है।
2. प्रकृति श्रम के सामने झुकती है। श्रम और भुजबल के सम्मुख पृथ्वी झुकी और आकाश विनीत है: मनुष्य ने धरती को उपजाऊ बनाया, नगर बसाए और प्रकृति की शक्तियों को वश में किया।
3. श्रमिक का अधिकार। 'जिसने श्रम-जल दिया, उसे पीछे मत रह जाने दो': जिसने पसीना बहाया, प्रकृति पर विजय का सुख पहले उसी को मिले। कवि उस अन्याय का विरोध करते हैं जिसमें काम कोई और करे और सुख कोई और भोगे।
4. पीछे छूटने का परिणाम (अंक-योजना के अनुसार)। (क) परिश्रमी निरुत्साहित होगा; (ख) वह उन सुखों से वंचित होगा जिनका अधिकारी है; (ग) समाज में असंतोष बढ़ेगा और समाज अधोपतन की ओर जाएगा।
5. प्रश्न (ii) और (iii) में अंतर। परीक्षकों ने देखा कि इन दोनों के उत्तर लगभग एक जैसे लिखे गए। (ii) का उत्तर: *भाग्य* किसे कहा (श्रम और भुजबल) और *क्यों* (मनुष्य अपना भाग्य श्रम से स्वयं बनाता है)। (iii) का उत्तर: *अधिकारी* कौन (श्रम करने वाला) और *क्यों* (उसने पसीना बहाकर विजय दिलाई)।
6. सामान्य भूलें। कविता के नाम में मात्राओं की भूल; कवि का नाम भूलना; 5 अंक के प्रश्न में तर्क की जगह सारांश लिखना।
7. एक गणना (काल्पनिक संख्याएँ)। यदि किसी खेत की उपज 600 क्विंटल हुई और श्रमिकों को उसका 15% हिस्सा मिला, तो श्रमिकों का हिस्सा 600 × 15 ÷ 100 = 90 क्विंटल और शेष 600 − 90 = 510 क्विंटल। कविता की माँग है कि श्रमिक को पीछे न छोड़ा जाए, यानी उसे उचित हिस्सा मिले।
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
नर-समाज का भाग्य एक है, वह श्रम है, वह भुजबल है
कवि: 2025 के पद्यांश की आरंभिक पंक्ति।
श्रम ही भाग्य है।
जिसके सम्मुख झुकी हुई पृथिवी, विनीत नभ-तल है
कवि: श्रम की शक्ति का वर्णन।
प्रकृति पर मनुष्य की विजय।
जिसने श्रम-जल दिया, उसे पीछे मत रह जाने दो
कवि: श्रमिक के अधिकार की माँग।
सुख पर पहला अधिकार श्रमिक का।
उद्यमी नर: श्रम का महत्त्व, श्रमिक का अधिकार और 2025 का पद्यांश-प्रश्न: key facts
- कविता के तीन भाव
- श्रम ही भाग्य
- प्रकृति पर विजय
- श्रमिक को पहला अधिकार
- तीनों भाव क्रम से।
- पीछे रहने के तीन परिणाम
- निरुत्साह
- सुखों से वंचित
- असंतोष और अधोपतन
- दो तर्क माँगे जाएँ तो दो चुनें।
- पद्यांश का अंक-विभाजन
- नाम 1
- भाग्य और क्यों 2
- अधिकारी और क्यों 2
- परिणाम 5
- (ii) और (iii) अलग लिखें।
How to answer उद्यमी नर: श्रम का महत्त्व, श्रमिक का अधिकार और 2025 का पद्यांश-प्रश्न questions
पद्यांश-आधारित प्रश्न के लिए यह क्रम अपनाएँ।
- 1(i) में कविता और कवि का नाम मात्राएँ सही लिखकर दें।
- 2(ii) में 'क्या' और 'क्यों' दोनों भाग लिखें।
- 3(iii) में अधिकारी और उसका कारण लिखें; (ii) की नकल न करें।
- 4(iv) में सारांश नहीं, दो तर्क दें।
उद्यमी नर: श्रम का महत्त्व, श्रमिक का अधिकार और 2025 का पद्यांश-प्रश्न in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
श्रम का उचित हिस्सा
मान लीजिए एक भवन बनाने वाले मज़दूरों ने महीनों पसीना बहाया, पर भवन के उद्घाटन में उन्हें बुलाया ही नहीं गया और मज़दूरी भी देर से मिली।
कविता इस स्थिति के बारे में क्या कहेगी?
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- श्रमिक ने श्रम-जल दिया है।
- कवि कहते हैं उसे पीछे मत रह जाने दो।
Answer: कविता के अनुसार सुख का पहला अधिकारी श्रमिक है; उसे पीछे छोड़ना अन्याय है।
Memory hook: जिसका पसीना, उसका पहला हक़।
Tricks to remember उद्यमी नर: श्रम का महत्त्व, श्रमिक का अधिकार और 2025 का पद्यांश-प्रश्न
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
भा-प्र-अ
भाग्य, प्रकृति की विजय, अधिकार।
Use it when: कविता के तीन भाव।
नि-वं-अ
निरुत्साह, वंचित, अधोपतन।
Use it when: पीछे रहने के परिणाम।
उद्यमी नर: श्रम का महत्त्व, श्रमिक का अधिकार और 2025 का पद्यांश-प्रश्न: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: कवि कौन · 1 mark · MCQBoard level
'उद्यमी नर' के कवि हैं:
(क) महादेवी वर्मा
(ख) रामधारी सिंह 'दिनकर'
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) सुमित्रानंदन पंत
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- यह रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता है।
Answer: (ख) रामधारी सिंह 'दिनकर'।
Example 2: नर-समाज का भाग्य · 2 marks · Short answerBoard level
कवि ने 'नर-समाज का भाग्य' किसे कहा है और क्यों? (लगभग 40 शब्द)
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- श्रम और भुजबल को।
- क्योंकि कर्मठ मनुष्य परिश्रम से अपना भाग्य स्वयं बनाता है।
Answer: कवि ने श्रम और भुजबल को नर-समाज का भाग्य कहा है, क्योंकि भाग्य बाहर से नहीं मिलता; कर्मठ मनुष्य अपने परिश्रम से उसे स्वयं बनाता है और उसके सामने पृथ्वी तथा आकाश भी झुकते हैं।
Example 3: श्रमिक का हिस्सा · 3 marks · Short answerHarder board level
कल्पना कीजिए कि खेत की उपज 600 क्विंटल है और श्रमिकों को 15% हिस्सा मिला। श्रमिकों का हिस्सा और शेष उपज ज्ञात कीजिए तथा बताइए कि कविता के अनुसार यह क्या सोचने को प्रेरित करता है। (संख्याएँ कल्पित हैं।)
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- श्रमिकों का हिस्सा = 600 × 15 ÷ 100 = 90 क्विंटल।
- शेष = 600 − 90 = 510 क्विंटल।
- विचार: क्या श्रमिक को उसके श्रम के अनुरूप हिस्सा मिला?
Answer: श्रमिकों का हिस्सा 90 क्विंटल और शेष 510 क्विंटल है। कविता यह सोचने को प्रेरित करती है कि क्या जिसने श्रम-जल दिया, उसे सुख का उचित हिस्सा मिला।
Example 4: पीछे रह जाने के परिणाम (5 अंक) · 5 marks · Long answerHarder board level
'उसे पीछे मत रह जाने दो' के आधार पर बताइए कि श्रमिक के पीछे रह जाने के क्या परिणाम होंगे। दो तर्क दीजिए। (लगभग 100 शब्द)
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- पहला तर्क: निरुत्साह (2)।
- दूसरा तर्क: असंतोष और अधोपतन (2)।
- निष्कर्ष (1)।
Answer: यदि परिश्रमी व्यक्ति पीछे रह जाएगा तो पहला परिणाम यह होगा कि वह निरुत्साहित हो जाएगा और अपने सुखों से वंचित रहेगा, जिनका वह अधिकारी है; तब उसके मन में श्रम के प्रति उत्साह घटेगा। दूसरा परिणाम यह होगा कि समाज में असंतोष बढ़ेगा और जब श्रम का सम्मान नहीं होगा तो समाज अधोपतन की ओर जाएगा। इसलिए कवि श्रमिक को पीछे न छोड़ने की माँग करते हैं।
Example 5: श्रम की महिमा (10 अंक) · 10 marks · Long answerHOTS / competency
'उद्यमी नर' कविता के आधार पर श्रम की महिमा और श्रमिक के अधिकार पर अपने विचार लिखिए। (लगभग 200 शब्द)
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- श्रम ही भाग्य (3)।
- प्रकृति पर विजय (2)।
- श्रमिक का अधिकार और अन्याय का विरोध (3)।
- पीछे रहने के परिणाम और संदेश (1)।
- भाषा (1)।
Answer: रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता 'उद्यमी नर' श्रम की महिमा का गान है। कवि कहते हैं कि नर-समाज का भाग्य एक ही है, श्रम और भुजबल; भाग्य कोई ऊपर से मिलने वाली वस्तु नहीं, कर्मठ मनुष्य उसे अपने परिश्रम से स्वयं बनाता है। उसी श्रम के सम्मुख पृथ्वी झुकी और आकाश विनीत है, क्योंकि मनुष्य ने धरती को उपजाऊ बनाया, नगर बसाए और प्रकृति की शक्तियों को वश में किया। कवि की सबसे बड़ी माँग है कि जिसने श्रम-जल दिया, उसे पीछे न रहने दिया जाए और प्रकृति पर विजय का सुख सबसे पहले उसी को मिले। वे उस अन्याय का विरोध करते हैं जिसमें काम कोई और करे और सुख कोई और भोगे। यदि श्रमिक पीछे रह गया तो वह निरुत्साहित होगा, अपने अधिकार के सुखों से वंचित होगा और समाज में असंतोष बढ़कर अधोपतन होगा। इस प्रकार कविता श्रम के सम्मान और श्रमिक को उचित हिस्सा देने को न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज की नींव बताती है।
Where students lose marks in उद्यमी नर: श्रम का महत्त्व, श्रमिक का अधिकार और 2025 का पद्यांश-प्रश्न
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: (ii) और (iii) के उत्तर एक जैसे लिखना
परीक्षकों ने 2025 में यह चूक देखी।
Wrong working
दोनों में 'श्रम' और 'पसीना' दोहराना।
Right working
(ii) में भाग्य क्या और क्यों; (iii) में अधिकारी कौन और क्यों।
Do this: प्रश्न के प्रश्नवाचक शब्द रेखांकित करें।
Usually costs: 1-2 अंक।
Mistake: तर्क की जगह सारांश
5 अंक का भाग दो तर्क माँगता है।
Wrong working
पूरी कविता का सार लिखना।
Right working
निरुत्साह तथा असंतोष-अधोपतन, दो तर्क।
Do this: उत्तर में तर्क गिनकर लिखें।
Usually costs: 2-3 अंक।
Mistake: नाम में मात्रा की भूल
कविता और कवि के नाम में भूलें हुईं।
Wrong working
'उद्यमी नर' को गलत मात्राओं से लिखना।
Right working
उद्यमी नर, रामधारी सिंह 'दिनकर'।
Do this: नाम दो बार लिखकर अभ्यास करें।
Usually costs: 1 अंक।
Exam tips
- 2025 में इस कविता पर पूरा पद्यांश-प्रश्न आया; ऐसे ढाँचे का अभ्यास करें।
- कविता और कवि का नाम सही मात्राओं से लिखें।
- 5 अंक में दो स्पष्ट तर्क दें।
- उद्धरण पाठ्यपुस्तक से मिलाकर ही लिखें।
Practice questions on उद्यमी नर: श्रम का महत्त्व, श्रमिक का अधिकार और 2025 का पद्यांश-प्रश्न
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · Very short answerBoard level
'उद्यमी नर' कविता के कवि का नाम लिखिए।
Hint
राष्ट्रकवि।
Answer
रामधारी सिंह 'दिनकर'।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
सुख पाने का सबसे पहला अधिकारी कौन है और क्यों? (लगभग 40 शब्द)
Hint
पसीना बहाने वाला।
Answer
सबसे पहला अधिकारी वह श्रमिक है जिसने श्रम-जल दिया, क्योंकि प्रकृति पर विजय उसी के पसीने का फल है; इसलिए उसका सुख पर पहला हक़ है।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
'पृथिवी झुकी हुई और नभ-तल विनीत है' से कवि क्या कहना चाहते हैं? (लगभग 40 शब्द)
Hint
प्रकृति पर विजय।
Answer
कवि कहना चाहते हैं कि श्रम और भुजबल के सामने प्रकृति भी झुक जाती है; मनुष्य ने परिश्रम से धरती को उपजाऊ बनाया और प्रकृति की शक्तियों को वश में किया।
Q4 · 3 marks · Short answerHarder board level
एक कारखाने में 40 श्रमिक हैं और उनमें से 10 को पदोन्नति मिली। पदोन्नति न पाने वाले श्रमिकों का प्रतिशत निकालिए और कविता के आलोक में उनके निरुत्साहित होने के कारण बताइए। (संख्याएँ कल्पित हैं।)
Hint
प्रतिशत, फिर परिणाम।
Answer
पदोन्नति न पाने वाले = 40 − 10 = 30; प्रतिशत = 30 ÷ 40 × 100 = 75%। कविता के अनुसार जब परिश्रमी पीछे रह जाता है तो वह निरुत्साहित होता है और अपने अधिकार के सुखों से वंचित रहता है, इसलिए उचित मूल्यांकन ज़रूरी है।
Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
एक छात्र ने लिखा कि कविता भाग्यवाद का समर्थन करती है। इस कथन की समीक्षा कीजिए। (लगभग 100 शब्द)
Hint
भाग्य की परिभाषा।
Answer
कथन गलत है। कवि 'भाग्य' शब्द का प्रयोग करते हैं, पर उसका अर्थ श्रम और भुजबल है: भाग्य ऊपर से नहीं मिलता, कर्मठ मनुष्य अपने परिश्रम से उसे स्वयं बनाता है। कविता भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय परिश्रम को सबसे बड़ी शक्ति बताती है, जिसके सामने पृथ्वी और आकाश भी झुकते हैं। इसलिए कविता भाग्यवाद का नहीं, कर्मवाद का समर्थन करती है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.नर-समाज का भाग्य क्या है?Show answer
श्रम और भुजबल।
2.सुख का पहला अधिकारी कौन?Show answer
जिसने श्रम-जल दिया, यानी श्रमिक।
3.पीछे रहने का एक परिणाम बताइए।Show answer
श्रमिक निरुत्साहित होगा।
4.कविता किस पुस्तक में है?Show answer
काव्य मंजरी।
उद्यमी नर: श्रम का महत्त्व, श्रमिक का अधिकार और 2025 का पद्यांश-प्रश्न: frequently asked questions
क्या पूरी कविता इस पृष्ठ पर है?
नहीं, कविता कॉपीराइट में है; यहाँ केवल बोर्ड प्रश्न में छपी पंक्तियाँ हैं।
दिनकर का 'भाग्य' क्या है?
श्रम और भुजबल, यानी कर्म से बना भाग्य।
निबंध 'संस्कृति क्या है' भी दिनकर का है?
हाँ, उसका अलग विषय-पृष्ठ है।