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HindiISC Class 12 · क्या निराश हुआ जाए (निबंध) – हजारी प्रसाद द्विवेदी

क्या निराश हुआ जाए (हजारी प्रसाद द्विवेदी): निराशा के कारण, दो घटनाएँ और आशा का संदेश (ISC कक्षा 12)

Updated 18 October 2026 · Fact-checked

द्विवेदी जी स्वीकार करते हैं कि अख़बारों में ठगी और भ्रष्टाचार की ख़बरें भरी हैं, पर वे कहते हैं कि सेवा, ईमानदारी और सचाई के मूल्य दबे हैं, नष्ट नहीं हुए। टिकट बाबू द्वारा नब्बे रुपये लौटाने और बस कंडक्टर की सहायता की घटनाएँ इसका प्रमाण हैं। इसलिए 'निराश होने की जरूरत नहीं है'।

Understand क्या निराश हुआ जाए: निराशा के कारण, टिकट बाबू और बस-यात्रा की घटनाएँ और आशा का संदेश

पृष्ठभूमि। यह निबंध NCERT की वसंत भाग 3 में भी है।

1. निराशा के कारण। अख़बार ठगी, डकैती, चोरी, तस्करी और भ्रष्टाचार से भरे हैं; आरोप-प्रत्यारोप का ऐसा वातावरण है कि देश में कोई ईमानदार आदमी नहीं दिखता। हर व्यक्ति संदेह से देखा जाता है; जो जितने ऊँचे पद पर, उसके उतने दोष दिखाए जाते हैं। एक बड़े आदमी ने कहा था कि आज सुखी वही है जो कुछ नहीं करता, क्योंकि करने वाले के गुण भुला दिए जाते हैं।

2. क्या यही भारतवर्ष है? लेखक पूछते हैं कि क्या यह तिलक और गांधी के सपनों का भारत है। मन कहता है, नहीं। वे मानते हैं कि आज ईमानदार श्रमजीवी पिस रहे हैं, झूठ-फ़रेब करने वाले फल-फूल रहे हैं और ईमानदारी मूर्खता का पर्याय समझी जाती है।

3. कारणों का विश्लेषण। भारत ने भौतिक वस्तुओं के संग्रह को कभी अधिक महत्त्व नहीं दिया और लोभ-मोह, काम-क्रोध को संयम से बाँधा। पर भूख, बीमारी और गुमराही की उपेक्षा नहीं की जा सकती। दरिद्रों के लिए क़ानून बने, पर लागू करने वालों का मन सदा पवित्र नहीं। पहले क़ानून धर्म का रूप था; आज दोनों में अंतर है। धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता, क़ानून को दिया जा सकता है।

4. मूल्य दबे हैं, नष्ट नहीं। सेवा, ईमानदारी, सचाई और आध्यात्मिकता के मूल्य दब गए हैं, नष्ट नहीं हुए। भ्रष्टाचार पर अख़बारों का आक्रोश ही बताता है कि हम इसे गलत मानते हैं। दोषों का पर्दाफ़ाश बुरा नहीं, पर बुराई में रस लेना बुरा है और अच्छाई को उजागर न करना उससे भी बुरा।

5. दो घटनाएँ।

  • *टिकट बाबू*: रेलवे स्टेशन पर लेखक ने दस के बजाय सौ का नोट दे दिया; टिकट बाबू डिब्बे में उन्हें ढूँढ़कर नब्बे रुपये लौटा गया।
  • *बस कंडक्टर*: एक रात बस बिगड़ी, कंडक्टर साइकिल लेकर चला गया, यात्रियों ने डकैती के डर से ड्राइवर को घेर लिया; लेखक ने उसे पिटने से बचाया। कंडक्टर दूसरी बस के साथ लौटा और बच्चों के लिए पानी और दूध भी लाया।

6. निष्कर्ष। लेखक ठगे भी गए, पर विश्वासघात बहुत कम मिला। केवल धोखे का हिसाब रखने से जीवन कष्टकर हो जाएगा। वे रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रार्थना याद करते हैं कि धोखा खाने पर भी ईश्वर पर संदेह न हो। मनुष्य की बनाई विधियाँ गलत हों तो उन्हें बदलना होगा। अंतिम वाक्य: 'मेरे मन! निराश होने की जरूरत नहीं है।'

7. गणना। टिकट बाबू को सौ का नोट मिला और टिकट दस रुपये का था: लौटाई गई राशि 100 − 10 = 90 रुपये। यदि वह रकम न लौटाता तो उसे 90 ÷ 10 = 9 गुना, यानी टिकट के नौ गुना धन का अनुचित लाभ होता।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • कैसे कहूँ कि मनुष्यता एकदम समाप्त हो गई!

    लेखक: टिकट बाबू और बस कंडक्टर की घटनाओं के संदर्भ में।

    साधारण लोगों की ईमानदारी और दया में लेखक की आस्था।

  • लेकिन अब भी आशा की ज्योति बुझी नहीं है।

    लेखक: निष्कर्ष की ओर।

    निबंध का आशावादी स्वर।

  • मेरे मन! निराश होने की जरूरत नहीं है।

    लेखक: निबंध का अंतिम वाक्य।

    शीर्षक के प्रश्न का उत्तर।

क्या निराश हुआ जाए: निराशा के कारण, टिकट बाबू और बस-यात्रा की घटनाएँ और आशा का संदेश: key facts

निबंध की गति
  • निराशा के कारण
  • क्या यही भारत है
  • कारण-विश्लेषण
  • मूल्य दबे हैं
  • दो घटनाएँ
  • आशा
छह चरण।
दो घटनाएँ
टिकट बाबू: नब्बे रुपये लौटाए | बस कंडक्टर: पानी और दूध लाया
साधारण लोगों की ईमानदारी।
लेखक का तर्क
  • बुराई देखो पर रस मत लो
  • अच्छाई को उजागर करो
  • मूल्य नष्ट नहीं, दबे हैं
समीक्षा में काम आता है।

How to answer क्या निराश हुआ जाए: निराशा के कारण, टिकट बाबू और बस-यात्रा की घटनाएँ और आशा का संदेश questions

निबंध के आशय या संदेश के प्रश्न के लिए यह क्रम अपनाएँ।

  1. 1पहले निराशा के कारण संक्षेप में लिखें।
  2. 2फिर लेखक का तर्क: मूल्य दबे हैं, नष्ट नहीं।
  3. 3दोनों घटनाएँ उदाहरण के रूप में दें।
  4. 4रचनाकार का नाम और निबंध का शीर्षक लिखें।
  5. 5अंत में अंतिम वाक्य के संदेश से निष्कर्ष दें।

क्या निराश हुआ जाए: निराशा के कारण, टिकट बाबू और बस-यात्रा की घटनाएँ और आशा का संदेश in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

साधारण ईमानदारी

मान लीजिए एक सब्ज़ीवाले को ग्राहक ने गलती से पचास के बदले पाँच सौ का नोट दे दिया और वह उसके पीछे दौड़कर साढ़े चार सौ लौटा देता है।

यह घटना निबंध के किस विचार से जुड़ती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. यह टिकट बाबू की घटना जैसी है।
  2. इससे दिखता है कि साधारण लोगों में ईमानदारी जीवित है।

Answer: यह निबंध के उस विचार को पुष्ट करती है कि ईमानदारी के मूल्य दबे हैं, नष्ट नहीं हुए।

Memory hook: सच्चाई छोटी घटनाओं में दिखती है।

Tricks to remember क्या निराश हुआ जाए: निराशा के कारण, टिकट बाबू और बस-यात्रा की घटनाएँ और आशा का संदेश

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • निराशा के कारण से आशा तक

    कारण, सवाल, विश्लेषण, मूल्य, घटनाएँ, आशा।

    Use it when: निबंध का क्रम।

  • दब गए, मिटे नहीं

    मूल्य दब गए हैं पर नष्ट नहीं हुए।

    Use it when: लेखक का मुख्य तर्क।

क्या निराश हुआ जाए: निराशा के कारण, टिकट बाबू और बस-यात्रा की घटनाएँ और आशा का संदेश: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: लेखक कौन · 1 mark · MCQBoard level

'क्या निराश हुआ जाए' के रचनाकार हैं:
(क) हरिशंकर परसाई
(ख) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(ग) रामचंद्र शुक्ल
(घ) महादेवी वर्मा

Try it first, then show the solutionSolution
  1. यह आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का निबंध है।

Answer: (ख) हजारी प्रसाद द्विवेदी।

Example 2: टिकट बाबू की घटना · 2 marks · Short answerBoard level

टिकट बाबू की घटना लिखकर बताइए कि लेखक पर उसका क्या प्रभाव पड़ा। (लगभग 50 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लेखक ने दस के बजाय सौ का नोट दिया; बाबू ने डिब्बे में ढूँढ़कर नब्बे रुपये लौटाए।
  2. प्रभाव: साधारण लोगों की ईमानदारी में विश्वास।

Answer: लेखक ने गलती से दस रुपये के टिकट के लिए सौ का नोट दे दिया। टिकट बाबू डिब्बे में उन्हें ढूँढ़कर नब्बे रुपये लौटा गया। इस घटना से लेखक का विश्वास दृढ़ हुआ कि साधारण लोगों में ईमानदारी जीवित है।

Example 3: दो घटनाएँ और लेखक का तर्क · 3 marks · Short answerHarder board level

टिकट बाबू और बस कंडक्टर की घटनाएँ लेखक के इस तर्क को कैसे पुष्ट करती हैं कि मूल्य दबे हैं, नष्ट नहीं हुए? (लगभग 80 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लेखक का तर्क लिखें: भ्रष्टाचार की ख़बरों के बीच भी मूल्य जीवित हैं (1)।
  2. टिकट बाबू: लोभ का अवसर होने पर भी नब्बे रुपये लौटाना (1)।
  3. बस कंडक्टर: संकट में दूसरी बस, पानी और दूध लाना; निष्कर्ष (1)।

Answer: लेखक मानते हैं कि ठगी और भ्रष्टाचार की ख़बरों के बीच भी सेवा, ईमानदारी और सचाई के मूल्य समाप्त नहीं हुए, केवल दब गए हैं। टिकट बाबू के पास रकम रख लेने का अवसर था, फिर भी उसने डिब्बे में ढूँढ़कर नब्बे रुपये लौटाए। बस कंडक्टर ने संकट में दूसरी बस के साथ बच्चों के लिए पानी और दूध पहुँचाया। ये साधारण लोगों के उदाहरण दिखाते हैं कि मनुष्यता जीवित है, इसलिए निराश होने की आवश्यकता नहीं।

Example 4: मूल्य दबे हैं नष्ट नहीं (5 अंक) · 5 marks · Long answerHarder board level

'सेवा, ईमानदारी, सचाई और आध्यात्मिकता के मूल्य दब गए हैं, नष्ट नहीं हुए' इस कथन को निबंध के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कथन का आशय (1)।
  2. अख़बारों का आक्रोश बताता है कि हम भ्रष्टाचार को गलत मानते हैं (1.5)।
  3. दो घटनाएँ (1.5)।
  4. निष्कर्ष (1)।

Answer: लेखक का आशय है कि भ्रष्टाचार और ठगी की ख़बरों के बीच भी सेवा, ईमानदारी और सचाई के मूल्य समाप्त नहीं हुए, बस दब गए हैं। अख़बारों का आक्रोश ही दिखाता है कि हम भ्रष्टाचार को गलत मानते हैं। टिकट बाबू का नब्बे रुपये लौटाना और बस कंडक्टर का साइकिल से जाकर दूसरी बस, पानी और दूध लाना इन मूल्यों के जीवित होने के प्रमाण हैं। इसलिए लेखक निराश न होने की सीख देते हैं।

Example 5: निबंध का संदेश (10 अंक) · 10 marks · Long answerHOTS / competency

'क्या निराश हुआ जाए' निबंध के आधार पर बताइए कि लेखक निराशा के कारणों को कैसे स्वीकार करते हैं और फिर आशा का पक्ष कैसे रखते हैं। (लगभग 200 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. निराशा के कारण और उनकी स्वीकृति (3)।
  2. कारणों का विश्लेषण: क़ानून और धर्म का अंतर (2)।
  3. आशा का पक्ष: दबे मूल्य और दो घटनाएँ (3)।
  4. रवींद्रनाथ की प्रार्थना और अंतिम वाक्य (1)।
  5. भाषा और निष्कर्ष (1)।

Answer: लेखक पहले निराशा के कारण ईमानदारी से मानते हैं: अख़बार ठगी, डकैती और भ्रष्टाचार की ख़बरों से भरे हैं, हर व्यक्ति संदेह से देखा जाता है, और ईमानदार श्रमजीवी पिस रहे हैं। वे कारणों का विश्लेषण भी करते हैं: दरिद्रों के लिए बने क़ानून लागू करने वालों का मन पवित्र नहीं होता, और धर्म तथा क़ानून में अंतर हो गया है, क्योंकि क़ानून को धोखा दिया जा सकता है, धर्म को नहीं। फिर वे आशा का पक्ष रखते हैं: सेवा, ईमानदारी और सचाई के मूल्य दबे हैं, नष्ट नहीं हुए। टिकट बाबू ने नब्बे रुपये लौटाए और बस कंडक्टर ने संकट में पानी और दूध पहुँचाया। लेखक ठगे गए, पर विश्वासघात बहुत कम मिला; केवल धोखे का हिसाब रखने से जीवन कष्टकर हो जाएगा। रवींद्रनाथ की प्रार्थना याद करते हुए वे अपने मन से कहते हैं, 'मेरे मन! निराश होने की जरूरत नहीं है।' इस प्रकार निबंध यथार्थ को स्वीकार करते हुए भी मनुष्यता में अटूट विश्वास का संदेश देता है।

Where students lose marks in क्या निराश हुआ जाए: निराशा के कारण, टिकट बाबू और बस-यात्रा की घटनाएँ और आशा का संदेश

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: रचनाकार का नाम भूलना

    लेखक का नाम न लिखने पर उत्तर अधूरा माना जा सकता है।

    Wrong working

    लेखक का नाम न लिखना।

    Right working

    हजारी प्रसाद द्विवेदी का नाम लिखना।

    Do this: उत्तर की शुरुआत में नाम लिखें।

    Usually costs: 1 अंक।

  • Mistake: केवल निराशा लिखना

    निबंध का निष्कर्ष आशा है।

    Wrong working

    समाज में केवल भ्रष्टाचार बताना।

    Right working

    कारणों के बाद दबे मूल्य और आशा लिखना।

    Do this: अंतिम वाक्य तक पहुँचें।

    Usually costs: 2-3 अंक।

  • Mistake: घटनाओं को उलट देना

    टिकट बाबू और कंडक्टर की घटनाएँ भिन्न हैं।

    Wrong working

    कंडक्टर ने नब्बे रुपये लौटाए।

    Right working

    टिकट बाबू ने नब्बे रुपये लौटाए; कंडक्टर पानी-दूध लाया।

    Do this: दोनों घटनाएँ अलग लिखें।

    Usually costs: 1-2 अंक।

Exam tips

  • अपनी पाठ्यपुस्तक/पाठ्यक्रम में निबंध की पुष्टि करें।
  • उद्धरण NCERT पाठ से मिलते हैं, पर अपनी पाठ्यपुस्तक से मिलाएँ।
  • निबंध के प्रश्न में निराशा से आशा तक की गति दिखाएँ।
  • दोनों घटनाएँ उदाहरण में दें।

Practice questions on क्या निराश हुआ जाए: निराशा के कारण, टिकट बाबू और बस-यात्रा की घटनाएँ और आशा का संदेश

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · Very short answerBoard level

    निबंध का अंतिम वाक्य क्या है?

    Hint

    शीर्षक का उत्तर।

    Answer

    'मेरे मन! निराश होने की जरूरत नहीं है।'

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    बस कंडक्टर ने यात्रियों की सहायता कैसे की?

    Hint

    दूसरी बस।

    Answer

    बस बिगड़ने पर कंडक्टर साइकिल लेकर गया, दूसरी बस लेकर लौटा और लेखक के बच्चों के लिए पानी और दूध भी लाया।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level

    लेखक के अनुसार क़ानून और धर्म में क्या अंतर है?

    Hint

    धोखा देना।

    Answer

    पहले भारत क़ानून को धर्म के रूप में देखता था, अब दोनों में अंतर हो गया है। धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता, पर क़ानून को दिया जा सकता है।

  4. Q4 · 3 marks · Short answerHarder board level

    'दोषों का पर्दाफ़ाश बुरा नहीं, पर बुराई में रस लेना बुरा है और अच्छाई को उजागर न करना उससे भी बुरा' — लेखक ऐसा क्यों कहते हैं? निबंध के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (लगभग 80 शब्द)

    Hint

    पर्दाफ़ाश, रस लेना और अच्छाई को छिपाने का अंतर।

    Answer

    लेखक दोषों के पर्दाफ़ाश को आवश्यक मानते हैं, क्योंकि इससे पता चलता है कि हम भ्रष्टाचार को गलत समझते हैं। पर जब समाज बुराई में रस लेने लगता है तो वातावरण संदेह और निराशा से भर जाता है। अच्छाई को उजागर न करने से लोगों को लगता है कि ईमानदारी बची ही नहीं, जबकि टिकट बाबू और बस कंडक्टर जैसे उदाहरण मौजूद हैं। इसलिए यह और भी बुरा है।

  5. Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    एक छात्र ने लिखा कि लेखक भ्रष्टाचार को नगण्य मानते हैं। इस कथन की समीक्षा कीजिए। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    दोषों का पर्दाफ़ाश।

    Answer

    कथन सही नहीं है। लेखक स्वयं स्वीकार करते हैं कि ठगी और भ्रष्टाचार की ख़बरें भरी हैं, ईमानदार पिस रहे हैं और झूठ-फ़रेब करने वाले फल-फूल रहे हैं। वे दोषों के पर्दाफ़ाश को बुरा नहीं मानते, पर बुराई में रस लेने और अच्छाई को उजागर न करने को बुरा कहते हैं। उनका मत है कि मूल्य दबे हैं, नष्ट नहीं हुए, इसलिए निराश न हों।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.टिकट बाबू ने कितने रुपये लौटाए?Show answer

    नब्बे।

  2. 2.लेखक ने किसकी प्रार्थना याद की?Show answer

    रवींद्रनाथ ठाकुर की।

  3. 3.किन दो नेताओं के सपनों के भारत की बात है?Show answer

    तिलक और गांधी।

  4. 4.मूल्य कैसे हैं, लेखक के अनुसार?Show answer

    दबे हैं, नष्ट नहीं।

क्या निराश हुआ जाए: निराशा के कारण, टिकट बाबू और बस-यात्रा की घटनाएँ और आशा का संदेश: frequently asked questions

क्या निबंध सरकार की आलोचना है?

यह भ्रष्टाचार और क़ानून के अंतर की आलोचना करता है, पर मुख्य संदेश आशा का है।

निबंध कहाँ से लिया गया है?

यह गद्य संकलन में है; यही निबंध NCERT की वसंत भाग 3 में भी है।

आशा की ज्योति का क्या अर्थ है?

मूल्यों और मनुष्यता में बचा हुआ विश्वास।