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HindiISC Class 12 · जाग तुझको दूर जाना है – महादेवी वर्मा

जाग तुझको दूर जाना है (महादेवी वर्मा): छंद-वार भाव, प्रतीक और संदेश (ISC कक्षा 12)

Updated 18 October 2026 · Fact-checked

महादेवी वर्मा का यह जागरण-गीत मन को आलस्य छोड़कर लक्ष्य की ओर बढ़ने का संदेश देता है। हिमालय का काँपना, प्रलय, अंधकार और तूफ़ान बाहरी बाधाओं के प्रतीक हैं, जबकि 'मोम के बंधन सजीले' आकर्षक मोह के। संघर्ष में मिली हार भी विजय की पताका बनती है। यह संदेश स्वाधीनता से अधिक हर उस व्यक्ति के लिए है जो किसी लक्ष्य की ओर चल रहा है।

Understand जाग तुझको दूर जाना है: छंद-वार भाव, प्रतीक और कविता का संदेश

पृष्ठभूमि। यह गीत काव्य मंजरी में है और NCERT की अंतरा भाग 1 में भी है; इस पृष्ठ के उद्धरण उसी पाठ से चैप्टर पृष्ठ पर दिए गए हैं। 2024 के प्रश्न 9 (10 अंक) में पूछा गया: कवयित्री अपने मन और मानव-मन को क्या संदेश देना चाहती हैं और पंक्तियाँ नया उत्साह कैसे भरती हैं। परीक्षकों ने कहा कि कुछ उत्तरों ने इसे 'स्वाधीनता' के संदर्भ में लिखा, जो सही नहीं था, और कई यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि पंक्तियाँ उत्साह कैसे भरती हैं।

स्वरूप। प्रयाण या जागरण-गीत। हर छंद के अंत में टेक: 'जाग तुझको दूर जाना!' कवयित्री अपने ही मन से और उसके माध्यम से हर मनुष्य से बात करती हैं।

1. पहला छंद: आलस्य छोड़ो, बाधाओं से मत डरो। जो आँखें सदा सजग रहती थीं, वे आज नींद से भरी हैं और वेश अस्त-व्यस्त है। चाहे अचल हिमालय काँपे, आकाश प्रलय के आँसू बहाए, घोर अंधकार छाए या बिजली के बीच तूफ़ान गरजे, तुझे अपने पदचिह्न छोड़कर जाना है।

2. दूसरा छंद: मोह के कोमल बंधन। बाधाएँ भयानक ही नहीं, आकर्षक भी होती हैं: 'मोम के बंधन सजीले', तितलियों के रंगीले पंख, भौंरे की मधुर गुनगुन, ओस से भीगी पंखुड़ियाँ। ये सुख-सुविधा और सांसारिक मोह के प्रतीक हैं। कवयित्री चेताती हैं कि अपनी ही छाया को अपने लिए कारागार न बना लेना।

3. तीसरा छंद: अमरता का पुत्र मृत्यु क्यों चाहे। वज्र जैसा कठोर हृदय एक छोटे आँसू में गल गया; जीवन का अमृत देकर दो घूँट मदिरा माँग लाया। वे पूछती हैं कि अमरता-सुत होकर मनुष्य निष्क्रियता रूपी मृत्यु को हृदय में क्यों बसाना चाहता है।

4. चौथा छंद: संघर्ष की आग। ठंडी साँसें भरकर पुरानी कहानी मत भूलो; हृदय में आग होगी तभी आँखों में आँसू की चमक सार्थक होगी। संघर्ष में मिली हार भी विजय की पताका बनेगी, जैसे पतंगे की राख दीपक की अमरता का प्रमाण है। अंगारों की शय्या पर भी कोमल कलियाँ बिछानी हैं, यानी कठिनाइयों के बीच भी कोमलता और सृजन बनाए रखना है।

5. प्रतीक-तालिका

प्रतीकअर्थ
हिमगिरि का काँपना, प्रलय, अंधकार, तूफ़ानबाहरी कठिन बाधाएँ
मोम के बंधन, तितली के पंख, भौंरे की गुनगुन, ओस भीगी पंखुड़ियाँसुख-सुविधा और मोह
पतंगे की राखसमर्पित संघर्ष की सार्थकता
अंगारों की शय्या पर कलियाँकठिनाई में भी कोमलता और सृजन

6. संदेश। जागो, बाधाओं और मोह दोनों से ऊपर उठो, संघर्ष में हार से न घबराओ और कठिनाइयों में भी सृजन जारी रखो.

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • चिर सजग आँखें उनींदी आज कैसा व्यस्त बाना!

    कवयित्री (अपने मन से): पहला छंद।

    आलस्य और अस्त-व्यस्तता की स्थिति; जागरण का आह्वान।

  • अचल हिमगिरि के हृदय में आज चाहे कंप हो ले

    कवयित्री: पहला छंद।

    सबसे बड़ी बाधा आने पर भी न डिगने का संदेश।

  • बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले?

    कवयित्री: दूसरा छंद।

    आकर्षक मोह एक कोमल बंधन है।

  • हार भी तेरी बनेगी मानिनी जय की पताका

    कवयित्री: चौथा छंद।

    संघर्ष में हार भी गौरव है।

जाग तुझको दूर जाना है: छंद-वार भाव, प्रतीक और कविता का संदेश: key facts

चार छंद, चार भाव
  • आलस्य छोड़ो
  • मोह से बचो
  • निष्क्रियता रूपी मृत्यु क्यों
  • संघर्ष की आग
हर छंद के अंत में टेक।
बाधाओं के दो रूप
भयानक: प्रलय, अंधकार, तूफ़ान | आकर्षक: मोम के बंधन, तितली, भौंरा, ओस
दोनों से ऊपर उठना है।
कविता का संदेश
  • जागो
  • बाधा और मोह से ऊपर उठो
  • हार से न घबराओ
  • कठिनाई में भी सृजन
स्वाधीनता तक सीमित न रखें।

How to answer जाग तुझको दूर जाना है: छंद-वार भाव, प्रतीक और कविता का संदेश questions

संदेश या उत्साह वाले 10 अंक के प्रश्न के लिए यह क्रम अपनाएँ।

  1. 1भूमिका में कवयित्री और गीत का स्वरूप (जागरण-गीत) लिखें।
  2. 2चारों छंदों का भाव क्रम से लिखें।
  3. 3प्रतीकों का अर्थ बताएँ (हिमगिरि, मोम के बंधन, पतंगे की राख)।
  4. 4दो-तीन पंक्तियाँ उद्धृत करके दिखाएँ कि वे उत्साह कैसे भरती हैं।
  5. 5निष्कर्ष में संदेश को हर व्यक्ति के लक्ष्य से जोड़ें, केवल स्वाधीनता से नहीं।

जाग तुझको दूर जाना है: छंद-वार भाव, प्रतीक और कविता का संदेश in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

आकर्षक बाधा

मान लीजिए एक विद्यार्थी परीक्षा से पहले मोबाइल पर रोचक वीडियो देखता रहता है, जबकि उसका लक्ष्य अच्छे अंक पाना है।

कविता के किस भाव से इसकी तुलना होगी?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. वीडियो आकर्षक हैं पर लक्ष्य से दूर ले जाते हैं।
  2. यही 'मोम के बंधन सजीले' का भाव है।

Answer: वीडियो का मोह 'मोम का बंधन' है: कोमल और आकर्षक, पर लक्ष्य के मार्ग में बाधा।

Memory hook: जो भाए वही बाँध ले, उससे सावधान।

Tricks to remember जाग तुझको दूर जाना है: छंद-वार भाव, प्रतीक और कविता का संदेश

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • जा-मो-अ-सं

    जागरण, मोह, अमरता-सुत, संघर्ष की आग।

    Use it when: चार छंदों का क्रम।

  • भयानक और सजीले

    बाधाएँ दो तरह की: डराने वाली और लुभाने वाली।

    Use it when: प्रतीकों का वर्गीकरण।

जाग तुझको दूर जाना है: छंद-वार भाव, प्रतीक और कविता का संदेश: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: टेक की पंक्ति · 1 mark · MCQBoard level

हर छंद के अंत में दोहराई जाने वाली पंक्ति कौन-सी है?
(क) जाग तुझको दूर जाना!
(ख) उठो और चलो
(ग) जीवन चलने का नाम है
(घ) सत्य की जय

Try it first, then show the solutionSolution
  1. चैप्टर पृष्ठ के अनुसार टेक है 'जाग तुझको दूर जाना!'

Answer: (क) जाग तुझको दूर जाना!

Example 2: मोम के बंधन · 2 marks · Short answerBoard level

'मोम के बंधन सजीले' का आशय स्पष्ट कीजिए। (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मोम कोमल और सुंदर होता है पर बाँध लेता है।
  2. प्रतीक है सुख-सुविधा और सांसारिक मोह का।

Answer: 'मोम के बंधन सजीले' कोमल और आकर्षक मोह के प्रतीक हैं, जैसे सुख-सुविधा, सौंदर्य और आराम। वे देखने में सुंदर पर मनुष्य को बाँधकर उसे लक्ष्य से रोक देते हैं, इसीलिए कवयित्री उनसे सावधान करती हैं।

Example 3: पंक्ति की व्याख्या · 3 marks · Short answerHarder board level

'हार भी तेरी बनेगी मानिनी जय की पताका' की संदर्भ, प्रसंग और विशेष सहित व्याख्या कीजिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. संदर्भ: कवयित्री महादेवी वर्मा और उनका गीत 'जाग तुझको दूर जाना है'।
  2. प्रसंग: चौथा छंद, जहाँ संघर्ष की आग और हार के गौरव की बात है।
  3. व्याख्या: संघर्ष में मिली हार भी विजय की पताका बन जाती है।
  4. विशेष: हार को 'जय की पताका' कहने में रूपक है; भाव संघर्ष से न घबराने का है।

Answer: संदर्भ: ये पंक्तियाँ महादेवी वर्मा के गीत 'जाग तुझको दूर जाना है' से ली गई हैं।

प्रसंग: चौथे छंद में कवयित्री मन को संघर्ष की आग जगाए रखने की प्रेरणा देती हैं और कहती हैं कि हार से घबराना नहीं है।

व्याख्या: कवयित्री कहती हैं कि यदि तू पूरे समर्पण से संघर्ष करेगा तो उसमें मिली हार भी तेरे लिए गौरव बन जाएगी और विजय की पताका के समान होगी। जैसे पतंगे की राख दीपक की अमरता का प्रमाण बनती है, वैसे ही सच्चे संघर्ष की हार भी सार्थक होती है।

विशेष: हार को 'जय की पताका' कहने में रूपक अलंकार है। भाव यह है कि हार से निराश न होकर लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए।

Example 4: बाधाओं के प्रतीक (5 अंक) · 5 marks · Long answerHarder board level

कविता में बाधाओं के लिए आए प्रतीकों का वर्णन कीजिए और बताइए कि वे दो प्रकार की बाधाओं को कैसे दर्शाते हैं। (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. भयानक बाधाएँ: हिमगिरि का काँपना, प्रलय, अंधकार, तूफ़ान (2)।
  2. आकर्षक बाधाएँ: मोम के बंधन, तितली के पंख, भौंरे की गुनगुन, ओस-भीगी पंखुड़ियाँ (2)।
  3. दोनों से ऊपर उठने का संदेश (1)।

Answer: कविता में बाधाओं के दो रूप हैं। भयानक बाधाएँ हैं अचल हिमालय का काँपना, प्रलय, घोर अंधकार और बिजली के बीच गरजता तूफ़ान, जो बाहरी कठिनाइयों के प्रतीक हैं। आकर्षक बाधाएँ हैं मोम के सजीले बंधन, तितलियों के रंगीले पंख, भौंरे की गुनगुन और ओस से भीगी पंखुड़ियाँ, जो सुख-सुविधा और मोह के प्रतीक हैं। कवयित्री कहती हैं कि दोनों के आगे न झुकना है, क्योंकि लक्ष्य दूर है।

Example 5: कविता का संदेश और उत्साह (10 अंक) · 10 marks · Long answerHOTS / competency

कवयित्री अपने मन तथा मानव-मन को क्या संदेश देना चाहती हैं? कविता की पंक्तियाँ हममें नया उत्साह कैसे भरती हैं? (लगभग 200 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. संदेश: जागो, लक्ष्य की ओर बढ़ो (2)।
  2. चारों छंदों का भाव (3)।
  3. पंक्तियों से उत्साह: 'अचल हिमगिरि…', 'हार भी तेरी बनेगी…' (3)।
  4. निष्कर्ष, स्वाधीनता से बाहर का सार्वभौम संदेश (1) और भाषा (1)।

Answer: महादेवी वर्मा का यह जागरण-गीत अपने ही मन से और उसके माध्यम से हर मनुष्य से कहता है, 'जाग तुझको दूर जाना है!' पहले छंद में वे आलस्य छोड़कर बाधाओं के सामने डटने का आह्वान करती हैं: चाहे अचल हिमालय काँपे, प्रलय आए या तूफ़ान गरजे, पदचिह्न छोड़ते हुए चलना है। दूसरे छंद में वे चेताती हैं कि मोम के सजीले बंधन, यानी सुख और मोह, भी मार्ग रोक सकते हैं, और अपनी छाया को कारागार न बनने दें। तीसरे छंद में वे पूछती हैं कि अमरता का पुत्र मनुष्य निष्क्रियता रूपी मृत्यु क्यों चाहे। चौथे में कहती हैं कि हृदय में आग हो तो आँसू की चमक सार्थक है और संघर्ष की हार भी 'जय की पताका' बनेगी, जैसे पतंगे की राख दीपक की अमरता की निशानी है। ये पंक्तियाँ भय को साहस में बदलती हैं, मोह से सावधान करती हैं और हार को गौरव बनाकर नया उत्साह भरती हैं। संदेश केवल स्वाधीनता के संघर्ष तक सीमित नहीं, हर उस व्यक्ति के लिए है जो किसी ऊँचे लक्ष्य की ओर चल रहा है।

Where students lose marks in जाग तुझको दूर जाना है: छंद-वार भाव, प्रतीक और कविता का संदेश

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: संदेश को केवल स्वाधीनता तक सीमित करना

    2024 के परीक्षकों ने इसे सही नहीं माना।

    Wrong working

    कविता स्वतंत्रता संग्राम के लिए है।

    Right working

    कविता जागरण और संघर्ष का सार्वभौम संदेश देती है।

    Do this: व्यापक संदेश लिखें।

    Usually costs: 2-3 अंक।

  • Mistake: उत्साह कैसे भरती हैं, यह न समझाना

    प्रश्न का दूसरा भाग यही है।

    Wrong working

    केवल संदेश लिखना।

    Right working

    पंक्तियाँ उद्धृत करके दिखाना कि वे साहस और आशा कैसे देती हैं।

    Do this: दो पंक्तियाँ उद्धृत करें।

    Usually costs: 3-4 अंक।

  • Mistake: प्रतीकों के अर्थ गड़बड़ाना

    मोम के बंधन मोह के हैं, हिमगिरि बाधा का।

    Wrong working

    मोम के बंधन को प्रलय का प्रतीक बताना।

    Right working

    मोम के बंधन आकर्षक मोह के; प्रलय भयानक बाधा का प्रतीक।

    Do this: प्रतीक-तालिका याद करें।

    Usually costs: 1-2 अंक।

Exam tips

  • बहुत कम परीक्षार्थियों ने 2024 में यह प्रश्न किया; इसे तैयार रखें।
  • पंक्तियाँ उद्धृत करते समय पाठ्यपुस्तक से शब्द मिलाएँ।
  • प्रतीकों की तालिका बनाकर याद करें।
  • निष्कर्ष में संदेश को हर व्यक्ति के लक्ष्य से जोड़ें।

Practice questions on जाग तुझको दूर जाना है: छंद-वार भाव, प्रतीक और कविता का संदेश

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · Very short answerBoard level

    'जाग तुझको दूर जाना है' किस प्रकार का गीत है?

    Hint

    आह्वान।

    Answer

    प्रयाण या जागरण-गीत।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    कवयित्री ने 'अपनी छाया को कारागार' क्यों न बनाने को कहा है? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    मोह।

    Answer

    इसका आशय है कि सुख-सुविधा और मोह में फँसकर मनुष्य स्वयं अपने लिए बंधन न बनाए। छाया अपनी ही है, पर उसमें बँध जाने से लक्ष्य की ओर बढ़ना रुक जाता है।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level

    'पतंगे की राख' का प्रतीकार्थ बताइए। (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    दीपक की अमरता।

    Answer

    पतंगा दीपक पर जलकर राख हो जाता है, पर वही राख दीपक की अमरता का प्रमाण बनती है। यह समर्पित संघर्ष का प्रतीक है, जिसमें हार भी गौरव है।

  4. Q4 · 5 marks · Long answerHarder board level

    तीसरे छंद में 'अमरता-सुत होकर मृत्यु को हृदय में क्यों बसाना चाहता है' से कवयित्री क्या प्रश्न उठाती हैं? (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    निष्क्रियता।

    Answer

    कवयित्री पूछती हैं कि अमरता का पुत्र कहलाने वाला मनुष्य, जिसके हृदय में अनंत संभावनाएँ हैं, निष्क्रियता रूपी मृत्यु को क्यों चुनता है। वज्र जैसा कठोर हृदय एक छोटे आँसू में गल गया और जीवन का अमृत देकर दो घूँट मदिरा, यानी क्षणिक सुख, माँग लाया। प्रश्न मनुष्य को अपनी उच्च क्षमता याद दिलाकर जागने के लिए प्रेरित करता है।

  5. Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    एक छात्र ने लिखा कि यह कविता केवल स्वाधीनता संग्राम के लिए है। इस कथन की समीक्षा कीजिए। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    परीक्षकों की टिप्पणी।

    Answer

    कथन अधूरा है। चैप्टर पृष्ठ के अनुसार गीत स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से रचा गया माना जाता है, पर परीक्षकों ने 2024 में इसे केवल स्वाधीनता से जोड़ने को सही नहीं माना। कविता में आलस्य, बाधाएँ, मोह, निष्क्रियता और संघर्ष की हार जैसे सार्वभौम भाव हैं, जो हर उस व्यक्ति के लिए हैं जो किसी लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इसलिए संदेश को व्यापक रूप में लिखना चाहिए।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.गीत किसने लिखा?Show answer

    महादेवी वर्मा ने।

  2. 2.टेक क्या है?Show answer

    'जाग तुझको दूर जाना!'

  3. 3.मोम के बंधन किसके प्रतीक हैं?Show answer

    सुख-सुविधा और मोह के।

  4. 4.पतंगे की राख क्या दर्शाती है?Show answer

    समर्पित संघर्ष में हार भी गौरव है।

जाग तुझको दूर जाना है: छंद-वार भाव, प्रतीक और कविता का संदेश: frequently asked questions

क्या गीत NCERT में भी है?

हाँ, अंतरा भाग 1 में 'जाग तुझको दूर जाना' शीर्षक से।

यह कविता किस काव्य-धारा की है?

महादेवी वर्मा छायावाद की प्रमुख कवयित्री हैं।

क्या सभी पंक्तियाँ याद करनी हैं?

प्रमुख पंक्तियाँ और उनका भाव याद रखें; शब्दशः पाठ्यपुस्तक से मिलाइए।