भिक्षुक ICSE Class 10: भावार्थ, काव्य-सौंदर्य और प्रश्न
Updated 14 October 2026 · Fact-checked
'भिक्षुक' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता है, जिसमें एक भूखे, दुर्बल भिखारी और उसके दो बच्चों का करुण चित्र है। वे लाठी टेककर भीख माँगते हैं, जूठी पत्तलें चाटते हैं और कुत्ते भी उनसे छीनने को तैयार रहते हैं। कवि समाज की संवेदनहीनता पर दुख प्रकट करता है।
What भिक्षुक is about
भिक्षुक छायावाद के प्रमुख कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की प्रसिद्ध कविता है, जो साहित्य सागर (पद्य भाग) में कक्षा दसवीं के लिए निर्धारित है। यह मुक्त छंद में लिखी गई यथार्थवादी और करुण रस की कविता है। निराला ने एक भिखारी की दयनीय दशा का ऐसा सजीव चित्र खींचा है कि पाठक का हृदय द्रवित हो जाता है, और साथ ही समाज की निर्ममता और आर्थिक विषमता पर प्रश्न उठता है।
खंड ख में पद्य भाग से पद्यांश-आधारित प्रश्न (2, 2, 3, 3 अंक) आते हैं: शब्दार्थ, भावार्थ, भिखारी की दशा, बच्चों का चित्रण, कवि का उद्देश्य और काव्य-सौंदर्य।
Weightage: CISCE पाठ-वार अंक नहीं बताता। खंड ख में साहित्य सागर के पद्य भाग पर हर प्रश्न 10 अंक (2, 2, 3, 3) का होता है।Source: CISCE ICSE हिंदी 2025 बोर्ड प्रश्न-पत्र (परीक्षकों की रिपोर्ट) और 2027 निर्धारित पुस्तकों की सूची
भिक्षुक: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
पहला अंश: भिखारी का आना। कवि कहता है कि एक भिखारी रास्ते पर आ रहा है। उसका हृदय दुख और पछतावे से टूक-टूक हो रहा है; उसे भीख माँगना पड़ रहा है, यह पीड़ा उसे भीतर तक कचोटती है। भूख के कारण वह इतना दुबला हो गया है कि उसका पेट और पीठ मिलकर एक हो गए हैं। वह लाठी के सहारे चल रहा है। मुट्ठी भर अनाज के लिए, अपनी भूख मिटाने के लिए, वह अपनी फटी-पुरानी झोली का मुँह लोगों के आगे फैलाता है।
दूसरा अंश: बच्चों की दशा। उसके साथ दो बच्चे भी हैं, जो सदा हाथ फैलाए रहते हैं। वे बाएँ हाथ से अपना भूखा पेट मलते हुए चलते हैं और दाहिना हाथ लोगों की दया पाने के लिए आगे बढ़ाते हैं। भूख से जब उनके होंठ सूख जाते हैं, तो दाता (भाग्य-विधाता कहे जाने वाले समाज के धनी लोग) से उन्हें कुछ नहीं मिलता; वे आँसुओं के घूँट पीकर रह जाते हैं।
तीसरा अंश: समाज की निर्ममता। कभी वे सड़क पर खड़े होकर लोगों की फेंकी हुई जूठी पत्तलें चाटते हैं, और कुत्ते भी उनसे वह जूठन छीन लेने के लिए अड़े रहते हैं। मनुष्य और पशु एक ही जूठन के लिए संघर्ष कर रहे हैं: यह दृश्य समाज की संवेदनहीनता का सबसे करुण प्रमाण है।
अंतिम अंश: कवि का संकल्प। कवि उन्हें रुकने को कहता है और कहता है कि उसके हृदय में अमृत (करुणा) है, जिससे वह उन्हें सींच देगा; वह उनके दुख अपने हृदय में खींच लेगा, और उन्हें अभिमन्यु जैसे संघर्षशील बनने की प्रेरणा देता है। कविता करुणा से आरंभ होकर सहानुभूति और संघर्ष की प्रेरणा पर समाप्त होती है।
Themes and message
भूख और गरीबी का यथार्थ
कविता भिखारी की शारीरिक और मानसिक दशा का सजीव चित्र है: सूखा शरीर, लाठी, फटी झोली, टूटा हृदय।
From the text: 'पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक'।
समाज की संवेदनहीनता
भिखारी और बच्चे दया के लिए हाथ फैलाते हैं, पर कुछ नहीं पाते; उन्हें जूठी पत्तलें कुत्तों से छीननी पड़ती हैं।
From the text: जूठी पत्तल और कुत्तों वाला प्रसंग।
करुणा और सहानुभूति
कवि केवल दृश्य नहीं दिखाता, स्वयं द्रवित होकर उनके दुख बाँटने का संकल्प करता है।
From the text: अंतिम अंश: हृदय का अमृत और दुख खींच लेना।
आत्मसम्मान की पीड़ा
भिखारी भीख माँगते हुए पछताता है; भीख माँगना उसकी विवशता है, स्वभाव नहीं।
From the text: 'दो टूक कलेजे के करता पछताता'।
The speaker and the people in the poem
भिक्षुक
कविता का केंद्रीय पात्र।
- भूख से दुर्बल
- विवश और पछताता हुआ
- दया का पात्र
लाठी टेककर चलना, फटी झोली फैलाना।
दो बच्चे
भिक्षुक के साथ।
- भूखे
- असहाय
- दया के लिए हाथ फैलाए
बाएँ हाथ से पेट मलना, दाहिना हाथ आगे बढ़ाना।
कवि
दृश्य का साक्षी।
- संवेदनशील
- करुणामय
- सहायता का संकल्प करने वाला
अंतिम अंश।
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| अतिशयोक्ति | पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक | भूख से आई दुर्बलता को अत्यंत प्रभावी ढंग से दिखाती है। |
| मुहावरा | दो टूक कलेजे के करना (हृदय टूटना); घूँट आँसुओं के पीना | भावों को गहराई देते हैं। |
| चित्रात्मकता (बिंब) | बाएँ हाथ से पेट मलते, दाहिना हाथ आगे बढ़ाते बच्चे | दृश्य आँखों के सामने साकार हो जाता है। |
| अनुप्रास | पेट पीठ; दाता-भाग्य विधाता | लय और प्रभाव। |
| मुक्त छंद और करुण रस | पूरी कविता | भावों का स्वाभाविक प्रवाह; पाठक में करुणा जगाती है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक,
कवि: भिखारी के दुबले शरीर का वर्णन।
भूख की चरम दशा का अतिशयोक्तिपूर्ण चित्र।
चल रहा लकुटिया टेक,
कवि: भिखारी की कमज़ोरी।
दुर्बलता और असहायता।
घूँट आँसुओं के पीकर रह जाते।
कवि: बच्चों को कुछ न मिलने पर।
विवश दुख और समाज की उपेक्षा।
भिक्षुक in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
संवेदनशीलता
मान लीजिए ट्रैफ़िक सिग्नल पर एक छोटा बच्चा भूख से आपकी कार की खिड़की पर हाथ फैलाता है और लोग शीशा चढ़ा लेते हैं।
'भिक्षुक' कविता के आधार पर आप इस दृश्य को कैसे देखेंगे और क्या कर सकते हैं?
Try it first, then show the solutionSolution
- यह कविता के बच्चों जैसा दृश्य है।
- समाज की उपेक्षा कवि की शिकायत है।
- उपाय: भोजन देना या ऐसी संस्था से जोड़ना जो उसे पढ़ाई और भोजन दे।
Answer: बच्चे की भूख को अनदेखा करना वही संवेदनहीनता है जिस पर निराला दुखी हैं। भोजन देना या उसे सहायता देने वाली संस्था तक पहुँचाना करुणा को कर्म में बदलना है।
Memory hook: शीशा चढ़ाना आसान है, दिल खोलना ज़रूरी।
भोजन की बर्बादी
कल्पना कीजिए कि किसी विवाह-भोज में आधी प्लेटें भरी की भरी फेंक दी जाती हैं, और बाहर कुछ बच्चे उसी जूठन को उठा रहे हैं।
कविता की किस पंक्ति से यह दृश्य मिलता है, और हमें क्या करना चाहिए?
Try it first, then show the solutionSolution
- जूठी पत्तल चाटने वाला प्रसंग।
- भोजन बर्बाद न करें; बचा भोजन ज़रूरतमंदों तक पहुँचाएँ।
Answer: यह 'चाट रहे जूठी पत्तल' वाला दृश्य है। हमें उतना ही लेना चाहिए जितना खाएँ, और बचा भोजन सम्मान से ज़रूरतमंदों तक पहुँचाना चाहिए।
Memory hook: थाली की जूठन किसी का भोजन है।
आत्मसम्मान
मान लीजिए कोई बुज़ुर्ग फुटपाथ पर पुरानी किताबें बेचते हैं और भीख लेने से मना कर देते हैं।
उनकी तुलना कविता के भिक्षुक से कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- भिक्षुक भीख माँगते हुए पछताता है।
- दोनों में आत्मसम्मान है; भिक्षुक विवश है।
Answer: भिक्षुक भी आत्मसम्मान रखता है, इसीलिए पछताता है; उसे विवशता ने भीख माँगने पर मजबूर किया है। समाज का कर्तव्य है कि ऐसे लोगों को सम्मानजनक काम मिले।
Memory hook: पछतावा बताता है कि भीख विवशता है, आदत नहीं।
Topics in this chapter
How the board asks भिक्षुक
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| शब्दार्थ और भावार्थ | किसी पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए; शब्दों के अर्थ लिखिए (लकुटिया, झोली, दाता)। | पहले शब्दार्थ, फिर भाव अपने शब्दों में। |
| पात्रों की दशा | भिखारी/बच्चों की दशा का वर्णन कीजिए। | कविता के बिंब क्रम से: शरीर, चाल, झोली, बच्चे, पत्तल। |
| काव्य-सौंदर्य और उद्देश्य | अलंकार/रस बताइए; कवि का उद्देश्य क्या है? | अलंकार का नाम + उदाहरण + प्रभाव; उद्देश्य में करुणा और सामाजिक संदेश। |
Tricks to remember भिक्षुक
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
भिखारी के चार बिंब
टूटा कलेजा, एक पेट-पीठ, लाठी, फटी झोली।
Use it when: दशा-वर्णन वाले प्रश्न।
बच्चों के हाथ: बायाँ-पेट, दायाँ-दया
बायाँ पेट मलता, दायाँ दया माँगता।
Use it when: बच्चों का चित्रण।
भिक्षुक: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: भिखारी का आना
वह आता—
दो टूक कलेजे के करता पछताता
पथ पर आता।
पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक,
चल रहा लकुटिया टेक,
मुट्ठी भर दाने को — भूख मिटाने को
मुँह फटी पुरानी झोली का फैलाता —
(1) · 2 marks · Short answer
(i) 'वह' कौन है? 'दो टूक कलेजे के करता पछताता' का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
(2) · 2 marks · Short answer
(ii) 'पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक' में कौन-सा भाव और कौन-सा अलंकार है?
(3) · 3 marks · Short answer
(iii) भिखारी 'मुट्ठी भर दाने' के लिए क्या करता है? उसकी दशा का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
(4) · 3 marks · Long answer
(iv) कविता में भिखारी के बच्चों की दशा का वर्णन कीजिए और बताइए कि कवि इस कविता से समाज को क्या संदेश देना चाहता है।
Show the answersAnswers
- 'वह' एक भूखा भिखारी (भिक्षुक) है। वह भीख माँगने की विवशता पर पछताता है और उसका हृदय दुख से टुकड़े-टुकड़े हो रहा है।
- भूख के कारण भिखारी इतना दुबला हो गया है कि पेट और पीठ एक हो गए लगते हैं; इसमें अतिशयोक्ति अलंकार है (साथ ही 'पेट पीठ' में अनुप्रास)।
- वह अपनी फटी-पुरानी झोली का मुँह लोगों के आगे फैलाता है। वह भूख से अत्यंत दुर्बल है, लाठी के सहारे चलता है, और भीख माँगने की मजबूरी से उसका मन टूटा हुआ और पछतावे से भरा है।
- दो बच्चे बाएँ हाथ से भूखा पेट मलते और दाहिना हाथ दया पाने को आगे बढ़ाते हैं; कुछ न मिलने पर आँसू पीकर रह जाते हैं, और कभी जूठी पत्तलें चाटते हैं जिन्हें कुत्ते भी छीनना चाहते हैं। संदेश: समाज को गरीबों के प्रति संवेदनशील होकर उनकी सहायता करनी चाहिए; ऐसी विषमता मानवता पर कलंक है।
भिक्षुक: board-level solved questions
Ordered from board level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: बच्चों का चित्रण · 2 marks · Short answerBoard level
भिखारी के साथ चल रहे बच्चों का चित्रण कीजिए। (2 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- बायाँ हाथ: पेट मलना।
- दाहिना हाथ: दया के लिए आगे।
Answer: दोनों बच्चे सदा हाथ फैलाए रहते हैं; बाएँ हाथ से भूखा पेट मलते हुए चलते हैं और दाहिना हाथ लोगों की दया पाने के लिए आगे बढ़ाते हैं।
Example 2: जूठी पत्तल और कुत्ते · 3 marks · Short answerHOTS / competency
'चाट रहे जूठी पत्तल…' वाले दृश्य से समाज की किस स्थिति का पता चलता है? (3 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- मनुष्य और पशु एक ही जूठन के लिए संघर्ष।
- समाज ने उन्हें कुछ नहीं दिया।
- निष्कर्ष: संवेदनहीनता और आर्थिक विषमता।
Answer: बच्चे सड़क पर फेंकी जूठी पत्तलें चाटते हैं और कुत्ते भी उनसे वह छीनने को अड़े हैं। मनुष्य को पशुओं के बराबर जूठन के लिए लड़ना पड़ रहा है: यह समाज की घोर संवेदनहीनता और अमीर-गरीब की गहरी खाई का प्रमाण है।
Example 3: 'दाता-भाग्य विधाता' · 2 marks · Short answerHarder board level
'दाता-भाग्य विधाता से क्या पाते?' का भाव स्पष्ट कीजिए। (2 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- दाता = दान देने वाले धनी लोग, जो स्वयं को भाग्य-विधाता समझते हैं।
- उनसे कुछ नहीं मिलता।
Answer: जो धनी लोग स्वयं को दाता और गरीबों का भाग्य-विधाता समझते हैं, उनसे इन भूखे बच्चों को कुछ नहीं मिलता; कवि उनकी कंजूसी और निष्ठुरता पर व्यंग्य करता है।
Example 4: कवि का संकल्प · 3 marks · Short answerHarder board level
कविता के अंत में कवि क्या संकल्प करता है? (3 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- भिखारियों को रुकने को कहता है।
- हृदय के अमृत (करुणा) से सींचने का संकल्प।
- उनके दुख अपने हृदय में खींच लेने और अभिमन्यु जैसा संघर्षशील बनने की प्रेरणा।
Answer: कवि उन्हें रुकने को कहता है और कहता है कि उसके हृदय में करुणा का अमृत है जिससे वह उन्हें सींच देगा; वह उनके दुख अपने हृदय में खींच लेगा और उन्हें अभिमन्यु की तरह संघर्ष करने की प्रेरणा देता है।
Example 5: रस और छंद · 2 marks · Short answerBoard level
'भिक्षुक' कविता में कौन-सा रस है और यह किस छंद में है? (2 अंक)
Try it first, then show the solutionSolution
- भाव: दया, दुख = करुण रस।
- छंद: मुक्त छंद (निराला इसके प्रवर्तक माने जाते हैं)।
Answer: करुण रस; मुक्त छंद।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
3 अंक: भिखारी की दशा का वर्णन। (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| शारीरिक दुर्बलता (पेट-पीठ एक, लाठी) | 1 |
| भीख की विवशता (फटी झोली फैलाना) | 1 |
| मानसिक पीड़ा (टूटा कलेजा, पछतावा) | 1 |
Where students lose marks in भिक्षुक
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: पंक्तियों का केवल शाब्दिक अर्थ
भाव और व्यंग्य छूट जाता है।
Do this: अर्थ के बाद भाव लिखें: समाज की निर्ममता, करुणा।
Usually costs: भावार्थ के अंक।
Mistake: अलंकार का नाम बिना उदाहरण के
उदाहरण और प्रभाव के बिना उत्तर अधूरा।
Do this: नाम + पंक्ति + प्रभाव।
Usually costs: काव्य-सौंदर्य के अंक।
Mistake: उद्देश्य में केवल 'गरीबी' लिखना
सामाजिक संदेश और कवि की करुणा छूट जाती है।
Do this: गरीबी का यथार्थ + समाज की संवेदनहीनता + सहायता का संदेश।
Usually costs: 3 अंक वाले भाग में।
Mistake: कवि-परिचय में गलत तथ्य
2025 में कबीर पर प्रश्न में परीक्षकों ने कवि की भाषा गलत बताने (जैसे खड़ी बोली या ब्रजभाषा लिखना) जैसी गलतियाँ बताईं; कवि-परिचय के तथ्य ठीक-ठीक याद रखें।
Do this: निराला: छायावाद, मुक्त छंद।
Usually costs: परिचय के अंक।
Practice questions on भिक्षुक
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 2 marks · Short answerBoard level
'लकुटिया' और 'झोली' का अर्थ लिखिए।
Hint
सहारा और थैला।
Answer
लकुटिया: छोटी लाठी; झोली: कपड़े का थैला जिसमें भीख ली जाती है।
Q2 · 2 marks · Short answerHarder board level
भिखारी 'पछताता' क्यों है?
Hint
आत्मसम्मान।
Answer
उसे भीख माँगना पड़ रहा है, जो उसके आत्मसम्मान को चोट पहुँचाता है; यह उसकी विवशता है, इसलिए उसका हृदय पछतावे से भरा है।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level
कविता में प्रयुक्त दो मुहावरे लिखकर उनके अर्थ बताइए।
Hint
कलेजा और आँसू।
Answer
'दो टूक कलेजे के करना': हृदय टूट जाना, बहुत दुखी होना; 'आँसुओं के घूँट पीना': दुख को चुपचाप सह लेना।
Q4 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
'भिक्षुक' को यथार्थवादी कविता क्यों कहा जाता है?
Hint
कल्पना नहीं, सच्चाई।
Answer
इसमें कल्पना या सौंदर्य नहीं, समाज की कठोर सच्चाई है: भूख, गरीबी, उपेक्षा और जूठन के लिए संघर्ष का सजीव चित्र; इसलिए यह यथार्थवादी है।
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
आज के समाज में भिक्षावृत्ति रोकने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?
Hint
शिक्षा, रोज़गार, सहायता।
Answer
गरीबों के लिए शिक्षा और रोज़गार, बच्चों के लिए विद्यालय और पोषण योजनाएँ, आश्रय-गृह, और नागरिकों द्वारा भीख के बजाय संस्थाओं के माध्यम से स्थायी सहायता।
Q6 · 2 marks · Short answerBoard level
निराला किस काव्य-धारा के कवि माने जाते हैं?
Hint
प्रसाद, पंत, महादेवी के साथ।
Answer
छायावाद के प्रमुख कवि; उन्होंने हिंदी में मुक्त छंद को लोकप्रिय बनाया।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'भिक्षुक' के कवि कौन हैं?Show answer
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'।
2.भिखारी किसके सहारे चलता है?Show answer
लकुटिया (लाठी) के सहारे।
3.भिखारी के साथ कितने बच्चे हैं?Show answer
दो।
4.जूठी पत्तल छीनने को कौन अड़े हैं?Show answer
कुत्ते।
5.कविता में कौन-सा रस है?Show answer
करुण रस।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप भिखारी की दशा के चार बिंब बता सकते हैं?
- क्या आप बच्चों के चित्रण को अपने शब्दों में लिख सकते हैं?
- क्या आप 'पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक' का अलंकार और भाव बता सकते हैं?
- क्या आप कविता का सामाजिक संदेश लिख सकते हैं?
- क्या आप कवि का संकल्प समझा सकते हैं?
भिक्षुक: frequently asked questions
'भिक्षुक' कविता का मूल भाव क्या है?
एक भूखे भिखारी और उसके बच्चों की दयनीय दशा का चित्रण कर समाज की संवेदनहीनता पर दुख प्रकट करना और करुणा जगाना।
'पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक' का अर्थ क्या है?
भूख से भिखारी इतना दुबला हो गया है कि उसका पेट पीठ से चिपक गया लगता है; यह अतिशयोक्ति है।
'भिक्षुक' किस छंद में लिखी गई है?
मुक्त छंद में।
Based on: CISCE ICSE 2027 Second Languages syllabus (Hindi); CISCE ICSE 2027 Appendix I: List of Prescribed Books (Hindi); CISCE circular CISCE/CIRCULAR/2026-27/33: Bifurcation of the Prescribed Texts for Selected Indian Languages; CISCE Analysis of Pupil Performance 2025: Hindi (examiners' comments)