कबीर के दोहे: Class 8 हिंदी मल्हार पाठ 5, अर्थ और प्रश्न-उत्तर
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
मल्हार (कक्षा 8) के पाँचवें पाठ में कबीर के आठ दोहे हैं। इनमें सत्य को सबसे बड़ा तप, गुरु को ईश्वर से पहले वंदनीय, मीठी वाणी को सबको शीतल करने वाली, आलोचक को पास रखने योग्य और संतुलन को ज़रूरी बताया गया है। साथ ही सज्जन को सूप जैसा सार ग्रहण करने वाला होने की सीख है।
What कबीर के दोहे – कबीर is about
कबीर के दोहे NCERT की हिंदी पुस्तक मल्हार (कक्षा 8) का पाँचवाँ पाठ है। पाठ के दोहे 'कबीर वचनावली' (संपादक: अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध') से लिए गए हैं।
कवि-परिचय के अनुसार कबीर ऐसे संत थे जो करघे पर कपड़ा और मन में कविता बुनते-बुनते प्रसिद्ध हो गए; उनकी कविताएँ आज भी भजनों की तरह सुनी जाती हैं। माना जाता है कि उनका जन्म चौदहवीं शताब्दी में काशी में हुआ। उनकी रचनाएँ मुख्य रूप से कबीर ग्रंथावली में संगृहीत हैं।
दोहा दो पंक्तियों का छंद है; हर पंक्ति के दो भाग (चरण) होते हैं। कबीर की भाषा सधुक्कड़ी (मिली-जुली बोलचाल की भाषा) है, इसलिए 'साँच', 'हिरदे', 'नियरे', 'सुभाय' जैसे शब्द मिलते हैं।
कक्षा 8 की परीक्षा विद्यालय लेता है और CBSE इसका प्रश्न-पत्र ढाँचा नहीं देता, इसलिए यहाँ प्रश्न कक्षा 9-10 जैसे रखे गए हैं: काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न।
Weightage: कक्षा 8 का मूल्यांकन विद्यालय स्वयं करता है; CBSE कक्षा 8 के लिए कोई पाठ्यक्रम या प्रश्न-पत्र का ढाँचा जारी नहीं करता, और विद्यालय NCERT की पुस्तक मल्हार पढ़ाते हैं। इसलिए यहाँ के प्रश्न कक्षा 9-10 हिंदी के प्रश्न-प्रकारों (पठित अंश पर बहुविकल्पी प्रश्न, 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न) के ढाँचे पर बने हैं।Source: CBSE पाठ्यक्रम दस्तावेज़ 2026-27 (कक्षा 9-12) और NCERT मल्हार, कक्षा 8 (Reprint 2026-27)
कबीर के दोहे – कबीर: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
1. सत्य का महत्त्व। 'साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।' सच्चाई के बराबर कोई तपस्या नहीं और झूठ के बराबर कोई पाप नहीं। जिसके हृदय में सच है, उसके हृदय में स्वयं गुरु (ईश्वर) बसते हैं।
2. बड़प्पन का अर्थ। केवल बड़ा (ऊँचा, धनी या शक्तिशाली) हो जाना काफ़ी नहीं। खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा होता है, पर राहगीर को छाया नहीं देता और उसके फल भी बहुत दूर (ऊँचाई पर) लगते हैं। बड़प्पन वही है जो दूसरों के काम आए।
3. गुरु की महिमा। गुरु और गोविंद (ईश्वर) दोनों सामने खड़े हैं, पहले किसके पैर छुऊँ? कबीर गुरु पर बलिहारी जाते हैं, क्योंकि गुरु ने ही ईश्वर का ज्ञान कराया।
4. संतुलन। न बहुत बोलना अच्छा, न बहुत चुप रहना; न बहुत वर्षा अच्छी, न बहुत धूप। हर चीज़ की अति बुरी है।
5. मधुर वाणी। ऐसी वाणी बोलें जिसमें अहंकार न हो; वह दूसरों को भी शीतल (शांत, सुखी) करती है और स्वयं को भी।
6. आलोचक को पास रखें। निंदक (कमियाँ बताने वाले) को अपने पास, आँगन में कुटिया बनाकर रखें। वह बिना पानी और साबुन के हमारा स्वभाव निर्मल कर देता है, क्योंकि उसकी बातों से हम अपनी गलतियाँ सुधारते हैं।
7. सूप जैसा सज्जन। साधु (सज्जन) का स्वभाव सूप जैसा होना चाहिए, जो अनाज का सार (दाना) रख लेता है और थोथा (भूसा, कचरा) उड़ा देता है। अर्थात अच्छी बातें ग्रहण करें, बेकार बातें छोड़ दें।
8. संगति का फल। मन पक्षी की तरह है, जहाँ अच्छा लगे वहाँ उड़ जाता है। जो जैसी संगति करता है, वैसा ही फल पाता है।
केंद्रीय भाव: सत्य, विनम्र और उपयोगी बड़प्पन, गुरु का सम्मान, संतुलन, मीठी वाणी, आलोचना से सीखना, विवेक और अच्छी संगति, यही अच्छे मनुष्य के गुण हैं।
Themes and message
सत्य ही सबसे बड़ा तप
सच बोलना और सच्चा रहना किसी कठिन साधना से कम नहीं; झूठ सबसे बड़ा पाप है।
From the text: 'साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।'
उपयोगी बड़प्पन
पद, आयु या धन से नहीं, दूसरों की भलाई करने से बड़ा बनता है; खजूर का पेड़ ऊँचा होकर भी किसी के काम नहीं आता।
From the text: 'बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।'
गुरु की महिमा
गुरु ने ही ईश्वर का ज्ञान कराया, इसलिए वह ईश्वर से भी पहले वंदनीय है।
From the text: 'बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥'
संतुलन और मधुर वाणी
हर चीज़ में संतुलन चाहिए; अहंकार-रहित मीठी वाणी बोलने वाले और सुनने वाले, दोनों को शांति देती है।
From the text: 'औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय॥'
आत्म-सुधार, विवेक और संगति
आलोचक हमें सुधारता है; सूप की तरह अच्छी बात चुननी चाहिए; जैसी संगति, वैसा फल।
From the text: 'जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय॥'
The speaker and the people in the poem
कबीर (वक्ता)
दोहों के कवि, जो सरल उदाहरणों से जीवन की सीख देते हैं।
- सत्यवादी और स्पष्टवादी
- गुरु-भक्त
- लोक-अनुभव से उदाहरण देने वाले (खजूर, सूप, पंछी)
- आत्म-सुधार में विश्वास रखने वाले
'निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।'
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| दृष्टांत/उपमा | 'बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।', 'साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।' | रोज़ की चीज़ों (खजूर, सूप) से गहरी बात आसानी से समझ आती है। |
| रूपक | 'कबिरा मन पंछी भया' (मन पर पंछी का आरोप) | मन की चंचलता का सुंदर चित्र। |
| अनुप्रास | 'साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय', 'सार सार' | 'स' की आवृत्ति से ध्वनि-माधुर्य। |
| पुनरावृत्ति | 'अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप' | 'अति' की चार बार आवृत्ति से संतुलन के संदेश पर ज़ोर। |
| दोहा छंद और सधुक्कड़ी भाषा | दो पंक्तियाँ, तुकांत अंत (पाप/आप, खजूर/दूर); 'साँच', 'हिरदे', 'नियरे' | छोटे, गेय और याद रखने में आसान; जन-जन की भाषा। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।
कबीर: पहला दोहा।
सत्य सबसे बड़ा तप, झूठ सबसे बड़ा पाप।
पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर॥
कबीर: दूसरा दोहा (खजूर का उदाहरण)।
जो बड़प्पन किसी के काम न आए, वह व्यर्थ है।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय॥
कबीर: निंदक वाला दोहा।
आलोचना हमारे स्वभाव को साफ़ करती है।
सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय॥
कबीर: सूप वाला दोहा।
विवेक: अच्छी बात ग्रहण करना, बेकार छोड़ना।
कबीर के दोहे – कबीर in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
सच बोलना
मान लीजिए खेलते समय आपसे पड़ोसी की खिड़की का शीशा टूट जाता है और किसी ने देखा नहीं।
'साँच बराबर तप नहीं' के आधार पर आप क्या करेंगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- सच बोलना कठिन है, इसलिए उसे 'तप' कहा।
- पड़ोसी को बताना, माफ़ी माँगना, नुकसान भरने की बात।
Answer: पड़ोसी को सच बताकर माफ़ी माँगूँगा और घरवालों से बात करके शीशा ठीक करवाऊँगा; सच बोलने का यही 'तप' मन को हल्का और भरोसा मज़बूत करता है।
Memory hook: सच कठिन, पर सबसे बड़ा तप।
उपयोगी बड़प्पन
कल्पना कीजिए कि आप कक्षा के मॉनिटर बने हैं।
'खजूर' जैसा नहीं, छायादार पेड़ जैसा मॉनिटर कैसे बनेंगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- पद का घमंड नहीं।
- कमज़ोर साथियों की मदद, सबकी बात सुनना।
Answer: पद का घमंड छोड़कर साथियों की मदद करूँगा, छूटा काम समझाऊँगा और सबकी बात शिक्षक तक पहुँचाऊँगा; तभी पद 'छायादार' बनेगा।
Memory hook: ऊँचा नहीं, छायादार बनो।
संगति
यदि नए स्कूल में आपको दो समूह मिलें, एक जो पढ़ाई और खेल में आगे है, दूसरा जो दूसरों का मज़ाक उड़ाता है, तो?
'जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय' से निर्णय लीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- संगति आदतें बनाती है।
- अच्छी संगति चुनें; दूसरे समूह से भी विनम्र रहें।
Answer: पढ़ाई और खेल वाले समूह की संगति चुनूँगा, क्योंकि जैसी संगति वैसी आदतें बनती हैं; दूसरे समूह से भी विनम्र रहूँगा, पर उनकी बुरी आदत नहीं अपनाऊँगा।
Memory hook: जैसा संग, वैसा रंग।
Topics in this chapter
How the school exam asks कबीर के दोहे – कबीर
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित दोहों पर बहुविकल्पी प्रश्न (1 अंक प्रत्येक) | दो-तीन दोहे देकर: किसी दोहे का संदेश, शब्दार्थ (हिरदे, पंथी, नियरे, थोथा), अलंकार, कथन-कारण। | पहले पुराने शब्द का आज का अर्थ सोचें, फिर दोहे का संदेश। |
| दोहे का भाव (2 अंक, 25-30 शब्द) | 'निंदक नियरे राखिए...' या 'बड़ा हुआ तो क्या हुआ...' का भाव। | सरल अर्थ एक वाक्य, जीवन की सीख एक वाक्य। |
| जीवन से जोड़ने वाले प्रश्न | किस दोहे की सीख आज सबसे ज़रूरी है; किसी स्थिति में कौन-सा दोहा याद आएगा। | दोहा उद्धृत करें + अपनी स्थिति का उदाहरण। |
Tricks to remember कबीर के दोहे – कबीर
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
आठ दोहे, आठ शब्द: 'सा-ख-गु-अ-बा-नि-सू-सं'
साँच → खजूर → गुरु → अति → बानी → निंदक → सूप → संगति।
Use it when: दोहों का क्रम और संदेश याद रखने के लिए।
कठिन शब्द-जोड़ियाँ
साँच = सच, हिरदे = हृदय, पंथी = राहगीर, नियरे = पास, सुभाय = स्वभाव, गहि = पकड़ना, थोथा = भूसा, भावै = अच्छा लगे।
Use it when: शब्दार्थ वाले MCQ।
कवि-परिचय: 'करघा-काशी-ग्रंथावली'
करघे पर कपड़ा बुनने वाले संत; चौदहवीं शताब्दी, काशी; रचनाएँ कबीर ग्रंथावली में; पाठ के दोहे कबीर वचनावली ('हरिऔध') से।
Use it when: कवि-परिचय।
कबीर के दोहे – कबीर: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: काव्यांश 1: सत्य, बड़प्पन, गुरु
साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।
जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप॥
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर॥
(1) · 1 mark · MCQ
'हिरदे' शब्द का अर्थ है:
(क) हीरा
(ख) हृदय
(ग) हिरण
(घ) हरियाली(2) · 1 mark · MCQ
कबीर के अनुसार गुरु (ईश्वर) स्वयं कहाँ बसते हैं?
(क) मंदिर में
(ख) जिसके हृदय में सच है
(ग) धनवान के घर में
(घ) तीर्थ में(3) · 1 mark · MCQ
'पंथी' का अर्थ है:
(क) पंडित
(ख) राहगीर
(ग) पक्षी
(घ) पंखा(4) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): कबीर ने ऊँचे खजूर के पेड़ को बड़प्पन का बुरा उदाहरण माना है।
कारण (R): खजूर न राहगीर को छाया देता है, न उसके फल आसानी से मिलते हैं।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।(5) · 1 mark · MCQ
'जैसे पेड़ खजूर' में कौन-सा अलंकार है?
(क) उपमा
(ख) यमक
(ग) श्लेष
(घ) अनुप्रास
Show the answersAnswers
- (ख) हृदय।
- (ख) जिसके हृदय में सच है।
- (ख) राहगीर।
- (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- (क) उपमा; 'जैसे' वाचक शब्द से तुलना।
Extract 2: काव्यांश 2: निंदक, सूप, संगति
निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय॥
साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय॥
(1) · 1 mark · MCQ
'नियरे' शब्द का अर्थ है:
(क) दूर
(ख) निकट, पास
(ग) नया
(घ) नीचे(2) · 1 mark · MCQ
'आँगन कुटी छवाय' का आशय है:
(क) निंदक को घर से बाहर निकाल देना
(ख) अपने आँगन में ही उसके लिए कुटिया बनवा देना, यानी उसे सदा पास रखना
(ग) आँगन में बगीचा लगाना
(घ) कुटिया की छत ठीक करवाना(3) · 1 mark · MCQ
'थोथा' का अर्थ है:
(क) अनाज का दाना
(ख) भूसा, सारहीन चीज़
(ग) थाली
(घ) थैला(4) · 1 mark · MCQ
'जैसा सूप सुभाय' में 'सुभाय' शब्द का अर्थ है:
(क) सुंदर
(ख) स्वभाव
(ग) सुबह
(घ) सुहाना(5) · 1 mark · MCQ
इन दोनों दोहों में मुख्य रूप से किस गुण की बात है?
(क) धन कमाना
(ख) आत्म-सुधार और विवेक
(ग) खेती
(घ) घर बनाना
Show the answersAnswers
- (ख) निकट, पास।
- (ख) अपने आँगन में ही उसके लिए कुटिया बनवा देना, यानी उसे सदा पास रखना।
- (ख) भूसा, सारहीन चीज़।
- (ख) स्वभाव।
- (ख) आत्म-सुधार और विवेक।
कबीर के दोहे – कबीर: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: खजूर और सूप: दो उदाहरण · 2 marks · Short answerExam level
खजूर और सूप, दोनों रोज़ की चीज़ों के उदाहरण हैं। कबीर ने एक को बुरे और दूसरे को अच्छे उदाहरण के रूप में क्यों रखा है? (25-30 शब्द)
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- खजूर: ऊँचा, पर न छाया, न आसानी से फल = बेकार बड़प्पन।
- सूप: सार रखता, थोथा उड़ाता = विवेकी सज्जन।
Answer: खजूर ऊँचा होकर भी न छाया देता है, न आसानी से फल; इसलिए वह बेकार बड़प्पन का उदाहरण है। सूप सार रखकर थोथा उड़ाता है; इसलिए वह विवेकी सज्जन का उदाहरण है।
Example 2: गुरु और गोविंद की दुविधा · 2 marks · Short answerExam level
'गुरु गोविंद दोऊ खड़े' दोहे में कबीर के सामने कौन-सी दुविधा है और वे उसे कैसे सुलझाते हैं? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- दुविधा: दोनों सामने, पहले किसके पैर छुएँ।
- समाधान: गुरु पर बलिहारी, क्योंकि गुरु ने गोविंद का ज्ञान कराया।
Answer: दुविधा यह है कि गुरु और ईश्वर दोनों सामने हों तो पहले किसके पैर छुएँ। कबीर गुरु पर बलिहारी जाते हैं, क्योंकि गुरु ने ही ईश्वर तक पहुँचने का रास्ता बताया।
Example 3: अति का भला न · 2 marks · Short answerHarder exam level
'अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप' दोहे का भाव आज के जीवन से एक उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द)
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- अति = सीमा से अधिक; हर चीज़ में संतुलन।
- उदाहरण: बहुत अधिक मोबाइल या बिल्कुल न सोना/बहुत सोना।
Answer: हर चीज़ की अति बुरी है, संतुलन ज़रूरी है। जैसे पढ़ाई ज़रूरी है, पर बिना खेल-आराम के लगातार पढ़ना भी सेहत बिगाड़ता है; और मोबाइल की अति भी हानिकारक है।
Example 4: बिना पानी-साबुन की सफ़ाई · 2 marks · Short answerHarder exam level
निंदक को 'बिन पानी साबुन बिना' स्वभाव निर्मल करने वाला कहने में कौन-सी तुलना छिपी है? समझाइए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पानी-साबुन कपड़े का मैल धोते हैं।
- निंदक की बातें स्वभाव का मैल (कमियाँ) दिखाकर साफ़ करती हैं।
Answer: जैसे पानी-साबुन कपड़े का मैल धोते हैं, वैसे ही निंदक की बातें हमारी कमियाँ दिखाकर स्वभाव का मैल साफ़ करती हैं। यहाँ स्वभाव की तुलना कपड़े से और निंदा की साबुन से है।
Example 5: 'सीतल' का अर्थ · 2 marks · Short answerExam level
'औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय' में 'सीतल' शरीर की ठंडक के लिए नहीं आया है। इसका अर्थ बताइए और लिखिए कि कठोर वाणी का प्रभाव कैसा होगा। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- सीतल = मन का शांत और प्रसन्न होना।
- उलटा: कठोर वाणी दोनों के मन में अशांति।
Answer: यहाँ 'सीतल' का अर्थ है मन का शांत और प्रसन्न होना। इसके उलट कठोर वाणी सुनने वाले को दुखी और क्रोधित करती है और बोलने वाले के मन में भी अशांति भर देती है।
Example 6: मन पंछी और संगति · 2 marks · Short answerHOTS / competency
आज सोशल मीडिया पर हम जिनको 'फ़ॉलो' करते हैं, वे भी हमारी संगति हैं। 'कबिरा मन पंछी भया' दोहे के आधार पर इस पर अपने विचार लिखिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- मन पंछी, जहाँ मन भाए वहाँ उड़ता है।
- जैसी संगति (ऑनलाइन भी), वैसा फल; सोच-समझकर चुनें।
Answer: मन पंछी की तरह जहाँ भाए वहाँ उड़ जाता है। ऑनलाइन जिनको हम देखते-सुनते हैं, उनकी बातें हमारी सोच बनाती हैं; इसलिए अच्छी, सीख देने वाली संगति ही चुननी चाहिए।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
'निंदक नियरे राखिए' का भाव (25-30 शब्द, 2 अंक) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| सरल अर्थ: आलोचक को पास रखो | 1 |
| कारण/सीख: कमियाँ बताकर स्वभाव निर्मल करता है | 1 |
शिक्षक की आलोचना पर कबीर का दोहा (40-50 शब्द, 3 अंक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| सही दोहे का चयन | 1 |
| दोहे का अर्थ | 1 |
| स्थिति पर लागू करना | 1 |
Where students lose marks in कबीर के दोहे – कबीर
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: 'थोथा देइ उड़ाय' का अर्थ 'सब कुछ उड़ा देना' लिखना
सूप केवल सारहीन भूसा उड़ाता है और सार (दाना) रख लेता है।
Do this: 'सार ग्रहण, थोथा त्याग' लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: निंदक को 'दुश्मन' मानकर दूर रखने की बात लिखना
कबीर निंदक को पास रखने की सलाह देते हैं, क्योंकि वह सुधारता है।
Do this: 'नियरे = पास' याद रखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: खजूर वाले दोहे को केवल पेड़ों के बारे में समझना
खजूर दृष्टांत है; असली बात ऐसे बड़े लोगों की है जो किसी के काम नहीं आते।
Do this: दृष्टांत + मनुष्य पर लागू अर्थ, दोनों लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: दोहे उद्धृत करते समय वर्तनी बदल देना ('हृदय' लिख देना)
उद्धरण में मूल शब्द ('हिरदे') ही लिखें; अर्थ अलग से दें।
Do this: पहले मूल पंक्ति, फिर कोष्ठक में अर्थ।
Usually costs: 1 अंक
Practice questions on कबीर के दोहे – कबीर
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
पाठ के दोहे किस पुस्तक से लिए गए हैं?
(क) कबीर ग्रंथावली
(ख) कबीर वचनावली
(ग) बीजक
(घ) रामचरितमानसHint
संपादक 'हरिऔध'।
Answer
(ख) कबीर वचनावली
Q2 · 1 mark · Very short answerExam level
माना जाता है कि कबीर का जन्म कब और कहाँ हुआ?
Hint
शताब्दी और नगर।
Answer
चौदहवीं शताब्दी में, काशी में।
Q3 · 1 mark · Very short answerHarder exam level
'मन का आपा खोय' में 'आपा' का अर्थ लिखिए।
Hint
मैं-पन।
Answer
अहंकार, घमंड।
Q4 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय' दोहे के अनुसार पढ़ाई करते समय एक विद्यार्थी 'सूप' की तरह कैसे काम कर सकता है? (25-30 शब्द)
Hint
मुख्य बिंदु रखें, फालतू छोड़ें।
Answer
पढ़ते समय विद्यार्थी मुख्य बिंदु और ज़रूरी तथ्य चुनकर नोट्स बनाए और फालतू बातें छोड़ दे; इंटरनेट पर भी सही जानकारी रखे और अफ़वाहें उड़ा दे।
Q5 · 1 mark · MCQHarder exam level
कथन (A): कबीर ने मन को पंछी कहा है।
कारण (R): पंछी जहाँ उसे अच्छा लगे वहाँ उड़ जाता है; मन भी जहाँ भाए वहाँ चला जाता है।
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
(ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
(ग) A सही, R गलत
(घ) A गलत, R सहीHint
'कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।'
Answer
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपके शिक्षक आपकी कॉपी में कई गलतियाँ लाल पेन से दिखाते हैं और आपको बुरा लगता है। कबीर का कौन-सा दोहा आपकी सोच बदल सकता है और कैसे? (40-50 शब्द)
Hint
निंदक नियरे राखिए।
Answer
'निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय' वाला दोहा। कमियाँ बताने वाला हमें बिना पानी-साबुन के निर्मल करता है। शिक्षक की लाल निशानियाँ मेरी गलतियाँ दिखाती हैं; उन्हें सुधारकर मैं बेहतर बनूँगा, इसलिए बुरा मानने के बजाय आभार मानना चाहिए।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
आपके विचार से आज के समय में आठों में से किस दोहे की सीख सबसे ज़रूरी है? कारण सहित लिखिए। (25-30 शब्द)
Hint
कोई भी दोहा, पर कारण आज के जीवन से।
Answer
'ऐसी बानी बोलिए' सबसे ज़रूरी है। आज ऑनलाइन और आमने-सामने, दोनों जगह कठोर शब्द झगड़े बढ़ाते हैं; अहंकार छोड़कर मीठा बोलने से रिश्ते और मन दोनों शांत रहते हैं।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.कबीर के अनुसार झूठ के बराबर क्या है?Show answer
पाप।
2.किस पेड़ का उदाहरण बड़प्पन के लिए दिया गया?Show answer
खजूर।
3.'अति का भला न...' दोहे में किन चार की अति बुरी बताई गई?Show answer
बोलना, चुप रहना, बरसना और धूप।
4.निंदक को कहाँ रखने की सलाह है?Show answer
आँगन में कुटिया बनाकर, अपने पास।
5.मन की तुलना किससे की गई है?Show answer
पंछी से।
6.पाठ के दोहों के संपादक कौन हैं?Show answer
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप आठों दोहों का एक-एक पंक्ति में संदेश बता सकते हैं?
- क्या आप 'हिरदे', 'पंथी', 'नियरे', 'थोथा' के अर्थ लिख सकते हैं?
- क्या आप खजूर और सूप के दृष्टांतों का अर्थ समझा सकते हैं?
- क्या आप किसी दोहे की सीख अपने जीवन की घटना से जोड़ सकते हैं?
- क्या आप कबीर का परिचय तीन तथ्यों में दे सकते हैं?
कबीर के दोहे – कबीर: frequently asked questions
पाठ में कबीर के कितने दोहे हैं?
आठ: सत्य, खजूर, गुरु-गोविंद, अति, मीठी वाणी, निंदक, सूप और मन-पंछी (संगति) वाले।
दोहा किसे कहते हैं?
दो पंक्तियों का छंद, जिसकी हर पंक्ति दो भागों (चरणों) में बँटी होती है और अंत में तुक मिलती है।
कबीर की भाषा को क्या कहते हैं?
सधुक्कड़ी; इसमें अनेक बोलियों के शब्द मिले हैं, जिससे यह आम लोगों की समझ में आसानी से आती है।
'गुरु गोविंद दोऊ खड़े' दोहे का सार क्या है?
गुरु ईश्वर से भी पहले वंदनीय है, क्योंकि उसी ने ईश्वर का ज्ञान कराया।
Based on: NCERT मल्हार, कक्षा 8 (Reprint 2026-27), पाठ 5: कबीर के दोहे; NCERT मल्हार, कक्षा 8: पुस्तक पृष्ठ