आदमी का अनुपात: Class 8 हिंदी मल्हार पाठ 9, भावार्थ और प्रश्न-उत्तर
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'आदमी का अनुपात' गिरिजा कुमार माथुर की कविता है, जो मल्हार (कक्षा 8) का नौवाँ पाठ है। कवि कमरे से घर, मोहल्ला, नगर, देश, पृथ्वी और लाखों ब्रह्मांडों तक जाकर दिखाते हैं कि विराट सृष्टि में मनुष्य बहुत छोटा है। फिर भी वह ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ में दीवारें उठाता है और एक कमरे में दो दुनिया रच लेता है।
What आदमी का अनुपात – गिरिजा कुमार माथुर is about
आदमी का अनुपात NCERT की हिंदी पुस्तक मल्हार (कक्षा 8) का नौवाँ पाठ है। इसके कवि गिरिजा कुमार माथुर (1919-1994) हैं। कवि-परिचय के अनुसार उनका जन्म मध्य प्रदेश के अशोक नगर ज़िले में हुआ; उनके पिता देवीचरण माथुर भी कविताएँ लिखते थे। वे आकाशवाणी में कई महत्त्वपूर्ण पदों पर रहे। कविताओं के अलावा उन्होंने नाटक, गीत, कहानी और निबंध भी लिखे। 'मंजीर', 'नाश और निर्माण', 'धूप के धान', 'शिलापंख चमकीले' और 'मैं वक्त के हूँ सामने' उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। प्रसिद्ध भावांतर गीत 'होंगे कामयाब' भी उन्हीं का लिखा है।
अनुपात का अर्थ है दो चीज़ों के आकार या मात्रा की तुलना। कविता में मनुष्य और विराट (अनंत ब्रह्मांड) का अनुपात दिखाया गया है: मनुष्य कितना छोटा है, फिर भी कितना घमंडी।
कक्षा 8 की परीक्षा विद्यालय लेता है और CBSE इसका प्रश्न-पत्र ढाँचा नहीं देता, इसलिए यहाँ प्रश्न कक्षा 9-10 जैसे रखे गए हैं: काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न।
Weightage: कक्षा 8 का मूल्यांकन विद्यालय स्वयं करता है; CBSE कक्षा 8 के लिए कोई पाठ्यक्रम या प्रश्न-पत्र का ढाँचा जारी नहीं करता, और विद्यालय NCERT की पुस्तक मल्हार पढ़ाते हैं। इसलिए यहाँ के प्रश्न कक्षा 9-10 हिंदी के प्रश्न-प्रकारों (पठित अंश पर बहुविकल्पी प्रश्न, 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न) के ढाँचे पर बने हैं।Source: CBSE पाठ्यक्रम दस्तावेज़ 2026-27 (कक्षा 9-12) और NCERT मल्हार, कक्षा 8 (Reprint 2026-27)
आदमी का अनुपात – गिरिजा कुमार माथुर: explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
कमरे से शुरुआत। कवि कहते हैं कि कमरे में दो व्यक्ति हैं, और वे कमरे से भी छोटे हैं।
बढ़ता हुआ घेरा। फिर कवि एक-एक कदम बाहर निकलते हैं: कमरा घर में है, घर मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में, नगर प्रदेश में, कई प्रदेश देश में, कई देश पृथ्वी पर। अनगिनत नक्षत्रों (तारों) में पृथ्वी एक छोटी-सी है; करोड़ों में एक। सबको आकाशगंगा (नभ गंगा) की परिधि (घेरा) समेटे हुए है। लाखों ब्रह्मांडों में हमारा एक ब्रह्मांड है, और हर ब्रह्मांड में न जाने कितनी पृथ्वियाँ, कितनी भूमियाँ और कितनी सृष्टियाँ हैं।
आदमी का अनुपात। यही है आदमी का विराट (अनंत ब्रह्मांड) से अनुपात, यानी इस अनंत में मनुष्य अत्यंत छोटा, लगभग कण के बराबर है।
फिर भी अहंकार। इसके बावजूद आदमी ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास में डूबा रहता है। वह 'शंख' (एक बहुत बड़ी संख्या) जैसी अनगिनत (संख्यातीत) दीवारें उठाता है, यानी लोगों के बीच बनावटी सीमाएँ खींचता है, और खुद को दूसरों का मालिक बताता है। देशों की तो बात ही क्या, वह एक कमरे में भी दो दुनिया बना लेता है, यानी साथ रहने वाले दो लोग भी मन से बँट जाते हैं।
केंद्रीय भाव: ब्रह्मांड की विशालता के सामने मनुष्य बहुत छोटा है; इसलिए उसे घमंड, ईर्ष्या और भेदभाव छोड़कर विनम्रता, विश्वास और मेलजोल से रहना चाहिए।
Themes and message
विराट सृष्टि में मनुष्य की लघुता
कमरे से ब्रह्मांड तक का क्रम दिखाता है कि अनंत सृष्टि के सामने मनुष्य बहुत छोटा है।
From the text: 'यह है अनुपात आदमी का विराट से'
मनुष्य का अहंकार और ईर्ष्या
इतना छोटा होकर भी मनुष्य ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास में लीन रहता है।
From the text: 'ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास लीन'
बनावटी दीवारें और बँटवारा
मनुष्य ईर्ष्या और अविश्वास के कारण अनगिनत बनावटी दीवारें (सीमाएँ) खड़ी करता है और दूसरों पर अधिकार जताता है; देश ही नहीं, घर और कमरे तक बँट जाते हैं।
From the text: 'एक कमरे में दो दुनिया रचाता है'
विनम्रता और एकता का संदेश
कविता बिना सीधे उपदेश दिए सिखाती है कि अपनी सही जगह पहचानकर हमें मिल-जुलकर, विश्वास से रहना चाहिए।
From the text: कविता का आरंभ और अंत 'कमरे' और 'दो व्यक्ति' से।
The speaker and the people in the poem
कवि (वक्ता)
जो पाठक को कमरे से ब्रह्मांड तक की यात्रा कराकर मनुष्य को आईना दिखाते हैं।
- वैज्ञानिक दृष्टि वाले (नक्षत्र, आकाशगंगा, ब्रह्मांड)
- चिंतनशील
- मनुष्य के घमंड पर व्यंग्य करने वाले
'यह है अनुपात आदमी का विराट से'
आदमी (मनुष्य)
कविता का विषय; कमरे के 'दो व्यक्ति' से हर मनुष्य तक।
- आकार में अत्यंत छोटा
- पर ईर्ष्यालु, अहंकारी, स्वार्थी
- दूसरों का स्वामी बनना चाहता है
'अपने को दूजे का स्वामी बताता है'
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| क्रमिक विस्तार (सीढ़ीनुमा चित्र) | 'कमरा है घर में / घर है मुहल्ले में / मुहल्ला नगर में...' | छोटे से बड़े की ओर बढ़ते घेरे से विशालता का सीधा अनुभव होता है। |
| उपमा | 'संख्यातीत शंख सी दीवारें' ('सी' वाचक शब्द) | अनगिनत दीवारों की बात को शंख जैसी असंख्य संख्या से जोड़ता है। |
| व्यंग्य | 'अपने को दूजे का स्वामी बताता है', 'एक कमरे में दो दुनिया रचाता है' | मनुष्य के घमंड और बँटवारे पर चोट। |
| मुक्त छंद, छोटी पंक्तियाँ | तुकबंदी के बिना छोटी-छोटी पंक्तियाँ | हर पंक्ति एक कदम जैसी; पाठक धीरे-धीरे विस्तार महसूस करता है। |
| वैज्ञानिक शब्दावली | 'नक्षत्र', 'नभ गंगा', 'परिधि', 'ब्रह्मांड', 'अनुपात' | विज्ञान और कविता का मेल; बात तथ्य जैसी ठोस लगती है। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
दो व्यक्ति कमरे में कमरे से छोटे
कवि: कविता का आरंभ।
मनुष्य की लघुता का पहला संकेत।
पृथ्वी एक छोटी करोड़ों में एक ही
कवि: ब्रह्मांड की विशालता का वर्णन।
पृथ्वी भी असंख्य पिंडों में एक साधारण पिंड है।
यह है अनुपात आदमी का विराट से
कवि: कविता का मोड़।
शीर्षक का अर्थ: अनंत के सामने मनुष्य का आकार।
एक कमरे में दो दुनिया रचाता है
कवि: कविता का अंत।
छोटी जगह में भी मनुष्य का आपसी बँटवारा।
आदमी का अनुपात – गिरिजा कुमार माथुर in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
घमंड छोड़ना
मान लीजिए किसी प्रतियोगिता में प्रथम आने पर आपका मित्र सबको नीचा दिखाने लगता है।
'आदमी का अनुपात' की सीख से आप उसे क्या समझाएँगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- विराट के सामने हम सब छोटे; एक जीत बहुत बड़ी चीज़ में छोटी।
- विनम्र रहकर दूसरों की मदद करना।
Answer: समझाऊँगा कि इस विशाल दुनिया में एक जीत बहुत छोटी है; विनम्र रहकर दूसरों को सिखाना ही असली बड़प्पन है, वरना हम 'दूजे का स्वामी' बनने की गलती करते हैं।
Memory hook: ब्रह्मांड बड़ा, घमंड छोटा रखो।
अविश्वास की दीवारें
कल्पना कीजिए कि आपकी कॉलोनी में नया परिवार आया है जो अलग भाषा बोलता है और लोग उनसे दूरी बना रहे हैं।
कविता की कौन-सी पंक्ति इस व्यवहार पर लागू होती है और आप क्या करेंगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- 'संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है' = अविश्वास की दीवार।
- उनसे मिलना, स्वागत करना, कुछ शब्द उनकी भाषा के सीखना।
Answer: यह अविश्वास की दीवार है। मैं परिवार सहित उनका स्वागत करूँगा, उनके बच्चों को खेल में बुलाऊँगा और उनकी भाषा के दो-चार शब्द सीखूँगा।
Memory hook: दीवार नहीं, पुल बनाओ।
साथ रहकर भी दूर
यदि रात के खाने पर घर के सभी लोग अपने-अपने फ़ोन में लगे रहते हों, तो?
'एक कमरे में दो दुनिया' से बचने के लिए क्या सुझाव देंगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- खाने के समय फ़ोन दूर रखने का नियम।
- दिन की बातें साझा करना।
Answer: खाने के समय सबके फ़ोन एक टोकरी में रखने और दिन की एक-एक अच्छी बात सुनाने का नियम सुझाऊँगा, ताकि एक कमरे में एक ही दुनिया रहे।
Memory hook: एक कमरा, एक दुनिया।
Topics in this chapter
How the school exam asks आदमी का अनुपात – गिरिजा कुमार माथुर
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1 अंक प्रत्येक) | कविता का कोई भाग देकर: क्रम (कमरा → ब्रह्मांड), 'अनुपात'/'विराट'/'परिधि' का अर्थ, मनुष्य के दोष, अलंकार, कथन-कारण। | पहले छोटे से बड़े का क्रम याद करें; फिर कवि का व्यंग्य पहचानें। |
| भाव स्पष्ट करना (2 अंक, 25-30 शब्द) | 'एक कमरे में दो दुनिया रचाता है' या 'यह है अनुपात आदमी का विराट से' का भाव। | शाब्दिक अर्थ + मनुष्य के व्यवहार पर कवि की टिप्पणी। |
| विचारात्मक प्रश्न | शीर्षक की सार्थकता; आज मनुष्य की बनाई 'दीवारें' कहाँ दिखती हैं; कविता की वैज्ञानिक दृष्टि। | कविता की पंक्ति + अपने आसपास का उदाहरण। |
Tricks to remember आदमी का अनुपात – गिरिजा कुमार माथुर
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
बढ़ते घेरे: 'क-घ-मु-न-प्र-दे-पृ-न-न-ब्र'
कमरा → घर → मुहल्ला → नगर → प्रदेश → देश → पृथ्वी → नक्षत्र → नभ गंगा → ब्रह्मांड।
Use it when: क्रम वाले MCQ।
मनुष्य के पाँच दोष: 'ई-अ-स्वा-घृ-अवि'
ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास।
Use it when: दूसरे काव्यांश के प्रश्न।
कवि-परिचय: 'अशोक नगर से आकाशवाणी तक'
गिरिजा कुमार माथुर (1919-1994), अशोक नगर (मध्य प्रदेश), पिता देवीचरण माथुर, आकाशवाणी; मंजीर, धूप के धान, शिलापंख चमकीले; 'होंगे कामयाब'।
Use it when: कवि-परिचय।
आदमी का अनुपात – गिरिजा कुमार माथुर: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: काव्यांश 1: कमरे से पृथ्वी तक
दो व्यक्ति कमरे में
कमरे से छोटे —
कमरा है घर में
घर है मुहल्ले में
मुहल्ला नगर में
(1) · 1 mark · MCQ
कविता के आरंभ में कमरे के दो व्यक्तियों को कैसा बताया गया है?
(क) कमरे से बड़े
(ख) कमरे से छोटे
(ग) बहुत शक्तिशाली
(घ) अनजान(2) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: आगे कवि यही क्रम बढ़ाते जाते हैं—नगर प्रदेश में, प्रदेश देश में और देश पृथ्वी पर।) इस काव्यांश में सही क्रम कौन-सा है?
(क) घर → कमरा → नगर → मुहल्ला
(ख) कमरा → घर → मुहल्ला → नगर → प्रदेश → देश → पृथ्वी
(ग) पृथ्वी → देश → कमरा → घर
(घ) नगर → मुहल्ला → प्रदेश → कमरा(3) · 1 mark · MCQ
कवि ने छोटे से बड़े की ओर क्रम क्यों रखा है?
(क) भूगोल पढ़ाने के लिए
(ख) ताकि पाठक धीरे-धीरे मनुष्य की लघुता महसूस करे
(ग) तुक मिलाने के लिए
(घ) पता लिखना सिखाने के लिए(4) · 1 mark · Assertion-reason
कथन (A): कविता में 'दो व्यक्ति' केवल किसी एक घर के लोग नहीं, हर मनुष्य के प्रतिनिधि हैं।
कारण (R): कविता के अंत में 'एक कमरे में दो दुनिया' के माध्यम से पूरी मानव-जाति के व्यवहार पर टिप्पणी है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।(5) · 1 mark · MCQ
इस काव्यांश की शैली की मुख्य विशेषता है:
(क) लंबी तुकांत पंक्तियाँ
(ख) छोटी पंक्तियों में क्रमिक विस्तार
(ग) संवाद
(घ) प्रश्न-उत्तर
Show the answersAnswers
- (ख) कमरे से छोटे।
- (ख) कमरा → घर → मुहल्ला → नगर → प्रदेश → देश → पृथ्वी।
- (ख) ताकि पाठक धीरे-धीरे मनुष्य की लघुता महसूस करे।
- (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- (ख) छोटी पंक्तियों में क्रमिक विस्तार।
Extract 2: काव्यांश 2: फिर भी आदमी
यह है अनुपात
आदमी का विराट से
इस पर भी आदमी
ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास लीन
संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है
(1) · 1 mark · MCQ
'विराट' का यहाँ अर्थ है:
(क) एक राजा
(ख) अनंत, विशाल ब्रह्मांड
(ग) छोटा कमरा
(घ) पहाड़(2) · 1 mark · MCQ
'संख्यातीत' शब्द का अर्थ है:
(क) गिनती में कम
(ख) अनगिनत, जिसे गिना न जा सके
(ग) संख्याओं से बना
(घ) सबसे पहला(3) · 1 mark · MCQ
काव्यांश में आए 'ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास' शब्द व्याकरण की दृष्टि से क्या हैं?
(क) भाववाचक संज्ञाएँ
(ख) क्रियाएँ
(ग) विशेषण
(घ) सर्वनाम(4) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: कवि आगे कहते हैं कि आदमी स्वयं को दूसरे का स्वामी बताता है, और 'देशों की कौन कहे', एक कमरे में भी दो दुनिया रच लेता है।) 'देशों की कौन कहे' का अर्थ है:
(क) देशों के बारे में कोई नहीं बोलता
(ख) देशों की तो बात ही क्या, वहाँ बँटवारा है ही
(ग) देशों को कौन चलाता है
(घ) देश बहुत बड़े होते हैं(5) · 1 mark · MCQ
'इस पर भी आदमी' में 'इस पर भी' किस ओर संकेत करता है?
(क) मनुष्य की ताकत की ओर
(ख) ब्रह्मांड के सामने इतना छोटा होने के बावजूद
(ग) कमरे की छत की ओर
(घ) पृथ्वी के आकार की ओर
Show the answersAnswers
- (ख) अनंत, विशाल ब्रह्मांड।
- (ख) अनगिनत, जिसे गिना न जा सके।
- (क) भाववाचक संज्ञाएँ; ये सब मन के भावों के नाम हैं।
- (ख) देशों की तो बात ही क्या, वहाँ बँटवारा है ही; मनुष्य तो एक कमरे तक को बाँट देता है।
- (ख) ब्रह्मांड के सामने इतना छोटा होने के बावजूद।
आदमी का अनुपात – गिरिजा कुमार माथुर: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: शीर्षक का अर्थ · 2 marks · Short answerExam level
'आदमी का अनुपात' शीर्षक से कवि का क्या आशय है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- अनुपात = तुलना से आकार।
- मनुष्य बनाम विराट ब्रह्मांड: मनुष्य अत्यंत छोटा।
Answer: अनुपात का अर्थ है तुलना में आकार। कवि मनुष्य की तुलना अनंत ब्रह्मांड से करके बताते हैं कि इस विराट सृष्टि में मनुष्य कितना छोटा, लगभग कण जैसा है।
Example 2: कमरे से ब्रह्मांड तक · 2 marks · Short answerExam level
कवि ने कमरे से ब्रह्मांड तक का क्रम क्यों दिखाया है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- हर कदम पर घेरा बड़ा, मनुष्य छोटा।
- पाठक को अपनी असली जगह का एहसास।
Answer: कमरा, घर, मोहल्ला, नगर से ब्रह्मांड तक बढ़ते घेरों से हर कदम पर मनुष्य और छोटा लगता है। इससे पाठक को सृष्टि में अपनी असली जगह का एहसास होता है।
Example 3: 'शंख' सी दीवारें · 2 marks · Short answerHarder exam level
'संख्यातीत शंख सी दीवारें' में 'शंख' किस अर्थ में आया है? इस उपमा से मनुष्य के बारे में क्या पता चलता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- शंख = बहुत बड़ी संख्या (लाख, करोड़, अरब के आगे), यहाँ बजाने वाला शंख नहीं।
- उपमा: मनुष्य की बनाई दीवारें अनगिनत हैं।
Answer: यहाँ 'शंख' एक बहुत बड़ी संख्या है (लाख, करोड़, अरब के आगे)। उपमा बताती है कि मनुष्य लोगों के बीच इतनी बनावटी दीवारें उठाता है कि उन्हें गिनना असंभव है।
Example 4: एक कमरे में दो दुनिया · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'एक कमरे में दो दुनिया रचाता है' पंक्ति का आज के परिवारों के संदर्भ में क्या अर्थ हो सकता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- एक कमरे में बैठे लोग अपने-अपने फ़ोन में खोए।
- या छोटी बातों पर अनबन; साथ होकर भी दूर।
Answer: आज एक ही कमरे में बैठे परिवार के लोग अपने-अपने फ़ोन में खोए रहते हैं या छोटी बातों पर रूठे रहते हैं। साथ रहकर भी मन से अलग होना ही 'दो दुनिया' रचना है।
Example 5: स्वामी बनने की चाह · 2 marks · Short answerHarder exam level
'अपने को दूजे का स्वामी बताता है' पंक्ति में मनुष्य की कौन-सी कमज़ोरी दिखाई गई है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- अहंकार, दूसरों पर अधिकार की इच्छा।
- ब्रह्मांड के सामने खुद छोटा, फिर भी मालिक बनना।
Answer: इसमें मनुष्य का अहंकार और दूसरों पर अधिकार जमाने की इच्छा दिखती है। जो स्वयं ब्रह्मांड के सामने इतना छोटा है, वह दूसरों का मालिक बनना चाहता है, यह व्यंग्य है।
Example 6: अंतरिक्ष से पृथ्वी · 2 marks · Short answerHOTS / competency
अंतरिक्ष यात्री कहते हैं कि ऊपर से पृथ्वी पर देशों की सीमाएँ दिखाई नहीं देतीं। इस बात को 'आदमी का अनुपात' कविता से जोड़िए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- ऊपर से पृथ्वी एक, बिना सीमाओं के।
- कविता: दीवारें मनुष्य की बनाई; विराट के सामने वे व्यर्थ।
Answer: ऊपर से पृथ्वी एक दिखती है, बिना सीमाओं के। कविता भी कहती है कि विराट सृष्टि के सामने मनुष्य की बनाई दीवारें और बँटवारे बहुत छोटे और व्यर्थ हैं।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
'एक कमरे में दो दुनिया रचाता है' का भाव (25-30 शब्द, 2 अंक) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| अर्थ: साथ रहकर भी मन से बँट जाना | 1 |
| कवि का व्यंग्य/संदेश या आज का उदाहरण | 1 |
कक्षा के दो समूहों पर कविता का संदेश (40-50 शब्द, 3 अंक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| कविता की पंक्ति/विचार से जुड़ाव | 1 |
| दीवारें गिराने की बात | 1 |
| व्यावहारिक उपाय | 1 |
Where students lose marks in आदमी का अनुपात – गिरिजा कुमार माथुर
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: 'अनुपात' को गणित का प्रश्न समझकर केवल 'भिन्न' या 'अनुपात का सूत्र' लिखना
कविता में अनुपात = मनुष्य और ब्रह्मांड के आकार की तुलना, जिससे मनुष्य की लघुता दिखती है।
Do this: तुलना और भाव, दोनों लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 'दीवारें' का शाब्दिक अर्थ (ईंट की दीवार) लिखना
यहाँ दीवारें मनुष्य द्वारा खींची गई बनावटी सीमाओं, भेदभाव और अविश्वास की प्रतीक हैं।
Do this: प्रतीकात्मक अर्थ लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: घेरों का क्रम गड़बड़ करना (नगर से पहले प्रदेश)
क्रम ही कविता की रचना-शैली है; MCQ में यही पूछा जाता है।
Do this: क-घ-मु-न-प्र-दे-पृ सूत्र दोहराएँ।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: कविता को केवल विज्ञान-वर्णन मान लेना
असली बात मनुष्य के अहंकार और बँटवारे पर व्यंग्य है।
Do this: केंद्रीय भाव में 'विनम्रता और मेलजोल' का संदेश जोड़ें।
Usually costs: 1 अंक
Practice questions on आदमी का अनुपात – गिरिजा कुमार माथुर
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
'आदमी का अनुपात' कविता के कवि कौन हैं?
(क) गिरिजा कुमार माथुर
(ख) दुष्यंत कुमार
(ग) भवानी प्रसाद मिश्र
(घ) गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'Hint
'होंगे कामयाब'।
Answer
(क) गिरिजा कुमार माथुर
Q2 · 1 mark · Very short answerExam level
गिरिजा कुमार माथुर ने किस प्रसिद्ध गीत का भावांतर रचा?
Hint
हम...
Answer
'होंगे कामयाब'।
Q3 · 1 mark · Very short answerHarder exam level
'नभ गंगा' और 'परिधि' का अर्थ लिखिए।
Hint
आकाश में तारों की पट्टी; घेरा।
Answer
नभ गंगा = आकाशगंगा; परिधि = घेरा, सीमा-रेखा।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level
कवि के अनुसार हर ब्रह्मांड में क्या-क्या हैं? इससे क्या संकेत मिलता है? (25-30 शब्द)
Hint
पृथ्वियाँ, भूमियाँ, सृष्टियाँ।
Answer
हर ब्रह्मांड में कितनी ही पृथ्वियाँ, भूमियाँ और सृष्टियाँ हैं। इससे संकेत मिलता है कि हमारी पृथ्वी कोई अनोखी केंद्र नहीं, असंख्य में से एक है, और मनुष्य उससे भी छोटा।
Q5 · 1 mark · MCQHarder exam level
कथन (A): कवि के अनुसार मनुष्य का बँटवारा केवल देशों के स्तर पर होता है।
कारण (R): कविता में कहा गया है कि मनुष्य एक कमरे में भी दो दुनिया रचाता है।
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
(ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
(ग) A सही, R गलत
(घ) A गलत, R सहीHint
'देशों की कौन कहे'।
Answer
(घ) A गलत, R सही
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपकी कक्षा में दो समूह बन गए हैं जो एक-दूसरे से बात नहीं करते। 'आदमी का अनुपात' कविता का संदेश देते हुए आप कक्षा-सभा में क्या कहेंगे? (40-50 शब्द)
Hint
छोटी कक्षा, बड़ी दुनिया; 'एक कमरे में दो दुनिया'।
Answer
मैं कहूँगा कि इतने बड़े ब्रह्मांड में हमारी कक्षा एक छोटा-सा कमरा है, और हम उसमें भी 'दो दुनिया' बना बैठे हैं। ईर्ष्या और अविश्वास की दीवारें गिराकर मिल-जुलकर काम करें, जैसे साझा प्रोजेक्ट या खेल, तो कक्षा एक परिवार बन सकती है।
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
विज्ञान की पुस्तक में आपने सौरमंडल और आकाशगंगा के बारे में पढ़ा होगा। यह जानकारी कविता को समझने में कैसे मदद करती है? (25-30 शब्द)
Hint
आकाशगंगा में अरबों तारे।
Answer
विज्ञान बताता है कि हमारी आकाशगंगा में ही अरबों तारे हैं और ऐसी असंख्य आकाशगंगाएँ हैं। यह जानकर कविता की बात सच लगती है कि इस विराट में मनुष्य बहुत छोटा है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.कमरा किसमें है?Show answer
घर में।
2.पृथ्वी को कवि ने कैसा बताया है?Show answer
एक छोटी, करोड़ों में एक।
3.सबको किसकी परिधि समेटे है?Show answer
नभ गंगा (आकाशगंगा) की।
4.'अहं' का अर्थ?Show answer
अहंकार, घमंड।
5.मनुष्य खुद को किसका स्वामी बताता है?Show answer
दूसरों (दूजे) का।
6.गिरिजा कुमार माथुर किस संस्था में महत्त्वपूर्ण पदों पर रहे?Show answer
आकाशवाणी।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप कमरे से ब्रह्मांड तक का क्रम बिना देखे लिख सकते हैं?
- क्या आप 'अनुपात', 'विराट', 'संख्यातीत', 'परिधि' के अर्थ बता सकते हैं?
- क्या आप मनुष्य के पाँच दोष गिना सकते हैं?
- क्या आप 'एक कमरे में दो दुनिया' का भाव आज के उदाहरण से समझा सकते हैं?
- क्या आप कवि-परिचय के तीन तथ्य लिख सकते हैं?
आदमी का अनुपात – गिरिजा कुमार माथुर: frequently asked questions
'आदमी का अनुपात' कविता का मुख्य भाव क्या है?
विराट ब्रह्मांड में मनुष्य बहुत छोटा है, फिर भी वह ईर्ष्या, अहंकार और अविश्वास से आपस में दीवारें खड़ी करता है; उसे विनम्र होकर मिलजुलकर रहना चाहिए।
कविता में तुक क्यों नहीं है?
यह मुक्त छंद की कविता है; इसकी लय छोटी पंक्तियों और बढ़ते क्रम से बनती है।
कविता कहाँ से शुरू होकर कहाँ खत्म होती है?
'दो व्यक्ति कमरे में' से शुरू होकर 'एक कमरे में दो दुनिया रचाता है' पर खत्म होती है; बीच में ब्रह्मांड तक की यात्रा है।
Based on: NCERT मल्हार, कक्षा 8 (Reprint 2026-27), पाठ 9: आदमी का अनुपात; NCERT मल्हार, कक्षा 8: पुस्तक पृष्ठ