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HindiCBSE Class 8 · Chapter 2

दो गौरैया: Class 8 हिंदी मल्हार पाठ 2, सारांश और प्रश्न-उत्तर

Updated 15 October 2026 · Fact-checked

'दो गौरैया' भीष्म साहनी की कहानी है, जो मल्हार (कक्षा 8) का दूसरा पाठ है। दो गौरैया पंखे के गोले में घोंसला बना लेती हैं। पिताजी उन्हें लाठी से भगाने और घोंसला तोड़ने में लगे रहते हैं, पर घोंसले से नन्हे बच्चों की आवाज़ आते ही उनका मन बदल जाता है और वे मुसकराने लगते हैं।

What दो गौरैया – भीष्म साहनी is about

दो गौरैया NCERT की हिंदी पुस्तक मल्हार (कक्षा 8) का दूसरा पाठ है। इसके लेखक भीष्म साहनी (1915-2003) हिंदी के बहुमुखी लेखक थे। पाठ के लेखक-परिचय के अनुसार उनकी कहानियों में देश-विभाजन और मानवीय मूल्यों की मार्मिक अभिव्यक्ति है; उपन्यास तमस पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला और भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। बच्चों के लिए उन्होंने 'गुलेल का खेल' जैसी कहानियाँ लिखीं।

कहानी एक बच्चे (कथावाचक) की नज़र से कही गई है। हल्के-फुल्के हास्य के बीच यह बताती है कि घर केवल हमारा नहीं, उसमें रहने वाले पशु-पक्षियों का भी है, और कठोर दिखने वाला मन भी नन्ही जानों को देखकर पिघल जाता है।

कक्षा 8 की परीक्षा विद्यालय लेता है और CBSE इसका प्रश्न-पत्र ढाँचा नहीं देता, इसलिए यहाँ प्रश्न कक्षा 9-10 जैसे रखे गए हैं: गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न।

Weightage: कक्षा 8 का मूल्यांकन विद्यालय स्वयं करता है; CBSE कक्षा 8 के लिए कोई पाठ्यक्रम या प्रश्न-पत्र का ढाँचा जारी नहीं करता, और विद्यालय NCERT की पुस्तक मल्हार पढ़ाते हैं। इसलिए यहाँ के प्रश्न कक्षा 9-10 हिंदी के प्रश्न-प्रकारों (पठित अंश पर बहुविकल्पी प्रश्न, 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न) के ढाँचे पर बने हैं।Source: CBSE पाठ्यक्रम दस्तावेज़ 2026-27 (कक्षा 9-12) और NCERT मल्हार, कक्षा 8 (Reprint 2026-27)

दो गौरैया – भीष्म साहनी: summary

In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.

घर या सराय? कथावाचक के घर में केवल तीन लोग रहते हैं: माँ, पिताजी और वह। फिर भी पिताजी कहते हैं कि घर सराय बना हुआ है; जैसे वे खुद मेहमान हों और असली मालिक कोई और। आँगन के आम के पेड़ पर तोते, कौवे और गौरैयाँ डेरा डाले रहते हैं। घर के अंदर बीसियों चूहे धमा-चौकड़ी मचाते हैं; एक अँगीठी के पीछे बैठता है, दूसरा बाथरूम की टंकी पर। बिल्ली कभी-कभी झाँक जाती है, शाम को चमगादड़ उड़ते हैं, कबूतर 'गुटर-गूँ' करते हैं, छिपकलियाँ, बर्रें और चींटियों की फ़ौज भी है।

दो गौरैया आती हैं। एक दिन दो गौरैया अंदर घुसकर 'मकान का निरीक्षण' करती हैं और दो दिन बाद बैठक की छत के पंखे के गोले में घोंसला बना लेती हैं। माँ कहती हैं कि अब ये नहीं उड़ेंगी। पिताजी गुस्से में बोलते हैं कि वे अभी इन्हें निकाल बाहर करेंगे। वे ताली बजाते, 'श...शू' करते, बाँहें झुलाते और कूदते हैं; गौरैया 'चीं-चीं' करती हैं और माँ खिलखिलाकर हँसती हैं। फिर पिताजी लाठी लाते हैं और पंखे के गोले को ठकोरते हैं। माँ हँसकर सुझाती हैं कि एक दरवाज़ा खुला छोड़कर बाकी बंद कर दो; तब केवल किचन का दरवाज़ा खुला छोड़कर पिताजी चिड़ियों को बाहर निकाल देते हैं।

हर रोज़ लौट आना। पर गौरैया कभी दरवाज़ों के नीचे की खाली जगह से, तो कभी रोशनदान के टूटे शीशे से फिर अंदर आ जाती हैं। माँ गंभीर होकर कहती हैं कि चिड़ियों को मत निकालो, शायद इन्होंने अंडे दे दिए हैं। पिताजी नहीं मानते। रोज़ यही होता है। आखिर पिताजी तय करते हैं कि घोंसला ही नोच डालेंगे, क्योंकि उनके अनुसार किसी को सचमुच निकालना हो तो उसका घर तोड़ देना चाहिए। वे स्टूल पर चढ़कर लाठी से घोंसले के तिनके खींचते हैं। बाहर दीवार पर बैठी दोनों गौरैया दुबली और गुमसुम हो चुकी हैं।

मन बदल जाता है। तभी घोंसले से 'चीं-चीं' की आवाज़ आती है: पंखे के गोले के ऊपर से नन्ही-नन्ही गौरैया सिर निकालकर झाँक रही हैं, मानो अपने माँ-बाप को पुकार रही हों। पिताजी चुपचाप लाठी रखकर नीचे उतर आते हैं और कुर्सी पर बैठ जाते हैं। माँ सारे दरवाज़े खोल देती हैं। माँ-बाप गौरैया अंदर आकर बच्चों की चोंच में चुग्गा डालने लगती हैं। कमरे में फिर शोर होने लगता है, पर इस बार पिताजी उन्हें देखकर केवल मुसकराते रहते हैं।

संदेश: घर और धरती सभी जीवों की साझी है; दया और ममता के आगे गुस्सा और ज़िद हार जाते हैं।

Themes and message

सभी जीवों का साझा घर

घर में मनुष्यों के साथ पक्षी, चूहे, बिल्ली, कबूतर, चींटियाँ सब रहते हैं। कहानी हास्य के साथ बताती है कि धरती पर हम अकेले मालिक नहीं हैं।

From the text: 'हम तो जैसे यहाँ मेहमान हैं, घर के मालिक तो कोई दूसरे ही हैं।'

करुणा की जीत

पिताजी की ज़िद और गुस्सा नन्हे बच्चों की आवाज़ सुनते ही पिघल जाते हैं; लाठी रख दी जाती है और दरवाज़े खुल जाते हैं।

From the text: 'पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।'

माँ की संवेदनशीलता और हास्य

माँ शुरू से गौरैयों के पक्ष में हैं। वे व्यंग्य और हँसी से पिताजी की ज़िद पर टिप्पणी करती हैं, अंत में गंभीर होकर अंडों की बात कहती हैं और बच्चों के बोलते ही सारे दरवाज़े खोल देती हैं।

From the text: 'देखो—जी, चिड़ियों को मत निकालो,'

घर का महत्त्व

पिताजी मानते हैं कि किसी को निकालना हो तो उसका घर तोड़ दो; यही बात उलटकर दिखाती है कि घर किसी के लिए कितना ज़रूरी है। घोंसला टूटने पर गौरैया दुबली और गुमसुम हो जाती हैं।

From the text: 'किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए,'

हठ बनाम धैर्य

पिताजी हार न मानने की ज़िद में रोज़ लाठी उठाते हैं, जबकि गौरैया धैर्य से हर बार लौट आती हैं। अंत में धैर्य और ममता की जीत होती है।

From the text: 'मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।'

Characters

पिताजी

घर के मुखिया, जो गौरैयों को निकालने पर अड़े हैं।

  • जल्दी गुस्सा होने वाले; माँ के व्यंग्य पर उबल पड़ते हैं
  • ज़िद्दी: हार न मानने वाले
  • मज़ाकिया स्थितियाँ बनाने वाले (कूदना, 'श...शू' करना)
  • भीतर से कोमल: बच्चों की आवाज़ पर लाठी रख देते हैं

'पिताजी के हाथ ठिठक गए।'

माँ

गौरैयों की हिमायती, जो हँसी-मज़ाक से पिताजी को रोकती हैं।

  • हँसमुख और व्यंग्य-कुशल
  • संवेदनशील: अंडों की बात समझती हैं
  • व्यावहारिक: अंत में सारे दरवाज़े खोल देती हैं

'अब तो इन्होंने अंडे भी दे दिए होंगे।'

कथावाचक (बच्चा)

कहानी सुनाने वाला बेटा, जो सब ध्यान से देखता है।

  • जिज्ञासु और ध्यान से देखने वाला
  • आज्ञाकारी: दरवाज़े बंद करता है
  • संवेदनशील: गौरैयों का दुबला होना देख लेता है

'मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा।'

दो गौरैया और उनके बच्चे

कहानी के केंद्र; अपने घोंसले और बच्चों के लिए बार-बार लौटने वाली।

  • धैर्यवान और जुझारू
  • ममतामयी: बच्चों को चुग्गा खिलाती हैं

'उनकी नन्हीं-नन्हीं चोंचों में चुग्गा डालने लगे।'

How it is written

DeviceExampleEffect
हास्य-व्यंग्यमाँ: 'चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?'पिताजी की हड़बड़ी हँसाती है और कहानी को रोचक बनाती है।
मानवीकरणगौरैया 'मकान का निरीक्षण' करती हैं; घर का पता 'लिखवाकर' लाते पक्षीपक्षियों को मनुष्य जैसा दिखाकर उनसे अपनापन जगाता है।
ध्वन्यात्मक शब्द'चीं-चीं', 'गुटर-गूँ', 'श...शू'दृश्य सजीव हो उठता है; पाठक आवाज़ें 'सुन' पाता है।
बच्चे की नज़र से कथन (प्रथम पुरुष)'मैंने भागकर दोनों दरवाजे बंद कर दिए'सरल, ईमानदार भाषा; घटनाएँ भरोसेमंद और आत्मीय लगती हैं।
अंत में मोड़नन्ही गौरैयों की 'चीं-चीं' से पिताजी के हाथ ठिठकनाअचानक बदलाव कहानी का संदेश गहरा कर देता है।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • हम तो जैसे यहाँ मेहमान हैं, घर के मालिक तो कोई दूसरे ही हैं।

    कथावाचक (पिताजी की बात बताते हुए): कहानी का आरंभ।

    घर में रहने वाले अनेक जीवों पर हल्का-फुल्का व्यंग्य; कहानी का मूल विचार।

  • मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।

    पिताजी: गौरैया रोज़ लौट आती हैं।

    पिताजी की ज़िद।

  • किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए,

    पिताजी: घोंसला नोचने से पहले।

    घर ही किसी का सबसे बड़ा सहारा है; कहानी की चरम स्थिति।

  • पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।

    कथावाचक: कहानी का अंत।

    गुस्से पर करुणा की जीत।

दो गौरैया – भीष्म साहनी in real life

Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

जीवों के प्रति करुणा

मान लीजिए आपके स्कूल के पेड़ पर बने घोंसले को कुछ बच्चे पत्थर मारकर गिराना चाहते हैं।

'दो गौरैया' की सीख से आप क्या करेंगे?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. घोंसला किसी परिवार का घर है; उसमें बच्चे हो सकते हैं।
  2. बच्चों को रोकना और शिक्षक को बताना।

Answer: उन्हें प्यार से रोकूँगा और समझाऊँगा कि घोंसले में नन्हे बच्चे हो सकते हैं; ज़रूरत हो तो शिक्षक को बताऊँगा ताकि घोंसला सुरक्षित रहे।

Memory hook: घोंसला भी घर है।

गुस्से पर काबू

कल्पना कीजिए कि आपका छोटा भाई बार-बार आपकी किताबें बिखेर देता है और आपको बहुत गुस्सा आता है।

पिताजी के अनुभव से क्या सीख सकते हैं?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. गुस्से में बार-बार डाँटने से बात नहीं बनी, जैसे लाठी से गौरैया नहीं गईं।
  2. कारण समझें; प्यार से रास्ता निकालें (उसके लिए अलग रंगीन किताब)।

Answer: गुस्से से हल नहीं निकलता; भाई की ज़रूरत समझकर उसे अपनी चित्र-किताब दे दें और किताबें ऊँची जगह रखें। धैर्य से रास्ता निकलता है।

Memory hook: लाठी नहीं, समझदारी।

साझा धरती

यदि आपकी सोसायटी में पेड़ काटकर पार्किंग बनाने का प्रस्ताव आए, तो आप क्या सुझाव देंगे?

'घर के मालिक तो कोई दूसरे ही हैं' वाली बात इससे कैसे जुड़ती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पेड़ पर पक्षियों के घर हैं; धरती सबकी साझी।
  2. पेड़ बचाकर दूसरी जगह पार्किंग का सुझाव।

Answer: पेड़ पर कई पक्षियों के घर हैं, इसलिए पेड़ बचाकर खाली जगह पर पार्किंग बनाने का सुझाव दूँगा; हम अकेले इस धरती के मालिक नहीं हैं।

Memory hook: धरती सबकी, पेड़ सबका।

Topics in this chapter

How the school exam asks दो गौरैया – भीष्म साहनी

The question patterns to expect, and the method that works for each.

Question typeHow it is askedMethod
पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1 अंक प्रत्येक)कहानी का कोई अंश देकर: पात्र का स्वभाव, किसी कथन का आशय, शब्दार्थ, कथन-कारण।अंश को दो बार पढ़ें; विकल्प चुनते समय पात्र के व्यवहार से प्रमाण खोजें।
लघु उत्तर (2 अंक, 25-30 शब्द)पिताजी का मन क्यों बदला; माँ हँसती क्यों थीं; घर को सराय क्यों कहा।घटना + कारण, दो वाक्यों में।
चरित्र-चित्रण / विचारात्मकपिताजी या माँ की दो विशेषताएँ; कहानी का संदेश; आप होते तो क्या करते।विशेषता + कहानी की घटना से प्रमाण।

Tricks to remember दो गौरैया – भीष्म साहनी

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • कहानी के चार मोड़: 'स-आ-लौ-मु'

    सराय जैसा घर → गौरैया आईं (पंखे का गोला) → लौट-लौट आना (दरवाज़े के नीचे, रोशनदान) → मुसकराते पिताजी (बच्चों की चीं-चीं)।

    Use it when: सारांश लिखने में।

  • पिताजी के हथियार

    ताली → 'श...शू' → कूदना → लाठी → दरवाज़े बंद → कपड़े ठूँसना → स्टूल पर चढ़कर घोंसला नोचना।

    Use it when: घटनाक्रम और चरित्र वाले प्रश्न।

  • लेखक-परिचय: 'तमस वाले साहनी'

    भीष्म साहनी (1915-2003); तमस पर साहित्य अकादमी; पद्म भूषण; बच्चों के लिए 'गुलेल का खेल'।

    Use it when: लेखक-परिचय वाले प्रश्न।

दो गौरैया – भीष्म साहनी: extract-based questions

Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.

Extract 1: गद्यांश 1: पिताजी का 'नाच'

वह फौरन उठ खड़े हुए और पंखे के नीचे जाकर जोर से ताली बजाई और मुँह से 'श...शू' कहा, बाँहें झुलाईं, फिर खड़े-खड़े कूदने लगे, कभी बाँहें झुलाते, कभी 'श...शू' करते।

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: इससे पहले लेखक बताते हैं कि माँ कोई बात व्यंग्य में कहें, तो पिताजी 'उबल पड़ते' हैं और समझते हैं कि माँ उनका मज़ाक उड़ा रही हैं।) पिताजी 'उबल पड़ते' हैं, जब:
    (क) गौरैया गाती हैं
    (ख) माँ कोई बात व्यंग्य में कहती हैं
    (ग) बिल्ली दूध पी जाती है
    (घ) बेटा दरवाज़ा खोलता है

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: पिछले प्रश्न का संदर्भ देखें।) 'उबल पड़ना' मुहावरे का अर्थ है:
    (क) पानी गरम करना
    (ख) अचानक बहुत गुस्सा हो जाना
    (ग) ज़ोर से हँसना
    (घ) डर जाना

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    पिताजी ने गौरैयों को भगाने के लिए क्या-क्या नहीं किया?
    (क) ताली बजाई
    (ख) 'श...शू' कहा
    (ग) पंखा चला दिया
    (घ) खड़े-खड़े कूदे

  4. (4) · 1 mark · Assertion-reason

    (संदर्भ: यह सब देखकर माँ खिलखिलाकर हँसने लगीं।) कथन (A): माँ खिलखिलाकर हँसने लगीं।
    कारण (R): पिताजी का कूदना और गौरैयों का झाँककर 'चीं-चीं' करना हास्यपूर्ण दृश्य बना रहा था।
    (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
    (ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
    (ग) A सही है, R गलत है।
    (घ) A गलत है, R सही है।

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    इस गद्यांश से पिताजी के स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है?
    (क) वे शांत और धैर्यवान हैं
    (ख) वे जल्दी गुस्सा होने वाले और ज़िद्दी हैं
    (ग) वे पक्षियों से बहुत प्रेम करते हैं
    (घ) वे माँ से डरते हैं

Show the answersAnswers
  1. (ख) माँ कोई बात व्यंग्य में कहती हैं।
  2. (ख) अचानक बहुत गुस्सा हो जाना।
  3. (ग) पंखा चला दिया।
  4. (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
  5. (ख) वे जल्दी गुस्सा होने वाले और ज़िद्दी हैं।

Extract 2: गद्यांश 2: बदलता मन

फिर मैंने देखा, पिताजी स्टूल पर से नीचे उतर आए हैं और घोंसले के तिनकों में से लाठी निकालकर उन्होंने लाठी को एक ओर रख दिया है और चुपचाप कुर्सी पर आकर बैठ गए हैं।

  1. (1) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: इससे ठीक पहले लेखक कहते हैं कि वे 'अवाक्' होकर पिताजी की ओर देखते रहे।) 'अवाक्' शब्द का अर्थ है:
    (क) बहुत बोलने वाला
    (ख) हैरानी से चुप रह जाना
    (ग) गुस्से में होना
    (घ) सो जाना

  2. (2) · 1 mark · MCQ

    पिताजी ने लाठी एक ओर क्यों रख दी?
    (क) वे थक गए थे
    (ख) घोंसले में नन्हे बच्चे देखकर उनका मन पिघल गया
    (ग) माँ ने उन्हें डाँटा
    (घ) लाठी टूट गई थी

  3. (3) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: इसके बाद माँ ने उठकर सभी दरवाज़े खोल दिए; घोंसले की नन्हीं चिड़ियाँ अब भी 'हाँफ-हाँफकर' चिल्लाते हुए अपने माँ-बाप को बुला रही थीं।) माँ ने सभी दरवाज़े क्यों खोल दिए?
    (क) कमरे में गर्मी थी
    (ख) ताकि बाहर बैठे माँ-बाप गौरैया अपने बच्चों तक आ सकें
    (ग) मेहमान आने वाले थे
    (घ) पिताजी ने कहा था

  4. (4) · 1 mark · MCQ

    (संदर्भ: पिछले प्रश्न का संदर्भ देखें।) 'हाँफ-हाँफकर' में कौन-सा शब्द-रूप है?
    (क) पुनरुक्त शब्द
    (ख) विलोम शब्द
    (ग) पर्यायवाची शब्द
    (घ) उपसर्ग

  5. (5) · 1 mark · MCQ

    इस अंश का मुख्य भाव है:
    (क) पिताजी की हार और शर्म
    (ख) करुणा के आगे गुस्से का पिघल जाना
    (ग) घर की सफ़ाई
    (घ) चिड़ियों का डर

Show the answersAnswers
  1. (ख) हैरानी से चुप रह जाना।
  2. (ख) घोंसले में नन्हे बच्चे देखकर उनका मन पिघल गया।
  3. (ख) ताकि बाहर बैठे माँ-बाप गौरैया अपने बच्चों तक आ सकें।
  4. (क) पुनरुक्त शब्द; एक ही शब्द की दोहराहट से भाव पर ज़ोर।
  5. (ख) करुणा के आगे गुस्से का पिघल जाना।

दो गौरैया – भीष्म साहनी: exam-level solved questions

Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.

Example 1: पिताजी के तरीके क्यों नाकाम · 2 marks · Short answerExam level

पिताजी ने गौरैयों को निकालने के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाए? वे बार-बार नाकाम क्यों हुए? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. तरीके: ताली, 'श...शू', कूदना, लाठी, दरवाज़े बंद करना, कपड़े ठूँसना।
  2. नाकामी: गौरैया दरवाज़ों के नीचे और रोशनदान के टूटे शीशे से लौट आतीं; घोंसले में बच्चे थे।

Answer: पिताजी ने ताली बजाई, 'श...शू' किया, कूदे, लाठी चलाई, दरवाज़े बंद किए और कपड़े ठूँसे। पर गौरैया नई-नई जगहों से लौट आतीं, क्योंकि घोंसले में उनके बच्चे थे।

Example 2: 'बाकी दो हजार भी' · 2 marks · Short answerHarder exam level

घोंसले से दो तिनके गिरने पर माँ हँसकर कहती हैं, 'अब बाकी दो हजार भी निकल जाएँगे!' इस वाक्य में छिपा व्यंग्य स्पष्ट कीजिए। (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. घोंसले में हज़ारों तिनके; दो निकलने पर इतनी मेहनत।
  2. व्यंग्य: पिताजी का प्रयास धीमा और व्यर्थ; माँ गौरैयों के पक्ष में।

Answer: इतनी मेहनत के बाद केवल दो तिनके निकले, जबकि घोंसले में हज़ारों हैं। माँ व्यंग्य करती हैं कि इस गति से पिताजी का प्रयास व्यर्थ है; वे मन से गौरैयों के पक्ष में हैं।

Example 3: पिताजी का मन क्यों बदला · 2 marks · Short answerExam level

घोंसला तोड़ते-तोड़ते पिताजी के हाथ क्यों ठिठक गए? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. घोंसले से नन्ही गौरैयों की 'चीं-चीं'।
  2. बच्चों को माँ-बाप को पुकारते देख मन पिघला।

Answer: घोंसले से अचानक नन्ही गौरैयों की 'चीं-चीं' सुनाई दी। बच्चे सिर निकालकर अपने माँ-बाप को पुकार रहे थे। यह देखकर पिताजी का गुस्सा करुणा में बदल गया।

Example 4: घर तोड़ने का तर्क · 2 marks · Short answerHOTS / competency

पिताजी ने कहा, 'किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।' यह बात कहानी के अंत में उलटकर कैसे सच साबित होती है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. घर किसी के जीवन का आधार है; इसलिए तोड़ने से वह निकल जाता है।
  2. अंत: घर में बच्चे थे; घर तोड़ना उनका जीवन छीनना होता; पिताजी रुक गए।

Answer: पिताजी समझते थे कि घर टूटा तो गौरैया चली जाएँगी। पर घोंसले में उनके बच्चे थे; घर तोड़ना उनसे जीवन छीनना होता। यही समझकर पिताजी ने घर तोड़ना छोड़ दिया।

Example 5: माँ का बदलता स्वर · 2 marks · Short answerHarder exam level

कहानी में माँ का स्वर पहले हँसी-मज़ाक का है, फिर गंभीर हो जाता है। यह बदलाव कब और क्यों आता है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पहले: पिताजी के कूदने पर हँसती हैं, व्यंग्य करती हैं।
  2. बाद में: 'देखो—जी, चिड़ियों को मत निकालो', क्योंकि अंडों की संभावना।

Answer: पहले माँ पिताजी के कूदने पर हँसती और व्यंग्य करती हैं। पर जब गौरैया बार-बार लौटती हैं, तो वे गंभीर होकर कहती हैं कि चिड़ियों को मत निकालो, शायद अंडे दे दिए हैं।

Example 6: आज के शहरों में गौरैया · 2 marks · Short answerHOTS / competency

आज शहरों में गौरैया बहुत कम दिखाई देती हैं। 'दो गौरैया' कहानी पढ़कर आप उन्हें बचाने के लिए क्या करेंगे? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कहानी की सीख: घर सबका साझा; पक्षियों को रहने की जगह चाहिए।
  2. उपाय: बालकनी में पानी-दाना, लकड़ी का घोंसला-डिब्बा, घोंसला न छेड़ना।

Answer: कहानी सिखाती है कि घर सबका साझा है। मैं बालकनी में पानी और दाना रखूँगा, लकड़ी का घोंसला-डिब्बा लगाऊँगा और किसी पक्षी का घोंसला कभी नहीं छेड़ूँगा।

Where the marks are

How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.

पिताजी के हाथ क्यों ठिठक गए (25-30 शब्द, 2 अंक) (2 marks)

StepMarks
घटना: घोंसले से नन्ही गौरैयों की 'चीं-चीं'1
कारण/भाव: बच्चों को देखकर मन पिघलना, करुणा1

बालकनी के घोंसले पर परिवार को समझाना (40-50 शब्द, 3 अंक) (3 marks)

StepMarks
कहानी से जुड़ाव (पिताजी का अनुभव)1
तर्क: बच्चे कुछ हफ़्तों में उड़ेंगे; घोंसला घर है1
व्यावहारिक हल1

Where students lose marks in दो गौरैया – भीष्म साहनी

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: यह लिखना कि माँ गौरैयों को भगाना चाहती थीं

    माँ शुरू से गौरैयों के पक्ष में थीं और अंत में दरवाज़े भी उन्होंने ही खोले।

    Do this: माँ के कथन ('चिड़ियों को मत निकालो', 'अब इन्होंने अंडे दे दिए होंगे') से उत्तर दें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: पिताजी को केवल 'क्रूर' बताना

    वे ज़िद्दी और गुस्सैल थे, पर अंत में दयालु निकले; चरित्र में यह बदलाव ज़रूरी है।

    Do this: 'गुस्सैल पर भीतर से कोमल' लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: घोंसले की जगह 'पेड़' या 'रोशनदान' लिखना

    घोंसला बैठक की छत के पंखे के गोले में था; रोशनदान केवल अंदर आने का रास्ता था।

    Do this: 'पंखे का गोला' याद रखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: उत्तर में कहानी का संदेश न लिखना

    विचारात्मक प्रश्नों में करुणा, साझा घर जैसा संदेश जोड़ना अपेक्षित है।

    Do this: अंतिम वाक्य में सीख लिखें।

    Usually costs: 1 अंक

Practice questions on दो गौरैया – भीष्म साहनी

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQExam level

    'दो गौरैया' कहानी के लेखक कौन हैं?
    (क) प्रेमचंद
    (ख) भीष्म साहनी
    (ग) माधवराव सप्रे
    (घ) उदयशंकर भट्ट

    Hint

    'तमस' के लेखक।

    Answer

    (ख) भीष्म साहनी

  2. Q2 · 1 mark · Very short answerExam level

    गौरैयों ने घोंसला कहाँ बनाया था?

    Hint

    बैठक की छत।

    Answer

    बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में।

  3. Q3 · 1 mark · Very short answerHarder exam level

    दरवाज़े बंद होने पर भी गौरैया दो बार अंदर कैसे आ गईं?

    Hint

    नीचे और ऊपर का रास्ता।

    Answer

    पहली बार दरवाज़ों के नीचे की खाली जगह से और दूसरी बार रोशनदान के टूटे शीशे से।

  4. Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level

    घोंसला उजड़ने के दौरान बाहर दीवार पर बैठी गौरैयों की हालत कैसी हो गई थी? इससे क्या पता चलता है? (25-30 शब्द)

    Hint

    दुबली, काली, चहकना बंद।

    Answer

    दोनों गौरैया कुछ दुबली और काली पड़ गई थीं और चहकना बंद कर चुकी थीं। इससे पता चलता है कि घर और बच्चों से अलग होने का दुख उन्हें भी गहराई से होता है।

  5. Q5 · 1 mark · MCQHarder exam level

    कथन (A): रात को सोने से पहले कथावाचक ने आँगन में गौरैयाँ नहीं देखीं और समझा कि वे हार मानकर चली गई हैं।
    कारण (R): अगली सुबह गौरैयाँ फिर से घर के अंदर मौजूद थीं।
    (क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
    (ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
    (ग) A सही, R गलत
    (घ) A गलत, R सही

    Hint

    R, A का कारण है या बाद की घटना?

    Answer

    (ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता; R बाद की घटना है, A का कारण नहीं।

  6. Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency

    मान लीजिए आपके घर की बालकनी में कबूतर ने अंडे दे दिए हैं और परिवार का एक सदस्य घोंसला हटाना चाहता है। 'दो गौरैया' के आधार पर आप उन्हें क्या समझाएँगे? (40-50 शब्द)

    Hint

    पिताजी का अनुभव; कुछ हफ़्तों की बात; बीच का रास्ता।

    Answer

    मैं उन्हें 'दो गौरैया' के पिताजी की कहानी सुनाऊँगा, जिन्होंने घोंसले में बच्चे देखकर लाठी रख दी थी। अंडे कुछ ही हफ़्तों में बच्चे बनकर उड़ जाएँगे। तब तक हम उस कोने को ढककर साफ़ रख सकते हैं; बाद में जाली लगाकर आगे से रोक सकते हैं।

  7. Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency

    कहानी में पिताजी कहते हैं, 'मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।' क्या अंत में पिताजी हार गए? अपने विचार लिखिए। (25-30 शब्द)

    Hint

    ज़िद हारी, इंसानियत जीती।

    Answer

    पिताजी की ज़िद हार गई, पर वे स्वयं जीत गए। नन्हे बच्चों पर दया करके उन्होंने गुस्सा छोड़ा, और यही उनकी सबसे बड़ी जीत है, इसलिए वे अंत में मुसकराते हैं।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.घर में कितने लोग रहते थे?Show answer

    तीन: माँ, पिताजी और कथावाचक।

  2. 2.आँगन में किसका पेड़ था?Show answer

    आम का।

  3. 3.गौरैयों को बाहर निकालने के लिए कौन-सा दरवाज़ा खुला छोड़ा गया?Show answer

    किचन वाला।

  4. 4.पिताजी घोंसला तोड़ने के लिए किस पर चढ़े?Show answer

    स्टूल पर।

  5. 5.भीष्म साहनी को किस उपन्यास पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?Show answer

    तमस।

  6. 6.अंत में माँ-बाप गौरैया ने बच्चों को क्या खिलाया?Show answer

    चुग्गा।

Quick revision checklist

The night before the exam: can you do each of these without looking?

  • क्या आप बता सकते हैं कि पिताजी घर को सराय क्यों कहते थे?
  • क्या आप गौरैयों को भगाने के पिताजी के तरीके क्रम से गिना सकते हैं?
  • क्या आप माँ और पिताजी की दो-दो विशेषताएँ प्रमाण सहित लिख सकते हैं?
  • क्या आप समझा सकते हैं कि पिताजी का मन क्यों बदला?
  • क्या आप कहानी का संदेश अपने जीवन से जोड़ सकते हैं?

दो गौरैया – भीष्म साहनी: frequently asked questions

'दो गौरैया' कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

घर और धरती सभी जीवों की साझी है; दया और ममता के आगे गुस्सा और ज़िद हार जाते हैं।

कहानी कौन सुना रहा है?

घर का बेटा (कथावाचक), जो माँ और पिताजी के साथ रहता है।

पिताजी ने गौरैयों का घोंसला कैसे उतारना शुरू किया?

वे पंखे के नीचे स्टूल रखकर उस पर चढ़े और लाठी का सिरा घास के तिनकों पर रखकर घुमाने लगे, जिससे तिनके, रुई के फाहे, धागे और थिगलियाँ लाठी पर लिपटते गए।

कहानी का अंत कैसा है?

सुखद। पिताजी लाठी रख देते हैं, माँ दरवाज़े खोलती हैं, गौरैया बच्चों को चुग्गा खिलाती हैं और पिताजी मुसकराते रहते हैं।

Based on: NCERT मल्हार, कक्षा 8 (Reprint 2026-27), पाठ 2: दो गौरैया; NCERT मल्हार, कक्षा 8: पुस्तक पृष्ठ