स्वदेश: Class 8 हिंदी मल्हार पाठ 1, भावार्थ और प्रश्न-उत्तर
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'स्वदेश' गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' की देश-प्रेम की कविता है और मल्हार (कक्षा 8) का पहला पाठ है। कवि कहते हैं कि जिस हृदय में अपने देश के लिए प्यार नहीं, वह हृदय नहीं, पत्थर है। जिस देश की मिट्टी में हम पले-बढ़े, उसके लिए साहस, भावना और त्याग रखना ही सच्चा जीवन है।
What स्वदेश – गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' is about
स्वदेश NCERT की हिंदी पुस्तक मल्हार (कक्षा 8) की पहली कविता है। इसके कवि गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' (1883-1972) हैं। पाठ के कवि-परिचय के अनुसार उनका जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले में हुआ; उन्होंने ब्रजभाषा में कविता लिखना शुरू किया और फिर खड़ी बोली के श्रेष्ठ कवियों में स्थान बनाया। सरकारी नौकरी के कारण उन्हें 'सनेही' के अलावा 'त्रिशूल' उपनाम भी रखना पड़ा। उन्होंने देश-प्रेम के साथ किसान, मज़दूर और सामाजिक कुरीतियों पर भी कविताएँ लिखीं; 'त्रिशूल तरंग', 'राष्ट्रीय मंत्र' और 'कृषक क्रंदन' उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।
यह कविता एक आह्वान गीत है, जो हमें देश से प्रेम करने और उसके लिए कुछ कर दिखाने के लिए जगाती है। कविता की टेक है: 'वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।'
कक्षा 8 की परीक्षा विद्यालय लेता है और CBSE इसका प्रश्न-पत्र ढाँचा नहीं देता, इसलिए यहाँ प्रश्न कक्षा 9-10 जैसे रखे गए हैं: काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न।
Weightage: कक्षा 8 का मूल्यांकन विद्यालय स्वयं करता है; CBSE कक्षा 8 के लिए कोई पाठ्यक्रम या प्रश्न-पत्र का ढाँचा जारी नहीं करता, और विद्यालय NCERT की पुस्तक मल्हार पढ़ाते हैं। इसलिए यहाँ के प्रश्न कक्षा 9-10 हिंदी के प्रश्न-प्रकारों (पठित अंश पर बहुविकल्पी प्रश्न, 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न) के ढाँचे पर बने हैं।Source: CBSE पाठ्यक्रम दस्तावेज़ 2026-27 (कक्षा 9-12) और NCERT मल्हार, कक्षा 8 (Reprint 2026-27)
स्वदेश – गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही': explanation
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
पहला भाग: देश-प्रेम के बिना जीवन अधूरा। कवि साफ़ कहते हैं कि जिस हृदय में अपने देश के लिए प्यार नहीं है, वह हृदय नहीं, पत्थर है, यानी उसमें कोई संवेदना नहीं। जो जीवन अपने भीतर और दूसरों में जोश नहीं जगा सका, उसका कोई सार (मूल्य) नहीं। जो व्यक्ति दुनिया के साथ कदम मिलाकर नहीं चल सका, दुनिया भी उसकी नहीं होती। जिसने साहस छोड़ दिया, वह कभी अपने लक्ष्य के पार नहीं पहुँच सकता। जिसने अपनी जाति (समाज और राष्ट्र) की भलाई के लिए कुछ नहीं किया, उसका भी भला नहीं होगा। जिस मन में भावनाएँ नहीं और जिसमें रस की धारा नहीं बहती, वह भी पत्थर के समान है।
दूसरा भाग: जिस देश ने सब कुछ दिया। कवि याद दिलाते हैं कि इसी देश की मिट्टी में हम उगे और बढ़े, इसी में हमें दाना-पानी मिला। यहीं हमारे माता-पिता और भाई-बंधु हैं, और हम इस देश के राजा-रानी हैं, अर्थात देश हमारा है और हम उसके मालिक भी हैं और ज़िम्मेदार भी। इस देश ने अपने खज़ाने खोल दिए और बेजोड़ (लासानी) नौ रत्न दिए; इस पर ज्ञानी भी मोहित हैं और पूरी दुनिया दीवानी है। ऐसे देश के लिए जिसका मन नहीं पिघलता, क्या वह धरती पर बोझ नहीं है?
तीसरा भाग: निडर होकर कर्तव्य। यह बिल्कुल निश्चित है कि एक दिन सबको जाना है। समय (काल) का दीपक हमेशा जल रहा है और परवानों (पतंगों) को उसमें जलना ही है। इसलिए डरने की कोई बात नहीं; सब कुछ हमारे अपने हाथ में है, हमारे पास साधनों (तोप-तलवार) की कमी नहीं। अंत में कवि फिर टेक दोहराते हैं कि देश-प्रेम से खाली हृदय पत्थर है।
केंद्रीय भाव: देश-प्रेम केवल भावना नहीं, जोश, साहस, संवेदना और कर्तव्य का नाम है। जिस देश से हमें जीवन, परिवार और पहचान मिली, उसके लिए निडर होकर काम करना ही सच्चा जीवन है।
Themes and message
देश-प्रेम ही सच्चे हृदय की पहचान
कवि के अनुसार हृदय वही है जिसमें देश के लिए प्यार हो; बाकी हृदय पत्थर जैसे कठोर और भावनाहीन हैं।
From the text: 'वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।'
जोश और साहस से भरा जीवन
जो जीवन दूसरों में उत्साह न जगा सके और जो साहस छोड़ दे, वह सफल नहीं हो सकता।
From the text: 'जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं।'
देश के प्रति कृतज्ञता
देश ने हमें मिट्टी, अन्न-जल, परिवार और अनमोल संपदा दी है; इसलिए उसके लिए मन में आदर और प्रेम होना स्वाभाविक कर्तव्य है।
From the text: 'जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, पाया जिसमें दाना-पानी।'
समाज की भलाई में अपनी भलाई
जो अपने समाज या राष्ट्र के उत्थान के लिए कुछ नहीं करता, उसका अपना भी उत्थान नहीं होता।
From the text: 'जिससे न जाति-उद्धार हुआ, होगा उसका उद्धार नहीं।'
मृत्यु का भय छोड़कर कर्तव्य
जीवन एक दिन समाप्त होना ही है, इसलिए डरने के बजाय देश के लिए निडर होकर कुछ करना चाहिए, जैसे पतंगा दीपक पर बिना डरे जाता है।
From the text: 'है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को॥'
The speaker and the people in the poem
कवि (वक्ता)
कविता का वक्ता, जो देशवासियों को देश-प्रेम के लिए जगा रहा है।
- देशभक्त और ओजस्वी
- प्रेरक: आह्वान के स्वर में बोलता है
- निडर: मृत्यु से नहीं डरता
- कृतज्ञ: देश के उपकार याद दिलाता है
'सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।'
देशवासी (संबोधित)
जिन्हें कवि संबोधित कर रहे हैं; 'हम' के रूप में देश के सभी नागरिक।
- देश के 'राजा-रानी': अधिकार भी, ज़िम्मेदारी भी
- जिनसे जोश, साहस और त्याग की आशा है
'हम हैं जिसके राजा-रानी॥'
Poetic devices
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| टेक (पंक्ति की पुनरावृत्ति) | 'वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।' (आरंभ, बीच में और अंत में) | मुख्य संदेश बार-बार मन पर छाप छोड़ता है; कविता गीत जैसी बनती है। |
| रूपक अलंकार | 'काल-दीप' (काल पर दीपक का आरोप) | समय/मृत्यु को जलते दीपक और मनुष्य को परवाने के रूप में दिखाकर निडरता का भाव जगाता है। |
| अनुप्रास और पुनरुक्ति | 'निश्चित है निस्संशय निश्चित' | 'न' और 'स' की आवृत्ति और 'निश्चित' की दोहराहट से बात पर ज़ोर। |
| प्रश्न-शैली (प्रश्न के रूप में कथन) | 'क्या है वह भू का भार नहीं', 'क्या तोप नहीं तलवार नहीं' | पाठक को सोचने पर मजबूर करती है; उत्तर प्रश्न में ही छिपा है। |
| तुक (अंत्यानुप्रास) | 'दाना-पानी' / 'राजा-रानी', 'लासानी' / 'दीवानी' | कविता में लय और गेयता आती है; याद रखना आसान होता है। |
| शब्द-क्रम बदलना ('है' पहले) | 'है जान एक दिन जाने को', 'है काल-दीप जलता हरदम' | 'है' पंक्ति के आरंभ में आने से लय बनती है; अंत में होता तो पंक्ति गद्य जैसी लगती। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
कवि: कविता की टेक; आरंभ और अंत में।
देश-प्रेम के बिना हृदय संवेदनहीन पत्थर है।
जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं।
कवि: पहला भाग।
साहस के बिना कोई लक्ष्य पूरा नहीं होता।
जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, पाया जिसमें दाना-पानी।
कवि: दूसरा भाग; देश के उपकार।
देश ने हमें पाला-पोसा; इसलिए उसके प्रति कृतज्ञ रहना।
उस पर है नहीं पसीजा जो, क्या है वह भू का भार नहीं।
कवि: दूसरा भाग।
देश के लिए जिसका मन न पिघले, वह धरती पर बोझ है।
स्वदेश – गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
देश-प्रेम रोज़ के कामों में
मान लीजिए स्कूल से लौटते समय आप देखते हैं कि पार्क में नल खुला छूट गया है और पानी बह रहा है।
'स्वदेश' कविता के अनुसार आपका क्या करना देश-प्रेम होगा?
Try it first, then show the solutionSolution
- देश के संसाधन (पानी) भी देश के 'खज़ाने' हैं।
- नल बंद करना और ज़िम्मेदार व्यक्ति को बताना।
Answer: नल बंद करना और पार्क के कर्मचारी को सूचना देना ही छोटा-सा देश-प्रेम है, क्योंकि पानी भी देश की संपदा है और 'राजा-रानी' होने के नाते उसकी रक्षा हमारी ज़िम्मेदारी है।
Memory hook: देश का पानी, मेरी निगरानी।
साहस
कल्पना कीजिए कि आपको स्कूल की भाषण प्रतियोगिता में भाग लेना है, पर मंच से डर लगता है।
कविता की कौन-सी पंक्ति आपको हिम्मत देगी?
Try it first, then show the solutionSolution
- 'जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं।'
- डर के आगे बढ़कर अभ्यास और प्रयास।
Answer: यह पंक्ति याद दिलाएगी कि साहस छोड़ दिया तो सफलता नहीं मिलेगी; इसलिए अभ्यास करके मंच पर जाना ही सही रास्ता है।
Memory hook: साहस साथ, तो पार हाथ।
समाज की भलाई
यदि आपकी कॉलोनी में बच्चों के लिए पुस्तकालय बनाने में सबसे मदद माँगी जाए, तो आप क्या करेंगे?
'जिससे न जाति-उद्धार हुआ, होगा उसका उद्धार नहीं' के आधार पर उत्तर दीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- सबकी भलाई के काम में हाथ बँटाना।
- पुरानी किताबें दान, समय देना; इससे अपना भी लाभ।
Answer: अपनी पुरानी किताबें देकर और छुट्टी के दिन व्यवस्था में मदद करके; पुस्तकालय से सबके साथ मेरा भी ज्ञान बढ़ेगा, यही 'जाति-उद्धार' में अपना उद्धार है।
Memory hook: सबका भला, तो मेरा भला।
Topics in this chapter
How the school exam asks स्वदेश – गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित काव्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1 अंक प्रत्येक) | कविता की चार-छह पंक्तियाँ देकर: पंक्ति का भाव, 'हृदय पत्थर है' का आशय, 'राजा-रानी' किसे कहा, अलंकार, कथन-कारण। | पहले पंक्ति का सरल अर्थ सोचें, फिर विकल्पों में से भाव वाला उत्तर चुनें। |
| भाव स्पष्ट करना (2 अंक, 25-30 शब्द) | 'उस पर है नहीं पसीजा जो...' या 'है काल-दीप जलता हरदम...' का भाव। | सरल अर्थ एक वाक्य में, फिर कवि का संदेश एक वाक्य में। |
| विचारात्मक प्रश्न | आज देश-प्रेम कैसे दिखाएँ; कविता को आह्वान गीत क्यों कहते हैं; हृदय को पत्थर कहने का कारण। | कविता की पंक्ति से जोड़कर अपने जीवन का उदाहरण दें। |
Tricks to remember स्वदेश – गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
कविता के तीन भाग: 'ह-दे-नि'
हृदय (देश-प्रेम बिना हृदय पत्थर) → देश के उपकार (मिट्टी, दाना-पानी, खज़ाने) → निडरता (काल-दीप, तोप-तलवार)।
Use it when: सारांश और केंद्रीय भाव लिखने में।
चार 'नहीं' वाले लोग
जोश नहीं जगाया → जीवन में सार नहीं; साहस छोड़ा → पार नहीं; जाति-उद्धार नहीं → अपना उद्धार नहीं; भाव नहीं → हृदय पत्थर।
Use it when: पहले काव्यांश के प्रश्न।
कवि-परिचय: 'उन्नाव का त्रिशूल'
सनेही (1883-1972), उन्नाव (उत्तर प्रदेश), ब्रजभाषा से खड़ी बोली, उपनाम त्रिशूल; रचनाएँ: त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र, कृषक क्रंदन।
Use it when: कवि-परिचय वाले प्रश्न।
स्वदेश – गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही': extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: काव्यांश 1: हृदय और साहस
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जो जीवित जोश जगा न सका,
उस जीवन में कुछ सार नहीं।
(1) · 1 mark · MCQ
'उस जीवन में कुछ सार नहीं' में 'सार' शब्द का अर्थ है:
(क) सारांश
(ख) मूल्य या सार्थकता
(ग) रस
(घ) नमक(2) · 1 mark · MCQ
कवि के अनुसार किस जीवन में 'कुछ सार नहीं' है?
(क) जो बहुत लंबा हो
(ख) जो जोश न जगा सके
(ग) जो गाँव में बीता हो
(घ) जिसमें धन न हो(3) · 1 mark · MCQ
'जो जीवित जोश जगा न सका' में किस वर्ण की आवृत्ति है और कौन-सा अलंकार है?
(क) 'ज' की आवृत्ति, अनुप्रास अलंकार
(ख) 'स' की आवृत्ति, यमक अलंकार
(ग) 'ग' की आवृत्ति, श्लेष अलंकार
(घ) 'न' की आवृत्ति, उपमा अलंकार(4) · 1 mark · Assertion-reason
(संदर्भ: कवि आगे कहते हैं कि जिसने साहस छोड़ दिया, वह पार नहीं पहुँच सकेगा।) कथन (A): साहस छोड़ देने वाला व्यक्ति अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँचता।
कारण (R): कठिनाइयों को पार करने के लिए साहस की ज़रूरत होती है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।(5) · 1 mark · MCQ
काव्यांश की लगभग हर दूसरी पंक्ति 'नहीं' पर समाप्त होती है। इसका क्या प्रभाव है?
(क) कविता निराशा से भर जाती है
(ख) हर पंक्ति में बताई गई कमी पर ज़ोर पड़ता है और लय बनती है
(ग) कविता गद्य जैसी लगने लगती है
(घ) कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता
Show the answersAnswers
- (ख) मूल्य या सार्थकता; जो जीवन जोश न जगा सके, वह व्यर्थ है।
- (ख) जो जोश न जगा सके।
- (क) 'ज' की आवृत्ति (जो, जीवित, जोश, जगा), अनुप्रास अलंकार।
- (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- (ख) हर पंक्ति में बताई गई कमी पर ज़ोर पड़ता है और लय बनती है।
Extract 2: काव्यांश 2: देश के उपकार
जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें,
हम हैं जिसके राजा-रानी॥
(1) · 1 mark · MCQ
'पाया जिसमें दाना-पानी' में 'दाना-पानी' का आशय है:
(क) केवल अनाज और जल
(ख) जीवन के लिए ज़रूरी भोजन और पालन-पोषण
(ग) पक्षियों का भोजन
(घ) व्यापार की वस्तुएँ(2) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: कवि आगे कहते हैं कि देश ने खजाने खोलकर नवरत्न दिए हैं, जिन्हें वे 'लासानी' कहते हैं।) 'लासानी' शब्द का अर्थ है:
(क) बेजोड़, अनुपम
(ख) पुराना
(ग) छिपा हुआ
(घ) सस्ता(3) · 1 mark · MCQ
(संदर्भ: इसके बाद की पंक्ति है—'जिसने कि खजाने खोले हैं'।) 'जिसने कि खजाने खोले हैं' पंक्ति में देश को किस रूप में दिखाया गया है?
(क) एक कंजूस राजा के रूप में
(ख) एक उदार दाता के रूप में, जिसने अपनी संपदा सबके लिए खोल दी
(ग) एक व्यापारी के रूप में
(घ) एक बैंक के रूप में(4) · 1 mark · MCQ
काव्यांश में 'जिसकी', 'जिसमें', 'जिसके', 'जिसने' शब्द किसके लिए आए हैं?
(क) कवि के लिए
(ख) स्वदेश (अपने देश) के लिए
(ग) माता-पिता के लिए
(घ) राजा के लिए(5) · 1 mark · MCQ
इस काव्यांश में देश और नागरिकों का संबंध किस जैसा बताया गया है?
(क) मालिक और नौकर जैसा
(ख) परिवार जैसा: देश में ही माता-पिता और बंधु हैं, और हम उसके राजा-रानी हैं
(ग) दुकानदार और ग्राहक जैसा
(घ) मेहमान और मेज़बान जैसा
Show the answersAnswers
- (ख) जीवन के लिए ज़रूरी भोजन और पालन-पोषण।
- (क) बेजोड़, अनुपम।
- (ख) एक उदार दाता के रूप में, जिसने अपनी संपदा सबके लिए खोल दी।
- (ख) स्वदेश (अपने देश) के लिए।
- (ख) परिवार जैसा: देश में ही माता-पिता और बंधु हैं, और हम उसके राजा-रानी हैं।
स्वदेश – गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही': exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: किसका जीवन व्यर्थ · 2 marks · Short answerExam level
कविता के पहले भाग में कवि किन लोगों के जीवन को व्यर्थ बताते हैं? किन्हीं तीन का उल्लेख कीजिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पहला भाग: 'नहीं' पर खत्म होने वाली पंक्तियाँ देखें।
- तीन उदाहरण: जोश न जगाने वाला, साहस छोड़ने वाला, समाज का भला न करने वाला।
Answer: जो जोश न जगा सके, उसके जीवन में सार नहीं; जिसने साहस छोड़ दिया, वह लक्ष्य तक नहीं पहुँचता; और जिसने समाज का भला नहीं किया, उसका भी भला नहीं होगा।
Example 2: देश के उपकार · 2 marks · Short answerHarder exam level
कवि के अनुसार हमें अपने देश के प्रति कृतज्ञ क्यों होना चाहिए? कविता से तीन कारण लिखिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- दूसरा भाग: देश ने हमें क्या-क्या दिया।
- मिट्टी और दाना-पानी, परिवार, खज़ाने और नौ रत्न।
Answer: इसी देश की मिट्टी में हम पले-बढ़े और दाना-पानी पाया; यहीं हमारे माता-पिता और भाई-बंधु हैं; और इसी देश ने खज़ाने खोलकर हमें बेजोड़ नौ रत्न दिए।
Example 3: पत्थर और भू का भार · 2 marks · Short answerHarder exam level
कविता में 'हृदय पत्थर है' और 'भू का भार' दोनों बातें किस व्यक्ति के लिए कही गई हैं? इन दोनों में क्या समानता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- दोनों उस व्यक्ति के लिए जिसके मन में देश-प्रेम नहीं।
- समानता: पत्थर और बोझ, दोनों भावहीन और किसी काम के नहीं।
Answer: दोनों बातें उस व्यक्ति के लिए हैं जिसके मन में देश के लिए प्रेम नहीं। समानता यह है कि पत्थर और बोझ दोनों भावहीन हैं; ऐसा व्यक्ति देश के किसी काम का नहीं।
Example 4: काल-दीप और परवाने · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को' पंक्ति से कवि क्या प्रेरणा देना चाहते हैं? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- काल (समय/मृत्यु) दीपक की तरह हमेशा जल रहा है।
- जैसे पतंगा निडर होकर दीपक पर जाता है, वैसे ही मृत्यु का डर छोड़कर देश के लिए काम।
Answer: मृत्यु निश्चित है, जैसे दीपक पर पतंगे का जलना। इसलिए मृत्यु से डरने के बजाय हमें निडर होकर देश के लिए साहस और त्याग से काम करना चाहिए।
Example 5: जाति-उद्धार और अपना उद्धार · 2 marks · Short answerHOTS / competency
'जिससे न जाति-उद्धार हुआ, होगा उसका उद्धार नहीं' पंक्ति आज के जीवन में कैसे सही बैठती है? एक उदाहरण दीजिए। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- जाति = समाज/राष्ट्र; उद्धार = भलाई, उन्नति।
- उदाहरण: मोहल्ले की सफ़ाई में हाथ न बँटाने वाला भी गंदगी से बीमार पड़ता है।
Answer: समाज की भलाई में ही अपनी भलाई है। जैसे मोहल्ले की सफ़ाई में हाथ न बँटाने वाला भी गंदगी और बीमारी से नहीं बच सकता, वैसे ही समाज को छोड़कर कोई अकेला आगे नहीं बढ़ता।
Example 6: 'नहीं' और प्रश्नों का प्रभाव · 2 marks · Short answerExam level
'स्वदेश' में कवि सीधे उपदेश देने के बजाय 'नहीं' और प्रश्नों का सहारा लेते हैं, जैसे 'क्या है वह भू का भार नहीं'। इससे कविता का प्रभाव कैसे बढ़ता है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- 'नहीं' से हर कमी पर ज़ोर पड़ता है।
- प्रश्न पाठक को खुद सोचने पर मजबूर करता है; उत्तर प्रश्न में ही छिपा है।
Answer: 'नहीं' से हर कमी पर ज़ोर पड़ता है, और प्रश्न पाठक को स्वयं सोचने पर मजबूर करते हैं। उत्तर प्रश्न में ही छिपा होता है, इसलिए संदेश मन में गहराई से उतरता है।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
'है काल-दीप जलता हरदम, जल जाना है परवानों को' का भाव (25-30 शब्द, 2 अंक) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| सरल अर्थ: मृत्यु निश्चित, जैसे दीपक पर पतंगे का जलना | 1 |
| संदेश: मृत्यु का डर छोड़कर देश के लिए निडर कर्म | 1 |
आज विद्यार्थी 'स्वदेश' की भावना कैसे अपनाए (40-50 शब्द, 3 अंक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| पहला काम, कविता से जुड़ा | 1 |
| दूसरा काम | 1 |
| तीसरा काम | 1 |
Where students lose marks in स्वदेश – गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: 'हृदय पत्थर है' का अर्थ 'हृदय मज़बूत है' लिख देना
यहाँ पत्थर कठोरता और भावहीनता का प्रतीक है, ताकत का नहीं।
Do this: 'संवेदनहीन, भावनाहीन हृदय' लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 'जाति-उद्धार' को किसी एक जाति या बिरादरी से जोड़ना
कविता में 'जाति' का अर्थ पूरा समाज या राष्ट्र है।
Do this: 'समाज/राष्ट्र की भलाई' लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 'तोप-तलवार' वाली पंक्ति को युद्ध का आह्वान मान लेना
कवि का आशय है कि साधनों की कमी नहीं, कमी साहस की है; पंक्ति हिम्मत जगाती है।
Do this: 'सब कुछ अपने हाथ में है, बस साहस चाहिए' लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: भाव वाले प्रश्न में केवल शब्दार्थ लिखना
2 अंक के लिए सरल अर्थ के साथ कवि का संदेश भी चाहिए।
Do this: पहले वाक्य में अर्थ, दूसरे में संदेश।
Usually costs: 1 अंक
Practice questions on स्वदेश – गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
'स्वदेश' कविता के कवि कौन हैं?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
(ग) दुष्यंत कुमार
(घ) गिरिजा कुमार माथुरHint
पाठ 1।
Answer
(ख) गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
Q2 · 1 mark · Very short answerExam level
सरकारी नौकरी के कारण 'सनेही' जी को कौन-सा दूसरा उपनाम रखना पड़ा?
Hint
उनकी एक रचना के नाम में भी है।
Answer
'त्रिशूल'।
Q3 · 1 mark · Very short answerHarder exam level
'निस्संशय' शब्द का अर्थ लिखिए और उसका एक वाक्य में प्रयोग कीजिए।
Hint
संशय = संदेह।
Answer
निस्संशय = बिना किसी संदेह के। वाक्य: मेहनत करने वाला निस्संशय सफल होगा।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level
'सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं' से कवि का क्या आशय है? (25-30 शब्द)
Hint
साधनों की कमी नहीं; कमी साहस की।
Answer
कवि कहते हैं कि हमारे पास शक्ति और साधनों की कोई कमी नहीं; सब कुछ हमारे हाथ में है। ज़रूरत केवल साहस और इच्छाशक्ति से उनका उपयोग करने की है।
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
आज के समय में एक विद्यार्थी 'स्वदेश' कविता की भावना को अपने रोज़ के जीवन में कैसे उतार सकता है? तीन काम बताइए। (40-50 शब्द)
Hint
देश-प्रेम केवल सीमा पर नहीं, रोज़ के कामों में भी।
Answer
पहला, सार्वजनिक संपत्ति (बस, पार्क, स्कूल की बेंच) को नुकसान न पहुँचाकर और साफ़ रखकर। दूसरा, पानी-बिजली बचाकर और पेड़ लगाकर देश के संसाधनों की रक्षा करके। तीसरा, मन लगाकर पढ़ाई करके और दूसरों की मदद करके, ताकि देश आगे बढ़े।
Q6 · 1 mark · MCQHarder exam level
कथन (A): कविता में 'है जान एक दिन जाने को' पंक्ति में 'है' शब्द पहले रखा गया है।
कारण (R): इससे पंक्ति में लय आती है; अंत में रखने पर पंक्ति गद्य जैसी लगती।
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
(ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
(ग) A सही, R गलत
(घ) A गलत, R सहीHint
कविता की लय।
Answer
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
Q7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आपकी कक्षा 15 अगस्त पर एक नाटक कर रही है और आपको उसके अंत में दो पंक्तियाँ बोलनी हैं। 'स्वदेश' कविता की कौन-सी दो पंक्तियाँ चुनेंगे और क्यों? (25-30 शब्द)
Hint
टेक की पंक्तियाँ सबसे असरदार।
Answer
मैं टेक की पंक्तियाँ 'वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं' चुनूँगा, क्योंकि इनमें कविता का पूरा संदेश है और ये सुनने वालों के मन को सीधे छू लेती हैं।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'स्वदेश' कविता किस पुस्तक का पहला पाठ है?Show answer
मल्हार (कक्षा 8)।
2.सनेही जी का जन्म किस ज़िले में हुआ?Show answer
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)।
3.'लासानी' का अर्थ?Show answer
बेजोड़, अनुपम।
4.'पसीजना' का अर्थ?Show answer
मन का पिघलना, दया या प्रेम जागना।
5.देश के लिए जिसका मन न पसीजे, कवि उसे क्या कहते हैं?Show answer
भू का भार (धरती पर बोझ)।
6.'काल-दीप' में कौन-सा अलंकार है?Show answer
रूपक।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप कविता के तीन भागों का भाव अपने शब्दों में बता सकते हैं?
- क्या आप समझा सकते हैं कि हृदय को पत्थर क्यों कहा गया?
- क्या आप 'राजा-रानी', 'भू का भार' और 'काल-दीप' का आशय लिख सकते हैं?
- क्या आप कविता की तुक वाली दो जोड़ियाँ और एक रूपक बता सकते हैं?
- क्या आप कवि-परिचय के तीन तथ्य लिख सकते हैं?
स्वदेश – गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही': frequently asked questions
'स्वदेश' कविता का मुख्य भाव क्या है?
देश-प्रेम। जिस हृदय में देश के लिए प्यार नहीं, वह पत्थर है; देश के उपकार याद रखकर साहस और निडरता से उसके लिए काम करना ही सच्चा जीवन है।
कविता की टेक कौन-सी है?
'वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।' यह आरंभ, बीच और अंत में दोहराई गई है।
'परवाने' का क्या अर्थ है?
पतंगे, जो दीपक की लौ की ओर खिंचकर उसमें जल जाते हैं। कविता में यह निडर बलिदान का प्रतीक है।
'नव रत्न' से क्या संकेत है?
देश की अनमोल, बेजोड़ संपदा, जैसे प्रकृति, ज्ञान, कला और महान लोग। कवि कहते हैं कि देश ने ऐसे लासानी (बेजोड़) रत्न दिए हैं।
Based on: NCERT मल्हार, कक्षा 8 (Reprint 2026-27), पाठ 1: स्वदेश; NCERT मल्हार, कक्षा 8: पुस्तक पृष्ठ