हरिद्वार: Class 8 हिंदी मल्हार पाठ 4, भारतेंदु का पत्र और प्रश्न-उत्तर
Updated 15 October 2026 · Fact-checked
'हरिद्वार' भारतेंदु हरिश्चंद्र का एक पत्र है, जो 'कविवचन सुधा' पत्रिका में 14 अक्टूबर 1871 को छपा। इसमें लेखक संपादक को अपनी हरिद्वार-यात्रा का वर्णन लिखते हैं: हरे पर्वत, तपस्वी जैसे वृक्ष, गंगा का शीतल जल, हर की पैड़ी, पाँच तीर्थ, संतोषी पंडे और गंगा-तट पर पत्थर पर किए भोजन का सुख।
What हरिद्वार – भारतेंदु हरिश्चंद्र is about
हरिद्वार NCERT की हिंदी पुस्तक मल्हार (कक्षा 8) का चौथा पाठ है। यह पत्र विधा में लिखा यात्रा-वृत्तांत है। लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850-1885) सन् 1871 में हरिद्वार गए थे और उन्होंने 'कविवचन सुधा' पत्रिका के संपादक के नाम पत्र लिखकर यात्रा का वर्णन किया। इस पत्र की हिंदी लगभग 150 वर्ष पुरानी है, इसलिए 'घाम', 'ठंढे', 'बढ़ के', 'हेतु' जैसे पुराने रूप मिलते हैं।
पाठ के लेखक-परिचय के अनुसार भारतेंदु ने 'निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल' का उद्घोष किया; कविता, नाटक, निबंध और यात्रा-वृत्तांत लिखे; 'कविवचन सुधा', 'हरिश्चंद्र मैगजीन', 'हरिश्चंद्र चंद्रिका' और स्त्रियों के लिए 'बालाबोधिनी' पत्रिकाएँ निकालीं। उन्हें आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक माना जाता है। 'सत्य हरिश्चन्द्र', 'भारत-दुर्दशा', 'अंधेर नगरी' और 'सरयूपार की यात्रा' उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। वे मानते थे कि शिक्षा की पूर्ति पुस्तकों से ही नहीं, यात्राओं से भी होती है।
कक्षा 8 की परीक्षा विद्यालय लेता है और CBSE इसका प्रश्न-पत्र ढाँचा नहीं देता, इसलिए यहाँ प्रश्न कक्षा 9-10 जैसे रखे गए हैं: गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न और 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न।
Weightage: कक्षा 8 का मूल्यांकन विद्यालय स्वयं करता है; CBSE कक्षा 8 के लिए कोई पाठ्यक्रम या प्रश्न-पत्र का ढाँचा जारी नहीं करता, और विद्यालय NCERT की पुस्तक मल्हार पढ़ाते हैं। इसलिए यहाँ के प्रश्न कक्षा 9-10 हिंदी के प्रश्न-प्रकारों (पठित अंश पर बहुविकल्पी प्रश्न, 25-30 शब्दों के 2 अंक वाले प्रश्न) के ढाँचे पर बने हैं।Source: CBSE पाठ्यक्रम दस्तावेज़ 2026-27 (कक्षा 9-12) और NCERT मल्हार, कक्षा 8 (Reprint 2026-27)
हरिद्वार – भारतेंदु हरिश्चंद्र: summary
In our own words, in the order of the text. Read the NCERT text itself too: the board quotes from it.
पत्र की शुरुआत। भारतेंदु 'कविवचन सुधा' के संपादक को संबोधित करते हुए लिखते हैं कि उन्हें उस पुण्य भूमि का वर्णन करने में बड़ा आनंद हो रहा है, जहाँ पहुँचते ही मन शुद्ध हो जाता है।
प्रकृति का वर्णन। हरिद्वार तीन ओर से हरे-भरे पर्वतों से घिरा है। पर्वतों पर लताएँ सज्जनों के शुभ विचारों की तरह फैली हैं। बड़े-बड़े पेड़ ऐसे खड़े हैं मानो एक पैर पर तपस्या कर रहे हों और साधुओं की तरह धूप, ओस और वर्षा सहते हैं। वे फल, फूल, छाया, पत्ते, छाल, लकड़ी, सब कुछ देते हैं; पत्थर मारने पर भी फल देते हैं। पेड़ों पर रंग-बिरंगे पक्षी बिना डर के चहचहाते हैं। वर्षा के कारण चारों ओर हरियाली ऐसी है मानो यात्रियों के आराम के लिए हरा गलीचा बिछा हो।
गंगा का वर्णन। गंगा की पवित्र धारा राजा भगीरथ की उज्ज्वल कीर्ति की लता जैसी दिखती है। जल बहुत शीतल, मीठा, स्वच्छ और सफ़ेद है। यहाँ गंगा दो धाराओं में बँटती है: नील धारा और श्री गंगा; बीच में एक नीचा पर्वत है और नील धारा के तट पर एक छोटे पर्वत की चोटी पर चंडिका देवी की मूर्ति है। हरि की पैड़ी नाम का पक्का घाट है, जहाँ स्नान होता है। लेखक को आश्चर्य है कि यहाँ केवल गंगा ही देवता हैं।
लोग और तीर्थ। यहाँ क्रोधी और झगड़ालू लोग नहीं रहते। पंडे कनखल और ज्वालापुर से आते हैं और इतने संतोषी हैं कि एक पैसे को लाख के बराबर मान लेते हैं। पाँच मुख्य तीर्थ हैं: हरिद्वार (हरि की पैड़ी), कुशावर्त, नीलधारा, बिल्वपर्वत (विल्वेश्वर महादेव) और कनखल, जहाँ दक्ष ने यज्ञ किया था और सती ने शिव का अपमान न सहकर शरीर भस्म किया था।
लेखक का अनुभव। लेखक का मन वहाँ इतना प्रसन्न और निर्मल हुआ कि वर्णन से बाहर है। वे दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले में ठहरे। रात को ग्रहण हुआ और लोगों ने आनंद से स्नान किया; दिन में भागवत का पाठ हुआ। एक दिन उन्होंने गंगा-तट पर रसोई बनाकर पत्थर पर बैठकर भोजन किया; पास ही पानी के ठंडे छींटे आते थे। वह सुख सोने की थाली के भोजन से भी बढ़कर था। वहाँ की कुशा में दालचीनी-जावित्री जैसी सुगंध थी। अंत में वे लिखते हैं कि मन से वे अब भी वहीं रहते हैं, और संपादक से पत्र छापने का अनुरोध करते हैं।
संदेश: प्रकृति, सादगी और संतोष में ही सच्चा सुख और मन की शांति है।
Themes and message
प्रकृति का सौंदर्य और उदारता
हरे पर्वत, लताएँ, पक्षी, हरियाली और गंगा का शीतल जल; पेड़ साधुओं की तरह सब कुछ सहते और सब कुछ देते हैं।
From the text: 'सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।'
मन की शांति और पवित्रता
हरिद्वार पहुँचते ही लेखक का मन शुद्ध, प्रसन्न और निर्मल हो जाता है; वहाँ ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता है।
From the text: 'मेरा तो चित्त वहाँ जाते ही ऐसा प्रसन्न और निर्मल हुआ कि वर्णन के बाहर है।'
सादगी और संतोष में सुख
पत्थर पर बैठकर गंगा के किनारे खाया भोजन सोने की थाली के भोजन से बढ़कर लगा; पंडे एक पैसे को लाख मानते हैं।
From the text: 'उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।'
आस्था और संस्कृति
हरि की पैड़ी, पाँच तीर्थ, भगीरथ और दक्ष-सती की कथाएँ, ग्रहण-स्नान और भागवत-पाठ भारतीय परंपरा की झलक देते हैं।
From the text: हरिद्वार, कुशावर्त, नीलधारा, बिल्वपर्वत और कनखल का वर्णन।
यात्रा से शिक्षा
भारतेंदु मानते थे कि शिक्षा पुस्तकों के साथ यात्राओं से भी पूरी होती है; यह पत्र देखने, अनुभव करने और लिखने की इसी कला का उदाहरण है।
From the text: पाठ की भूमिका और पत्र का बारीक वर्णन।
Characters
भारतेंदु हरिश्चंद्र (पत्र-लेखक, 'यात्री')
पत्र लिखने वाले, जो हरिद्वार की यात्रा का अनुभव संपादक को बताते हैं।
- प्रकृति-प्रेमी और सूक्ष्म दर्शक
- आस्थावान और संवेदनशील
- सादगी में सुख खोजने वाले
- कल्पनाशील: पेड़ों को तपस्वी, हरियाली को गलीचा कहते हैं
पत्र के अंत में हस्ताक्षर: 'आपका मित्र यात्री'।
पंडे
हरिद्वार के पुरोहित, जो कनखल और ज्वालापुर से आते हैं।
- संतोषी: एक पैसे को लाख मानते हैं
'पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं।'
संपादक, 'कविवचन सुधा'
जिन्हें पत्र लिखा गया; जिनसे पत्र छापने का अनुरोध है।
- लेखक के मित्र ('मित्रवरेषु' संबोधन)
'श्रीमान कविवचन सुधा संपादक महामहिम मित्रवरेषु!'
How it is written
| Device | Example | Effect |
|---|---|---|
| उपमा अलंकार | 'वल्ली ... सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति फैलकर लहलहा रही है', 'साधुओं की भाँति घाम, ओस और वर्षा ... सहते हैं' | प्रकृति को मनुष्य के गुणों से जोड़कर चित्र सजीव बनाता है। |
| उत्प्रेक्षा (मानो) | 'मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं', 'मानो हरे गलीचा की जात्रियों के विश्राम के हेतु बिछायत बिछी थी' | कल्पना से दृश्य को सुंदर और यादगार बनाती है। |
| मानवीकरण | पेड़ों को सज्जन और तपस्वी बताना | पेड़ों की उदारता और सहनशीलता उभरती है। |
| पुरानी हिंदी के रूप | 'घाम', 'ठंढे-ठंढे', 'बढ़ के', 'हेतु', 'जात्रियों' | लगभग 150 वर्ष पुरानी भाषा का स्वाद; भाषा के बदलाव की झलक। |
| पत्र-शैली | संबोधन 'मित्रवरेषु!' और समापन 'आपका मित्र यात्री' | आत्मीयता; पाठक को लगता है जैसे लेखक उससे बात कर रहे हों। |
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।
भारतेंदु हरिश्चंद्र: हरिद्वार के वृक्षों का वर्णन।
पेड़ों की उदारता: बुरा करने वाले का भी भला।
मेरा तो चित्त वहाँ जाते ही ऐसा प्रसन्न और निर्मल हुआ कि वर्णन के बाहर है।
भारतेंदु हरिश्चंद्र: हरिद्वार के अनुभव पर।
पवित्र और प्राकृतिक वातावरण से मन की शांति।
पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं।
भारतेंदु हरिश्चंद्र: हरिद्वार के लोगों का वर्णन।
संतोष का गुण।
उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।
भारतेंदु हरिश्चंद्र: गंगा-तट पर भोजन।
सादगी और संतुष्टि में सच्चा सुख।
हरिद्वार – भारतेंदु हरिश्चंद्र in real life
Each concept, met in an everyday situation. Read the situation, answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
यात्रा-वृत्तांत लिखना
मान लीजिए आपकी कक्षा किसी ऐतिहासिक किले की सैर पर जाती है और लौटकर अनुभव लिखने को कहा जाता है।
भारतेंदु के पत्र से कौन-सी तीन बातें सीखकर आप अपना वर्णन रोचक बनाएँगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- आँख से देखा बारीक वर्णन (रंग, आवाज़, लोग)।
- उपमा/'मानो' से तुलना; अपनी भावनाएँ और एक यादगार पल।
Answer: मैं दृश्य का बारीक वर्णन करूँगा, 'मानो' और उपमा से तुलना करूँगा, और किसी एक यादगार पल (जैसे बुर्ज पर हवा) के साथ अपनी भावना लिखूँगा।
Memory hook: देखो, तुलना करो, महसूस करो, लिखो।
सादगी में सुख
कल्पना कीजिए कि जन्मदिन पर महँगे रेस्तराँ के बजाय परिवार पार्क में घर का बना खाना लेकर पिकनिक मनाता है।
भारतेंदु के अनुभव से यह दिन कैसा लग सकता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- पत्थर पर का भोजन सोने की थाली से बढ़कर।
- सुख साथ, प्रकृति और संतोष में।
Answer: पेड़ों की छाँव, ठंडी हवा और परिवार का साथ उस खाने को किसी भी महँगे भोजन से अधिक स्वादिष्ट और यादगार बना देगा, जैसे भारतेंदु को गंगा-तट पर लगा।
Memory hook: थाली नहीं, माहौल स्वाद देता है।
पेड़ों से सीख
यदि आपका कोई सहपाठी आपसे बुरा व्यवहार करे और बाद में उसे आपकी मदद चाहिए, तो?
'पत्थर मारने से फल देते हैं' वाली बात कैसे अपनाएँगे?
Try it first, then show the solutionSolution
- पेड़ बुरा करने वाले का भी भला करते हैं।
- पुरानी बात भूलकर मदद करना; इससे संबंध सुधरते हैं।
Answer: पुरानी बात भूलकर उसकी मदद करूँगा, जैसे पेड़ पत्थर मारने वाले को भी फल देते हैं; इससे मन बड़ा होता है और दोस्ती भी बन सकती है।
Memory hook: पेड़ बनो, फल दो।
Topics in this chapter
How the school exam asks हरिद्वार – भारतेंदु हरिश्चंद्र
The question patterns to expect, and the method that works for each.
| Question type | How it is asked | Method |
|---|---|---|
| पठित गद्यांश पर बहुविकल्पी प्रश्न (1 अंक प्रत्येक) | प्रकृति-वर्णन या भोजन वाला अंश देकर: उपमा/उत्प्रेक्षा पहचान, शब्दार्थ (घाम, वल्ली, मनोरथ), लेखक का भाव, कथन-कारण। | पुरानी हिंदी के शब्दों का आज का रूप सोचें (घाम = धूप)। |
| लघु उत्तर (2 अंक, 25-30 शब्द) | पेड़ों को सज्जन/तपस्वी क्यों कहा; पंडों का स्वभाव; पत्थर पर भोजन का सुख; पाँच तीर्थ। | पत्र की बात + उसका भाव। |
| विचारात्मक / रचनात्मक | यात्रा से शिक्षा कैसे मिलती है; आज का हरिद्वार; अपनी किसी यात्रा पर मित्र को पत्र। | भारतेंदु की शैली (संबोधन, वर्णन, अनुभव, समापन) अपनाएँ। |
Tricks to remember हरिद्वार – भारतेंदु हरिश्चंद्र
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
पाँच तीर्थ: 'ह-कु-नी-बि-क'
हरिद्वार (हरि की पैड़ी), कुशावर्त, नीलधारा, बिल्वपर्वत (विल्वेश्वर महादेव), कनखल (दक्ष यज्ञ, सती)।
Use it when: तीर्थों वाले प्रश्न।
पत्र के चार दृश्य: 'प-गं-लो-भो'
पर्वत-पेड़ (तपस्वी) → गंगा (दो धाराएँ, शीतल जल) → लोग (संतोषी पंडे) → भोजन (पत्थर पर, सोने की थाल से बढ़कर)।
Use it when: सारांश।
भारतेंदु की चार पत्रिकाएँ
कविवचन सुधा, हरिश्चंद्र मैगजीन, हरिश्चंद्र चंद्रिका, बालाबोधिनी (स्त्रियों के लिए); समय 1850-1885; 'आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक'।
Use it when: लेखक-परिचय।
हरिद्वार – भारतेंदु हरिश्चंद्र: extract-based questions
Read the extract, answer every part on paper, then open the answers.
Extract 1: गद्यांश 1: पर्वत और वृक्ष
यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है जिन पर्वतों पर अनेक प्रकार की वल्ली हरी-भरी सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति फैलकर लहलहा रही है और बड़े-बड़े वृक्ष भी ऐसे खड़े हैं मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं और साधुओं की भाँति घाम, ओस और वर्षा अपने ऊपर सहते हैं।
(1) · 1 mark · MCQ
हरिद्वार की भूमि कितनी ओर से पर्वतों से घिरी है?
(क) दो ओर
(ख) तीन ओर
(ग) चार ओर
(घ) एक ओर(2) · 1 mark · MCQ
'घाम' शब्द का अर्थ है:
(क) घास
(ख) धूप
(ग) घर
(घ) पसीना(3) · 1 mark · MCQ
'मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं' में कौन-सा अलंकार है?
(क) अनुप्रास
(ख) उत्प्रेक्षा
(ग) यमक
(घ) श्लेष(4) · 1 mark · MCQ
लताओं की तुलना किससे की गई है?
(क) साधुओं की तपस्या से
(ख) सज्जनों के शुभ मनोरथों से
(ग) गंगा की धारा से
(घ) पक्षियों के गीत से(5) · 1 mark · Assertion-reason
वृक्ष 'साधुओं की भाँति घाम, ओस और वर्षा अपने ऊपर सहते हैं'। वृक्षों के इस गुण से मनुष्य क्या सीख सकता है?
(क) कठिनाइयों को धैर्य से सहना
(ख) बारिश से बचकर रहना
(ग) धूप में बाहर न निकलना
(घ) तपस्या के लिए जंगल चले जाना
Show the answersAnswers
- (ख) तीन ओर।
- (ख) धूप।
- (ख) उत्प्रेक्षा; 'मानो' से संभावना/कल्पना।
- (ख) सज्जनों के शुभ मनोरथों से।
- (क) कठिनाइयों को धैर्य से सहना।
Extract 2: गद्यांश 2: पत्थर पर भोजन
एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया। जल के छलके पास ही ठंढे-ठंढे आते थे। उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।
(1) · 1 mark · MCQ
लेखक ने भोजन कहाँ किया?
(क) धर्मशाला में
(ख) गंगा-तट पर पत्थर पर
(ग) दीवान कृपा राम के घर में
(घ) मंदिर में(2) · 1 mark · MCQ
'छलके' का यहाँ अर्थ है:
(क) बरतन
(ख) पानी के छींटे या हिलोरें
(ग) फल के छिलके
(घ) पत्थर(3) · 1 mark · MCQ
'रसोई करके' का यहाँ अर्थ है:
(क) रसोईघर बनवाकर
(ख) भोजन पकाकर
(ग) फलों का रस निकालकर
(घ) बरतन धोकर(4) · 1 mark · MCQ
'ठंढे-ठंढे' और 'बढ़ के' जैसे शब्द-रूप बताते हैं कि:
(क) छपाई में गलती है
(ख) पत्र की हिंदी लगभग 150 वर्ष पुरानी है
(ग) यह अंग्रेज़ी का अनुवाद है
(घ) यह कविता है(5) · 1 mark · MCQ
इस गद्यांश में लेखक पत्थर पर किए भोजन की तुलना किससे करते हैं?
(क) चाँदी के कटोरे से
(ख) सोने की थाल के भोजन से
(ग) राजमहल की दावत से
(घ) मंदिर के प्रसाद से
Show the answersAnswers
- (ख) गंगा-तट पर पत्थर पर।
- (ख) पानी के छींटे या हिलोरें।
- (ख) भोजन पकाकर।
- (ख) पत्र की हिंदी लगभग 150 वर्ष पुरानी है।
- (ख) सोने की थाल के भोजन से।
हरिद्वार – भारतेंदु हरिश्चंद्र: exam-level solved questions
Ordered from exam level to HOTS. Cover the solution, write your own, then compare step by step.
Example 1: वृक्ष क्या-क्या देते हैं · 2 marks · Short answerExam level
पत्र के अनुसार हरिद्वार के वृक्ष जीवन-भर और जल जाने के बाद भी लोगों को क्या-क्या देते हैं? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- जीवन-भर: फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी, जड़।
- जल जाने पर भी: कोयला और राख।
Answer: वृक्ष जीवन-भर फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़ देते हैं; जल जाने पर भी उनके कोयले और राख से लोगों का काम चलता है।
Example 2: पंडों का स्वभाव · 2 marks · Short answerExam level
पत्र के अनुसार हरिद्वार के पंडों की क्या विशेषता थी? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- कनखल और ज्वालापुर से आते थे।
- बड़े संतोषी: एक पैसे को लाख मानते।
Answer: पंडे और दुकानदार कनखल और ज्वालापुर से आते थे। लेखक के अनुसार पंडे बड़े विलक्षण संतोषी थे; वे एक पैसे को भी लाख के बराबर मानकर खुश हो जाते थे।
Example 3: पाँच तीर्थ · 2 marks · Short answerHarder exam level
पत्र में हरिद्वार क्षेत्र के कौन-से पाँच मुख्य तीर्थ बताए गए हैं? कनखल के बारे में क्या कथा है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- हरिद्वार, कुशावर्त, नीलधारा, बिल्वपर्वत, कनखल।
- कनखल: दक्ष का यज्ञ; सती ने शरीर भस्म किया।
Answer: पाँच तीर्थ हैं: हरिद्वार (हरि की पैड़ी), कुशावर्त, नीलधारा, बिल्वपर्वत और कनखल। कनखल में दक्ष ने यज्ञ किया था, जहाँ सती ने शिव का अपमान न सहकर अपना शरीर भस्म कर दिया।
Example 4: भोजन को सुखद बनाने वाली बातें · 2 marks · Short answerHarder exam level
गंगा-तट वाले भोजन के प्रसंग में कौन-सी बातें मिलकर उस साधारण भोजन को लेखक के लिए इतना सुखद बना देती हैं? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- अपने हाथ से रसोई; गंगा के जल के अत्यंत निकट पत्थर पर परोसना।
- पास आते ठंडे-ठंडे छलके; हरिद्वार का शांत, पवित्र वातावरण।
Answer: लेखक ने स्वयं रसोई बनाई, गंगा के जल के अत्यंत निकट पत्थर पर परोसा, पास ही ठंडे-ठंडे छलके आते रहे और चारों ओर शांत, पवित्र वातावरण था।
Example 5: यात्रा और शिक्षा · 2 marks · Short answerHOTS / competency
भारतेंदु मानते थे कि शिक्षा की पूर्ति यात्राओं से भी होती है। 'हरिद्वार' पत्र पढ़कर बताइए कि यात्रा से लेखक ने क्या-क्या सीखा या जाना। (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- भूगोल: गंगा की दो धाराएँ, पर्वत।
- इतिहास-संस्कृति: तीर्थ, दक्ष-सती कथा; जीवन-मूल्य: संतोष, सादगी।
Answer: यात्रा से लेखक ने गंगा की दो धाराओं और पर्वतों का भूगोल, पाँच तीर्थों और दक्ष-सती की कथा का इतिहास, और पंडों के संतोष तथा सादे भोजन से जीवन-मूल्य जाने।
Example 6: आज का हरिद्वार और भारतेंदु का हरिद्वार · 2 marks · Short answerHOTS / competency
भारतेंदु के समय गंगा का जल स्वच्छ, शीतल और मीठा था। आज अनेक नदियाँ प्रदूषित हैं। इस पत्र से हमें नदियों के प्रति क्या प्रेरणा मिलती है? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पत्र में गंगा का स्वच्छ, सफ़ेद, शीतल जल; जल-जंतुओं की क्रीड़ा।
- प्रेरणा: कचरा न डालें, सफ़ाई अभियान, जल बचाना।
Answer: पत्र बताता है कि गंगा कभी स्वच्छ, शीतल और जल-जंतुओं से भरी थी। हमें प्रेरणा मिलती है कि नदियों में कचरा न डालें, सफ़ाई में हाथ बँटाएँ और उनका वैसा ही रूप लौटाएँ।
Where the marks are
How a typical answer is marked: the value points the examiner looks for and the marks each earns.
पत्थर पर भोजन का सुख सोने की थाल से बढ़कर क्यों (25-30 शब्द, 2 अंक) (2 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| प्रसंग: गंगा-तट पर पत्थर पर भोजन, ठंडे छींटे | 1 |
| भाव: सुख मन की संतुष्टि और सादगी में | 1 |
भारतेंदु की शैली में यात्रा-पत्र के अंश (40-50 शब्द, 3 अंक) (3 marks)
| Step | Marks |
|---|---|
| आत्मीय संबोधन और समापन | 1 |
| उपमा/'मानो' वाला सजीव वर्णन | 1 |
| अपना अनुभव और भावना | 1 |
Where students lose marks in हरिद्वार – भारतेंदु हरिश्चंद्र
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: पत्र की तारीख या पत्रिका का नाम गलत लिखना
पत्र 'कविवचन सुधा' में 14 अक्टूबर 1871 को छपा; भारतेंदु उसी वर्ष हरिद्वार गए थे।
Do this: 'कविवचन सुधा, 1871' जोड़ी में याद रखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: 'पत्थर मारने से फल देते हैं' को सज्जन मनुष्यों का वर्णन मानना
यहाँ वृक्षों को सज्जन कहा गया है; यह वृक्षों का मानवीकरण है।
Do this: 'वृक्ष सज्जनों की तरह...' लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: पुरानी हिंदी के शब्दों को 'गलत वर्तनी' बताना
ये 150 वर्ष पुराने मान्य रूप हैं (घाम, ठंढे, बढ़ के)।
Do this: 'पुरानी हिंदी के रूप' कहें और आज का रूप साथ में दें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: पाँच तीर्थों में 'ऋषिकेश' या 'ज्वालापुर' गिन लेना
ज्वालापुर से पंडे आते थे, वह तीर्थ-सूची में नहीं; ऋषिकेश पत्र में नहीं।
Do this: 'ह-कु-नी-बि-क' सूत्र।
Usually costs: 1 अंक
Practice questions on हरिद्वार – भारतेंदु हरिश्चंद्र
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQExam level
भारतेंदु का 'हरिद्वार' पत्र किस पत्रिका में छपा था?
(क) सरस्वती
(ख) कविवचन सुधा
(ग) हंस
(घ) बालाबोधिनीHint
14 अक्टूबर 1871।
Answer
(ख) कविवचन सुधा
Q2 · 1 mark · Very short answerExam level
हरिद्वार में स्नान के पक्के घाट का क्या नाम बताया गया है?
Hint
हरि की...
Answer
हरि की पैड़ी।
Q3 · 1 mark · Very short answerHarder exam level
भारतेंदु ने पत्र के अंत में अपने नाम की जगह स्वयं को क्या लिखा?
Hint
आपका मित्र...
Answer
'आपका मित्र यात्री'।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder exam level
लेखक ने हरियाली की तुलना किससे की है और क्यों? (25-30 शब्द)
Hint
यात्रियों का विश्राम।
Answer
वर्षा के कारण चारों ओर फैली हरियाली की तुलना हरे गलीचे से की गई है, मानो यात्रियों के आराम के लिए बिछौना बिछाया गया हो। इससे हरियाली की कोमलता और सुंदरता झलकती है।
Q5 · 1 mark · MCQHarder exam level
कथन (A): लेखक के अनुसार हरिद्वार में झगड़े-लड़ाई का कहीं नाम नहीं था।
कारण (R): वहाँ क्रोध की खान जैसे मनुष्य रहते ही नहीं थे और वातावरण में ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का भाव था।
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
(ख) A और R दोनों सही, R व्याख्या नहीं करता
(ग) A सही, R गलत
(घ) A गलत, R सहीHint
पत्र का वातावरण।
Answer
(क) A और R दोनों सही, R व्याख्या करता है
Q6 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
मान लीजिए आप पिछली छुट्टियों में किसी पहाड़ी या नदी-तट वाले स्थान पर गए थे। भारतेंदु की शैली अपनाकर अपने मित्र को लिखे पत्र के आरंभ और समापन की दो-दो पंक्तियाँ तथा बीच में वर्णन के दो वाक्य लिखिए। (40-50 शब्द)
Hint
आत्मीय संबोधन, उपमा या 'मानो' वाला वर्णन, आत्मीय समापन।
Answer
प्रिय मित्र अमन,
तुम्हें ऋषिकेश का हाल लिखते हुए मन फिर वहीं पहुँच गया है।
गंगा का जल ऐसा हरा-नीला था मानो किसी ने आसमान घोल दिया हो। किनारे के पत्थरों पर बैठकर खाई मूँगफली किसी दावत से कम न थी।
अगली बार तुम्हें साथ ले चलूँगा।
तुम्हारा मित्र, यात्रीQ7 · 2 marks · Short answerHOTS / competency
पत्र में लेखक कहते हैं कि यहाँ 'केवल गंगा जी ही देवता हैं, दूसरा देवता नहीं'। इसके साथ वे मठ-मंदिरों की बात भी करते हैं। आपके विचार में लेखक इस 'आश्चर्य' से क्या कहना चाहते हैं? (25-30 शब्द)
Hint
गंगा का महत्त्व सबसे ऊपर।
Answer
मठ-मंदिर होने पर भी हरिद्वार में सबसे अधिक श्रद्धा गंगा के प्रति है; लोग हरि की पैड़ी पर गंगा-स्नान के लिए ही आते हैं। लेखक गंगा के इसी सर्वोच्च महत्त्व पर आश्चर्य और प्रसन्नता प्रकट करते हैं।
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1.भारतेंदु हरिद्वार किस वर्ष गए थे?Show answer
1871 ई. में।
2.गंगा की धारा किसकी कीर्ति की लता-सी दिखती है?Show answer
राजा भगीरथ की।
3.नील धारा के तट पर पर्वत की चोटी पर किसकी मूर्ति है?Show answer
चंडिका देवी की।
4.लेखक कहाँ ठहरे थे?Show answer
दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले में।
5.हरिद्वार की कुशा में किसकी-सी सुगंध आती थी?Show answer
दालचीनी और जावित्री की।
6.भारतेंदु की स्त्रियों के लिए निकाली गई पत्रिका?Show answer
बालाबोधिनी।
Quick revision checklist
The night before the exam: can you do each of these without looking?
- क्या आप बता सकते हैं कि यह पत्र किसे, कब और किस पत्रिका के लिए लिखा गया?
- क्या आप हरिद्वार के पर्वत, पेड़ और गंगा के वर्णन की दो-दो बातें लिख सकते हैं?
- क्या आप पाँच तीर्थ और कनखल की कथा बता सकते हैं?
- क्या आप पत्थर पर भोजन वाले प्रसंग का भाव समझा सकते हैं?
- क्या आप भारतेंदु के परिचय के चार तथ्य लिख सकते हैं?
हरिद्वार – भारतेंदु हरिश्चंद्र: frequently asked questions
'हरिद्वार' पाठ किस विधा में है?
पत्र विधा में; यह पत्र के रूप में लिखा यात्रा-वृत्तांत है, जो 'कविवचन सुधा' के संपादक को संबोधित है।
भारतेंदु हरिश्चंद्र को किस नाम से जाना जाता है?
आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक के रूप में।
हरिद्वार में गंगा की दो धाराओं के नाम क्या हैं?
नील धारा और श्री गंगा; दोनों के बीच एक नीचा पर्वत है।
पत्र की भाषा कुछ अलग क्यों लगती है?
क्योंकि यह लगभग 150 वर्ष पुरानी हिंदी है; उस समय के शब्द-रूप जैसे 'घाम', 'ठंढे', 'बढ़ के', 'हेतु' आज कम प्रयोग होते हैं।
Based on: NCERT मल्हार, कक्षा 8 (Reprint 2026-27), पाठ 4: हरिद्वार; NCERT मल्हार, कक्षा 8: पुस्तक पृष्ठ