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HindiCBSE Class 8 · कबीर के दोहे – कबीर

कबीर के दोहे, कक्षा 8: संतुलन, मधुर वाणी, निंदक, सूप और संगति

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

कबीर के अंतिम पाँच दोहे जीवन-व्यवहार की सीख देते हैं: अति हर चीज़ की बुरी है, मधुर वाणी दूसरों के साथ अपने को भी शीतल करती है, आलोचक को पास रखने से स्वभाव बिना पानी-साबुन के निर्मल हो जाता है, सज्जन को सूप की तरह सार रखकर थोथा उड़ा देना चाहिए, और जैसी संगति करते हैं, वैसा ही फल मिलता है।

Understand कबीर के दोहे: संतुलन, मधुर वाणी, निंदक, सूप और संगति

दोहा 4: संतुलन। न बहुत बोलना अच्छा है, न बहुत चुप रहना; न बहुत वर्षा अच्छी है, न बहुत धूप। कबीर का भाव है कि हर चीज़ की अति बुरी होती है। मूल दोहा है: 'अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥'

दोहा 5: मधुर वाणी। ऐसी वाणी बोलें जिसमें अहंकार (आपा) न हो। वह दूसरों को शीतल करती है और स्वयं को भी: 'औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय॥'

दोहा 6: निंदक को पास रखें। आलोचक को अपने पास, आँगन में कुटिया बनाकर रखें। वह बिना पानी और साबुन के हमारे स्वभाव को निर्मल कर देता है: 'बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय॥' क्योंकि निंदक की बातों से हम अपनी गलतियाँ पहचानकर सुधारते हैं। यहाँ पानी और साबुन के बिना सफ़ाई का विरोधाभास है।

दोहा 7: सूप जैसा सज्जन। साधु का स्वभाव सूप जैसा होना चाहिए, जो अनाज का सार रख लेता है और थोथा (भूसा, कचरा) उड़ा देता है: 'सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय॥' अर्थात् अच्छी बातें ग्रहण करें और बेकार बातें छोड़ दें।

दोहा 8: संगति का फल। मन पक्षी की तरह है, जहाँ अच्छा लगे वहाँ उड़ जाता है। 'जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय॥' अच्छी संगति से अच्छा फल और बुरी संगति से बुरा फल मिलता है।

अलंकार। 'कबिरा मन पंछी भया' में रूपक अलंकार है, क्योंकि मन पर पंछी का आरोप है। 'साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय' में उपमा है। 'सार सार' में पुनरुक्ति है।

पाँचों का सूत्र। संतुलन रखो, मीठा बोलो, आलोचना से सीखो, अच्छा ग्रहण करो, अच्छी संगति चुनो।

उत्तर का ढंग। दोहे की पंक्ति, अर्थ, जीवन से उदाहरण और शिक्षा, इस क्रम में लिखें।

कबीर के दोहे: संतुलन, मधुर वाणी, निंदक, सूप और संगति: key facts

पाँच दोहों की सीख
  • अति बुरी है
  • मीठी वाणी
  • निंदक पास रखो
  • सार ग्रहण करो
  • संगति सोच-समझकर चुनो
दोहे 4 से 8।
शब्दार्थ
थोथाबेकार चीज़
सुभायस्वभाव
निर्मलसाफ़
सीतलशांत
निंदकआलोचक
नियरेपास
अर्थ-प्रश्न के लिए।
अलंकार
रूपकमन पंछी भया
उपमाजैसा सूप सुभाय
पुनरुक्तिसार सार
उदाहरण के साथ।
जीवन के उदाहरण
  • संतुलित आहार
  • मीठी बोली
  • आलोचक मित्र
  • अच्छी बातों का चयन
  • अच्छे मित्र
हर दोहे के लिए एक उदाहरण।

कबीर के दोहे: संतुलन, मधुर वाणी, निंदक, सूप और संगति in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

आलोचना को सुधार का साधन बनाना

मान लीजिए कक्षा 8 की सना के भाषण पर उसकी सहेली कहती है कि वह बहुत तेज़ बोलती है और शब्द स्पष्ट नहीं होते। पहले सना को बुरा लगता है, पर वह रोज़ आईने के सामने धीरे बोलने का अभ्यास करती है और कुछ दिनों में उसका भाषण साफ़ हो जाता है।

यह घटना कबीर के किस दोहे से मेल खाती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सहेली की बात आलोचना है, जो निंदक के समान है।
  2. सना ने उसे सुधार का अवसर बनाया।
  3. सुधार के बाद स्वभाव निर्मल हुआ, बिना पानी-साबुन के।

Answer: यह 'निंदक नियरे राखिए' वाले दोहे से मेल खाती है, क्योंकि आलोचना से स्वभाव और व्यवहार सुधरता है।

Memory hook: आलोचक आईना है।

Tricks to remember कबीर के दोहे: संतुलन, मधुर वाणी, निंदक, सूप और संगति

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • सं-मी-नि-सू-सं

    संतुलन, मीठी वाणी, निंदक, सूप, संगति।

    Use it when: पाँचों दोहे क्रम से।

  • सूप का काम

    दाना रखो, भूसा उड़ाओ।

    Use it when: सार-थोथा का भाव।

  • आपा खोकर बोलो

    अहंकार छोड़ो, तभी मीठी वाणी।

    Use it when: पाँचवें दोहे का भाव।

कबीर के दोहे: संतुलन, मधुर वाणी, निंदक, सूप और संगति: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: सूप का गुण · 1 mark · MCQBoard level

कबीर के अनुसार सज्जन का स्वभाव किसके जैसा होना चाहिए?
(क) पंखे के (ख) सूप के (ग) खजूर के (घ) दीपक के

Try it first, then show the solutionSolution
  1. 'साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय' में सज्जन की तुलना सूप से की गई है (1 अंक)।

Answer: (ख)

Example 2: अति का भला न बोलना · 2 marks · Short answerBoard level

'अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप' पंक्ति में कबीर क्या कहना चाहते हैं? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. न बहुत बोलना ठीक, न बहुत चुप रहना (1)।
  2. हर चीज़ में संतुलन ज़रूरी है (1)।

Answer: कबीर कहना चाहते हैं कि न अधिक बोलना अच्छा है, न बिलकुल चुप रहना। वर्षा और धूप की तरह हर चीज़ की अति बुरी है, इसलिए जीवन में संतुलन आवश्यक है।

Example 3: निंदक का महत्त्व · 3 marks · Short answerHarder board level

कबीर निंदक को अपने पास रखने की सलाह क्यों देते हैं? 'बिन पानी साबुन बिना' का आशय स्पष्ट कीजिए। (40-50 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. निंदक हमारी कमियाँ बताता है (1)।
  2. उनसे सुधार होता है (1)।
  3. पानी-साबुन के बिना स्वभाव निर्मल होता है (1)।

Answer: कबीर निंदक को पास रखने को कहते हैं, क्योंकि वह हमारी कमियाँ और गलतियाँ बताता रहता है। उन्हें सुनकर हम अपना व्यवहार सुधार लेते हैं। 'बिन पानी साबुन बिना' का आशय है कि जैसे पानी-साबुन से शरीर साफ़ होता है, वैसे ही निंदक की आलोचना हमारे स्वभाव को बिना किसी साधन के निर्मल कर देती है।

Example 4: सूप और सज्जन · 4 marks · Short answerHarder board level

सूप के उदाहरण से कबीर क्या शिक्षा देते हैं? इस दोहे में कौन-सा अलंकार है और कैसे? आज के समय में यह शिक्षा कैसे उपयोगी है? (60-70 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सार रखना, थोथा उड़ाना (1.5)।
  2. उपमा अलंकार: जैसा (1)।
  3. आज की उपयोगिता (1.5)।

Answer: कबीर सूप के उदाहरण से सिखाते हैं कि सज्जन को अच्छी बातें रख लेनी चाहिए और बेकार बातें छोड़ देनी चाहिए, जैसे सूप दाना रखता है और भूसा उड़ा देता है। 'जैसा' शब्द के कारण यहाँ उपमा अलंकार है। आज इंटरनेट और अफ़वाहों के समय में यह सीख बहुत उपयोगी है, क्योंकि हमें सही जानकारी चुनकर बाकी छोड़ देनी चाहिए।

Example 5: संगति का प्रभाव · 5 marks · Long answerHOTS / competency

'जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय' कथन पर अपने विचार लिखिए। अपने अनुभव या किसी उदाहरण से इसे समझाइए। (80-100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कथन का अर्थ (1)।
  2. अच्छी संगति का उदाहरण (1.5)।
  3. बुरी संगति का उदाहरण (1.5)।
  4. निष्कर्ष और भाषा (1)।

Answer: कबीर कहते हैं कि मनुष्य जैसी संगति करता है, वैसा ही फल पाता है। यह बात बिलकुल सही है। जो विद्यार्थी परिश्रमी मित्रों के साथ रहता है, वह भी पढ़ाई में रुचि लेने लगता है और अच्छे गुण सीखता है। इसके विपरीत जो बिना उद्देश्य के घूमने वाले साथियों में रहता है, उसका समय और स्वभाव दोनों बिगड़ सकते हैं। मन पक्षी की तरह होता है, जहाँ अच्छा लगता है वहाँ चला जाता है, इसलिए हमें सोच-समझकर संगति चुननी चाहिए।

Where students lose marks in कबीर के दोहे: संतुलन, मधुर वाणी, निंदक, सूप और संगति

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: निंदक का अर्थ शत्रु लिखना

    यहाँ निंदक का अर्थ आलोचक है, जो सुधार में सहायक है।

    Wrong working

    निंदक हमारा शत्रु है।

    Right working

    निंदक वह आलोचक है जो हमारी कमियाँ बताकर हमें सुधारता है।

    Do this: आलोचक शब्द लिखें।

    Usually costs: 1 अंक।

  • Mistake: सूप का शाब्दिक वर्णन

    सूप से सज्जन की तुलना है।

    Wrong working

    सूप अनाज साफ़ करने का बर्तन है।

    Right working

    सज्जन को सूप की तरह सार रखना और बेकार छोड़ना चाहिए।

    Do this: उपमा का भाव लिखें।

    Usually costs: 1 से 2 अंक।

  • Mistake: अलंकार में रूपक और उपमा मिलाना

    वाचक शब्द से भेद होता है।

    Wrong working

    'जैसा सूप सुभाय' में रूपक है।

    Right working

    'जैसा' वाचक शब्द के कारण उपमा है; 'मन पंछी भया' में रूपक है।

    Do this: वाचक शब्द खोजें।

    Usually costs: 1 अंक।

Exam tips

  • दोहा 4 से 8 के क्रम को सूत्र से याद रखें।
  • निंदक का अर्थ आलोचक लिखें, शत्रु नहीं।
  • सूप वाले दोहे में अलंकार का कारण ('जैसा') लिखें।
  • संगति के उत्तर में अच्छी और बुरी दोनों संगति का उदाहरण दें।
  • अंत में एक पंक्ति की शिक्षा अवश्य लिखें।

Practice questions on कबीर के दोहे: संतुलन, मधुर वाणी, निंदक, सूप और संगति

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    'कबिरा मन पंछी भया' में कौन-सा अलंकार है?
    (क) उपमा (ख) रूपक (ग) अनुप्रास (घ) श्लेष

    Hint

    मन पर पंछी का आरोप।

    Answer

    (ख)

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    कबीर के अनुसार मीठी वाणी का क्या लाभ है? (20-25 शब्द)

    Hint

    दूसरों को और स्वयं को।

    Answer

    कबीर के अनुसार अहंकार रहित मधुर वाणी दूसरों को शीतल करती है, यानी शांति और सुख देती है, और बोलने वाले को भी शीतलता और संतोष मिलता है।

  3. Q3 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level

    अभिकथन (A): कबीर के अनुसार निंदक को अपने पास रखना चाहिए।
    कारण (R): निंदक हमारी गलतियाँ बताकर बिना पानी-साबुन के हमारा स्वभाव निर्मल कर देता है।
    (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या करता है
    (ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं करता
    (ग) A सही है, R गलत है
    (घ) A गलत है, R सही है

    Hint

    R कारण बताता है।

    Answer

    (क)

  4. Q4 · 3 marks · Short answerHarder board level

    'सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय' का भाव आज के विद्यार्थी के लिए क्या है? दो उदाहरणों सहित समझाइए। (50-60 शब्द)

    Hint

    पढ़ाई और सूचना।

    Answer

    इसका भाव है कि जो अच्छा और उपयोगी है, उसे ग्रहण करो और बेकार को छोड़ दो। विद्यार्थी के लिए इसका अर्थ है कि पुस्तकों और शिक्षक की उपयोगी बातें याद रखें, पर अफ़वाहों या व्यर्थ की चर्चा में समय न गँवाएँ। इसी तरह मोबाइल पर सही जानकारी चुनें और बेकार सामग्री छोड़ दें।

  5. Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    कबीर के इन पाँच दोहों में से किसी एक के आधार पर 80-100 शब्दों में एक छोटी कथा या घटना लिखिए जो उसकी शिक्षा को दिखाती हो।

    Hint

    घटना, पात्र, शिक्षा।

    Answer

    एक कक्षा में अर्जुन अपनी बात पर बहुत अकड़ता था और कभी किसी की सलाह नहीं मानता था। एक दिन उसके मित्र मोहन ने कहा कि वह दूसरों का मज़ाक उड़ाता है। अर्जुन को गुस्सा आया, पर उसने सोचा कि मोहन सच ही कह रहा है। उसने अपना व्यवहार बदला और सबसे विनम्रता से बोलने लगा। कुछ दिनों में सब उससे प्रसन्न रहने लगे। तब उसे समझ आया कि निंदक बिन पानी-साबुन के स्वभाव को निर्मल कर देता है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.निंदक को कहाँ रखने को कहा गया है?Show answer

    अपने पास, आँगन में कुटिया बनाकर।

  2. 2.'थोथा' का क्या अर्थ है?Show answer

    बेकार चीज़, भूसा।

  3. 3.मन को किसके समान बताया गया है?Show answer

    पक्षी (पंछी) के समान।

  4. 4.अति का भला क्या न बताया गया है?Show answer

    न बोलना, न चुप रहना।

  5. 5.मीठी वाणी किसे शीतल करती है?Show answer

    दूसरों को और स्वयं को।

  6. 6.संगति के बारे में कबीर का क्या कथन है?Show answer

    जो जैसी संगति करता है, वैसा फल पाता है।

कबीर के दोहे: संतुलन, मधुर वाणी, निंदक, सूप और संगति: frequently asked questions

इन दोहों का सार क्या है?

संतुलन, मधुर वाणी, आलोचना से सीख, विवेक और अच्छी संगति जीवन के आधार हैं।

कबीर निंदक को क्यों उपयोगी मानते हैं?

क्योंकि वह हमारी कमियाँ बताकर हमें सुधारने का अवसर देता है।

सधुक्कड़ी भाषा क्या है?

कबीर की मिली-जुली, सरल बोलचाल की भाषा, जिसमें अनेक बोलियों के शब्द हैं।

इस भाग से कैसे प्रश्न आते हैं?

भावार्थ, अलंकार, शब्दार्थ और जीवन से जुड़े उदाहरण।