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HindiCBSE Class 8 · हरिद्वार – भारतेंदु हरिश्चंद्र

हरिद्वार (भारतेंदु हरिश्चंद्र), कक्षा 8: प्रकृति, गंगा और तीर्थों का वर्णन

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

भारतेंदु हरिश्चंद्र के पत्र 'हरिद्वार' में तीन ओर के हरे-भरे पर्वत, तपस्वियों जैसे वृक्ष और पक्षियों का वर्णन है। गंगा की धारा शीतल, मीठी और स्वच्छ है और यहाँ वह नील धारा और श्री गंगा नाम की दो धाराओं में बँटती है। लेखक हरि की पैड़ी और पाँच तीर्थ (हरिद्वार, कुशावर्त, नीलधारा, बिल्वपर्वत और कनखल) भी गिनाते हैं।

Understand हरिद्वार: प्रकृति, गंगा और तीर्थों का वर्णन

पत्र का स्वरूप। यह पाठ 'कविवचन सुधा' पत्रिका के संपादक को लिखा गया पत्र है, जो 14 अक्टूबर 1871 को छपा। इसमें लेखक संबोधन 'मित्रवरेषु!' करते हैं और पत्र के अंत में 'आपका मित्र यात्री' लिखते हैं।

पर्वत और वृक्ष। हरिद्वार तीन ओर से हरे-भरे पर्वतों से घिरा है। पर्वतों पर लताएँ सज्जनों के शुभ विचारों की भाँति फैली हैं। बड़े पेड़ ऐसे दिखते हैं मानो एक पैर पर खड़े होकर तपस्या कर रहे हों। वे धूप, ओस और वर्षा सहते हैं और फल, फूल, छाया, पत्ते, छाल और लकड़ी सब कुछ देते हैं। लेखक कहते हैं कि वे सज्जन ऐसे हैं कि पत्थर मारने पर भी फल देते हैं।

पक्षी और हरियाली। पेड़ों पर रंग-बिरंगे पक्षी बिना डर के चहचहाते हैं। वर्षा के कारण चारों ओर हरियाली है, मानो यात्रियों के आराम के लिए हरा गलीचा बिछा हो।

गंगा। गंगा की पवित्र धारा लेखक को राजा भगीरथ की उज्ज्वल कीर्ति की लता जैसी दिखती है। जल शीतल, मीठा, स्वच्छ और सफ़ेद है। यहाँ गंगा दो धाराओं में बँटती है: नील धारा और श्री गंगा। बीच में एक नीचा पर्वत है और नील धारा के तट पर एक छोटे पर्वत की चोटी पर चंडिका देवी की मूर्ति है। हरि की पैड़ी नाम का पक्का घाट है, जहाँ स्नान होता है।

पाँच तीर्थ। हरिद्वार (हरि की पैड़ी), कुशावर्त, नीलधारा, बिल्वपर्वत (बिल्वेश्वर महादेव) और कनखल, जहाँ दक्ष ने यज्ञ किया था और सती ने शिव का अपमान न सह पाने पर शरीर भस्म किया था।

अलंकार। 'सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति' में उपमा है। 'मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं' और 'मानो हरे गलीचा की जात्रियों के आराम के हेतु बिछाई है' में उत्प्रेक्षा है। पेड़ों को सज्जन और तपस्वी बताने में मानवीकरण है।

भाषा। भाषा 19वीं सदी की खड़ी बोली है, जैसे 'घाम', 'ठंढे-ठंढे', 'बढ़ के', 'हेतु', 'जात्रियों'।

उत्तर का ढंग। तीन बातें लिखें: क्या वर्णन है, कौन-सा अलंकार है और उससे क्या भाव उभरता है।

हरिद्वार: प्रकृति, गंगा और तीर्थों का वर्णन: key facts

प्रकृति का वर्णन
  • तीन ओर हरे पर्वत
  • लताएँ सज्जनों के विचारों-सी
  • वृक्ष तपस्वी जैसे
  • रंग-बिरंगे पक्षी
  • हरा गलीचा
प्रत्येक के साथ अलंकार।
गंगा
  • शीतल, मीठा, स्वच्छ जल
  • दो धाराएँ: नील धारा और श्री गंगा
  • हरि की पैड़ी: पक्का घाट
  • चंडिका देवी की मूर्ति
गंगा-वर्णन के बिंदु।
पाँच तीर्थ
  • हरिद्वार
  • कुशावर्त
  • नीलधारा
  • बिल्वपर्वत
  • कनखल
क्रम से याद रखें।
अलंकार
उपमाशुभ मनोरथों की भाँति
उत्प्रेक्षामानो तपस्या करते हैं
मानवीकरणवृक्षों को सज्जन कहना
वाचक शब्द पहचानें।

हरिद्वार: प्रकृति, गंगा और तीर्थों का वर्णन in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

यात्रा का विवरण पत्र में लिखना

मान लीजिए आरव पहाड़ी इलाके की यात्रा से लौटकर अपने मित्र को पत्र लिखता है। वह लिखता है कि पेड़ बादलों में खड़े साधुओं जैसे लगते थे और नदी का जल इतना साफ़ था कि तल के पत्थर गिने जा सकते थे। अंत में वह लिखता है कि भोजन उसने नदी किनारे पत्थर पर बैठकर किया और वह स्वादिष्ट लगा।

आरव के पत्र में 'हरिद्वार' पाठ की कौन-कौन सी विशेषताएँ हैं?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पेड़ों की साधुओं से तुलना: मानवीकरण और उत्प्रेक्षा।
  2. नदी-वर्णन: जल की स्वच्छता।
  3. सादे भोजन का सुख, जैसा भारतेंदु ने लिखा।

Answer: उसके पत्र में प्रकृति का वर्णन, तुलना के अलंकार, नदी का सौंदर्य और सादगी का सुख, चारों विशेषताएँ हैं जो 'हरिद्वार' में हैं।

Memory hook: जो देखो, उपमा से सजाओ।

Tricks to remember हरिद्वार: प्रकृति, गंगा और तीर्थों का वर्णन

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • ह-कु-नी-बि-क

    हरिद्वार, कुशावर्त, नीलधारा, बिल्वपर्वत, कनखल।

    Use it when: पाँच तीर्थ।

  • पर्वत-पेड़-पक्षी-पथ

    हरे पर्वत, तपस्वी पेड़, पक्षी, गंगा का पथ।

    Use it when: वर्णन का क्रम।

  • मानो = उत्प्रेक्षा

    मानो, जनु, मनु, जानो जैसे शब्द संभावना बताकर उत्प्रेक्षा की पहचान कराते हैं। जैसे, सम, सा, भाँति उपमा के वाचक हैं।

    Use it when: उत्प्रेक्षा की पहचान।

हरिद्वार: प्रकृति, गंगा और तीर्थों का वर्णन: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: पत्र किसे लिखा गया · 1 mark · MCQBoard level

भारतेंदु ने 'हरिद्वार' पत्र किसे लिखा?
(क) अपने पिता को (ख) 'कविवचन सुधा' के संपादक को (ग) राजा को (घ) एक शिष्य को

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पत्र 'कविवचन सुधा' के संपादक को संबोधित है (1 अंक)।

Answer: (ख)

Example 2: गंगा की दो धाराएँ · 2 marks · Short answerBoard level

हरिद्वार में गंगा कितनी धाराओं में बँटती है? उनके नाम लिखिए। (20-25 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. दो धाराएँ (1)।
  2. नील धारा और श्री गंगा (1)।

Answer: हरिद्वार में गंगा दो धाराओं में बँटती है। एक का नाम नील धारा है और दूसरी का श्री गंगा। उनके बीच एक नीचा पर्वत है।

Example 3: पेड़ और तपस्वी · 3 marks · Short answerHarder board level

लेखक ने पेड़ों को तपस्वी और सज्जन क्यों कहा है? दो कारण लिखिए। (40-50 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. एक पैर से तपस्या करते-से खड़े हैं और धूप, ओस, वर्षा सहते हैं (1.5)।
  2. सब कुछ देते हैं, पत्थर मारने पर भी फल (1.5)।

Answer: पेड़ों को तपस्वी इसलिए कहा गया है कि वे मानो एक पैर पर खड़े होकर तपस्या करते हैं और धूप, ओस तथा वर्षा सहते हैं। उन्हें सज्जन इसलिए कहा गया है कि वे फल, फूल, छाया, पत्ते और लकड़ी सब कुछ देते हैं और पत्थर मारने पर भी फल ही देते हैं।

Example 4: अलंकार पहचानिए · 4 marks · Short answerHarder board level

निम्नलिखित वाक्यांशों में अलंकार पहचानकर कारण लिखिए: (क) 'मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं' (ख) 'सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति फैली हैं' (ग) वृक्षों को 'सज्जन' कहना। (60-70 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. (क) उत्प्रेक्षा: मानो (1.5)।
  2. (ख) उपमा: भाँति (1.5)।
  3. (ग) मानवीकरण (1)।

Answer: (क) उत्प्रेक्षा अलंकार, क्योंकि 'मानो' शब्द से पेड़ों के तपस्या करने की संभावना की गई है। (ख) उपमा अलंकार, क्योंकि लताओं की तुलना 'भाँति' शब्द से सज्जनों के शुभ विचारों से की गई है। (ग) मानवीकरण अलंकार, क्योंकि पेड़ों में मनुष्य के गुण, यानी सज्जनता का आरोप किया गया है।

Example 5: पाठ की आज प्रासंगिकता · 5 marks · Long answerHOTS / competency

पेड़ों के वर्णन से हमें प्रकृति के प्रति कौन-सी सीख मिलती है? पाठ के आधार पर अपने विचार लिखिए। (80-100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. वृक्षों के गुण (1.5)।
  2. हमारा उनके प्रति कर्तव्य (1.5)।
  3. सीख और उदाहरण (1)।
  4. भाषा (1)।

Answer: पाठ में पेड़ों को सज्जन कहा गया है, क्योंकि वे धूप, ओस और वर्षा सहकर भी हमें फल, फूल, छाया, पत्ते, छाल और लकड़ी देते हैं। यहाँ तक कि पत्थर मारने पर भी वे फल ही देते हैं। इससे हमें सीख मिलती है कि हमें प्रकृति का आभारी होना चाहिए और उसे हानि नहीं पहुँचानी चाहिए। हम पेड़ लगा सकते हैं, उनकी देखभाल कर सकते हैं और अनावश्यक रूप से उन्हें काटने से बच सकते हैं। जैसे पेड़ बिना शिकायत के देते हैं, वैसे हमें भी दूसरों को देना सीखना चाहिए।

Where students lose marks in हरिद्वार: प्रकृति, गंगा और तीर्थों का वर्णन

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: तीर्थों की संख्या या नाम गलत लिखना

    पाठ में पाँच तीर्थ बताए गए हैं।

    Wrong working

    हरिद्वार के चार तीर्थ हैं।

    Right working

    पाँच तीर्थ: हरिद्वार, कुशावर्त, नीलधारा, बिल्वपर्वत और कनखल।

    Do this: ह-कु-नी-बि-क याद रखें।

    Usually costs: 1 अंक।

  • Mistake: उत्प्रेक्षा को उपमा लिखना

    मानो शब्द संभावना बताता है।

    Wrong working

    'मानो तपस्या करते हैं' में उपमा है।

    Right working

    'मानो तपस्या करते हैं' में उत्प्रेक्षा है।

    Do this: मानो-जनु शब्द पर ध्यान दें।

    Usually costs: 1 अंक।

  • Mistake: धाराओं के नाम बदल देना

    नाम जैसे लिखे गए हैं, वैसे ही दें।

    Wrong working

    गंगा की दो धाराएँ यमुना और सरस्वती हैं।

    Right working

    दो धाराएँ नील धारा और श्री गंगा हैं।

    Do this: पाठ के नाम लिखें।

    Usually costs: 1 अंक।

Exam tips

  • पत्र की तिथि 14 अक्टूबर 1871 और पत्रिका 'कविवचन सुधा' याद रखें।
  • अलंकार के उत्तर में वाचक शब्द (मानो, भाँति) अवश्य लिखें।
  • पाँच तीर्थों को क्रम से लिखें।
  • पेड़ों के गुणों में फल, फूल, छाया, पत्ते, छाल, लकड़ी गिनाएँ।
  • पुराने शब्दों (घाम, हेतु, जात्रियों) के अर्थ तैयार रखें।

Practice questions on हरिद्वार: प्रकृति, गंगा और तीर्थों का वर्णन

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    हरिद्वार में स्नान का पक्का घाट कौन-सा है?
    (क) कुशावर्त (ख) हरि की पैड़ी (ग) नीलधारा (घ) कनखल

    Hint

    पाठ में पक्के घाट का नाम।

    Answer

    (ख)

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    पाठ में चंडिका देवी की मूर्ति कहाँ बताई गई है? (20-25 शब्द)

    Hint

    नील धारा के तट पर।

    Answer

    चंडिका देवी की मूर्ति नील धारा के तट पर एक छोटे पर्वत की चोटी पर स्थित बताई गई है। इसे लेखक ने गंगा के पास की एक विशेषता के रूप में लिखा है।

  3. Q3 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level

    अभिकथन (A): 'मानो हरे गलीचा की जात्रियों के आराम के हेतु बिछाई है' में उत्प्रेक्षा अलंकार है।
    कारण (R): इसमें 'मानो' शब्द से हरियाली में गलीचे की संभावना की गई है।
    (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या करता है
    (ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं करता
    (ग) A सही है, R गलत है
    (घ) A गलत है, R सही है

    Hint

    मानो का अर्थ संभावना।

    Answer

    (क)

  4. Q4 · 3 marks · Short answerHarder board level

    गंगा के वर्णन में लेखक ने किन विशेषताओं को बताया है? तीन बिंदु लिखिए और बताइए कि उनसे गंगा की कैसी छवि बनती है। (50-60 शब्द)

    Hint

    जल, धाराएँ, घाट।

    Answer

    लेखक बताते हैं कि गंगा का जल शीतल, मीठा, स्वच्छ और सफ़ेद है। यहाँ वह नील धारा और श्री गंगा नाम की दो धाराओं में बँटती है और हरि की पैड़ी का पक्का घाट वहाँ स्नान के लिए है। इन विवरणों से गंगा की पवित्र, निर्मल और पूज्य छवि बनती है, जो यात्रियों के मन को शांति देती है।

  5. Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    मान लीजिए आप किसी पहाड़ी या नदी-तट के स्थान की यात्रा से लौटे हैं। अपने मित्र को 80-100 शब्दों में पत्र लिखिए, जिसमें 'हरिद्वार' की तरह प्रकृति का वर्णन तथा कम से कम एक उत्प्रेक्षा हो।

    Hint

    अनौपचारिक पत्र, संबोधन, वर्णन, समापन।

    Answer

    देहरादून
    15 अक्टूबर 2024

    प्रिय मित्र रोहन,
    सस्नेह नमस्ते। मैं कल ही नदी-तट की यात्रा से लौटा हूँ। वहाँ चारों ओर हरे पर्वत थे और नदी का जल इतना स्वच्छ था कि तल के पत्थर दिखाई देते थे। पेड़ ऐसे खड़े थे मानो साधु ध्यान में बैठे हों। पक्षी निर्भय होकर चहचहा रहे थे। चारों ओर फैली हरियाली ऐसी लगती थी मानो धरती पर हरा गलीचा बिछा हो। नदी किनारे बैठकर हमने सादा भोजन किया, जो मुझे बहुत स्वादिष्ट लगा। यह यात्रा मेरे लिए अविस्मरणीय रही। तुम भी अगली बार हमारे साथ चलना।
    तुम्हारा मित्र,
    अर्जुन

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.पाठ किस पत्रिका में छपा?Show answer

    'कविवचन सुधा' में।

  2. 2.लेखक ने पत्र का संबोधन क्या लिखा?Show answer

    'मित्रवरेषु!'।

  3. 3.गंगा की दो धाराओं के नाम बताइए।Show answer

    नील धारा और श्री गंगा।

  4. 4.हरि की पैड़ी क्या है?Show answer

    स्नान का पक्का घाट।

  5. 5.पाँच तीर्थ कौन-से हैं?Show answer

    हरिद्वार, कुशावर्त, नीलधारा, बिल्वपर्वत और कनखल।

  6. 6.पेड़ों में कौन-सा अलंकार है जब उन्हें तपस्वी बताया जाए?Show answer

    उत्प्रेक्षा और मानवीकरण।

हरिद्वार: प्रकृति, गंगा और तीर्थों का वर्णन: frequently asked questions

'हरिद्वार' पाठ किस विधा में है?

यह पत्र के रूप में लिखा गया यात्रा-वर्णन है।

लेखक को हरिद्वार में कौन-सा सुख सबसे बढ़कर लगा?

गंगा-तट पर पत्थर पर बैठकर भोजन का सुख, जो उन्हें सोने की थाल के भोजन से भी बढ़कर लगा।

इस भाग से कैसे प्रश्न आते हैं?

अलंकार, तीर्थों के नाम, गंगा-वर्णन और पेड़ों से सीख पर।

पाठ के लेखक कौन हैं?

भारतेंदु हरिश्चंद्र।