दो गौरैया (भीष्म साहनी), कक्षा 8: पिताजी का हृदय-परिवर्तन और संदेश
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
भीष्म साहनी की कहानी 'दो गौरैया' में दो गौरैया पंखे के गोले में घोंसला बना लेती हैं। पिताजी उन्हें भगाते हैं और अंत में घोंसला तोड़ने लगते हैं, पर नन्हे बच्चों की चीं-चीं सुनकर लाठी रख देते हैं और मुसकराने लगते हैं। कहानी का संदेश है कि घर और धरती सभी जीवों की साझी है और दया के आगे ज़िद हार जाती है।
Understand दो गौरैया: पिताजी का हृदय-परिवर्तन और कहानी का संदेश
कहानी का आरंभ। कथावाचक कहता है कि घर में केवल तीन लोग हैं, पर पिताजी कहते हैं कि घर सराय बना हुआ है। आँगन के पेड़ पर तोते, कौवे और गौरैयाँ डेरा डाले हैं, और घर में चूहे, चमगादड़, कबूतर, छिपकलियाँ और चींटियाँ भी हैं। यह सराय वाली बात हास्य और व्यंग्य है और आगे की घटना की भूमिका भी।
गौरैयों का आना। दो गौरैया पहले 'मकान का निरीक्षण' करती हैं और फिर बैठक की छत के पंखे के गोले में घोंसला बना लेती हैं। इस वाक्य में मानवीकरण है।
पिताजी के प्रयास। पिताजी पहले ताली बजाते, 'श...शू' करते और बाँहें झुलाते हैं। फिर लाठी से पंखे के गोले को ठकोरते हैं। माँ के सुझाव पर वे एक दरवाज़ा खुला रखकर बाकी बंद करते हैं और चिड़ियों को निकाल देते हैं। गौरैया टूटे रोशनदान और दरवाज़ों के नीचे की जगह से लौट आती हैं।
माँ की भूमिका। माँ पहले हँसती हैं और दरवाज़ा खुला रखने का सुझाव देती हैं; बाद में गंभीर होकर कहती हैं कि चिड़ियों को मत निकालो, शायद इन्होंने अंडे दे दिए हैं। पिताजी नहीं मानते। माँ कहानी में संवेदनशीलता और हास्य दोनों लाती हैं।
पिताजी की ज़िद। पिताजी कहते हैं: 'मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।' उनके अनुसार किसी को सचमुच निकालना हो तो उसका घर तोड़ देना चाहिए। इसलिए वे स्टूल पर चढ़कर घोंसला नोचते हैं।
मोड़। तभी पंखे के गोले से नन्ही गौरैयों की चीं-चीं सुनाई देती है। पिताजी चुपचाप लाठी रखकर नीचे उतर आते हैं। माँ सारे दरवाज़े खोल देती हैं। माँ-बाप गौरैया बच्चों को चुग्गा खिलाती हैं और पिताजी उन्हें देखकर केवल मुसकराते रहते हैं।
हृदय-परिवर्तन का कारण। पिताजी का गुस्सा अहं से ज़्यादा आदत का था। जब उन्होंने असहाय बच्चों की आवाज़ सुनी, तो उनके भीतर दया और ममता जाग गई।
कहानी की शैली। प्रथम पुरुष में कथन, ध्वन्यात्मक शब्द (चीं-चीं, गुटर-गूँ), हास्य-व्यंग्य और अंत में मोड़।
उत्तर का ढंग। घटना, उसका कारण और उसका प्रभाव, तीनों लिखें।
दो गौरैया: पिताजी का हृदय-परिवर्तन और कहानी का संदेश: key facts
- घटनाओं का क्रम
- घर सराय जैसा
- गौरैयों का घोंसला
- भगाने के प्रयास
- घोंसला तोड़ने की ज़िद
- बच्चों की चीं-चीं
- पिताजी का मुसकराना
- कहानी का सार लिखने के लिए।
- पात्र और गुण
पिताजी ज़िद्दी, पर कोमल माँ संवेदनशील और हँसमुख कथावाचक बालक, दर्शक गौरैया माता-पिता और नन्हे बच्चे - प्रमाण के साथ लिखें।
- शैली
- हास्य-व्यंग्य
- मानवीकरण
- ध्वन्यात्मक शब्द
- अंत में मोड़
- उदाहरण दें।
- संदेश
- घर और धरती सभी जीवों की साझी है | दया और ममता की जीत
- अंतिम अनुच्छेद के लिए।
दो गौरैया: पिताजी का हृदय-परिवर्तन और कहानी का संदेश in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
दूसरों की ज़रूरत समझने पर मन बदलना
मान लीजिए रोहन अपने बरामदे में एक पुराने डिब्बे में कबूतर के घोंसले से परेशान है और रोज़ उसे हटाने की बात करता है। एक दिन वह देखता है कि घोंसले में दो छोटे बच्चे हैं। वह डिब्बा नहीं हटाता और माँ से कहता है कि कुछ दिन रुक जाएँ।
रोहन का व्यवहार कहानी के किस मोड़ से मिलता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- पहले उसे असुविधा दिखती थी, फिर बच्चों पर नज़र पड़ी।
- दया और ममता जागने पर उसने अपना निर्णय बदला।
- पिताजी ने भी बच्चों की आवाज़ सुनकर लाठी रख दी।
Answer: यह पिताजी के हृदय-परिवर्तन से मिलता है, क्योंकि बच्चों को देखकर दोनों में दया जागी और निर्णय बदल गया।
Memory hook: दया जागी, ज़िद गई।
Tricks to remember दो गौरैया: पिताजी का हृदय-परिवर्तन और कहानी का संदेश
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
घर-घोंसला-घात-घर
घर सराय, घोंसला बना, घात की कोशिश, घर में रखा।
Use it when: कहानी का क्रम।
ताली, लाठी, दरवाज़ा, घोंसला
पिताजी के चार तरीके।
Use it when: भगाने के प्रयास।
चीं-चीं ने बदला
बच्चों की चीं-चीं ने पिताजी का मन बदला।
Use it when: मोड़ का कारण।
दो गौरैया: पिताजी का हृदय-परिवर्तन और कहानी का संदेश: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: गौरैयों ने घोंसला कहाँ बनाया · 1 mark · MCQBoard level
गौरैयों ने घोंसला कहाँ बनाया?
(क) आम के पेड़ पर (ख) बैठक के पंखे के गोले में (ग) रसोई की खिड़की में (घ) छत की मुँडेर पर
Try it first, then show the solutionSolution
- गौरैयों ने बैठक की छत के पंखे के गोले में घोंसला बनाया (1 अंक)।
Answer: (ख)
Example 2: सराय कहने का कारण · 2 marks · Short answerBoard level
पिताजी घर को सराय क्यों कहते हैं? (25-30 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- घर में अनेक पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं (1)।
- पिताजी को लगता है कि वे स्वयं मेहमान हैं (1)।
Answer: घर में तोते, कौवे, चूहे, चमगादड़, कबूतर, छिपकलियाँ और चींटियाँ भी रहते हैं। पिताजी को लगता है कि वे स्वयं मेहमान हैं और घर के असली मालिक दूसरे हैं, इसलिए वे घर को सराय कहते हैं।
Example 3: माँ का सुझाव · 3 marks · Short answerHarder board level
माँ ने चिड़ियों को निकालने से पिताजी को क्यों रोका? इससे माँ के स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है? (40-50 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- शायद गौरैयों ने अंडे दे दिए थे (1)।
- माँ को पक्षियों की चिंता थी (1)।
- माँ संवेदनशील और समझदार है (1)।
Answer: माँ ने कहा कि शायद गौरैयों ने घोंसले में अंडे दे दिए हैं, इसलिए उन्हें मत निकालो। इससे पता चलता है कि माँ संवेदनशील और दयालु हैं। वे पक्षियों की ज़रूरत को पहले समझ लेती हैं और हँसी-मज़ाक में भी पिताजी को सही बात याद दिलाती हैं।
Example 4: पिताजी की ज़िद · 4 marks · Short answerHarder board level
पिताजी के इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए: 'किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।' यह कथन उनके स्वभाव के किस पक्ष को दिखाता है? (60-70 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- कथन का अर्थ (1.5)।
- पिताजी की ज़िद (1.5)।
- अंत में बदलाव से उसका विरोध (1)।
Answer: इस कथन का आशय है कि जब तक किसी का ठिकाना बना रहेगा, वह लौटता रहेगा; उसे सचमुच हटाना हो तो उसका आश्रय ही तोड़ दो। यह पिताजी की ज़िद और हार न मानने की आदत दिखाता है। पर अंत में वे नन्हे बच्चों की आवाज़ सुनकर यही काम नहीं करते। इससे पता चलता है कि उनकी ज़िद के नीचे कोमल हृदय है।
Example 5: कहानी का शीर्षक और अंत · 5 marks · Long answerHOTS / competency
'पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।' इस अंत की सार्थकता पर अपने विचार लिखिए। (80-100 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- अंत का अर्थ (1)।
- पहले का शोर बनाम अब की मुसकान (1.5)।
- हृदय-परिवर्तन और संदेश (1.5)।
- भाषा (1)।
Answer: कहानी का अंत सार्थक है, क्योंकि यही मोड़ पूरी कहानी का संदेश बता देता है। पहले जब गौरैया कमरे में शोर करती थीं, पिताजी गुस्से में उन्हें भगाते थे। अब वही गौरैया बच्चों को चुग्गा खिलाती हैं और वही शोर पिताजी के मन में मुसकान जगाता है। यह उनके हृदय-परिवर्तन का प्रमाण है। लेखक यह दिखाते हैं कि घर और धरती सभी जीवों की साझी है और दया तथा ममता के आगे ज़िद हार जाती है।
Where students lose marks in दो गौरैया: पिताजी का हृदय-परिवर्तन और कहानी का संदेश
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: कथावाचक को पिताजी समझ लेना
कहानी बालक की ओर से कही गई है।
Wrong working
पिताजी कहते हैं कि वे घर में मेहमान हैं, इसलिए वे कथावाचक हैं।
Right working
कथावाचक घर का बालक है; पिताजी उसके पिता हैं।
Do this: पात्रों की भूमिका याद करें।
Usually costs: 1 अंक।
Mistake: हृदय-परिवर्तन का कारण न लिखना
प्रश्न में कारण माँगा जाता है।
Wrong working
पिताजी का मन बदल गया।
Right working
नन्ही गौरैयों की चीं-चीं सुनकर पिताजी के मन में दया जागी और उनका मन बदल गया।
Do this: कारण के साथ परिणाम लिखें।
Usually costs: 1 से 2 अंक।
Mistake: माँ को क्रोधी बताना
माँ हास्य और संवेदना दिखाती हैं।
Wrong working
माँ भी पिताजी की तरह गुस्से में थीं।
Right working
माँ हँसती हैं और चिड़ियों को निकालने से रोकती हैं।
Do this: माँ के संवाद उद्धृत करें।
Usually costs: 1 अंक।
Exam tips
- घटनाओं को क्रम में लिखें: घर सराय, घोंसला, प्रयास, ज़िद, मोड़, अंत।
- पिताजी के चरित्र में ज़िद और कोमलता दोनों पक्ष लिखें।
- हृदय-परिवर्तन के प्रश्न में कारण और परिणाम दोनों लिखें।
- ध्वन्यात्मक शब्दों के उदाहरण याद रखें।
- संदेश: घर और धरती सभी जीवों की है।
Practice questions on दो गौरैया: पिताजी का हृदय-परिवर्तन और कहानी का संदेश
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
पिताजी ने गौरैयों को भगाने के लिए सबसे अंत में क्या करने का निश्चय किया?
(क) लाठी से डराने का (ख) घोंसला नोच डालने का (ग) कमरे का दरवाज़ा बंद करने का (घ) माँ से कहने काHint
आखिर में उन्होंने घर ही तोड़ने की ठानी।
Answer
(ख)
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
कहानी में कौन-से ध्वन्यात्मक शब्द आए हैं? दो उदाहरण देकर बताइए कि उनसे क्या लाभ है। (25-30 शब्द)
Hint
चीं-चीं, गुटर-गूँ।
Answer
कहानी में 'चीं-चीं', 'गुटर-गूँ' और 'श...शू' जैसे ध्वन्यात्मक शब्द आए हैं। इनसे पक्षियों की आवाज़ कानों में गूँजती है और दृश्य जीवंत लगता है।
Q3 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level
अभिकथन (A): कहानी के अंत में पिताजी का हृदय-परिवर्तन होता है।
कारण (R): घोंसले से नन्ही गौरैयों की चीं-चीं की आवाज़ सुनकर उनके मन में दया जाग जाती है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या करता है
(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं करता
(ग) A सही है, R गलत है
(घ) A गलत है, R सही हैHint
परिवर्तन का कारण क्या था?
Answer
(क)
Q4 · 3 marks · Short answerHarder board level
कहानी में हास्य-व्यंग्य कहाँ-कहाँ आया है? दो उदाहरण देकर समझाइए कि लेखक ने इसका प्रयोग क्यों किया। (50-60 शब्द)
Hint
घर सराय है; गौरैया मकान का निरीक्षण करती हैं।
Answer
पिताजी का यह कहना कि घर सराय है और वे स्वयं मेहमान हैं, हास्य-व्यंग्य है। गौरैयों का 'मकान का निरीक्षण' करना भी मज़ेदार है, क्योंकि यहाँ पक्षी इंसान की तरह काम करते हैं। लेखक ने इनसे कहानी को रोचक बनाया है और बिना उपदेश दिए यह संदेश दिया है कि सभी जीव एक ही घर में साथ रह सकते हैं।
Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
मान लीजिए कि आप कहानी के कथावाचक बालक हैं। उस दिन की घटना पर अपनी डायरी में 80-100 शब्दों का प्रविष्टि-लेख लिखिए।
Hint
प्रथम पुरुष, भूतकाल, भाव।
Answer
रविवार, रात। प्रिय डायरी, आज बहुत मज़ेदार दिन था। पिताजी सुबह से गौरैयों को भगाने में लगे थे। वे ताली बजाते, लाठी चलाते, पर गौरैया बार-बार लौट आईं। माँ ने कहा कि शायद इन्होंने अंडे दिए हैं, पर पिताजी नहीं माने। जब वे घोंसला नोचने लगे, तो अचानक छोटे-छोटे बच्चों की चीं-चीं सुनाई दी। पिताजी ने लाठी रख दी और बैठ गए। माँ ने सारे दरवाज़े खोल दिए। मुझे बहुत अच्छा लगा कि पिताजी मुसकरा रहे थे।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.'दो गौरैया' के लेखक कौन हैं?Show answer
भीष्म साहनी।
2.गौरैयों ने घोंसला कहाँ बनाया?Show answer
बैठक की छत के पंखे के गोले में।
3.पिताजी घर को क्या कहते हैं?Show answer
सराय।
4.माँ ने अंडों के बारे में क्या अनुमान लगाया?Show answer
कि शायद गौरैयों ने अंडे दे दिए हैं।
5.पिताजी का मन किस आवाज़ से बदला?Show answer
नन्ही गौरैयों की चीं-चीं से।
6.अंत में पिताजी क्या करते रहे?Show answer
देख-देखकर मुसकराते रहे।
दो गौरैया: पिताजी का हृदय-परिवर्तन और कहानी का संदेश: frequently asked questions
'दो गौरैया' का केंद्रीय भाव क्या है?
घर और धरती सभी जीवों की साझी है, और दया के आगे गुस्सा-ज़िद हार जाते हैं।
पिताजी का स्वभाव कैसा है?
ज़िद्दी और गुस्सैल दिखते हैं, पर भीतर से कोमल हैं।
कहानी का शीर्षक कैसा है?
दो गौरैया शीर्षक कहानी के मुख्य पात्रों पर है और सार्थक है।
यह कहानी मल्हार में कौन-सा पाठ है?
पाठ 2।