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HindiCBSE Class 8 · आदमी का अनुपात – गिरिजा कुमार माथुर

आदमी का अनुपात (गिरिजा कुमार माथुर), कक्षा 8: विराट सृष्टि में मनुष्य की लघुता

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

गिरिजा कुमार माथुर की कविता 'आदमी का अनुपात' कमरे से घर, मोहल्ला, नगर, देश, पृथ्वी, आकाशगंगा और लाखों ब्रह्मांडों तक फैलती है और दिखाती है कि इस विराट सृष्टि में मनुष्य बहुत छोटा है। इसके बावजूद वह ईर्ष्या, अहंकार और स्वार्थ में दीवारें उठाता है और एक कमरे में भी दो दुनिया रच लेता है। कविता विनम्रता और मेलजोल की सीख देती है।

See how the room is a tiny dot inside the universe, yet people still build walls; the poem teaches humility and togetherness.

Illustration drawn for QuestionBuddy.

Understand आदमी का अनुपात: विराट सृष्टि में मनुष्य की लघुता और उसका अहंकार

आरंभ और अंत। कविता 'दो व्यक्ति कमरे में, कमरे से छोटे' से आरंभ होती है। यहाँ व्यक्ति कमरे से भी छोटे दिखाए गए हैं, जो अनुपात के विचार की भूमिका है।

बढ़ता हुआ घेरा। कविता में एक सीढ़ीनुमा चित्र बनता है: कमरा घर में है, घर मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में, नगर प्रदेश में, कई प्रदेश देश में, कई देश पृथ्वी पर। फिर अनगिनत नक्षत्रों (तारों) में पृथ्वी एक छोटी-सी, करोड़ों में एक है। आकाशगंगा (नभ गंगा) की परिधि सबको घेरे है। लाखों ब्रह्मांडों में हमारा एक ब्रह्मांड है, और हर ब्रह्मांड में न जाने कितनी पृथ्वियाँ और सृष्टियाँ हैं।

अनुपात। कवि कहते हैं: 'यह है अनुपात आदमी का विराट से।' अनुपात का अर्थ तुलना है। विराट के सामने आदमी लगभग कण जितना है।

फिर भी अहंकार। इतनी छोटी हैसियत के बावजूद आदमी ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास में डूबा रहता है। वह 'संख्यातीत शंख-सी दीवारें' उठाता है, यानी लोगों के बीच बनावटी सीमाएँ खड़ी करता है, और स्वयं को दूसरों का स्वामी बताता है। कवि का व्यंग्य है कि वह एक कमरे में भी दो दुनिया बना लेता है, यानी साथ रहने वाले दो लोग भी मन से बँट जाते हैं।

कला-पक्ष। (1) क्रमिक विस्तार का चित्र, (2) उपमा: 'शंख-सी दीवारें', (3) व्यंग्य, (4) मुक्त छंद और छोटी पंक्तियाँ, (5) वैज्ञानिक शब्दावली (नक्षत्र, नभ गंगा, परिधि, ब्रह्मांड)।

केंद्रीय भाव। ब्रह्मांड की विशालता के सामने मनुष्य बहुत छोटा है, इसलिए उसे घमंड, ईर्ष्या और भेदभाव छोड़कर विनम्रता, विश्वास और मेलजोल से रहना चाहिए।

आज के संदर्भ में। जाति, धर्म, भाषा और सीमाओं के भेद हमारे बनाए हुए हैं। विराट के सामने सब मनुष्य समान और छोटे हैं।

उत्तर का ढंग। विस्तार का क्रम, फिर अहंकार का व्यंग्य, फिर संदेश।

आदमी का अनुपात: विराट सृष्टि में मनुष्य की लघुता और उसका अहंकार: key facts

विस्तार का क्रम
  • कमरा
  • घर
  • मोहल्ला
  • नगर
  • प्रदेश
  • देश
  • पृथ्वी
  • नक्षत्र
  • आकाशगंगा
  • ब्रह्मांड
सीढ़ीनुमा चित्र।
मनुष्य का अहंकार
  • ईर्ष्या
  • अहं
  • स्वार्थ
  • घृणा
  • अविश्वास
कविता में गिनाए गए दोष।
शब्दार्थ
अनुपाततुलना
नक्षत्रतारे
नभ गंगाआकाशगंगा
परिधिघेरा
विराटअत्यंत विशाल
संख्यातीतअनगिनत
अर्थ-प्रश्न के लिए।
काव्य-सौंदर्य
  • क्रमिक विस्तार
  • उपमा: शंख-सी दीवारें
  • व्यंग्य: एक कमरे में दो दुनिया
  • मुक्त छंद
उदाहरण के साथ।

आदमी का अनुपात: विराट सृष्टि में मनुष्य की लघुता और उसका अहंकार in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

भेदभाव की दीवारें

मान लीजिए कक्षा 8 के दो दोस्त अनिल और समीर एक ही बेंच पर बैठते हैं। एक मामूली बात पर बहस हो जाती है और वे एक सप्ताह तक बोलते नहीं। एक दिन विज्ञान के शिक्षक सौरमंडल का चित्र दिखाते हैं, जिसमें पृथ्वी एक छोटा-सा बिंदु है। दोनों को लगता है कि उनकी बहस कितनी छोटी थी, और वे फिर दोस्त बन जाते हैं।

इस घटना का कविता से क्या संबंध है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. दोनों दोस्त एक बेंच पर होते हुए भी दो दुनिया में बँटे थे: एक कमरे में दो दुनिया।
  2. विशाल सृष्टि के चित्र ने उन्हें अपनी लघुता का एहसास कराया।
  3. अहंकार छोड़कर वे फिर मेलजोल से रहने लगे।

Answer: यह कविता की सीख से मिलता है कि विराट सृष्टि के सामने मनुष्य की बहसें और अहंकार बहुत छोटे हैं, इसलिए हमें मेलजोल से रहना चाहिए।

Memory hook: ब्रह्मांड बड़ा, अहं छोटा।

Tricks to remember आदमी का अनुपात: विराट सृष्टि में मनुष्य की लघुता और उसका अहंकार

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • क-घ-म-न-प्र-दे-पृ

    कमरा, घर, मोहल्ला, नगर, प्रदेश, देश, पृथ्वी।

    Use it when: सीढ़ी का क्रम।

  • ई-अ-स्वा-घृ-अवि

    ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास।

    Use it when: पाँच दोष।

  • कण जितना आदमी

    विराट में आदमी कण के बराबर।

    Use it when: अनुपात का भाव।

आदमी का अनुपात: विराट सृष्टि में मनुष्य की लघुता और उसका अहंकार: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: कमरे से बाहर · 1 mark · MCQBoard level

कविता का आरंभ किस चित्र से होता है?
(क) ब्रह्मांड से (ख) कमरे में दो व्यक्तियों से, जो कमरे से भी छोटे हैं (ग) पृथ्वी से (घ) दीवारों से

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कविता 'दो व्यक्ति कमरे में, कमरे से छोटे' से शुरू होती है (1 अंक)।

Answer: (ख)

Example 2: अनुपात शब्द · 2 marks · Short answerBoard level

कविता के शीर्षक में 'अनुपात' शब्द का क्या अर्थ है? कवि ने किसका अनुपात बताया है? (25-30 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अनुपात = तुलना (1)।
  2. आदमी की विराट सृष्टि से तुलना (1)।

Answer: अनुपात का अर्थ है दो वस्तुओं की तुलना। कवि ने आदमी की विराट सृष्टि से तुलना की है और दिखाया है कि इस अनंत ब्रह्मांड के सामने आदमी बहुत छोटा है।

Example 3: पृथ्वी की लघुता · 3 marks · Short answerHarder board level

'पृथ्वी एक छोटी करोड़ों में एक ही' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। इससे कवि क्या संदेश देना चाहते हैं? (40-50 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अनगिनत नक्षत्रों में पृथ्वी एक (1)।
  2. पृथ्वी ही छोटी है तो मनुष्य और भी छोटा (1)।
  3. अहंकार व्यर्थ (1)।

Answer: इस पंक्ति का आशय है कि अनगिनत तारों और नक्षत्रों के बीच हमारी पृथ्वी केवल करोड़ों में एक है, यानी बहुत छोटी। जब पूरी पृथ्वी ही इतनी छोटी है, तो उस पर रहने वाला मनुष्य और भी छोटा है। कवि संदेश देते हैं कि मनुष्य को अपने अहंकार और स्वार्थ पर घमंड नहीं करना चाहिए।

Example 4: शंख-सी दीवारें · 4 marks · Short answerHarder board level

'संख्यातीत शंख सी दीवारें' में किस अलंकार का प्रयोग है? 'दीवारों' से कवि का क्या तात्पर्य है और आज के जीवन से एक उदाहरण दीजिए। (60-70 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. उपमा अलंकार: 'सी' वाचक शब्द (1)।
  2. दीवारें = बनावटी भेद और दूरियाँ (1.5)।
  3. उदाहरण (1.5)।

Answer: इसमें उपमा अलंकार है, क्योंकि 'सी' वाचक शब्द के साथ दीवारों की तुलना शंख (बहुत बड़ी संख्या) से की गई है। यहाँ दीवारों से तात्पर्य लोगों के बीच ईर्ष्या, अहंकार और स्वार्थ से बनी बनावटी दूरियों से है। आज के जीवन में जाति, धर्म या अमीरी-गरीबी के आधार पर बनाया गया भेदभाव ऐसी ही दीवार का उदाहरण है।

Example 5: एक कमरे में दो दुनिया · 5 marks · Long answerHOTS / competency

'एक कमरे में दो दुनिया रचाता है' पंक्ति में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए और बताइए कि विराट सृष्टि की चर्चा के बाद यह पंक्ति और प्रभावशाली क्यों लगती है। (80-100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. व्यंग्य का अर्थ (1.5)।
  2. विराट के विस्तार से तुलना (1.5)।
  3. प्रभाव और संदेश (1)।
  4. भाषा (1)।

Answer: इस पंक्ति में व्यंग्य यह है कि मनुष्य इतना संकीर्ण हो जाता है कि एक ही कमरे में रहते हुए भी अलग-अलग दुनिया बना लेता है, यानी मन से बँट जाता है। कविता पहले ब्रह्मांड, आकाशगंगा और करोड़ों पृथ्वियों का विस्तार दिखाती है। इस विशाल पृष्ठभूमि के बाद एक कमरे का छोटा-सा बँटवारा बहुत क्षुद्र लगता है, इसलिए व्यंग्य गहरा हो जाता है। कवि का संदेश है कि हमें दूरियाँ मिटाकर साथ रहना सीखना चाहिए।

Where students lose marks in आदमी का अनुपात: विराट सृष्टि में मनुष्य की लघुता और उसका अहंकार

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: क्रम उलटा लिखना

    कविता कमरे से बाहर की ओर फैलती है।

    Wrong working

    पृथ्वी, देश, नगर, घर, कमरा।

    Right working

    कमरा, घर, मोहल्ला, नगर, प्रदेश, देश, पृथ्वी।

    Do this: सीढ़ी का सूत्र याद रखें।

    Usually costs: 1 अंक।

  • Mistake: शंख को शंख (सीपी) का अर्थ लिखना

    यहाँ शंख बहुत बड़ी संख्या है।

    Wrong working

    दीवारें शंख की तरह मुड़ी हुई हैं।

    Right working

    दीवारें अनगिनत, शंख की संख्या जितनी हैं।

    Do this: संदर्भ से अर्थ समझें।

    Usually costs: 1 से 2 अंक।

  • Mistake: व्यंग्य की जगह केवल वर्णन

    प्रश्न व्यंग्य का आशय माँगता है।

    Wrong working

    कवि कहता है कि आदमी कमरे में रहता है।

    Right working

    कवि व्यंग्य करते हैं कि आदमी इतना छोटा होकर भी एक कमरे में दो दुनिया बना लेता है।

    Do this: लघुता और अहंकार का विरोध लिखें।

    Usually costs: 1 से 2 अंक।

Exam tips

  • कमरे से ब्रह्मांड तक का क्रम पहले लिखें, फिर अनुपात समझाएँ।
  • 'सी' वाचक शब्द देखकर उपमा लिखें।
  • व्यंग्य के उत्तर में लघुता और अहंकार का विरोध स्पष्ट करें।
  • शब्दार्थ याद रखें: नक्षत्र, परिधि, संख्यातीत, विराट।
  • केंद्रीय भाव में विनम्रता और मेलजोल का उल्लेख करें।

Practice questions on आदमी का अनुपात: विराट सृष्टि में मनुष्य की लघुता और उसका अहंकार

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    'आदमी का अनुपात' कविता के कवि कौन हैं?
    (क) गिरिजा कुमार माथुर (ख) दुष्यंत कुमार (ग) कबीर (घ) गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'

    Hint

    मल्हार का नौवाँ पाठ।

    Answer

    (क)

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    'नभ गंगा' और 'परिधि' शब्दों के अर्थ लिखिए। (20-25 शब्द)

    Hint

    आकाशगंगा; घेरा।

    Answer

    'नभ गंगा' का अर्थ है आकाशगंगा, यानी तारों का विशाल समूह। 'परिधि' का अर्थ है घेरा, जो कविता में आकाशगंगा के सबको घेर लेने के भाव में आया है।

  3. Q3 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level

    अभिकथन (A): कविता में मनुष्य के अहंकार पर व्यंग्य किया गया है।
    कारण (R): विराट सृष्टि के सामने तुच्छ होने पर भी वह ईर्ष्या और स्वार्थ में दीवारें उठाता है।
    (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की व्याख्या करता है
    (ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की व्याख्या नहीं करता
    (ग) A सही है, R गलत है
    (घ) A गलत है, R सही है

    Hint

    व्यंग्य का कारण क्या है?

    Answer

    (क)

  4. Q4 · 3 marks · Short answerHarder board level

    कविता में क्रमिक विस्तार (कमरे से ब्रह्मांड तक) का प्रयोग क्यों किया गया है? इसका प्रभाव बताइए। (50-60 शब्द)

    Hint

    छोटे से बड़े की ओर।

    Answer

    कवि कमरे से घर, नगर, देश, पृथ्वी और ब्रह्मांड तक क्रम से विस्तार करते हैं ताकि पाठक एक-एक सीढ़ी चढ़कर विराट सृष्टि का अनुभव करे। इस क्रम से मनुष्य की लघुता का भाव धीरे-धीरे गहरा होता है और अंत में अहंकार पर किया गया व्यंग्य अधिक प्रभावी बन जाता है।

  5. Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    विद्यालय की प्रातःकालीन सभा के लिए 'विराट के सामने हम' विषय पर 80-100 शब्दों का एक भाषण लिखिए, जिसमें कविता की दो बातों का उल्लेख हो।

    Hint

    संबोधन, दो बातें, संदेश।

    Answer

    आदरणीय शिक्षकगण और प्रिय मित्रो, सुप्रभात। आज मैं एक विचार साझा करना चाहता हूँ। गिरिजा कुमार माथुर की कविता कहती है कि हमारा कमरा घर में है, घर नगर में, नगर देश में और देश पृथ्वी पर, जो अनगिनत तारों में एक छोटी-सी है। इस विराट के सामने हम बहुत छोटे हैं। फिर भी हम ईर्ष्या और अहंकार से दीवारें खड़ी करते हैं। आइए, हम अपनी कक्षा में किसी को छोटा न समझें और आपस में मेलजोल रखें। धन्यवाद।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.कविता के कवि कौन हैं?Show answer

    गिरिजा कुमार माथुर।

  2. 2.कविता का आरंभ किस पंक्ति से होता है?Show answer

    दो व्यक्ति कमरे में, कमरे से छोटे।

  3. 3.'नक्षत्र' का अर्थ क्या है?Show answer

    तारे।

  4. 4.आदमी ने कैसी दीवारें उठाई हैं?Show answer

    संख्यातीत शंख-सी, यानी अनगिनत।

  5. 5.आदमी एक कमरे में क्या रचाता है?Show answer

    दो दुनिया।

  6. 6.कविता का छंद कैसा है?Show answer

    मुक्त छंद, छोटी पंक्तियाँ।

आदमी का अनुपात: विराट सृष्टि में मनुष्य की लघुता और उसका अहंकार: frequently asked questions

कविता का केंद्रीय भाव क्या है?

विराट सृष्टि में मनुष्य बहुत छोटा है, इसलिए उसे अहंकार छोड़कर मेलजोल से रहना चाहिए।

'अनुपात' शीर्षक क्यों उचित है?

क्योंकि पूरी कविता मनुष्य की विराट से तुलना पर आधारित है।

यह कविता मल्हार में कौन-सा पाठ है?

पाठ 9।

परीक्षा में क्या पूछा जाता है?

पंक्तियों का भावार्थ, अलंकार, व्यंग्य, शब्दार्थ और भाषण या अनुच्छेद।