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HindiCBSE Class 10 · Course B · Board exam 2026, set 4/1/1 · 7 marks · Reading comprehension

CBSE Class 10 Hindi Course B 2026: question 2

Set in the CBSE Class 10 board exam of 2026, paper 4/1/1, section क, question 2, for 7 marks. Try it first; the hints and our step-by-step solution are below.

Q2 · 7 marks · Reading comprehensionCompetency-basedReading (unseen passages)

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

मन कल्पनाशील है, इसलिए सुंदर सतरंगी कल्पनाएँ बनाकर लुभाता है, मगर सच का अनुभव करना हो तो कल्पना के आसमान से उतरकर सच के धरातल पर आना पड़ता है। काँटे, यानी जो भी दुखद है, जो भी नकारात्मक है, उसका स्वीकार। लेकिन उन्हें तो हम अपने भीतर कहीं गहरे दबा देते हैं, उनसे बचना चाहते हैं। जीवन को अच्छे और बुरे में बाँटकर हमने खुद के साथ बड़ा अन्याय किया है। ज़िन्दगी आदमी की सतरंगी कल्पनाओं के सहारे नहीं चलती, उसके अपने नियम हैं, जो बिल्कुल वैज्ञानिक हैं। हमारा पूरा अस्तित्व बना तरंगों से; यह ऊर्जा का महासागर है और ऊर्जाएँ स्वभावतः एक दूसरे के विपरीत और परिपूरक होती हैं। जो विपरीत दिखाई देता है, वह दूसरे को सहारा देता है। दो विपरीत एक दूसरे को सँभालते हैं।

अगर आप चाहते हैं कि सच में आपके जीवन का फूल खिले, तो काँटों से दूर रहने की आदत छोड़ दें। ज्योति अंधेरे में ही जगमगाती है। पत्थर पर जब छेनी चलती है, तभी तो मूर्तियाँ निर्मित होती हैं। अगर पत्थर कह दे कि नहीं, छेनी मुझे बर्दाश्त नहीं, मुझे काटो मत। मैं जैसा हूँ, मुझे वैसा ही रहने दो; तो अनगढ़ ही रह जाएगा। छेनी की चोट सहना उसके लिए जरूरी है। लोग काँटों से इसलिए बचते हैं कि उनके छिदने पर जो दुख होता है, उसकी पीड़ा सहने की उनमें शक्ति नहीं है। काँटों से निबाह करना काफी नहीं है, काँटों से उतना ही प्रेम करना होगा, जितना फूलों से। अगर आपने काँटों से प्रेम न किया, तो आप प्लास्टिक के फूल ही खरीद लाएँगे, क्योंकि उनमें काँटे नहीं होते।

ज़िंदगी के दोहरे रूप को भली-भाँति पहचानिए। अगर आपने ज़िद की कि हम तो एक को ही पकड़कर जिएँगे, तो आपको यह भी मानना होगा कि आप एक ही पैर से, एक ही पतवार से अपनी नाव खे लेंगे। जब आप एक ही पतवार से नाव को खेओगे तो वह गोल-गोल चक्कर लगाने लगेगी। ऐसी ही ज़िंदगी है। दोनों पतवारों से खेकर ही इसे किनारे पहुँचाया जा सकता है।

  1. (i)

    'ज्योति अंधेरे में ही जगमगाती है' - का गद्यांश के संदर्भ में आशय है :

    1. (A)प्रकाश का भान अंधकार में ही होता है।
    2. (B)अंधेरे के कारण ही प्रकाश का महत्त्व है।
    3. (C)कष्टों के बाद ही सुख का अनुभव होता है।
    4. (D)अंधेरे में रहने वाले ही प्रकाश का मोल समझते हैं।
    1 mark
  2. (ii)

    कॉलम - I को कॉलम - II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प का चयन कीजिए :

    कॉलम – Iकॉलम – II
    I. पत्थर(i) कष्ट
    II. छेनी(ii) मानव-जीवन
    III. मूर्ति(iii) सफलता
    1. (A)I (i), II (iii), III (ii)
    2. (B)I (ii), II (iii), III (i)
    3. (C)I (ii), II (i), III (iii)
    4. (D)I (iii), II (ii), III (i)
    1 mark
  3. (iii)

    पत्थर, छेनी और मूर्ति का उदाहरण यहाँ किस उद्देश्य से दिया गया है ?

    1. (A)मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया से अवगत कराने हेतु
    2. (B)जीवन निखारने के लिए कष्टों का महत्त्व समझाने हेतु
    3. (C)पत्थर की अनगढ़ता से परिचित कराने हेतु
    4. (D)पत्थर, छेनी और मूर्ति की अन्योन्याश्रयता को समझाने हेतु
    1 mark
  4. (iv)

    'जीवन का फूल खिलने' से क्या अभिप्राय है ?

    2 marks
  5. (v)

    'ज़िंदगी की नाव दोनों पतवारों से चलती है' कथन की सार्थकता सिद्ध कीजिए।

    2 marks

Source: official question paper from cbse.gov.in (PDF). See it in the full 2026 board paper, set 4/1/1.

Hints

Open one hint at a time and try again before the next.

Hint 1

अंधेरा और ज्योति किसके प्रतीक हैं?

Hint 2

पत्थर पर छेनी चलने से क्या बनता है?

Hint 3

एक पतवार से नाव का क्या होता है?

Step-by-step solution

Each step shows the marks it earns, as an examiner would award them. Checked by an independent re-solve from the question paper.

  1. (i) अंधेरा कष्ट का प्रतीक है और ज्योति सुख का। अतः आशय है कि कष्टों के बाद ही सुख का अनुभव होता है, (C)।

    1 mark
  2. (ii) पत्थर = मानव-जीवन, छेनी = कष्ट, मूर्ति = सफलता। अतः (C) सही है।

    1 mark
  3. (iii) उदाहरण का उद्देश्य यह समझाना है कि जीवन को निखारने के लिए कष्ट आवश्यक हैं, (B)।

    1 mark
  4. (iv) 'जीवन का फूल खिलना' का अर्थ है जीवन में सुख, सफलता और सार्थकता का अनुभव होना। यह तभी संभव है जब हम काँटों यानी दुख-कष्टों को भी सहज स्वीकार करें।

    2 marks
  5. (v) जैसे एक पतवार से नाव गोल घूमती है और किनारे नहीं पहुँचती, वैसे ही केवल सुख या केवल दुख को पकड़कर जीवन आगे नहीं बढ़ता। सुख-दुख, सफलता-असफलता दोनों को समान रूप से अपनाने से ही जीवन-नौका लक्ष्य तक पहुँचती है। अतः कथन सार्थक है।

    2 marks

Answer: (i) C; (ii) C; (iii) B; (iv) सुख-सफलता का अनुभव, दुखों को स्वीकारकर; (v) सुख-दुख दोनों के संतुलन से ही जीवन आगे बढ़ता है

Where the marks are

  • (i) C (1 अंक)
  • (ii) C (1 अंक)
  • (iii) B (1 अंक)
  • फूल खिलने का अभिप्राय (2 अंक)
  • पतवार कथन की सार्थकता (2 अंक)

Revise the chapter

  • Chapter: Reading (unseen passages)

The question is transcribed from the official paper; figures are described in words. The solution, hints and chapter tag are ours. Spotted an error? Write tosupport@questionbuddy.in.