CBSE Class 10 Hindi Course A 2026: question 1
Set in the CBSE Class 10 board exam of 2026, paper 3/1/1, section क, question 1, for 7 marks. Try it first; the hints and our step-by-step solution are below.
Q1 · 7 marks · Reading comprehensionCompetency-basedReading (unseen passages)
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
जब हम छोटे थे, हमें सिखाया गया कि होशियार बनो। अच्छे नंबर लाओ। जीत कर दिखाओ। धीरे-धीरे ये आदत तमाम सीखें आदत में बदल गईं और पता भी नहीं चला कि कब ये आदत हमारे मन की एक दौड़ में बदल गईं। दूसरों से आगे निकलने की दौड़। कभी कक्षा में प्रथम आने की, कभी ऑफिस में पदोन्नति की, कभी समाज में इज़्ज़त कमाने की और कभी अपने ही भाई-बहनों, दोस्तों, रिश्तेदारों से बेहतर दिखने की। परंतु इस लगातार चलने वाली दौड़ में हम भूल गए कि जिस आत्मा को लेकर निकले थे, वह कहाँ है? हर सुबह उठते हैं और सोचते हैं कि किसे पछाड़ना है। हर शाम थककर सोते हैं और गिनते हैं कि कितने पीछे रह गए। यह थकान सिर्फ शरीर की नहीं है, आत्मा की थकान भी है क्योंकि हमने अपनी गति किसी और की रफ़्तार से बाँध दी है। हम अपने फैसले किसी और की कामयाबी देखकर लेने लगे हैं।
वो किताब क्यों पढ़ रहे हो? क्योंकि सब पढ़ रहे हैं। वो कोर्स क्यों कर रहे हो? क्योंकि उससे नौकरी मिलती है। शहर क्यों जा रहे हो? क्योंकि वहाँ ज़्यादा अवसर हैं। और धीरे-धीरे हमारी ज़िंदगी, हमारी नहीं रह जाती। वह एक नक़ल बन जाती है, दूसरों के रास्तों की, दूसरों के सपनों की। ऐसा नहीं है कि प्रतिस्पर्धा बुरी चीज़ है। आपको अगर किसी से आगे ही निकलना है, तो उस 'आप' से निकलिए, जो डरता है, जो टालता है, जो रोज़ कहता है 'कल से'। आपका अपना असली प्रतिद्वंद्वी कोई और नहीं, हमारा ही कल का, हमारा ही पुराना संस्करण है।
आज के इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में, जहाँ सोशल मीडिया हर दिन दूसरों की उपलब्धियों को चमका कर पेश करता है, वहाँ अपने ही भीतर स्थिर रहना एक साधना है। खुशी और संतोष हमेशा भीतर से आते हैं और उनका रास्ता आत्म-साक्षात्कार से होकर जाता है, ना कि तुलना और प्रतियोगिता से।
- (i)1 mark
गद्यांश के आधार पर लगातार दूसरों से की जा रही प्रतिस्पर्धा की हानि/हानियाँ है/हैं। उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :
I. शारीरिक थकान
II. आत्मा की थकान
III. सामाजिक प्रतिष्ठा की हानि
IV. आर्थिक नुकसान- (A)I और II दोनों
- (B)I, II और III तीनों
- (C)I, II और IV तीनों
- (D)II और IV दोनों
- (ii)1 mark
सोशल मीडिया के युग में अपने भीतर स्थिर रहना एक साधना क्यों है?
- (A)यह दूसरों की उपलब्धियों को नज़र-अंदाज़ करना सिखाता है।
- (B)इससे हम अधिक सफल और प्रसिद्ध हो सकते हैं।
- (C)हर दिन दूसरों की उपलब्धियों को दिखा ललचाता रहता है।
- (D)प्रतिस्पर्धात्मक युग में इंद्रियों पर नियंत्रण कठिन है।
- (iii)1 mark
निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन कर लिखिए :
कथन : हमें अपनी ज़िंदगी में दूसरों के सपनों का अनुकरण बंद कर देना चाहिए।
कारण : दूसरों की नक़ल से सच्ची खुशी मिल सकती है।- (A)कथन और कारण दोनों गलत हैं।
- (B)कथन सही है किंतु कारण गलत है।
- (C)कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की उचित व्याख्या है।
- (D)कथन और कारण दोनों सही हैं किंतु कारण कथन की उचित व्याख्या नहीं है।
- (iv)2 marks
हम सभी को बचपन में कौन-सी सीख दी जाती है और उसका क्या प्रभाव हमारे स्वभाव पर पड़ता है?
- (v)2 marks
खुशी और संतुष्टि किस प्रकार मिल सकती है? आप उसे पाने के लिए क्या करेंगे?
Source: official question paper from cbse.gov.in (PDF). See it in the full 2026 board paper, set 3/1/1.
Hints
Open one hint at a time and try again before the next.
Hint 1
प्रत्येक विकल्प को गद्यांश की पंक्तियों से मिलाइए।
Hint 2
(iv) पहले अनुच्छेद की शुरुआती तीन सीखें देखिए और फिर देखिए कि वे 'दौड़' में कैसे बदलीं।
Hint 3
(v) अंतिम पंक्ति में खुशी का रास्ता बताया गया है; उसी के आधार पर अपना उपाय सोचिए।
Step-by-step solution
Each step shows the marks it earns, as an examiner would award them. Checked by an independent re-solve from the question paper.
- 1 mark
(i) गद्यांश में थकान को 'सिर्फ शरीर की नहीं, आत्मा की भी' कहा गया है। इसलिए शारीरिक और आत्मा की थकान ही हानियाँ हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा या आर्थिक हानि का उल्लेख नहीं है। सही विकल्प (A) है।
- 1 mark
(ii) प्रतिस्पर्धा के इस युग में सोशल मीडिया दूसरों की उपलब्धियाँ चमकाकर दिखाता है, इसलिए इंद्रियों और मन पर नियंत्रण रखकर स्थिर रहना कठिन है। इसी से यह साधना है। सही विकल्प (D) है।
- 1 mark
(iii) कथन सही है, क्योंकि दूसरों के सपनों की नक़ल से जीवन अपना नहीं रहता। कारण गलत है, क्योंकि गद्यांश के अनुसार सच्ची खुशी भीतर से आती है, नक़ल से नहीं। सही विकल्प (B) है।
- 1 mark
(iv) सीख: बचपन में सिखाया जाता है कि होशियार बनो, अच्छे अंक लाओ और जीतकर दिखाओ।
- 1 mark
प्रभाव: यह सीख आदत बनकर मन में दूसरों से आगे निकलने की दौड़ और प्रतिद्वंद्विता का स्वभाव बना देती है। इससे शरीर और मन थक जाते हैं और हम दूसरों की सफलता देखकर फ़ैसले लेने लगते हैं।
- 1 mark
(v) खुशी और संतुष्टि भीतर से आती है। यह आत्म-साक्षात्कार के रास्ते मिलती है, तुलना और प्रतियोगिता से नहीं।
- 1 mark
मैं दूसरों से तुलना छोड़कर अपनी क्षमता पर विश्वास रखूँगा। मैं स्वयं के कल के रूप से बेहतर बनने का प्रयास करूँगा और सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर रहूँगा।
Answer: (i) A; (ii) D; (iii) B; (iv) सीख: होशियार बनो, अच्छे अंक लाओ, जीतकर दिखाओ; प्रभाव: दूसरों से आगे निकलने की दौड़ और थकान; (v) आत्म-साक्षात्कार से; मैं तुलना छोड़कर अपनी क्षमता पर भरोसा करूँगा
Where the marks are
- (i) सही विकल्प A (1 अंक)
- (ii) सही विकल्प D (1 अंक)
- (iii) सही विकल्प B (1 अंक)
- (iv) सीख के दो बिंदु और प्रभाव के दो बिंदु, प्रत्येक ½ अंक (2 अंक)
- (v) खुशी पाने का मार्ग और अपने प्रयास के उपयुक्त बिंदु (1+1 अंक)
Revise the chapter
- Chapter: Reading (unseen passages)
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