CBSE Class 10 Hindi Course A 2026: question 1
Set in the CBSE Class 10 board exam of 2026, paper 3/2/1, section क, question 1, for 7 marks. Try it first; the hints and our step-by-step solution are below.
Q1 · 7 marks · Reading comprehensionCompetency-basedReading (unseen passages)
निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए :
हमारी सभ्यताएँ आमतौर पर नदियों के किनारे ही फली-फूलीं, लेकिन जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ी तो उन्हें नदियों से दूर जाकर बसना पड़ा, पर वहाँ भी उन्होंने तालाब बनाए। इन तालाबों की खासियत यह रही कि ये मनुष्यों के साथ-साथ नदियों को भी पोषित करते रहे थे और मानवता को भी पोषित करते थे, क्योंकि तालाबों में भरा पानी नदी के पेट को भरकर नदी को प्रवाह देता था। इसके बाद फिर जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ी, तो हमने कुएँ बनाए, बावड़ियाँ बनाईं। इस तरह जैसे-जैसे मनुष्य को जलस्रोत से दूर जाना पड़ा तो उसने तालाब, बावड़ियाँ, कुएँ, ताल, झाल, पाल आदि बनाकर पानी का संरक्षण किया। इसी कारण हम पानीदार बने रहे, लेकिन जब भारत में अंग्रेज़ी शासक आए तो उन्होंने कहना शुरू किया कि – 'यह तो सपेरों का देश है और ये ठहरा हुआ पानी पीते हैं। ठहरा हुआ पानी तो दूषित है।' अंग्रेज़ यह बात नहीं जानते थे कि वर्षा जल शुद्ध और पवित्र होता है और जब वह इकट्ठा होता है तो वह सूर्य की किरणों और हवा के स्पर्श से शुद्ध होता रहता है। यह ज्ञान उन्हें नहीं था। राजस्थान में जो वर्षा का जल इकट्ठा होता था उसे हम ताज़ा पानी कहते थे और अगर किसी को पेट की बीमारी होती थी, तो हम उसी से उसका इलाज कर लिया करते थे।
हमारे लिए जल सिर्फ़ जीवन देने वाला, जीवन चलाने वाला ही नहीं रहा, बल्कि उसकी एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भूमिका भी रही। हमारी कोई भी पूजा जल के बिना नहीं होती। जब कहीं घूमने या आनंद मनाने जाते हैं, तो नदी किनारे का और उसके बदलते रंगों का आनंद लेते हैं। पूरे दिन में नदी के तीन रंग बदलते हैं। सुबह का अलग, शाम का अलग और दोपहर का अलग। नदी के ये बदलते रंग हमारे जीवन के बदलते रंगों की तरह हैं जिनमें प्रवाह होता है, गति होती है। इस तरह पानी से हमें एक 'जीवन दर्शन' मिलता रहा जिसे हम 'जल दर्शन' कह सकते हैं। जब तक हमें यह मिलता रहा तब तक हम पानीदार बने रहे, लेकिन अब हमारा यह जल दर्शन शनैः शनैः मिट्टी में दबता जा रहा है।
- (i)1 mark
हमारी सभ्यताएँ नदियों के किनारे ही क्यों विकसित हुईं ?
- (A)जल संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के कारण
- (B)बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण
- (C)आवागमन की सुविधा के कारण
- (D)प्राकृतिक सौंदर्य के कारण
- (ii)1 mark
जनसंख्या वृद्धि के साथ जलस्रोतों के विषय में क्या बदलाव आया है ?
- (A)नदियों पर मनुष्यों की निर्भरता अधिक बढ़ी।
- (B)वर्षा जल के लिए प्रतीक्षा रहने लगी।
- (C)नदियों से बसावट दूर हुई और तालाब, बावड़ियाँ, कुएँ आदि बनाए गए।
- (D)पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ने लगा और जलस्रोतों का पानी कम पड़ने लगा।
- (iii)1 mark
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : हमारी कोई भी पूजा जल के बिना पूरी नहीं होती।
कारण : जल की मानव जीवन में एक आध्यात्मिक भूमिका रही है।
विकल्प :- (A)कथन सही है, किंतु कारण ग़लत है।
- (B)कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
- (C)कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (D)कथन और कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
- (iv)2 marks
जल से जीवन का कौन-सा दर्शन मिलता है ? स्पष्ट उत्तर लिखिए।
- (v)2 marks
'पानीदार होने' का गद्यांश के संदर्भ में क्या अर्थ है ? हम किस प्रकार पानीदार बने रह सकते हैं ?
Source: official question paper from cbse.gov.in (PDF). See it in the full 2026 board paper, set 3/2/1.
Hints
Open one hint at a time and try again before the next.
Hint 1
पहले अनुच्छेद की शुरुआती पंक्तियाँ फिर पढ़ें।
Hint 2
(iv) के लिए दूसरे अनुच्छेद में नदी के बदलते रंगों वाली पंक्ति देखें।
Hint 3
(v) में 'पानीदार' का अर्थ और बचाव के तरीके अलग-अलग लिखें।
Step-by-step solution
Each step shows the marks it earns, as an examiner would award them. Checked by an independent re-solve from the question paper.
- 1 mark
(i) सभ्यताएँ नदियों के किनारे इसलिए फली-फूलीं कि मनुष्य की पानी की ज़रूरतें वहीं पूरी होती थीं। उत्तर: (A)।
- 1 mark
(ii) जनसंख्या बढ़ने पर लोग नदियों से दूर बसे और वहाँ तालाब, बावड़ियाँ, कुएँ बनाकर पानी जुटाया। उत्तर: (C)।
- 1 mark
(iii) पूजा का जल के बिना न होना सही कथन है। जल की आध्यात्मिक भूमिका इसका सही कारण है और कथन की व्याख्या करती है। उत्तर: (C)।
- 2 marks
(iv) जल से हमें प्रवाह और गति का जीवन-दर्शन मिलता है, जिसे 'जल दर्शन' कहा गया है। नदी के सुबह, दोपहर और शाम के बदलते रंग जीवन के बदलते रंगों जैसे हैं। वे सुख-दुख और परिवर्तन की ओर संकेत करते हैं और सिखाते हैं कि जीवन चलते रहने का नाम है।
- 2 marks
(v) अर्थ: 'पानीदार होना' का अर्थ है पानी जैसी प्राकृतिक संपदा से संपन्न होना, और साथ ही आत्मसम्मान तथा आन वाला होना। तरीका: वर्षा जल का संचयन करके, तालाब, कुएँ और बावड़ियों को फिर से जीवित करके और नदियों को सँभालकर हम पानीदार बने रह सकते हैं।
Answer: (i) A; (ii) C; (iii) C; (iv) प्रवाह, गति और परिवर्तन का जीवन-दर्शन ('जल दर्शन'); (v) पानी से संपन्न व आत्मसम्मानी होना; वर्षा जल संचयन व परंपरागत जलस्रोतों का पुनर्जीवन
Where the marks are
- (i) सही विकल्प A (1 अंक)
- (ii) सही विकल्प C (1 अंक)
- (iii) सही विकल्प C (1 अंक)
- (iv) प्रवाह/गति/बदलाव का दर्शन और सुख-दुख व परिवर्तन का संकेत, दो बिंदु (1+1=2 अंक)
- (v) अर्थ और उसे बनाए रखने का तरीका (1+1=2 अंक)
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