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HindiCBSE Class 10 · Course B · Board exam 2025, set 4/3/1 · 7 marks · Reading comprehension

CBSE Class 10 Hindi Course B 2025: question 1

Set in the CBSE Class 10 board exam of 2025, paper 4/3/1, section क, question 1, for 7 marks. Try it first; the hints and our step-by-step solution are below.

Q1 · 7 marks · Reading comprehensionCompetency-basedReading (unseen passages)

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए :

क्रोध कार्य-कारण के संबंध ज्ञान में त्रुटि या भूल होने पर धोखा देता है। क्रोध करने वाला जिस ओर से दुख आता है उसी ओर देखता है, अपनी ओर नहीं। जिसने दुख पहुँचाया है उसका नाश हो या उसे दुख पहुँचे, क्रुद्ध का यही लक्ष्य होता है। न तो वह यह देखता है कि मैंने कुछ किया है या नहीं, और न ही इस बात का ध्यान करता है कि क्रोध के वेग में मैं जो कुछ करूँगा उसका परिणाम क्या होगा। यही क्रोध का अंधापन है। इसी से एक तो मनोविकार ही एक-दूसरे को परिमित किया करते हैं, ऊपर से बुद्धि या विवेक भी इन पर अंकुश रखता है। यदि क्रोध इतना उग्र हुआ कि मन में दुखदाता की शक्ति के रूप और परिणाम के निश्चय, दया, भय आदि और भावों के संचार तथा उचित-अनुचित के विचार के लिए जगह ही न रही तो बड़ा अनर्थ खड़ा हो जाता है, जैसे यदि कोई सुने कि उसका शत्रु बीस-पच्चीस आदमी लेकर उसे मारने आ रहा है और वह चट क्रोध में व्याकुल होकर बिना शत्रु की शक्ति का विचार और अपनी रक्षा का पूरा प्रबंध किए उसे मारने के लिए अकेले दौड़ पड़े, तो उसके मारे जाने में बहुत कम संदेह समझा जाएगा। अत: कारण के यथार्थ निश्चय के उपरांत, उसका उद्देश्य अच्छी तरह समझ लेने पर ही आवश्यक मात्रा और उपयुक्त स्थिति में ही क्रोध वह काम दे सकता है जिसके लिए उसका विकास होता है।

  1. (i)

    क्रोध धोखा कब देता है ?

    1. (A)क्रोध करने वाले के मनोभावों का ज्ञान न होने पर
    2. (B)कार्य-कारण के संबंध में भूल होने पर
    3. (C)कार्य-कारण के संबंध में विश्वास होने पर
    4. (D)दुख पहुँचाने वाले के व्यवहार का ज्ञान न होने पर
    1 mark
  2. (ii)

    गद्यांश के मूल भाव को व्यक्त करने वाला/वाले कथन कौन-सा/से है/हैं ? उचित विकल्प चुनकर लिखिए :
    I. बुद्धि और विवेक की भावना मनोविकारों पर अंकुश लगाते हैं।
    II. दुखदाता की शक्ति का विचार किए बिना अकेले भिड़ना मूर्खता है।
    III. आवश्यक और उचित मात्रा में किया गया क्रोध भी अनुचित है।
    IV. शत्रु के अहंकार मर्दन के लिए क्रोध जरूरी है।

    1. (A)केवल II सही है।
    2. (B)केवल IV सही है।
    3. (C)I और II दोनों सही हैं।
    4. (D)III और IV दोनों सही हैं।
    1 mark
  3. (iii)

    निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यान से पढ़िए और सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए :
    कथन : कारण और परिस्थिति के अनुरूप किया गया क्रोध ही उपयुक्त है।
    कारण : परिस्थिति के अनुरूप बुद्धि का प्रयोग कर, परिमित क्रोध करने से भयंकर दुष्परिणामों से बचा जा सकता है।
    विकल्प :

    1. (A)कथन और कारण दोनों गलत हैं।
    2. (B)कारण गलत है, लेकिन कथन सही है।
    3. (C)कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की गलत व्याख्या करता है।
    4. (D)कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
    1 mark
  4. (iv)

    क्रोध को अंधा क्यों कहा गया है ?

    2 marks
  5. (v)

    क्रोध कब अनर्थकारी रूप धारण कर लेता है ?

    2 marks

Source: official question paper from cbse.gov.in (PDF). See it in the full 2025 board paper, set 4/3/1.

Hints

Open one hint at a time and try again before the next.

Hint 1

गद्यांश की पहली पंक्ति देखिए।

Hint 2

(iv) क्रोधी किस ओर देखता है और किस ओर नहीं?

Hint 3

(v) 'यदि क्रोध इतना उग्र हुआ' से शुरू होने वाला वाक्य पढ़िए।

Step-by-step solution

Each step shows the marks it earns, as an examiner would award them. Checked by an independent re-solve from the question paper.

  1. (i) गद्यांश के पहले वाक्य के अनुसार क्रोध तब धोखा देता है जब कार्य-कारण के संबंध में ज्ञान की भूल हो। उत्तर: (B)।

    1 mark
  2. (ii) कथन I और II गद्यांश के भाव हैं। III और IV गद्यांश के विपरीत हैं, क्योंकि लेखक उचित मात्रा के क्रोध को उपयोगी मानता है। उत्तर: (C)।

    1 mark
  3. (iii) कथन सही है: कारण समझकर, उचित मात्रा व स्थिति में किया क्रोध ही काम का है। कारण भी सही है और बुद्धि से परिमित क्रोध अनर्थ से बचाता है, इसलिए वह कथन की सही व्याख्या है। उत्तर: (D)।

    1 mark
  4. (iv) क्रोधी केवल उस ओर देखता है जिधर से दुख आया, अपनी भूल या कर्म की ओर नहीं देखता। वह दुख देने वाले के नाश को ही लक्ष्य बनाता है और अपने कार्य के परिणाम का विचार नहीं करता, इसलिए क्रोध अंधा कहा गया है।

    2 marks
  5. (v) जब क्रोध इतना उग्र हो जाए कि मन में शत्रु की शक्ति के विचार, दया, भय और उचित-अनुचित के विवेक के लिए जगह न बचे, तब वह अनर्थकारी बन जाता है। जैसे शत्रु की शक्ति जाने बिना अकेले उस पर दौड़ पड़ना, जिसमें मारे जाने की आशंका रहती है।

    2 marks

Answer: (i) B; (ii) C; (iii) D; (iv),(v) ऊपर लिखे अनुसार

Where the marks are

  • (i) विकल्प B (1 अंक)
  • (ii) विकल्प C (1 अंक)
  • (iii) विकल्प D (1 अंक)
  • (iv) केवल दुख देने वाले की ओर देखना, अपनी भूल व परिणाम का विचार न करना (2 अंक)
  • (v) विवेक, दया, भय आदि के लिए जगह न रहने पर; शत्रु की शक्ति का विचार किए बिना भिड़ना (2 अंक)

Revise the chapter

  • Chapter: Reading (unseen passages)

The question is transcribed from the official paper; figures are described in words. The solution, hints and chapter tag are ours. Spotted an error? Write tosupport@questionbuddy.in.