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HindiCBSE Class 10 · Course A · Board exam 2025, set 3/5/1 · 7 marks · Reading comprehension

CBSE Class 10 Hindi Course A 2025: question 1

Set in the CBSE Class 10 board exam of 2025, paper 3/5/1, section क, question 1, for 7 marks. Try it first; the hints and our step-by-step solution are below.

Q1 · 7 marks · Reading comprehensionCompetency-basedReading (unseen passages)

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

भारतीय सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है, जिसमें बहुरंगी विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। इसके साथ ही यह अपने आपको बदलते समय के साथ ढालती भी आई है। इसमें प्राचीन गौरवशाली मान्यताओं एवं परंपराओं के साथ नवीनता का समावेश भी दिखाई देता है। यह विभिन्न सांस्कृतिक धारणाओं का महासंगम है। इसमें अध्यात्म एवं भौतिकता का समन्वय दिखाई देता है। अपनी पारंपरिक संस्कृति से लेकर तिब्बत, मंगोल, द्रविड़, हड़प्पाई और यूरोपीय धाराओं के समागम के बावजूद भारतीय संस्कृति ने अपना पृथक् अस्तित्व बनाए रखा और नवागत संस्कृतियों की अच्छी बातों को उदारतापूर्वक ग्रहण किया।

भारतीय संस्कृति में 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की भावना के साथ सबके कल्याण की बात कही गई है। साथ ही 'वसुधैव कुटुंबकम्' की पवित्र भावना के साथ संपूर्ण विश्व को ही एक परिवार के रूप में स्वीकार किया गया है। हमारी संस्कृति ने जीवन में 'एकल' को स्वीकार करने, उसका मानवर्धन करने या उसकी ओर अग्रसर होने की बात नहीं सिखाई बल्कि 'सकल' को स्थापित किया । 'व्यष्टि' के स्थान पर 'समष्टि' को महत्त्व और प्राथमिकता दी गई है। हमारे पूर्वजों ने सिखाया कि इस नश्वर संसार में 'मैं' का कोई महत्त्व नहीं है। यहाँ तो 'हम' के बिना मनुष्य जीवन का कुछ होने वाला नहीं है। यह सच है कि मनुष्यता का ऐसा उदात्त भाव, संस्कारों की ऐसी तरलता, सरलता और सांस्कृतिक गहराई दुनिया के किसी समाज, धर्म-संस्कृति में नहीं मिलती, जबकि हमारी संस्कृति में ये हमारी धमनियों में प्रवाहित रक्त के समान तथा हमारी श्वासों के साथ हमारी देह में प्रविष्ट करने वाली प्राण-धारा के समान है।

आज आवश्यकता है कि हम अतीत की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजें-सँवारें तथा उसकी मज़बूत आधारशिला पर खड़े होकर नए मूल्यों और संस्कृति को निर्मित एवं विकसित करें।

  1. (क)

    गद्यांश में भारतीय संस्कृति के किस तत्त्व का उल्लेख नहीं किया गया है ?

    1. (A)सबके सुख की कामना
    2. (B)सबके कल्याण की भावना
    3. (C)समस्त वसुधा एक परिवार
    4. (D)व्यष्टि उत्थान को प्राथमिकता
    1 mark
  2. (ख)

    निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उचित विकल्प का चयन कीजिए :
    कथन : भारतीय संस्कृति 'एकल' का मानवर्धन करने के स्थान पर 'सकल' का महत्त्व स्थापित करती है।
    कारण : भारतीय संस्कृति की विशालता और महत्ता संपूर्ण मानव के साथ तादात्म्य संबंध स्थापित करने में है।

    1. (A)कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
    2. (B)कथन सही है, लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
    3. (C)कारण सही है, लेकिन कथन गलत है।
    4. (D)कथन व कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
    1 mark
  3. (ग)

    'इस नश्वर संसार में 'मैं' का कोई महत्त्व नहीं है।' - कथन में प्रयुक्त 'मैं' का अर्थ है -

    1. (A)अहंकार
    2. (B)जीवन
    3. (C)एकल
    4. (D)मनुष्य
    1 mark
  4. (घ)

    भारतीय संस्कृति में 'मैं' की जगह किसे महत्त्व दिया गया है और क्यों ?

    2 marks
  5. (ङ)

    भारतीय संस्कृति के अक्षुण्ण बने रहने का क्या कारण है ? किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए ।

    2 marks

Source: official question paper from cbse.gov.in (PDF). See it in the full 2025 board paper, set 3/5/1.

Hints

Open one hint at a time and try again before the next.

Hint 1

गद्यांश में 'व्यष्टि' और 'समष्टि' के बीच किसे चुना गया है, यह देखिए।

Hint 2

'मैं' के साथ 'एकल' शब्द का प्रयोग कहाँ हुआ है, यह खोजिए।

Hint 3

(ङ) में समय के साथ ढलने और अपना अस्तित्व बनाए रखने वाली पंक्तियाँ देखिए।

Step-by-step solution

Each step shows the marks it earns, as an examiner would award them. Checked by an independent re-solve from the question paper.

  1. (क) गद्यांश में सबके सुख, सबके कल्याण और 'वसुधैव कुटुंबकम्' का उल्लेख है। 'व्यष्टि' की जगह 'समष्टि' को महत्त्व मिला है, इसलिए व्यष्टि-उत्थान को प्राथमिकता का उल्लेख नहीं है। उत्तर: (D)।

    1 mark
  2. (ख) कथन सही है, क्योंकि संस्कृति ने 'एकल' नहीं 'सकल' को स्थापित किया। कारण भी सही है और कथन की व्याख्या करता है। उत्तर: (D)।

    1 mark
  3. (ग) 'मैं' यहाँ 'एकल', यानी अकेले व्यक्ति के भाव का सूचक है, जिसके स्थान पर 'हम' को महत्त्व दिया गया। उत्तर: (C)।

    1 mark
  4. (घ) भारतीय संस्कृति में 'मैं' की जगह 'हम' को महत्त्व दिया गया है। 'हम' समाज या समष्टि का प्रतीक है।

    1 mark
  5. (घ) कारण: सबके कल्याण की भावना ही सच्चा विकास है। पूरा विश्व एक परिवार है और 'हम' के बिना मनुष्य का जीवन सार्थक नहीं होता।

    1 mark
  6. (ङ) पहला कारण: यह बदलते समय के अनुसार स्वयं को ढालती रही है। इसमें प्राचीन परंपराओं के साथ नवीनता का समावेश है।

    1 mark
  7. (ङ) दूसरा कारण: अनेक संस्कृतियों के मेल के बावजूद इसने अपना अलग अस्तित्व बनाए रखा। इसमें मनुष्यता का उदात्त भाव और सांस्कृतिक गहराई है, साथ ही अध्यात्म और भौतिकता का समन्वय भी है।

    1 mark

Answer: (क) D; (ख) D; (ग) C; (घ) 'हम' को, क्योंकि समष्टि और सबके कल्याण में ही वास्तविक विकास है; (ङ) समय के अनुसार ढलना तथा प्राचीन-नवीन का समावेश, सांस्कृतिक गहराई और उदात्त मनुष्यता।

Where the marks are

  • (क) सही विकल्प D (1 अंक)
  • (ख) सही विकल्प D (1 अंक)
  • (ग) सही विकल्प C (1 अंक)
  • (घ) 'हम' का उल्लेख (1 अंक)
  • (घ) समष्टि और कल्याण का कारण (1 अंक)
  • (ङ) दो उपयुक्त कारण (1+1 अंक)

Revise the chapter

  • Chapter: Reading (unseen passages)

The question is transcribed from the official paper; figures are described in words. The solution, hints and chapter tag are ours. Spotted an error? Write tosupport@questionbuddy.in.