CBSE Class 10 Hindi Course A 2025: question 1
Set in the CBSE Class 10 board exam of 2025, paper 3/4/1, section क, question 1, for 7 marks. Try it first; the hints and our step-by-step solution are below.
Q1 · 7 marks · Reading comprehensionCompetency-basedReading (unseen passages)
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
लोक साहित्य का सृजक लोक ही है इसीलिए उसमें लोकजीवन की आत्मगाथा समाहित होती है। लोक साहित्य मानव जीवन जितना ही प्राचीन है। अपने जन्म के साथ ही मनुष्य ने कथाएँ कहनी शुरू कर दी थीं- यथार्थपरक भी और काल्पनिक भी। इन कथाओं में उसके अपने अनुभव की कथाएँ हैं। साथ ही अपने तत्कालीन समय और समाज की घटनाओं तथा कथाओं का समावेश है। समय के साथ-साथ समाज में बदलाव की बयार चलती रहती है और समय के साथ कदमताल करते हुए लोक साहित्य में भी बदलाव होता रहा है। लोक साहित्य समय के साथ यात्रा करता आया है और परिवर्तनों को स्वीकारता रहा है।
लोक साहित्य की यह सबसे बड़ी खूबसूरती है कि वह परंपराओं का ध्यान रखते हुए भी रूढ़ियों को पकड़कर एक जगह ठहरता नहीं। वह समय के साथ चलता है और समय के सच से साक्षात्कार कराते हुए कभी-कभी समय से आगे चलता भी दिखता है। तभी कहा जाता है कि किसी संस्कृति के संबंध में गहराई से जानने के लिए वहाँ के लोक साहित्य को जानना आवश्यक है। क्योंकि उसमें संस्कृति का सच्चा स्वरूप दृष्टिगोचर होता है।
लोक साहित्य में लोकगीत, लोककथा, लोकगाथा, लोकनाट्य आदि सभी रूप शामिल हैं। इनकी भाषा इतनी सहज-सरल-सरस होती है कि वे लोककंठों में बस जाती हैं। आज के आत्ममुग्ध और आत्म-प्रचार के समय में हम लोक साहित्य सृजकों के आत्म-प्रचार से दूर रहने की मनःस्थिति पर विस्मय ही कर सकते हैं। अपनी प्रसिद्धि, मान-सम्मान या अपने नाम के प्रचार की लालसा का भाव उनमें लेशमात्र भी नहीं था। अपनी रचनाओं में भी वे ऐसा संकेत करने से बचते रहे, जिससे उनकी पहचान की जा सके। अपने नाम के प्रचार के मोह से वे पूरी तरह मुक्त थे।
- (i)1 mark
लोक साहित्य में बदलाव क्यों होते रहते हैं?
- (A)बदलाव से इनमें नवीनता बनी रहती है
- (B)इसके आधार, समाज में बदलाव होते रहते हैं
- (C)मनुष्य की कल्पनाएँ नए-नए रूप धारण करती हैं
- (D)एक ही तरह का साहित्य नीरसता पैदा करता है
- (ii)1 mark
लोक साहित्य के संबंध में अनुपयुक्त विकल्प है-
- (A)लोक साहित्य का संबंध तत्कालीन समाज की परंपराओं से होता है।
- (B)लोक साहित्य के माध्यम से किसी समाज-देश की संस्कृति को जाना जा सकता है।
- (C)लोक साहित्य का सृजन समाज के एक वर्ग विशेष द्वारा किया जाता है।
- (D)लोक साहित्य समय के साथ आ रहे बदलाव के प्रति ग्रहणशील होता है।
- (iii)1 mark
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए:
कथन- लोक साहित्य रूढ़िवाद का समर्थक होता है।
कारण- यथार्थ और कल्पना पर आधारित होने के कारण इनमें बदलाव संभव नहीं है।- (A)कथन गलत है किंतु कारण सही है।
- (B)कथन और कारण दोनों ही गलत हैं।
- (C)कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
- (D)कथन सही है किंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
- (iv)2 marks
लोक साहित्य और संस्कृति को अंतर्संबंधित क्यों बताया गया है? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।
- (v)2 marks
लोक साहित्य सृजक अन्य साहित्य सृजकों से भिन्न कैसे होते हैं? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।
Source: official question paper from cbse.gov.in (PDF). See it in the full 2025 board paper, set 3/4/1.
Hints
Open one hint at a time and try again before the next.
Hint 1
गद्यांश में लोक साहित्य के बदलने और रूढ़ि से न बँधने की पंक्तियाँ देखिए।
Hint 2
(iv) में संस्कृति का सच्चा स्वरूप कहाँ दिखता है, यह खोजिए।
Hint 3
(v) में अंतिम अनुच्छेद की आत्म-प्रचार वाली पंक्तियाँ पढ़िए।
Step-by-step solution
Each step shows the marks it earns, as an examiner would award them. Checked by an independent re-solve from the question paper.
- 1 mark
(i) लोक साहित्य का आधार समाज है और समाज में समय के साथ बदलाव आते रहते हैं, इसलिए उसमें भी बदलाव होता है। सही उत्तर (B)।
- 1 mark
(ii) लोक साहित्य का सृजन किसी एक वर्ग विशेष द्वारा नहीं, पूरे लोक द्वारा होता है। इसलिए अनुपयुक्त कथन (C) है।
- 1 mark
(iii) लोक साहित्य रूढ़ियों को पकड़कर ठहरता नहीं और समय के साथ बदलता है। इसलिए कथन और कारण दोनों गलत हैं। सही उत्तर (B)।
- 2 marks
(iv) लोक साहित्य लोकजीवन की ही अभिव्यक्ति है, इसलिए किसी संस्कृति को गहराई से जानने के लिए उसका लोक साहित्य जानना आवश्यक है। उसमें अपने समय और समाज की घटनाओं-कथाओं का वर्णन होता है, इसलिए उसमें संस्कृति का सच्चा स्वरूप दिखाई देता है।
- 2 marks
(v) लोक साहित्य के सृजकों में आत्ममुग्धता और आत्म-प्रचार का भाव नहीं होता। वे प्रसिद्धि और मान-सम्मान की लालसा से मुक्त रहते थे और अपनी रचनाओं में अपनी पहचान का कोई संकेत नहीं छोड़ते थे।
Answer: (i) B; (ii) C; (iii) B; (iv) लोक साहित्य में संस्कृति का सच्चा स्वरूप और समाज की घटनाएँ मिलती हैं; (v) लोक साहित्य सृजक आत्म-प्रचार और नाम की लालसा से मुक्त होते हैं
Where the marks are
- (i) सही विकल्प B (1 अंक)
- (ii) सही विकल्प C (1 अंक)
- (iii) सही विकल्प B (1 अंक)
- (iv) कोई दो उपयुक्त बिंदु (2 अंक)
- (v) कोई दो उपयुक्त बिंदु (2 अंक)
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- Chapter: Reading (unseen passages)
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