CBSE Class 10 Hindi Course B 2023: question 9
Set in the CBSE Class 10 board exam of 2023, paper 4/4/1, section अ, question 9, for 5 marks. Try it first; the hints and our step-by-step solution are below.
Q9 · 5 marks · Reading comprehensionCompetency-basedप्रहलाद अग्रवाल – तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उचित विकल्प चुनकर लिखिए :
राज कपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह भी किया। पर वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी, जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी। 'तीसरी कसम' कितनी ही महान् फ़िल्म क्यों न रही हो, लेकिन यह एक दुःखद सत्य है कि इसे प्रदर्शित करने के लिए बमुश्किल वितरक मिले। बावजूद इसके कि 'तीसरी कसम' में राज कपूर और वहीदा रहमान जैसे नामजद सितारे थे, शंकर-जयकिशन का संगीत था, जिसकी लोकप्रियता उन दिनों सातवें आसमान पर थी और इसके गीत भी फ़िल्म के प्रदर्शन के पूर्व ही बेहद लोकप्रिय हो चुके थे, लेकिन इस फ़िल्म को खरीदने वाला कोई नहीं था। दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने का गणित जानने वाले की समझ से परे थी। उसमें रची-बसी करुणा तराज़ू पर तौली जा सकने वाली चीज़ नहीं थी।
- (i)1 mark
राज कपूर ने शैलेंद्र को किस बात से आगाह किया था ?
- (a)फ़िल्म का किसी को समझ न आने वाली बात से।
- (b)फ़िल्म से कोई आर्थिक लाभ न मिलने वाली बात से।
- (c)फ़िल्म निर्माण में होने वाली परेशानियों से ।
- (d)फ़िल्म की संभावित असफलता के खतरों से ।
- (ii)1 mark
शैलेंद्र को किस प्रकार का व्यक्ति माना जा सकता है ?
- (a)कुशल फ़िल्म निर्माता
- (b)प्रसिद्ध गीतकार
- (c)आदर्शवादी भावुक कवि
- (d)आत्म-संतुष्ट व्यक्ति
- (iii)1 mark
'तीसरी कसम' फ़िल्म का दुःखद सत्य क्या था ?
- (a)फ़िल्म के लिए खरीददार का न मिलना।
- (b)लोगों का फ़िल्म को न समझ पाना।
- (c)फ़िल्म का रूपहले पर्दे पर न पहुँच पाना।
- (d)फ़िल्म को प्रसिद्धि न मिल पाना।
- (iv)1 mark
गद्यांश में आई पंक्ति – 'दो से चार बनाने का गणित' – का अर्थ है :
- (a)अधिक से अधिक धन कमाना।
- (b)संख्याओं को जोड़ने का हिसाब।
- (c)अधिक से अधिक मुनाफ़ा कमाना।
- (d)संख्याओं को गुणा करने का हिसाब।
- (v)1 mark
"उसमें रची-बसी करुणा तराज़ू पर तौली जा सकने वाली चीज़ नहीं थी।" - पंक्ति का आशय है :
- (a)यह करुणा अनुभूति का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
- (b)यह करुणा बुद्धि का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
- (c)यह करुणा हृदय का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
- (d)यह करुणा भावना का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
Source: official question paper from cbse.gov.in (PDF). See it in the full 2023 board paper, set 4/4/1.
Hints
Open one hint at a time and try again before the next.
Hint 1
गद्यांश की पहली पंक्ति देखिए।
Hint 2
शैलेंद्र को गद्यांश में किस विशेषण से बताया गया है?
Hint 3
'दो से चार' मुहावरा लाभ-हानि के हिसाब से जुड़ा है।
Step-by-step solution
Each step shows the marks it earns, as an examiner would award them. Checked by an independent re-solve from the question paper.
- 1 mark
(i) राज कपूर ने फ़िल्म की संभावित असफलता के खतरों से आगाह किया। (d)
- 1 mark
(ii) शैलेंद्र आदर्शवादी भावुक कवि थे। (c)
- 1 mark
(iii) दुखद सत्य यह कि फ़िल्म के लिए खरीददार/वितरक नहीं मिले। (a)
- 1 mark
(iv) 'दो से चार बनाना' = अधिक से अधिक मुनाफ़ा कमाना। (c)
- 1 mark
(v) करुणा अनुभूति का विषय थी, नाप-तोल का नहीं। (a)
Answer: (i) d; (ii) c; (iii) a; (iv) c; (v) a
Where the marks are
- (i) (d) (1 अंक)
- (ii) (c) (1 अंक)
- (iii) (a) (1 अंक)
- (iv) (c) (1 अंक)
- (v) (a) (1 अंक)
Revise the chapter
- Chapter: प्रहलाद अग्रवाल – तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र (notes, formulas, where marks are lost and every past question)
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