वह जन्मभूमि मेरी (सोहनलाल द्विवेदी): भारत के आठ रूप और गौरव-गान
Updated 18 October 2026 · Fact-checked
'वह जन्मभूमि मेरी' सोहनलाल द्विवेदी की देशप्रेम की कविता है। कवि भारत को जन्मभूमि, मातृभूमि, पुण्यभूमि, स्वर्णभूमि, धर्मभूमि, कर्मभूमि, युद्धभूमि और बुद्धभूमि कहते हैं और हिमालय, सागर, नदियों, झरनों तथा राम, सीता, कृष्ण और गौतम बुद्ध के गौरव का गान करते हैं। टेक बार-बार लौटती है।
Understand भारत के आठ रूप: प्रकृति और संस्कृति का गौरव-गान (वह जन्मभूमि मेरी)
कवि और पाठ। यह सोहनलाल द्विवेदी की कविता है, जो साहित्य सागर में संकलित है और कक्षा 9 के लिए निर्धारित है। यह तीन भागों में भारत का गौरव-गान है। टेक "वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी" बार-बार आती है।
पहला भाग: प्राकृतिक भव्यता। उत्तर में ऊँचा हिमालय आकाश को चूमता है और उसके चरणों में सागर झूमता है। गंगा, यमुना और त्रिवेणी की लहरें लहराती हैं। अंत में भारत पुण्यभूमि (पवित्र भूमि) और स्वर्णभूमि (समृद्ध भूमि) कहलाता है।
दूसरा भाग: प्रकृति की मधुरता। पहाड़ियों में झरने झरते हैं, झाड़ियों में चिड़ियाँ चहकती हैं, आम के बागों में कोयल पुकारती है और सुगंधित मलय पवन तन-मन को सँवारती है। अंत में भारत धर्मभूमि और कर्मभूमि है।
तीसरा भाग: सांस्कृतिक गौरव। यही वह भूमि है जहाँ श्रीराम ने जन्म लिया और सीता जन्मी; जहाँ श्रीकृष्ण ने वंशी बजाई और गीता का उपदेश दिया। गौतम बुद्ध ने दया का पाठ पढ़ाकर ज्ञान का दीपक दिखाया। अंत में भारत युद्धभूमि (वीरता की भूमि) और बुद्धभूमि (ज्ञान-करुणा की भूमि) है।
क्रम का अर्थ। कविता प्रकृति की भव्यता से आरंभ होकर कोमलता और फिर महापुरुषों की महिमा तक पहुँचती है। कवि के लिए भारत केवल भू-भाग नहीं, सुंदरता, पवित्रता, धर्म, कर्म, वीरता और करुणा का संगम है।
शिल्प। टेक की आवृत्ति, मानवीकरण (सागर का चरणों में झूमना), अलंकार और सरल गेय भाषा।
भारत के आठ रूप: प्रकृति और संस्कृति का गौरव-गान (वह जन्मभूमि मेरी): key facts
- तीन भाग
- प्राकृतिक भव्यता
- प्रकृति की मधुरता
- सांस्कृतिक गौरव
- क्रम से।
- आठ विशेषण
- जन्म
- मातृ
- पुण्य
- स्वर्ण
- धर्म
- कर्म
- युद्ध
- बुद्ध
- सब के साथ भूमि।
- महापुरुष
- राम
- सीता
- कृष्ण
- गौतम बुद्ध
- तीसरे भाग में।
- टेक
- वह जन्मभूमि मेरी | वह मातृभूमि मेरी
- बार-बार आती है।
How to answer भारत के आठ रूप: प्रकृति और संस्कृति का गौरव-गान (वह जन्मभूमि मेरी) questions
कविता के भावार्थ का उत्तर इस प्रकार लिखिए।
- 1कविता और कवि का नाम लिखिए।
- 2संबंधित भाग का विषय बताइए।
- 3दिए गए उदाहरणों को सरल शब्दों में लिखिए।
- 4कवि का भाव और अलंकार बताइए।
- 5देशप्रेम के संदेश के साथ उत्तर पूरा कीजिए।
भारत के आठ रूप: प्रकृति और संस्कृति का गौरव-गान (वह जन्मभूमि मेरी) in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
विदेश से लौटकर
मान लीजिए कोई छात्रा कुछ वर्ष विदेश में रहकर लौटती है और अपने गाँव की नदी, आम के बाग और पर्वतों को देखकर भावुक हो जाती है।
यह कविता के किस भाव से मिलता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- अपनी भूमि से प्रेम।
- प्रकृति की सुंदरता का बोध।
- गर्व और कृतज्ञता।
Answer: यह कवि के देशप्रेम और अपनी भूमि की प्रकृति पर गर्व से मिलता है।
Memory hook: अपनी भूमि अपना गौरव।
Tricks to remember भारत के आठ रूप: प्रकृति और संस्कृति का गौरव-गान (वह जन्मभूमि मेरी)
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
ज-मा-पु-स्व-ध-क-यु-बु
आठ भूमि-विशेषणों के पहले अक्षर।
Use it when: आठ रूप।
भव्यता-मधुरता-गौरव
तीन भागों का क्रम।
Use it when: क्रम।
राम-सीता-कृष्ण-बुद्ध
चार महापुरुष।
Use it when: तीसरा भाग।
भारत के आठ रूप: प्रकृति और संस्कृति का गौरव-गान (वह जन्मभूमि मेरी): solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: सप्रसंग व्याख्या: हिमालय और सागर (4 अंक) · 4 marks · Long answerBoard level
"ऊँचा हिमालय आकाश को चूमता है और उसके चरणों में सागर झूमता है" – इस भाव की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रसंग: कवि और कविता का नाम, पहला भाग (1)
- हिमालय की ऊँचाई का भाव (1)
- सागर के झूमने का भाव और मानवीकरण (1)
- विशेष: भारत की भव्यता और देशप्रेम (1)।
Answer: प्रसंग: ये भाव सोहनलाल द्विवेदी की कविता 'वह जन्मभूमि मेरी' के पहले भाग के हैं, जिसमें कवि भारत की प्राकृतिक भव्यता का गान करते हैं। व्याख्या: उत्तर में खड़ा हिमालय इतना ऊँचा है कि मानो आकाश को चूम रहा है। दूसरी ओर सागर भारत के चरणों में नित्य झूमता है, जैसे वह मातृभूमि की वंदना कर रहा हो। विशेष: सागर का झूमना मानवीकरण है। इन चित्रों से भारत की विशालता और भव्यता प्रकट होती है तथा कवि का देशप्रेम और गर्व झलकता है।
Example 2: हिमालय का वर्णन (2 अंक) · 2 marks · Short answerBoard level
कवि ने हिमालय और सागर का वर्णन कैसे किया है?
Try it first, then show the solutionSolution
- हिमालय आकाश को चूमता (1)
- सागर चरणों में झूमता (1)।
Answer: कवि कहते हैं कि ऊँचा हिमालय आकाश को चूमता है और भारत के चरणों में झुककर सागर नित्य झूमता है।
Example 3: दूसरे भाग का सार (4 अंक) · 4 marks · Long answerHarder board level
कविता के दूसरे भाग में प्रकृति की किन-किन मधुर बातों का वर्णन है?
Try it first, then show the solutionSolution
- झरने (1)
- चिड़ियाँ (1)
- आम के बाग और कोयल (1)
- मलय पवन (1)।
Answer: दूसरे भाग में पहाड़ियों में झरते झरनों, झाड़ियों में चहकती चिड़ियों, आम के घने बागों में पुकारती कोयल और तन-मन को सँवारने वाली सुगंधित मलय पवन का वर्णन है। अंत में भारत धर्मभूमि और कर्मभूमि कहलाता है।
Example 4: महापुरुषों का गौरव (4 अंक) · 4 marks · Long answerHarder board level
तीसरे भाग में कवि भारत की किन महान विभूतियों का स्मरण करते हैं और क्यों?
Try it first, then show the solutionSolution
- राम और सीता (1)
- कृष्ण और गीता (1)
- बुद्ध की दया (1)
- सांस्कृतिक गौरव (1)।
Answer: कवि श्रीराम, सीता, श्रीकृष्ण और गौतम बुद्ध का स्मरण करते हैं। कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया और बुद्ध ने दया का पाठ पढ़ाया। इनसे भारत का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गौरव प्रकट होता है, इसलिए वह धरती युद्धभूमि और बुद्धभूमि है।
Example 5: मूल्यांकन (4 अंक) · 4 marks · Long answerHOTS / competency
"भारत केवल भू-भाग नहीं, सुंदरता, धर्म, कर्म और करुणा का संगम है।" इस कथन की परख दो कारणों से कीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- मत (1)
- प्रकृति और संस्कृति (1)
- आठ विशेषण (1)
- निष्कर्ष (1)।
Answer: यह कथन सही है। कविता में प्रकृति की भव्यता के साथ राम, कृष्ण और बुद्ध की विरासत भी है, इसलिए भारत केवल मिट्टी नहीं, मूल्यों की भूमि है। आठ विशेषण पुण्य, धर्म, कर्म, युद्ध और बुद्ध जैसे अनेक पक्ष दिखाते हैं।
Where students lose marks in भारत के आठ रूप: प्रकृति और संस्कृति का गौरव-गान (वह जन्मभूमि मेरी)
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: आठ विशेषण अधूरे लिखना
कुछ नाम छूट जाते हैं।
Wrong working
जन्मभूमि, मातृभूमि, पुण्यभूमि।
Right working
जन्म, मातृ, पुण्य, स्वर्ण, धर्म, कर्म, युद्ध और बुद्ध भूमि।
Do this: सूची याद कीजिए।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: भागों का क्रम बदलना
विषय गलत स्थान पर।
Wrong working
महापुरुष पहले भाग में।
Right working
महापुरुष तीसरे भाग में।
Do this: क्रम याद कीजिए।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: अर्थ केवल शाब्दिक
भाव नहीं।
Wrong working
हिमालय ऊँचा है।
Right working
हिमालय की ऊँचाई भारत की गौरवशाली भव्यता दर्शाती है।
Do this: भाव जोड़िए।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- तीन भाग और आठ विशेषण याद रखिए।
- टेक की पंक्ति उद्धृत कीजिए।
- चार महापुरुषों के नाम लिखिए।
- भावार्थ में गर्व और देशप्रेम जोड़िए।
- त्रिवेणी का अर्थ बताइए।
Practice questions on भारत के आठ रूप: प्रकृति और संस्कृति का गौरव-गान (वह जन्मभूमि मेरी)
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 3 marks · Short answerHarder board level
कविता में "सागर का भारत के चरणों में झूमना" किस अलंकार का उदाहरण है? पहचानकर समझाइए। (3 अंक)
Hint
जड़ प्रकृति में मनुष्य जैसे व्यवहार का आरोप देखिए।
Answer
यह मानवीकरण अलंकार है। सागर निर्जीव प्रकृति है, पर कवि उसे मनुष्य की तरह चरणों में झूमता हुआ दिखाते हैं, मानो वह मातृभूमि की वंदना कर रहा हो। इससे भारत की महिमा और कवि का देशप्रेम प्रकट होता है।
Q2 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
कविता में भारत को आठ भूमि-रूपों में क्यों देखा गया है? स्पष्ट कीजिए। (4 अंक)
Hint
आठ विशेषण प्रकृति, धर्म, कर्म, वीरता और ज्ञान के अलग-अलग पक्ष दिखाते हैं।
Answer
कवि के लिए भारत केवल एक भू-भाग नहीं है। जन्मभूमि और मातृभूमि उससे माँ जैसा संबंध दिखाते हैं। पुण्यभूमि और स्वर्णभूमि उसकी पवित्रता और समृद्धि बताते हैं। धर्मभूमि और कर्मभूमि उसके आदर्श और परिश्रम को दर्शाते हैं। युद्धभूमि वीरता का और बुद्धभूमि ज्ञान व करुणा का प्रतीक है। इस प्रकार आठ रूप मिलकर भारत का पूरा गौरवशाली चित्र बनाते हैं।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
"त्रिवेणी" किन नदियों का संगम है? (2 अंक)
Hint
तीन नदियों के मिलन-स्थान के बारे में सोचिए।
Answer
गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम।
Q4 · 2 marks · Short answerHarder board level
"पुण्यभूमि" और "स्वर्णभूमि" के अर्थ लिखिए। (2 अंक)
Hint
विशेषण।
Answer
पुण्यभूमि का अर्थ पवित्र भूमि है और स्वर्णभूमि का अर्थ समृद्ध भूमि है।
Q5 · 3 marks · Short answerHarder board level
कविता में गौतम बुद्ध के योगदान का उल्लेख कीजिए। (3 अंक)
Hint
दया और ज्ञान।
Answer
गौतम बुद्ध ने भारत में जन्म लेकर इसका यश बढ़ाया, संसार को दया का पाठ पढ़ाया और ज्ञान का दीपक दिखाया।
Q6 · 4 marks · Long answerHOTS / competency
कविता में प्रकृति और संस्कृति दोनों का वर्णन क्यों है? दो कारण दीजिए। (4 अंक)
Hint
देश का पूरा चित्र।
Answer
एक, देश की पहचान प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत दोनों से बनती है। दो, इस क्रम से कवि भारत को सुंदरता, पवित्रता, वीरता और करुणा का संगम दिखाकर पाठक के मन में गर्व जगाते हैं।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.कवि?Show answer
सोहनलाल द्विवेदी।
2.भाग?Show answer
तीन।
3.त्रिवेणी?Show answer
गंगा, यमुना, सरस्वती।
4.बुद्धभूमि का अर्थ?Show answer
ज्ञान-करुणा की भूमि।
5.कविता कहाँ संकलित?Show answer
साहित्य सागर।
6.प्रकृति से संस्कृति तक का क्रम क्या दर्शाता है?Show answer
भारत सुंदरता, पवित्रता, वीरता और करुणा का संगम है।
भारत के आठ रूप: प्रकृति और संस्कृति का गौरव-गान (वह जन्मभूमि मेरी): frequently asked questions
कविता का मुख्य भाव क्या है?
देशप्रेम और गौरव।
क्या पूरी कविता उद्धृत है?
नहीं, यहाँ कविता का सार दिया गया है; पूरी कविता अपनी पाठ्यपुस्तक में पढ़िए।
कौन-सा अलंकार?
मानवीकरण आदि; अपनी पुस्तक से मिलाइए।