सूखी डाली (उपेंद्रनाथ अश्क): बरगद का प्रतीक, बेला और दादा मूलराज
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
'सूखी डाली' में दादा मूलराज अपने संयुक्त परिवार को बरगद मानते हैं और डरते हैं कि कोई डाली अलग होकर सूख न जाए। नई बहू बेला परिवार की रीति से तालमेल नहीं बिठा पाती, ताने सुनती है, फिर अत्यधिक औपचारिक आदर पाकर अकेलापन महसूस करती है। अंत में वह परिवार में रहना चाहती है और दादा की सूझबूझ से परिवार टूटने से बच जाता है।
Understand बरगद का प्रतीक, बेला और दादा मूलराज (सूखी डाली)
एकांकी का परिचय। 'सूखी डाली' उपेंद्रनाथ 'अश्क' का एकांकी है, जो एकांकी संचय में निर्धारित है। यह संयुक्त परिवार की समस्या और उसके समाधान का एकांकी है। खंड ख में अवतरण पर चार प्रश्न (2, 2, 3, 3 अंक) आते हैं: वक्ता-श्रोता, प्रसंग, पात्रों की विशेषताएँ, शीर्षक और संदेश।
पात्र। दादा मूलराज (परिवार के मुखिया); बेला (परेश की पत्नी, पढ़ी-लिखी नई बहू); परेश (दादा का छोटा पोता); इंदु (दादा की पोती, ताने कसने वाली)।
घटना-क्रम (समस्या से समाधान तक)।
1. दादा परिवार की तुलना आँगन के विशाल बरगद से करते हैं: जो डाली अलग होती है, वह सूख जाती है।
2. बेला संपन्न, आधुनिक परिवार से आई है; उसे इस घर के रहन-सहन और बातचीत का ढंग पसंद नहीं आता, वह मायके की बातें करती और घर की चीज़ों की आलोचना करती है।
3. इंदु और परिवार की स्त्रियाँ बेला पर ताने कसती और उसका मज़ाक उड़ाती हैं।
4. तनाव बढ़ता है; आशंका होती है कि परेश और बेला अलग हो जाएँगे।
5. दादा चिंतित होकर सबको समझाते हैं कि बेला का आदर करो और उससे सीखो।
6. सब अत्यधिक औपचारिक आदर करने लगते हैं; बेला से कोई काम नहीं कराया जाता, सब दूर रहते हैं।
7. बेला को यह अपनापन नहीं, अलगाव लगता है और वह अकेली पड़ जाती है।
8. बेला अपनी गलती मानती है, दादा से कहती है कि वह अलग नहीं होना चाहती और सूखी डाली नहीं बनना चाहती; परिवार बच जाता है।
प्रतीक। बरगद = संयुक्त परिवार; डाली = परिवार का सदस्य; सूखी डाली = परिवार से अलग होकर अकेला पड़ा सदस्य।
चरित्र। *दादा मूलराज:* एकता के समर्थक, अनुशासनप्रिय, दूरदर्शी, स्नेही। *बेला:* शिक्षित, आधुनिक, आरंभ में आलोचक, संवेदनशील, अंत में अपनी गलती मानने वाली।
संदेश। परिवार की शक्ति एकता में है; मतभेद आदर, समझ और स्नेह से सुलझते हैं; अत्यधिक औपचारिकता अपनापन नहीं देती।
बरगद का प्रतीक, बेला और दादा मूलराज (सूखी डाली): key facts
- प्रतीक
- बरगद = संयुक्त परिवार
- डाली = सदस्य
- सूखी डाली = अलग हुआ अकेला सदस्य
- शीर्षक के प्रश्न का आधार।
- घटना-क्रम
- बेला की आलोचना
- इंदु के ताने
- तनाव
- दादा का निर्देश
- औपचारिक आदर
- बेला का अकेलापन
- मेल
- समस्या और समाधान के प्रश्न में यही क्रम।
- चरित्र
- दादा: दूरदर्शी, स्नेही, एकता के समर्थक | बेला: शिक्षित, आधुनिक, संवेदनशील, गलती मानने वाली
- हर गुण के साथ एक घटना जोड़िए।
How to answer बरगद का प्रतीक, बेला और दादा मूलराज (सूखी डाली) questions
शीर्षक या समस्या-समाधान के प्रश्न का उत्तर इस प्रकार लिखिए।
- 1बरगद, डाली और सूखी डाली का प्रतीकार्थ लिखिए।
- 2बेला की समस्या और परिवार के व्यवहार को क्रम से बताइए।
- 3दादा के निर्देश और उसके परिणाम का उल्लेख कीजिए।
- 4अंत में बेला का हृदय-परिवर्तन और संदेश लिखिए।
बरगद का प्रतीक, बेला और दादा मूलराज (सूखी डाली) in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
औपचारिक सम्मान बनाम अपनापन
मान लीजिए किसी कक्षा में एक नई छात्रा आती है और बाकी सब छात्र 'सम्मान' के नाम पर उससे बात करने से बचने लगते हैं और उसे खेल या समूह-कार्य में शामिल भी नहीं करते।
यह स्थिति 'सूखी डाली' में बेला के अनुभव से कैसे मिलती है, और इसका क्या समाधान है?
Try it first, then show the solutionSolution
- अत्यधिक औपचारिक व्यवहार दूरी बनाता है।
- बेला ने भी अपने को अकेला महसूस किया।
- समाधान: सहज स्नेह और साझेदारी।
Answer: छात्रा भी बेला की तरह अकेलेपन का अनुभव करेगी। समाधान यह है कि उसके साथ सहज, स्नेहपूर्ण व्यवहार हो और उसे सबके साथ काम में शामिल किया जाए।
Memory hook: आदर में दूरी नहीं, अपनापन चाहिए।
Tricks to remember बरगद का प्रतीक, बेला और दादा मूलराज (सूखी डाली)
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
ब-डा-सू
बरगद, डाली, सूखी डाली।
Use it when: प्रतीकों का क्रम।
ताने-आदर-अकेलापन-मेल
चार चरण: ताने, अधिक आदर, अकेलापन, मेल।
Use it when: बेला की कथा का क्रम।
बरगद का प्रतीक, बेला और दादा मूलराज (सूखी डाली): solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: बरगद किसका प्रतीक · 1 mark · MCQBoard level
दादा मूलराज 'बरगद' से किसकी तुलना करते हैं?
(क) बेला की (ख) संयुक्त परिवार की (ग) गाँव की (घ) अपने मकान की
Try it first, then show the solutionSolution
- दादा परिवार को आँगन का विशाल बरगद मानते हैं (0.5)।
- डाली उसके सदस्य हैं (0.5)।
Answer: (ख) संयुक्त परिवार की।
Example 2: बेला कौन है (2 अंक) · 2 marks · Short answerBoard level
बेला कौन है? उसे परिवार का वातावरण क्यों अच्छा नहीं लगता?
Try it first, then show the solutionSolution
- परेश की पत्नी, पढ़ी-लिखी नई बहू (1)।
- संपन्न, आधुनिक परिवार से आना (1)।
Answer: बेला दादा के छोटे पोते परेश की पढ़ी-लिखी पत्नी है। वह संपन्न, आधुनिक परिवार से आई है, इसलिए उसे इस बड़े परिवार के रहन-सहन, नौकरों और बहुओं की बातचीत का ढंग पसंद नहीं आता।
Example 3: दादा का निर्देश और परिणाम (3 अंक) · 3 marks · Short answerHarder board level
दादा मूलराज ने परिवार को क्या निर्देश दिया और उसका परिणाम क्या हुआ?
Try it first, then show the solutionSolution
- निर्देश: बेला का आदर, मज़ाक नहीं (1)।
- सब अत्यधिक औपचारिक हो गए (1)।
- बेला का अकेलापन (1)।
Answer: दादा ने परिवार के सदस्यों से कहा कि बेला पढ़ी-लिखी है, उसका आदर करें, उसका मज़ाक न उड़ाएँ और उससे सीखें। इसके बाद सब उससे अत्यधिक औपचारिकता से पेश आने लगे, उसे कोई काम नहीं करने दिया जाता था और सब दूर-दूर रहते थे। बेला को यह अलगाव लगा और वह अकेलापन महसूस करने लगी।
Example 4: शीर्षक की सार्थकता (5 अंक) · 5 marks · Long answerHarder board level
'सूखी डाली' शीर्षक की सार्थकता एकांकी के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (लगभग 120 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रतीक का अर्थ (2)।
- कथा से संबंध (2)।
- निष्कर्ष (1)।
Answer: दादा मूलराज अपने परिवार को बरगद के विशाल वृक्ष की तरह मानते हैं और कहते हैं कि जो डाली वृक्ष से अलग होती है, वह सूख जाती है। यहाँ बरगद संयुक्त परिवार है, डाली उसका सदस्य और सूखी डाली अलग होकर अकेला पड़ा सदस्य। बेला के आलोचना करने और परिवार के ताने कसने से यह आशंका बनती है कि परेश और बेला अलग हो जाएँगे। अंत में बेला कहती है कि वह परिवार से अलग नहीं होना चाहती और सूखी डाली नहीं बनना चाहती। इसलिए शीर्षक कथा के केंद्रीय संघर्ष और संदेश को व्यक्त करता है।
Example 5: दादा का समाधान कितना सफल (5 अंक) · 5 marks · Long answerHOTS / competency
दादा मूलराज के निर्देश के बाद बेला खुश नहीं हुई, फिर भी परिवार बच गया। इस स्थिति का मूल्यांकन कीजिए। (लगभग 120 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- निर्देश की प्रशंसा (1)।
- उसकी कमी (2)।
- अंत का हृदय-परिवर्तन (1)।
- निष्कर्ष (1)।
Answer: दादा का उद्देश्य अच्छा था, क्योंकि वे बेला के अपमान को रोकना और परिवार की एकता बचाना चाहते थे। परंतु सबको बेला से अत्यधिक औपचारिक व्यवहार करने को कहने से उसे अपनापन नहीं, अलगाव मिला। सम्मान के नाम पर लोग उससे दूर हो गए और उससे काम तक नहीं कराया गया। इस अकेलेपन ने ही बेला को अपनी भूल का एहसास कराया और उसने परिवार में रहने की इच्छा प्रकट की। इस प्रकार निर्देश पूरी तरह सफल नहीं था, पर उसके परिणाम ने सामंजस्य की राह खोल दी, और दादा की सूझबूझ से परिवार बच गया।
Where students lose marks in बरगद का प्रतीक, बेला और दादा मूलराज (सूखी डाली)
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: प्रतीक का अर्थ अधूरा लिखना
बरगद, डाली और सूखी डाली, तीनों के अर्थ चाहिए।
Wrong working
सूखी डाली का अर्थ सूखी टहनी है।
Right working
सूखी डाली वह सदस्य है जो परिवार से अलग होकर अकेला पड़ जाता है।
Do this: तीनों प्रतीक तालिका की तरह याद कीजिए।
Usually costs: 1 से 2 अंक
Mistake: बेला को केवल दोषी बताना
एकांकी में परिवार का व्यवहार भी तनाव का कारण है।
Wrong working
तनाव केवल बेला की आलोचना से हुआ।
Right working
बेला की आलोचना और इंदु तथा परिवार के तानों, दोनों से तनाव बढ़ा।
Do this: दोनों पक्षों का कारण लिखिए।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: औपचारिक आदर की समस्या छोड़ना
समाधान के प्रश्न में इस मोड़ का होना आवश्यक है।
Wrong working
दादा के कहने से सब ठीक हो गया।
Right working
दादा के कहने से सब अत्यधिक औपचारिक हो गए, जिससे बेला अकेली पड़ी; तब उसे अपनी भूल समझ आई।
Do this: क्रम में सात-आठ चरण याद रखिए।
Usually costs: 2 अंक
Exam tips
- प्रतीकों का अर्थ एक वाक्य में लिखिए: बरगद, डाली, सूखी डाली।
- वक्ता-श्रोता वाले प्रश्न में पात्र का संबंध भी लिखिए।
- बेला और परिवार दोनों के व्यवहार का उल्लेख कीजिए।
- अंत में संदेश लिखिए: एकता, आदर और अपनापन।
Practice questions on बरगद का प्रतीक, बेला और दादा मूलराज (सूखी डाली)
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
'सूखी डाली' के लेखक कौन हैं?
(क) डॉ. रामकुमार वर्मा (ख) उपेंद्रनाथ 'अश्क' (ग) मन्नू भंडारी (घ) प्रेमचंदHint
एकांकी संचय।
Answer
(ख) उपेंद्रनाथ 'अश्क'।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
इंदु कौन है और बेला के साथ उसका व्यवहार कैसा है? (2 अंक)
Hint
दादा की पोती।
Answer
इंदु दादा की पोती है। वह मुँहफट है और बेला पर ताने कसती तथा उसका मज़ाक उड़ाती है।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level
बेला को अंत में किस बात का एहसास होता है और वह दादा से क्या कहती है? (3 अंक)
Hint
अकेलापन और डाली।
Answer
बेला को अपनी गलती का एहसास होता है कि उसकी आलोचना और अलगाव से परिवार टूट सकता था। वह दादा से कहती है कि वह परिवार से अलग नहीं होना चाहती और उसे सबका पहले जैसा स्नेह चाहिए। वह सूखी डाली नहीं बनना चाहती।
Q4 · 5 marks · Long answerHarder board level
दादा मूलराज के चरित्र की चार विशेषताएँ घटनाओं सहित लिखिए। (लगभग 100 शब्द)
Hint
एकता, दूरदर्शिता, स्नेह, अनुशासन।
Answer
दादा मूलराज परिवार की एकता के समर्थक हैं; वे परिवार की तुलना बरगद से करते हैं और किसी डाली को सूखते नहीं देखना चाहते। वे दूरदर्शी हैं, क्योंकि उन्होंने बेला के अलग होने की आशंका को समय पर भाँप लिया। वे अनुशासनप्रिय हैं, इसलिए उनके निर्देश पर सब बेला का आदर करने लगते हैं। वे स्नेही और समझदार भी हैं; उन्होंने परिवार को समझाया कि बेला का मज़ाक न उड़ाएँ। उनके धैर्यपूर्ण नेतृत्व से परिवार टूटने से बचता है।
Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
यदि बेला परिवार से अलग होकर परेश के साथ रहने लगती, तो एकांकी के संदेश पर क्या असर पड़ता? अपना तर्क दीजिए। (लगभग 100 शब्द)
Hint
सूखी डाली का प्रतीक।
Answer
यदि बेला परिवार से अलग हो जाती, तो एकांकी का प्रतीक दुखद अर्थ में पूरा होता, क्योंकि बेला और परेश सचमुच सूखी डाली बन जाते और दादा की चिंता सही सिद्ध होती। तब संदेश संयुक्त परिवार के टूटने की चेतावनी बन जाता। पर लेखक ने बेला के हृदय-परिवर्तन और परिवार के मेल से आशावादी अंत दिया है, जिससे यह संदेश मिलता है कि आदर, स्नेह और समझ से मतभेद सुलझाए जा सकते हैं। इसलिए वर्तमान अंत एकांकी के उद्देश्य के अधिक अनुरूप है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.सूखी डाली के लेखक कौन हैं?Show answer
उपेंद्रनाथ 'अश्क'।
2.यह किस पुस्तक में निर्धारित है?Show answer
एकांकी संचय।
3.परिवार के मुखिया कौन हैं?Show answer
दादा मूलराज।
4.परेश की पत्नी का नाम क्या है?Show answer
बेला।
5.दादा परिवार की तुलना किससे करते हैं?Show answer
आँगन के विशाल बरगद से।
6.बेला क्या नहीं बनना चाहती?Show answer
सूखी डाली।
बरगद का प्रतीक, बेला और दादा मूलराज (सूखी डाली): frequently asked questions
सूखी डाली का मुख्य विषय क्या है?
संयुक्त परिवार की समस्या और उसका समाधान।
खंड ख में कैसे प्रश्न आते हैं?
अवतरण पर वक्ता-श्रोता, प्रसंग, चरित्र और शीर्षक के प्रश्न (2, 2, 3, 3 अंक)।
एकांकी का संदेश क्या है?
परिवार की शक्ति उसकी एकता में है; आदर और अपनापन दोनों आवश्यक हैं।