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HindiICSE Class 10 · मातृ मंदिर की ओर

मातृ मंदिर की ओर (सुभद्रा कुमारी चौहान): प्रतीक, बाधाएँ और देशभक्ति

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

'मातृ मंदिर की ओर' में कवयित्री का हृदय देश की परतंत्रता से व्यथित है और वह माँ अर्थात् भारत माता के चरणों में दुख कहने जाना चाहती है। मार्ग में प्रबल शत्रु, ऊँची सीढ़ियाँ और दुर्बल पैर बाधाएँ हैं, जो स्वतंत्रता-संग्राम की कठिनाइयों के प्रतीक हैं। वह देशवासियों और भगवान से सहायता माँगती है और सब कुछ अर्पित करने को तैयार है।

Understand प्रतीक, बाधाएँ और देशभक्ति का भाव (मातृ मंदिर की ओर)

कविता का परिचय। 'मातृ मंदिर की ओर' स्वतंत्रता-संग्राम की प्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता है, जो साहित्य सागर (पद्य भाग) में निर्धारित है। इस कविता से पद्यांश-आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें शब्दार्थ, दुख का कारण, बाधाएँ और भाव आते हैं।

तीन भाग।
1. *व्यथित हृदय:* हृदय देश की परतंत्रता से दुखी है। कवयित्री मातृ-मंदिर जाकर माँ को सुख-दुख बताकर हृदय का भार हल्का करना, माँ के चरण आँसुओं से धोना और दर्शन करना चाहती है।
2. *मार्ग की बाधाएँ:* प्रबल शत्रु, ऊँची सीढ़ियाँ और दुर्बल पैर।
3. *सहायता की प्रार्थना:* वह देशवासियों और भगवान से सहारा माँगती है और माँ की सेवा में सब अर्पित करने को तैयार है।

प्रतीक-सारणी।

शब्दसाधारण अर्थप्रतीकार्थ
माँजन्म देने वाली माताभारत माता
मातृ-मंदिरमाँ का पूजा-स्थानस्वतंत्रता-संग्राम का पवित्र क्षेत्र
प्रबल शत्रुमार्ग रोकने वालाविदेशी शासन
ऊँची सीढ़ियाँचढ़ने में कठिनस्वतंत्रता का कठिन लक्ष्य
दुर्बल पैरकमज़ोर शरीरसीमित शक्ति

शब्दार्थ। व्यथित = दुखी; पद-पंकज = चरण-कमल; नयन-जल = आँसू।

काव्य-सौंदर्य। रूपक (हृदय प्रदेश, पद-पंकज); प्रतीकात्मकता; अनुप्रास (पद-पंकज पकड़); वीर और करुण रस का मेल।

संदेश। देशभक्ति, परतंत्रता की पीड़ा, कठिनाइयों से न घबराना, और सामूहिक प्रयास से अंग्रेज़ी शासन से मुक्ति के संघर्ष की प्रेरणा।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • व्यथित है मेरा हृदय प्रदेश,

    कवयित्री: कविता का आरंभ।

    परतंत्र देश के कारण हृदय का दुख।

  • चलूँ दर्शन कर आऊँ आज॥

    कवयित्री: पद्यांश की अंतिम पंक्ति।

    मातृ-मंदिर जाने का दृढ़ संकल्प।

प्रतीक, बाधाएँ और देशभक्ति का भाव (मातृ मंदिर की ओर): key facts

तीन भाग
  • व्यथित हृदय
  • मार्ग की बाधाएँ
  • सहायता की प्रार्थना और संकल्प
भावार्थ और सार में इसी क्रम का प्रयोग कीजिए।
प्रतीक
  • माँ = भारत माता
  • मातृ-मंदिर = स्वतंत्रता-संग्राम
  • शत्रु = विदेशी शासन
  • सीढ़ियाँ = कठिन लक्ष्य
  • दुर्बल पैर = सीमित शक्ति
हर प्रतीक का अर्थ स्वतंत्रता-संग्राम से जोड़िए।
काव्य-सौंदर्य
  • रूपक
  • प्रतीक
  • अनुप्रास
  • वीर और करुण रस
उदाहरण पंक्ति सहित लिखिए।

How to answer प्रतीक, बाधाएँ और देशभक्ति का भाव (मातृ मंदिर की ओर) questions

पद्यांश-आधारित चार प्रश्नों के लिए यह क्रम अपनाइए।

  1. 1शब्दार्थ के साथ कारण लिखिए: व्यथित = दुखी, क्योंकि देश परतंत्र है।
  2. 2माँ और मातृ-मंदिर का दोहरा अर्थ बताइए।
  3. 3बाधाएँ पूछी हों तो तीनों गिनाइए और हर एक का प्रतीकार्थ दीजिए।
  4. 4उद्देश्य में देशभक्ति और मनोबल बढ़ाने की बात लिखिए।

प्रतीक, बाधाएँ और देशभक्ति का भाव (मातृ मंदिर की ओर) in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

लक्ष्य की कठिनाइयाँ और सामूहिक प्रयास

मान लीजिए किसी मोहल्ले के बच्चे अपने खेल के मैदान को कचरे से मुक्त कराने का संकल्प लेते हैं। मैदान बड़ा है, उनके पास साधन कम हैं और कुछ लोग उन्हें रोकते भी हैं, फिर भी वे बड़ों और पड़ोसियों से सहायता माँगकर काम में लग जाते हैं।

यह स्थिति कविता के किस भाव से मेल खाती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. बड़ा मैदान और कम साधन: ऊँची सीढ़ियाँ और दुर्बल पैर।
  2. रोकने वाले लोग: शत्रु जैसी बाधा।
  3. सहायता माँगना: देशवासियों और भगवान से प्रार्थना।

Answer: यह कविता के उस भाव से मेल खाती है जिसमें बाधाएँ होने पर भी कवयित्री हार नहीं मानती और सामूहिक सहयोग से लक्ष्य तक पहुँचना चाहती है।

Memory hook: बाधा बड़ी, पर सहयोग से राह खुलती।

Tricks to remember प्रतीक, बाधाएँ और देशभक्ति का भाव (मातृ मंदिर की ओर)

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • शी-सी-पै

    शत्रु, सीढ़ियाँ, पैर।

    Use it when: मार्ग की तीन बाधाएँ।

  • माँ = माँ भारती

    जहाँ 'माँ' दिखे, भारत माता भी पढ़िए।

    Use it when: दोहरे अर्थ वाले प्रश्न में।

प्रतीक, बाधाएँ और देशभक्ति का भाव (मातृ मंदिर की ओर): solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: व्यथित का अर्थ · 1 mark · MCQBoard level

'व्यथित' का अर्थ क्या है?
(क) प्रसन्न (ख) दुखी (ग) क्रोधित (घ) थका हुआ

Try it first, then show the solutionSolution
  1. व्यथा = पीड़ा (0.5)।
  2. व्यथित = पीड़ा से भरा, दुखी (0.5)।

Answer: (ख) दुखी।

Example 2: हृदय व्यथित क्यों (2 अंक) · 2 marks · Short answerBoard level

कवयित्री का हृदय व्यथित क्यों है? वह अपना सुख-दुख किसे बताना चाहती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कारण: देश की परतंत्रता (1)।
  2. माँ अर्थात् भारत माता (1)।

Answer: कवयित्री का हृदय इसलिए व्यथित है कि उसका देश परतंत्र है। वह अपना सुख-दुख माँ अर्थात् भारत माता को बताना चाहती है, ताकि उसके हृदय का बोझ हल्का हो।

Example 3: मार्ग की बाधाएँ (3 अंक) · 3 marks · Short answerHarder board level

मातृ-मंदिर तक पहुँचने के मार्ग में कौन-सी बाधाएँ हैं? वे किनके प्रतीक हैं?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रबल शत्रु = विदेशी शासन (1)।
  2. ऊँची सीढ़ियाँ = कठिन लक्ष्य (1)।
  3. दुर्बल पैर = सीमित शक्ति (1)।

Answer: मार्ग में प्रबल शत्रु खड़ा है जो विदेशी शासन का प्रतीक है, मंदिर की सीढ़ियाँ बहुत ऊँची हैं जो स्वतंत्रता के कठिन लक्ष्य का प्रतीक हैं, और कवयित्री के पैर दुर्बल हैं जो उसकी सीमित शक्ति के प्रतीक हैं।

Example 4: दोहरा अर्थ (5 अंक) · 5 marks · Long answerHarder board level

कविता में 'माँ' और 'मातृ-मंदिर' के दोहरे अर्थ को स्पष्ट कीजिए। (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. सामान्य अर्थ (1)।
  2. प्रतीकार्थ (2)।
  3. प्रभाव (2)।

Answer: सामान्य अर्थ में माँ वह माता है जिसके चरणों में जाकर कवयित्री अपना दुख कहना चाहती है और मातृ-मंदिर उसका पूजा-स्थान है। प्रतीकार्थ में माँ भारत माता है और मातृ-मंदिर स्वतंत्रता-संग्राम का पवित्र क्षेत्र। इस दोहरे अर्थ से कवयित्री का व्यक्तिगत भाव राष्ट्रीय भाव से जुड़ जाता है। माँ के चरण आँसुओं से धोने की इच्छा भारत माता के प्रति श्रद्धा और समर्पण को व्यक्त करती है। इससे कविता पाठक में देशभक्ति जगाती है।

Example 5: कविता की प्रेरणा (5 अंक) · 5 marks · Long answerHOTS / competency

यह कविता केवल दुख की अभिव्यक्ति है या संघर्ष की प्रेरणा भी? पद्यांश के आधार पर अपना मत दीजिए। (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मत (1)।
  2. दुख का पक्ष (1)।
  3. प्रेरणा का पक्ष (2)।
  4. निष्कर्ष (1)।

Answer: कविता केवल दुख की अभिव्यक्ति नहीं है। आरंभ में हृदय की व्यथा और आँसुओं की बात है, जो परतंत्रता की पीड़ा दिखाती है। परंतु कवयित्री दुख पर रुकती नहीं; वह मातृ-मंदिर तक पहुँचने का संकल्प करती है, मार्ग की बाधाओं से नहीं घबराती और सब कुछ अर्पित करने को तैयार है। वह देशवासियों से सहायता माँगकर एकता का संदेश भी देती है। इस प्रकार करुणा और वीरता का मेल कविता को देशवासियों का मनोबल बढ़ाने वाली प्रेरक रचना बनाता है।

Where students lose marks in प्रतीक, बाधाएँ और देशभक्ति का भाव (मातृ मंदिर की ओर)

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: व्यथित का अर्थ लिखकर कारण छोड़ देना

    प्रश्न में अर्थ और कारण दोनों माँगे जाते हैं।

    Wrong working

    व्यथित का अर्थ दुखी है।

    Right working

    व्यथित = दुखी; हृदय इसलिए व्यथित है कि देश परतंत्र है।

    Do this: 'क्यों' के उत्तर में कारण अवश्य जोड़िए।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: माँ को केवल जन्म देने वाली माता मानना

    कविता का केंद्रीय अर्थ भारत माता है।

    Wrong working

    कवयित्री अपनी माँ के पास जा रही है।

    Right working

    माँ का अर्थ भारत माता भी है और कविता में देशभक्ति का भाव है।

    Do this: दोनों अर्थ लिखिए।

    Usually costs: 1 से 2 अंक

  • Mistake: बाधाएँ अधूरी गिनाना

    तीनों बाधाएँ अपेक्षित हैं।

    Wrong working

    रास्ते में शत्रु है।

    Right working

    शत्रु, ऊँची सीढ़ियाँ और दुर्बल पैर, तीनों बाधाएँ हैं।

    Do this: शी-सी-पै याद रखिए।

    Usually costs: 1 अंक

Exam tips

  • शब्दार्थ के साथ कारण लिखिए।
  • माँ और मातृ-मंदिर का दोहरा अर्थ हर उत्तर में ध्यान रखिए।
  • तीनों बाधाएँ और उनके प्रतीकार्थ तालिका की तरह याद कीजिए।
  • उद्देश्य में देशभक्ति और मनोबल बढ़ाने की बात लिखिए।

Practice questions on प्रतीक, बाधाएँ और देशभक्ति का भाव (मातृ मंदिर की ओर)

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    इस कविता की कवयित्री कौन हैं?
    (क) महादेवी वर्मा (ख) सुभद्रा कुमारी चौहान (ग) मीराबाई (घ) अमृता प्रीतम

    Hint

    स्वतंत्रता-संग्राम की कवयित्री।

    Answer

    (ख) सुभद्रा कुमारी चौहान।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    कवयित्री माँ के चरणों के साथ क्या करना चाहती है? इससे क्या भाव प्रकट होता है? (2 अंक)

    Hint

    चरण-कमल और आँसू।

    Answer

    कवयित्री माँ के चरण-कमल पकड़कर उन्हें अपने आँसुओं से नहलाना चाहती है। इससे भारत माता के प्रति उसकी गहरी श्रद्धा, समर्पण और दुख का भाव प्रकट होता है।

  3. Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level

    कवयित्री मार्ग की बाधाओं के सामने क्या करती है और किससे सहायता माँगती है? (3 अंक)

    Hint

    तीसरा भाग।

    Answer

    कवयित्री बाधाओं से हार नहीं मानती। वह देशवासियों और भगवान से प्रार्थना करती है कि वे उसे सहारा दें, ताकि वह माँ के मंदिर तक पहुँच सके, और वह माँ की सेवा में अपना सब कुछ अर्पित करने को तैयार है।

  4. Q4 · 5 marks · Long answerHarder board level

    कविता में रूपक और प्रतीक के प्रयोग से भाव की गहराई कैसे बढ़ती है? दो-दो उदाहरण देकर समझाइए। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    पद-पंकज, हृदय प्रदेश, सीढ़ियाँ, शत्रु।

    Answer

    रूपक में हृदय को प्रदेश और चरणों को कमल कहा गया है, जिससे हृदय की व्यापकता और चरणों की पवित्रता का भाव एक साथ आता है। प्रतीकों में प्रबल शत्रु विदेशी शासन का और ऊँची सीढ़ियाँ स्वतंत्रता के कठिन लक्ष्य का रूप हैं। इनसे व्यक्तिगत यात्रा राष्ट्र की यात्रा बन जाती है। पाठक को सामान्य शब्दों के पीछे छिपे देशभक्ति के भाव दिखते हैं, इसलिए कविता का प्रभाव बढ़ जाता है।

  5. Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    यदि कवयित्री केवल अपने बल पर मंदिर पहुँचने का प्रयास करती और सहायता न माँगती, तो कविता का संदेश कैसे बदल जाता? अपना तर्क दीजिए। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    पैर दुर्बल हैं।

    Answer

    कवयित्री स्वीकार करती है कि उसके पैर दुर्बल हैं, इसलिए वह देशवासियों और भगवान से सहारा माँगती है। यदि वह केवल अपने बल पर चलने का दावा करती, तो कविता व्यक्तिगत साहस की रचना होती और सामूहिक प्रयास का संदेश खो जाता। सहायता माँगना कमज़ोरी नहीं, विनम्रता और एकता का संकेत है, क्योंकि स्वतंत्रता जैसा बड़ा लक्ष्य अकेले नहीं पाया जा सकता। इसलिए सहायता की प्रार्थना कविता को समूह का आह्वान बनाती है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.इस कविता की कवयित्री कौन हैं?Show answer

    सुभद्रा कुमारी चौहान।

  2. 2.कविता किस भाग में निर्धारित है?Show answer

    साहित्य सागर के पद्य भाग में।

  3. 3.'व्यथित' का अर्थ क्या है?Show answer

    दुखी।

  4. 4.'माँ' से कवयित्री का आशय क्या है?Show answer

    भारत माता।

  5. 5.मार्ग की तीन बाधाएँ कौन-सी हैं?Show answer

    प्रबल शत्रु, ऊँची सीढ़ियाँ और दुर्बल पैर।

  6. 6.'पद-पंकज' का अर्थ क्या है?Show answer

    चरण-कमल।

प्रतीक, बाधाएँ और देशभक्ति का भाव (मातृ मंदिर की ओर): frequently asked questions

इस कविता से किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं?

इस कविता से पद्यांश-आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें शब्दार्थ, दुख का कारण, बाधाएँ और भाव आते हैं।

कविता का मूल भाव क्या है?

देशभक्ति, परतंत्रता की पीड़ा और स्वतंत्रता के लिए आत्म-समर्पण।

कौन-से रस मिलते हैं?

करुण और वीर रस का मेल।