दो कलाकार (मन्नू भंडारी): चित्रा-अरुणा की तुलना, प्रमुख घटनाएँ और शीर्षक
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
'दो कलाकार' में चित्रा चित्रकला को जीवन का लक्ष्य मानती है और अरुणा सेवा को। विदेश जाने के दिन चित्रा मरी भिखारिन और रोते बच्चों का स्केच बनाने में लगकर देर से लौटती है, जबकि अरुणा उसी समय वहाँ जाती है और बाद में उन बच्चों को गोद लेकर पालती है। दोनों अपने-अपने क्षेत्र में कलाकार हैं, पर अरुणा की कला अधिक मानवीय है।
एक ही दृश्य पर चित्रा ने स्केच बनाया, अरुणा ने मदद की; दोनों कलाकार हैं, पर अरुणा की कला अधिक मानवीय है।
Illustration drawn for QuestionBuddy.
Understand चित्रा और अरुणा: दो दृष्टिकोण और शीर्षक की सार्थकता (दो कलाकार)
कहानी और पाठ्यक्रम। 'दो कलाकार' मन्नू भंडारी की कहानी है, जो साहित्य सागर (कहानियाँ) में निर्धारित है। इस कहानी पर अवतरण-आधारित और शीर्षक की सार्थकता वाले प्रश्न पूछे जाते हैं; सामान्य भूलें ये हैं: चित्रा के 'घर' जाने की बात लिखना (वह विदेश जा रही थी), दोनों पात्रों की भूमिकाएँ उलट देना, देर से लौटने का कारण अधूरा लिखना (भिखारिन और बच्चों का स्केच भूल जाना) और यह न समझा पाना कि दोनों कलाकार हैं।
पात्र। *चित्रा:* संपन्न परिवार की इकलौती संतान, प्रतिभाशाली चित्रकार, विदेश जाने की इच्छुक। *अरुणा:* समाजसेविका, दयालु, गरीब बच्चों को पढ़ाने वाली। दोनों छात्रावास में एक कमरे में रहने वाली घनिष्ठ सहेलियाँ हैं।
घटना-क्रम।
1. दोनों की नोक-झोंक: अरुणा कहती है कि चित्रा की कला जीवन से कटी है; चित्रा सेवा को समय की बर्बादी मानती है।
2. चित्रा के विदेश जाने का दिन: अरुणा उसका सामान ठीक करती है।
3. चित्रा गुरुजी का आशीर्वाद लेने जाती है और देर से लौटती है; पाँच बजे की गाड़ी से जाना है।
4. देर का कारण: रास्ते में पेड़ के नीचे मरी भिखारिन और उससे लिपटकर रोते दो बच्चे; चित्रा उसका रफ़ स्केच बनाने लगी।
5. अरुणा व्याकुल होकर तुरंत वहाँ चली जाती है; चित्रा विदेश चली जाती है।
6. विदेश में वही चित्र प्रसिद्ध होता है और चित्रा को सम्मान तथा पुरस्कार मिलते हैं।
7. वर्षों बाद प्रदर्शनी में अरुणा दो बच्चों के साथ मिलती है, जिन्हें उसने गोद लेकर पाला है। चित्रा स्तब्ध रह जाती है।
तुलना-तालिका।
| बिंदु | चित्रा | अरुणा |
|---|---|---|
| जीवन का लक्ष्य | कला की साधना | सेवा |
| भिखारिन का दृश्य | स्केच बनाया | मदद को दौड़ी |
| अंत में | प्रसिद्धि | बच्चों का जीवन सँवारा |
शीर्षक की सार्थकता। दोनों कलाकार हैं: चित्रा कागज़ पर जीवन का चित्र बनाती है, अरुणा स्वयं जीवन को सँवारने की कला जानती है। कहानी का संदेश है कि केवल संवेदना का चित्रण पर्याप्त नहीं, सच्ची संवेदना कर्म में बदलनी चाहिए।
चित्रा और अरुणा: दो दृष्टिकोण और शीर्षक की सार्थकता (दो कलाकार): key facts
- भूमिकाएँ
- चित्रा = चित्रकार
- अरुणा = समाजसेविका
- चित्रा विदेश जाती है
- अरुणा बच्चों को अपनाती है
- भूमिकाएँ उलटने पर अंक कटते हैं।
- देर का कारण
- गुरुजी का आशीर्वाद
- पेड़ के नीचे मरी भिखारिन
- रोते दो बच्चे
- रफ़ स्केच
- चारों बिंदु लिखिए।
- शीर्षक के लिए तर्क
चित्रा कला की साधना अरुणा जीवन सँवारने की कला दोनों कलाकार संदेश संवेदना कर्म बने - 'दोनों कलाकार हैं' सिद्ध कीजिए।
How to answer चित्रा और अरुणा: दो दृष्टिकोण और शीर्षक की सार्थकता (दो कलाकार) questions
इस कहानी के अवतरण-प्रश्नों में नीचे का क्रम अपनाइए।
- 1पात्रों का परिचय दीजिए; भूमिकाएँ न उलटें।
- 2चित्रा विदेश जा रही थी, यह स्पष्ट लिखिए।
- 3देर के कारण में गुरुजी और स्केच दोनों लिखिए।
- 4दोनों को कलाकार सिद्ध करने के लिए दो-दो तर्क दीजिए।
- 5अंत में अपना मत और संदेश लिखिए।
चित्रा और अरुणा: दो दृष्टिकोण और शीर्षक की सार्थकता (दो कलाकार) in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
देखना और करना
मान लीजिए एक छात्र समूह किसी बाढ़-पीड़ित गाँव पर वृत्तचित्र बना रहा है। एक सदस्य कैमरे से दृश्य उतारने में लगा रहता है, जबकि दूसरा सदस्य राहत-सामग्री बाँटने में हाथ बँटाता है।
इन दो सदस्यों की तुलना चित्रा और अरुणा से कीजिए और बताइए कि कहानी कौन-सी सीख देती है।
Try it first, then show the solutionSolution
- कैमरे वाला सदस्य चित्रा जैसा है।
- सामग्री बाँटने वाला अरुणा जैसा है।
- दोनों का काम उपयोगी हो सकता है, पर मदद का कर्म अधिक मानवीय है।
Answer: कैमरे वाला सदस्य चित्रा-सा है जो दृश्य को दर्ज करता है, और राहत बाँटने वाला अरुणा-सा है जो स्वयं सहायता करता है। कहानी सिखाती है कि संवेदना के साथ कर्म भी होना चाहिए।
Memory hook: चित्र बनाना कला है, जीवन सँवारना भी कला है।
Tricks to remember चित्रा और अरुणा: दो दृष्टिकोण और शीर्षक की सार्थकता (दो कलाकार)
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
चित्रा चित्र, अरुणा अपनाया
च से चित्रकार, अ से अपनाने वाली।
Use it when: भूमिकाओं को उलटने से बचने के लिए।
गु-भि-स्के
गुरुजी, भिखारिन, स्केच।
Use it when: देर से लौटने के कारण का क्रम।
चित्रा और अरुणा: दो दृष्टिकोण और शीर्षक की सार्थकता (दो कलाकार): solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: चित्रा कहाँ जा रही थी · 1 mark · MCQBoard level
चित्रा किस उद्देश्य से कहाँ जा रही थी?
(क) अपने घर, आराम के लिए (ख) विदेश, चित्रकला की आगे की शिक्षा के लिए (ग) गाँव, समाज-सेवा के लिए (घ) छात्रावास, कमरा बदलने
Try it first, then show the solutionSolution
- वह विदेश जा रही थी, घर नहीं (0.5)।
- उद्देश्य: कला को निखारना (0.5)।
Answer: (ख) विदेश, चित्रकला की आगे की शिक्षा के लिए।
Example 2: पात्र-परिचय (2 अंक) · 2 marks · Short answerBoard level
अरुणा और चित्रा का परिचय दीजिए।
Try it first, then show the solutionSolution
- संबंध: सहेलियाँ, एक कमरा (1)।
- चित्रा चित्रकार; अरुणा समाजसेविका (1)।
Answer: अरुणा और चित्रा छात्रावास में एक ही कमरे में रहने वाली घनिष्ठ सहेलियाँ हैं। चित्रा संपन्न परिवार की इकलौती संतान और प्रतिभाशाली चित्रकार है, जबकि अरुणा दयालु और कर्मठ समाजसेविका है।
Example 3: देर से लौटने का कारण (3 अंक) · 3 marks · Short answerHarder board level
चित्रा को लौटने में देर क्यों हुई? उसने लौटकर क्या बताया और अरुणा ने क्या किया?
Try it first, then show the solutionSolution
- गुरुजी का आशीर्वाद, फिर रास्ते का दृश्य (1)।
- मरी भिखारिन, रोते दो बच्चे, स्केच (1)।
- अरुणा का वहाँ जाना (1)।
Answer: गुरुजी का आशीर्वाद लेकर लौटते समय चित्रा ने रास्ते में पेड़ के नीचे एक मरी हुई भिखारिन देखी, जिससे लिपटकर उसके दो छोटे बच्चे रो रहे थे। वह उस दृश्य का रफ़ स्केच बनाने में लग गई, इसलिए देर हुई। यह सुनकर अरुणा व्याकुल हो गई और उसी समय वहाँ चली गई।
Example 4: दोनों कलाकार हैं (5 अंक) · 5 marks · Long answerHarder board level
सिद्ध कीजिए कि चित्रा और अरुणा दोनों अपने-अपने क्षेत्र में कलाकार हैं। (लगभग 120 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- चित्रा का पक्ष (2)।
- अरुणा का पक्ष (2)।
- निष्कर्ष (1)।
Answer: चित्रा चित्रकला में कलाकार है। वह कला की साधना में डूबी रहती है और भिखारिन तथा बच्चों के दृश्य का जो चित्र बनाती है, वह विदेश में बहुत प्रसिद्ध होता है और उसे सम्मान तथा पुरस्कार दिलाता है। अरुणा जीवन को सँवारने की कला में कलाकार है। वह गरीब बच्चों को पढ़ाती है और भिखारिन के दोनों बच्चों को गोद लेकर उनका जीवन बना देती है। एक ने कागज़ पर जीवन का चित्र बनाया, दूसरी ने जीवन ही रच दिया। इसलिए शीर्षक 'दो कलाकार' दोनों के लिए सार्थक है।
Example 5: सच्चा कलाकार कौन (5 अंक) · 5 marks · Long answerHOTS / competency
आपके विचार से कहानी में अधिक सच्चा कलाकार कौन है? कहानी के प्रसंगों के आधार पर अपना मत कारण सहित लिखिए। (लगभग 120 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- मत (1)।
- दो कारण, घटना सहित (2)।
- दूसरे पक्ष की स्वीकृति (1)।
- निष्कर्ष (1)।
Answer: मेरे विचार से अरुणा अधिक सच्ची कलाकार है। पहला कारण यह है कि जब चित्रा ने स्केच बनाने में समय लगाया और लौटकर यह दृश्य बताया, तब अरुणा सुनते ही व्याकुल होकर सहायता के लिए वहाँ दौड़ी; उसकी संवेदना कर्म में बदली। दूसरा कारण यह है कि उसने रोते बच्चों को गोद लेकर उनका जीवन ही सँवार दिया, जो चित्र की प्रसिद्धि से अधिक स्थायी काम है। फिर भी चित्रा की कला को छोटा नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उसने समाज के दुख का चित्र दुनिया तक पहुँचाया। पर कहानी का झुकाव मानवीय कर्म की ओर है।
Where students lose marks in चित्रा और अरुणा: दो दृष्टिकोण और शीर्षक की सार्थकता (दो कलाकार)
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: चित्रा के 'घर' जाने की बात लिखना
चित्रा विदेश जा रही थी।
Wrong working
चित्रा अपने घर जा रही थी।
Right working
चित्रा चित्रकला की शिक्षा के लिए विदेश जा रही थी।
Do this: प्रश्न में 'कहाँ और क्यों' दोनों का उत्तर दीजिए।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: देर के कारण में स्केच छोड़ देना
केवल गुरुजी से मिलने की बात अधूरी है।
Wrong working
चित्रा गुरुजी के पास रुक गई थी।
Right working
रास्ते में मरी भिखारिन और बच्चों का रफ़ स्केच बनाने में लगने से देर हुई।
Do this: कारण में तीन चीज़ें लिखिए: गुरुजी, भिखारिन, स्केच।
Usually costs: 1 से 2 अंक
Mistake: केवल अरुणा को कलाकार मानना
लेखिका ने दोनों को कलाकार कहा है।
Wrong working
कलाकार केवल अरुणा है।
Right working
दोनों कलाकार हैं; चित्रा चित्रकला में, अरुणा जीवन सँवारने में।
Do this: दोनों के पक्ष में एक-एक तर्क लिखिए।
Usually costs: 2 अंक
Exam tips
- पात्रों की भूमिकाओं को एक बार लिखकर देख लीजिए, उलटिए नहीं।
- 'कहाँ और क्यों' वाले प्रश्न में दोनों बातें लिखिए।
- शीर्षक के उत्तर में दोनों को कलाकार सिद्ध कीजिए, फिर अपना मत दीजिए।
- उत्तर का अंत संदेश से कीजिए: संवेदना को कर्म में बदलना।
Practice questions on चित्रा और अरुणा: दो दृष्टिकोण और शीर्षक की सार्थकता (दो कलाकार)
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
'दो कलाकार' की लेखिका कौन हैं?
(क) महादेवी वर्मा (ख) सुभद्रा कुमारी चौहान (ग) मन्नू भंडारी (घ) उषा प्रियंवदाHint
पाठ-परिचय देखिए।
Answer
(ग) मन्नू भंडारी।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
अरुणा के स्वभाव की दो विशेषताएँ लिखिए। (2 अंक)
Hint
सेवा और दया।
Answer
अरुणा दयालु और संवेदनशील है, इसलिए दूसरों के दुख में तुरंत मदद को दौड़ पड़ती है। वह परोपकारी भी है, इसलिए गरीब बच्चों को पढ़ाती है और अंत में अनाथ बच्चों को गोद लेती है।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level
चित्रा और अरुणा के जीवन-दृष्टिकोण में क्या अंतर है? (3 अंक)
Hint
कला बनाम सेवा।
Answer
चित्रा कला को ही जीवन का लक्ष्य मानती है और अरुणा की सेवा को समय की बर्बादी समझती है। अरुणा का मानना है कि चित्रा की कला जीवन से कटी हुई है, क्योंकि वह दुख के चित्र तो बनाती है पर सामने के दुखी लोगों के लिए कुछ नहीं करती। अरुणा दूसरों के लिए जीना और उनकी सहायता करना ही जीवन का उद्देश्य मानती है।
Q4 · 5 marks · Long answerHarder board level
कहानी के अंत में प्रदर्शनी के प्रसंग का वर्णन कीजिए और बताइए कि इससे चित्रा पर क्या प्रभाव पड़ा होगा। (लगभग 100 शब्द)
Hint
बच्चे वही हैं।
Answer
कई वर्ष बाद भारत लौटने पर चित्रा की चित्र-प्रदर्शनी होती है, जहाँ उसकी भेंट अरुणा से होती है। अरुणा के साथ दो बच्चे हैं। पूछने पर पता चलता है कि ये वही बच्चे हैं जिनकी मृत माँ का चित्र बनाकर चित्रा प्रसिद्ध हुई थी, और अरुणा ने उन्हें गोद लेकर पाला है। यह जानकर चित्रा स्तब्ध रह जाती है। उसे अनुभव हुआ होगा कि उसने दृश्य को कागज़ पर उतारकर यश पाया, जबकि अरुणा ने उसी दृश्य से जुड़े बच्चों को जीवन दिया।
Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
यदि चित्रा भी स्केच बनाने के बजाय अरुणा के साथ बच्चों की सहायता करती, तो कहानी का संदेश कैसे बदलता? अपना तर्क दीजिए। (लगभग 100 शब्द)
Hint
कला और मानवता का संबंध।
Answer
यदि चित्रा भी उसी क्षण बच्चों की सहायता करती, तो कला और मानवता का विरोध नहीं रहता और कहानी का केंद्रीय द्वंद्व समाप्त हो जाता। तब संदेश यह होता कि सच्चा कलाकार संवेदना और कर्म दोनों साथ रखता है। पर लेखिका ने दोनों को अलग दिखाकर पाठक को सोचने पर विवश किया कि दुख का चित्र बनाना और दुख मिटाने का प्रयास करना अलग बातें हैं। इसलिए वर्तमान रूप में कहानी चेतावनी देती है कि कलाकार को केवल दृश्य नहीं देखना चाहिए, उसमें भाग लेना भी चाहिए।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.कहानी की लेखिका कौन हैं?Show answer
मन्नू भंडारी।
2.चित्रा क्या करती है?Show answer
चित्रकारी।
3.अरुणा क्या करती है?Show answer
समाज-सेवा; गरीब बच्चों को पढ़ाती है।
4.चित्रा किस गाड़ी से जाने वाली थी?Show answer
पाँच बजे की गाड़ी से।
5.रास्ते में चित्रा ने क्या देखा?Show answer
पेड़ के नीचे मरी भिखारिन और उससे लिपटे दो रोते बच्चे।
6.कहानी के अंत में अरुणा के साथ कौन था?Show answer
वही दो बच्चे, जिन्हें उसने गोद लिया था।
चित्रा और अरुणा: दो दृष्टिकोण और शीर्षक की सार्थकता (दो कलाकार): frequently asked questions
इस कहानी पर किस प्रकार के प्रश्न आ सकते हैं?
इस कहानी पर अवतरण-आधारित प्रश्न और शीर्षक की सार्थकता वाले प्रश्न आ सकते हैं।
कहानी का केंद्रीय विषय क्या है?
कला और मानवता का संबंध; सच्ची संवेदना का कर्म में बदलना।
शीर्षक 'दो कलाकार' क्यों सार्थक है?
क्योंकि चित्रा और अरुणा दोनों अपने-अपने क्षेत्र में कलाकार हैं।