दीपदान (डॉ. रामकुमार वर्मा): पन्ना धाय का त्याग, घटना-क्रम और शीर्षक की सार्थकता
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
'दीपदान' में पन्ना धाय चित्तौड़ के उत्तराधिकारी कुँवर उदयसिंह को बनवीर से बचाने के लिए उसे कीरत बारी की टोकरी में बाहर भिजवा देती है और अपने पुत्र चंदन को उसके पलंग पर सुला देती है। बनवीर चंदन का वध कर देता है। जिस रात लोग दीपदान करते हैं, उसी रात पन्ना अपने कुल-दीपक का दान करती है, यही शीर्षक का गहरा अर्थ है।
Understand पन्ना धाय का त्याग और 'दीपदान' शीर्षक की सार्थकता
एकांकी का आधार। 'दीपदान' डॉ. रामकुमार वर्मा का ऐतिहासिक एकांकी है, जो एकांकी संचय में निर्धारित है। यह मेवाड़ (चित्तौड़) की उस प्रसिद्ध घटना पर आधारित है जिसमें पन्ना धाय ने राजवंश की रक्षा के लिए अपने पुत्र का बलिदान किया। इस एकांकी पर अवतरण-आधारित और चरित्र-चित्रण के प्रश्न पूछे जाते हैं।
पात्र। पन्ना धाय (उदयसिंह की धाय माँ, नायिका); बनवीर (सिंहासन हड़पने वाला खलनायक); कुँवर उदयसिंह (चौदह वर्ष का उत्तराधिकारी); चंदन (पन्ना का पुत्र); कीरत बारी (जूठी पत्तलें उठाने वाला सेवक)।
घटना-क्रम।
1. महाराणा सांगा के बाद चित्तौड़ के राजवंश पर संकट है; वैध उत्तराधिकारी चौदह वर्ष का उदयसिंह है।
2. महत्वाकांक्षी बनवीर सिंहासन हड़पना चाहता है और उदयसिंह को मार्ग का काँटा मानकर समाप्त करने का षड्यंत्र रचता है।
3. वह दीपदान का उत्सव रखवाता है ताकि महल के लोग उसमें व्यस्त रहें।
4. पन्ना षड्यंत्र को भाँप लेती है।
5. वह उदयसिंह को कीरत बारी की जूठी पत्तलों की टोकरी में छिपाकर महल से बाहर भिजवा देती है।
6. वह अपने पुत्र चंदन को उदयसिंह के पलंग पर सुलाकर उसे उदयसिंह के वस्त्र ओढ़ा देती है।
7. बनवीर नंगी तलवार लिए आता है; पन्ना ममता को दबाकर सोए हुए चंदन की ओर संकेत करती है और बनवीर उसका वध कर देता है।
पन्ना के गुण (घटना के साथ)। स्वामी-भक्त (राजवंश की रक्षा); त्यागमयी (पुत्र का बलिदान); दूरदर्शी और बुद्धिमान (षड्यंत्र भाँपना, टोकरी की युक्ति); साहसी (तलवार के सामने शांत रहना); कर्तव्य को ममता से ऊपर रखने वाली।
'दीपदान' शीर्षक की सार्थकता। *शाब्दिक अर्थ:* उत्सव में दीपों को जल में प्रवाहित करना। *प्रतीकात्मक अर्थ:* उसी रात पन्ना ने अपने कुल के दीपक, पुत्र चंदन, का दान कर दिया। एक ही शब्द में उत्सव और बलिदान का करुण विरोधाभास है। सामान्य चूकें: शीर्षक का केवल शाब्दिक अर्थ लिखना, गलत राजवंश लिखना और पन्ना के त्याग का कारण अधूरा बताना।
संदेश। स्वामी-भक्ति, कर्तव्य, त्याग और देश-प्रेम; सत्ता का लोभ मनुष्य को क्रूर बनाता है।
पन्ना धाय का त्याग और 'दीपदान' शीर्षक की सार्थकता: key facts
- घटना-क्रम
- षड्यंत्र का संकेत
- उदयसिंह कीरत की टोकरी में
- चंदन पलंग पर
- बनवीर का आना
- चंदन का वध
- 'पन्ना ने उदयसिंह को कैसे बचाया' का उत्तर इसी क्रम में दीजिए।
- शीर्षक के दो अर्थ
- शाब्दिक: दीपों का दान | प्रतीकात्मक: कुल-दीपक चंदन का दान
- दोनों अर्थ लिखे बिना शीर्षक का उत्तर अधूरा रहता है।
- पन्ना के गुण
- स्वामी-भक्त
- त्यागमयी
- दूरदर्शी
- साहसी
- कर्तव्यनिष्ठ
- हर गुण के साथ एक घटना जोड़ें।
How to answer पन्ना धाय का त्याग और 'दीपदान' शीर्षक की सार्थकता questions
अवतरण पर चार प्रश्नों के लिए यह क्रम काम आता है।
- 1वक्ता, श्रोता और प्रसंग पहचानिए (नाम और संबंध लिखिए)।
- 2राजवंश का नाम सही लिखिए: मेवाड़ (चित्तौड़), महाराणा सांगा का वंश।
- 3घटना पूछी हो तो सात चरणों में से सही चरण क्रम से लिखिए।
- 4चरित्र हो तो गुण + घटना लिखिए।
- 5शीर्षक हो तो दोनों अर्थ और संदेश लिखिए।
पन्ना धाय का त्याग और 'दीपदान' शीर्षक की सार्थकता in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
कर्तव्य और निजी भावना का द्वंद्व
मान लीजिए किसी विद्यालय की एक अध्यापिका को पता चलता है कि उसके अपने बेटे ने परीक्षा में नकल की है, और उसे नियमों के अनुसार इसकी सूचना प्रधानाचार्य को देनी है, जबकि उसका मन बेटे को बचाने का है।
यह स्थिति पन्ना के अंतर्द्वंद्व से कैसे भिन्न और कैसे समान है?
Try it first, then show the solutionSolution
- समानता: दोनों में कर्तव्य और ममता का टकराव है।
- भिन्नता: पन्ना का निर्णय राजवंश की रक्षा के लिए बलिदान था, यहाँ निर्णय नियम-पालन का है।
- दोनों में कर्तव्य को निजी भावना से ऊपर रखना पड़ता है।
Answer: समानता यह है कि दोनों जगह ममता और कर्तव्य टकराते हैं और कर्तव्य को चुनना पड़ता है; भिन्नता यह है कि पन्ना के निर्णय की कीमत अपने पुत्र का बलिदान थी, जो बहुत गंभीर है।
Memory hook: ममता दबी, कर्तव्य जीता।
Tricks to remember पन्ना धाय का त्याग और 'दीपदान' शीर्षक की सार्थकता
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
प-को-च-ब
पन्ना जानती है, कीरत ले जाता है, चंदन सोता है, बनवीर मारता है।
Use it when: घटना-क्रम के चार मोड़।
दो दीप
एक दीप जल में बहा, एक दीप कुल का बुझा।
Use it when: शीर्षक के दोनों अर्थ।
पन्ना धाय का त्याग और 'दीपदान' शीर्षक की सार्थकता: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: उदयसिंह कौन · 1 mark · MCQBoard level
उदयसिंह के विषय में कौन-सा कथन सही है?
(क) वह बनवीर का पुत्र था (ख) वह चौदह वर्ष का वैध उत्तराधिकारी था (ग) वह पन्ना का पुत्र था (घ) वह कीरत बारी का भाई था
Try it first, then show the solutionSolution
- चित्तौड़ का उत्तराधिकारी कुँवर उदयसिंह (0.5)।
- आयु चौदह वर्ष; पन्ना उसकी धाय माँ (0.5)।
Answer: (ख) वह चौदह वर्ष का वैध उत्तराधिकारी था।
Example 2: पन्ना की युक्ति (2 अंक) · 2 marks · Short answerBoard level
पन्ना ने उदयसिंह को महल से बाहर कैसे भिजवाया?
Try it first, then show the solutionSolution
- कीरत बारी का सहारा (1)।
- जूठी पत्तलों की टोकरी (1)।
Answer: पन्ना ने जूठी पत्तलें उठाने वाले कीरत बारी की टोकरी में उदयसिंह को छिपाकर चुपचाप महल से बाहर सुरक्षित स्थान पर भिजवा दिया।
Example 3: बनवीर की योजना (3 अंक) · 3 marks · Short answerHarder board level
बनवीर ने दीपदान का उत्सव क्यों रखवाया और उसका षड्यंत्र क्या था?
Try it first, then show the solutionSolution
- सिंहासन का लोभ (1)।
- उत्सव से ध्यान बँटाना (1)।
- उदयसिंह की हत्या (1)।
Answer: बनवीर सिंहासन हड़पना चाहता था और उदयसिंह को अपने मार्ग का काँटा मानता था। उसने दीपदान का उत्सव इसलिए रखवाया कि महल के लोग उत्सव में व्यस्त रहें और उसी रात वह उदयसिंह की हत्या कर सके। पन्ना ने यह षड्यंत्र भाँप लिया।
Example 4: पन्ना का चरित्र (5 अंक) · 5 marks · Long answerHarder board level
'दीपदान' के आधार पर पन्ना धाय के चरित्र की चार विशेषताएँ घटनाओं सहित लिखिए। (लगभग 120 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- परिचय (1)।
- चार गुण, घटना सहित (3)।
- निष्कर्ष (1)।
Answer: पन्ना कुँवर उदयसिंह की धाय माँ और एकांकी की नायिका है। वह दूरदर्शी और बुद्धिमान है, क्योंकि उसने दीपदान के उत्सव में छिपा षड्यंत्र भाँप लिया और कीरत की टोकरी की युक्ति निकाली। वह स्वामी-भक्त है; राजवंश की रक्षा के लिए उसने उदयसिंह को बाहर भिजवाया। वह त्यागमयी है; उसने अपने पुत्र चंदन को उदयसिंह के पलंग पर सुला दिया। वह साहसी है; नंगी तलवार लिए बनवीर के सामने भी मन की व्यथा दबाकर सोए हुए चंदन की ओर संकेत करती है। इस प्रकार वह कर्तव्य को ममता से ऊपर रखने वाली अद्वितीय नारी है।
Example 5: शीर्षक की सार्थकता (5 अंक) · 5 marks · Long answerHOTS / competency
एक विद्यार्थी लिखता है कि 'दीपदान' शीर्षक केवल उत्सव की ओर संकेत करता है। कथानक के आधार पर इस उत्तर का मूल्यांकन कीजिए और शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए। (लगभग 120 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- शाब्दिक अर्थ की स्वीकृति (1)।
- प्रतीकात्मक अर्थ (2)।
- विरोधाभास का करुण प्रभाव (1)।
- निष्कर्ष (1)।
Answer: विद्यार्थी का उत्तर अधूरा है। शाब्दिक रूप से दीपदान उस उत्सव का नाम है जिसमें लोग दीप जलाकर जल में प्रवाहित करते हैं, और बनवीर ने इसी उत्सव को आड़ बनाया। पर उसी रात पन्ना ने अपने कुल के दीपक, पुत्र चंदन, का दान कर दिया। इस प्रतीकात्मक अर्थ में शीर्षक एकांकी के मूल प्रसंग, पन्ना के बलिदान, को व्यक्त करता है। बाहर उत्सव और भीतर हत्या का विरोधाभास करुणा को गहरा करता है। इसलिए शीर्षक अत्यंत सार्थक है।
Where students lose marks in पन्ना धाय का त्याग और 'दीपदान' शीर्षक की सार्थकता
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: गलत राजवंश लिखना
राजवंश का गलत नाम लिखना एक सामान्य चूक है, जिस पर अंक कट सकते हैं।
Wrong working
पन्ना जयपुर के राजवंश की रक्षा कर रही है।
Right working
पन्ना चित्तौड़ (मेवाड़) के महाराणा सांगा के राजवंश की रक्षा कर रही है।
Do this: राजवंश: चित्तौड़, महाराणा सांगा।
Usually costs: लगभग 1 अंक (अनुमानित)
Mistake: त्याग का कारण अधूरा लिखना
उत्तर में उद्देश्य (उदयसिंह की रक्षा) अपेक्षित है।
Wrong working
पन्ना ने अपने पुत्र का बलिदान किया।
Right working
पन्ना ने उदयसिंह की प्राण-रक्षा के लिए अपने पुत्र चंदन का बलिदान किया।
Do this: 'क्यों' का उत्तर साथ में दीजिए।
Usually costs: लगभग 1 से 2 अंक (अनुमानित)
Mistake: शीर्षक का केवल शाब्दिक अर्थ लिखना
शीर्षक का वास्तविक अर्थ प्रतीकात्मक है।
Wrong working
दीपदान का अर्थ दीप जलाकर प्रवाहित करना है।
Right working
शाब्दिक अर्थ के साथ बताइए कि पन्ना ने उसी रात कुल-दीपक चंदन का दान किया।
Do this: दोनों अर्थ और संदेश।
Usually costs: लगभग 2 अंक (अनुमानित)
Exam tips
- राजवंश और पात्रों के संबंध सही लिखिए: महाराणा सांगा, उदयसिंह, चंदन, बनवीर, कीरत बारी।
- घटना-क्रम वाले उत्तर में क्रम न बिगाड़िए।
- पन्ना के हर गुण के साथ एक घटना लिखिए।
- शीर्षक के उत्तर में दोनों अर्थ और संदेश दीजिए।
Practice questions on पन्ना धाय का त्याग और 'दीपदान' शीर्षक की सार्थकता
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
'दीपदान' एकांकी के लेखक कौन हैं?
(क) उपेंद्रनाथ अश्क (ख) डॉ. रामकुमार वर्मा (ग) मन्नू भंडारी (घ) प्रेमचंदHint
एकांकी संचय के लेखक।
Answer
(ख) डॉ. रामकुमार वर्मा।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
चंदन कौन था और उसके साथ क्या हुआ? (2 अंक)
Hint
पलंग और वस्त्र।
Answer
चंदन पन्ना धाय का पुत्र था। पन्ना ने उसे उदयसिंह के पलंग पर उदयसिंह के वस्त्र ओढ़ाकर सुला दिया, और बनवीर ने उसे उदयसिंह समझकर उसका वध कर दिया।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level
बनवीर कौन था? उसके चरित्र की दो विशेषताएँ कथा से उदाहरण सहित लिखिए। (3 अंक)
Hint
महत्वाकांक्षा और क्रूरता।
Answer
बनवीर चित्तौड़ का सिंहासन हड़पने वाला खलनायक था। वह महत्वाकांक्षी था, क्योंकि उसने राज्य पर अधिकार जमाने के लिए षड्यंत्र रचा। वह क्रूर और धूर्त भी था, क्योंकि उसने दीपदान के उत्सव की आड़ में उदयसिंह की हत्या की योजना बनाई और अंत में नंगी तलवार लेकर चंदन का वध किया।
Q4 · 5 marks · Long answerHarder board level
'पन्ना के लिए कर्तव्य ममता से ऊपर था', इस कथन की पुष्टि एकांकी के प्रसंगों से कीजिए। (लगभग 100 शब्द)
Hint
चंदन का पलंग और बनवीर के सामने मौन।
Answer
पन्ना की ममता पुत्र चंदन के प्रति अपार थी, फिर भी उसने उदयसिंह की रक्षा को पहले रखा। उसने उदयसिंह को कीरत की टोकरी में बाहर भिजवाया और अपने पुत्र को उदयसिंह के पलंग पर सुला दिया। बनवीर के आने पर उसका हृदय फटा जा रहा था, पर उसने कर्तव्य के आगे ममता को दबाकर चंदन की ओर संकेत किया। माँ होकर अपनी आँखों के सामने पुत्र को मरते देखना और मौन रहना यह सिद्ध करता है कि उसके लिए स्वामी-भक्ति और राजवंश की रक्षा सर्वोपरि थी।
Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
आपकी दृष्टि में पन्ना के निर्णय को केवल स्वामी-भक्ति कहना कितना उचित है? कथानक के आधार पर अपना मत दीजिए। (लगभग 100 शब्द)
Hint
देश-प्रेम का पक्ष भी देखिए।
Answer
केवल स्वामी-भक्ति कहना अधूरा है। उदयसिंह चित्तौड़ का वैध उत्तराधिकारी था, इसलिए उसकी रक्षा मेवाड़ के भविष्य की रक्षा थी। पन्ना ने एक बालक को नहीं, पूरे राजवंश और राज्य के भविष्य को बचाया। इस दृष्टि से उसके निर्णय में देश-प्रेम और कर्तव्य-बोध भी था। साथ ही उसका त्याग एक माँ की सबसे बड़ी कुर्बानी है, इसलिए उसमें मानवीय करुणा भी है। अतः उसका निर्णय स्वामी-भक्ति, देश-प्रेम और त्याग, तीनों का संगम है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.दीपदान के लेखक कौन हैं?Show answer
डॉ. रामकुमार वर्मा।
2.यह किस पुस्तक में निर्धारित है?Show answer
एकांकी संचय।
3.उदयसिंह की आयु कितनी थी?Show answer
चौदह वर्ष।
4.उदयसिंह को महल से कौन ले गया?Show answer
कीरत बारी, जूठी पत्तलों की टोकरी में।
5.पन्ना का पुत्र कौन था?Show answer
चंदन।
6.बनवीर ने किसका वध किया?Show answer
चंदन का, उसे उदयसिंह समझकर।
पन्ना धाय का त्याग और 'दीपदान' शीर्षक की सार्थकता: frequently asked questions
दीपदान किस ऐतिहासिक घटना पर आधारित है?
मेवाड़ में पन्ना धाय द्वारा उदयसिंह की रक्षा के लिए अपने पुत्र चंदन के बलिदान की घटना पर।
अवतरण-प्रश्न में क्या पूछा जाता है?
सामान्यतः वक्ता कौन है, श्रोता कौन है, प्रसंग क्या है और अवतरण में किस घटना का संकेत है, यह पूछा जाता है। उत्तर में पात्रों के नाम और संबंध सही लिखिए।
एकांकी का मुख्य संदेश क्या है?
कर्तव्य, स्वामी-भक्ति और त्याग; साथ ही सत्ता-लोभ की क्रूरता।