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HindiICSE Class 10 · भेड़ें और भेड़िये

भेड़ें और भेड़िये (परसाई): प्रतीक, सियार की योजना और व्यंग्य का लक्ष्य

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

'भेड़ें और भेड़िये' में भेड़ें भोली जनता, भेड़िये शोषक सत्ता-लोलुप नेता और सियार चापलूस प्रचारक के प्रतीक हैं। बूढ़े सियार की योजना (साधु का वेश, मीठी भाषा, प्रचारक सियार) से भेड़िये चुनाव जीतते हैं और पहला कानून भेड़ों के विरुद्ध बनाते हैं। लेखक का संदेश है कि जनता वेश नहीं, चरित्र देखे।

Notice that the disguise, sweet speech and jackal publicity win the votes, and then the first law harms the sheep who voted.

Illustration drawn for QuestionBuddy.

Understand प्रतीक और सियार की चुनाव-योजना (भेड़ें और भेड़िये)

रचना। 'भेड़ें और भेड़िये' हरिशंकर परसाई की प्रतीकात्मक व्यंग्य कथा है, जो साहित्य सागर (कहानियाँ) में निर्धारित है। खंड ख में अवतरण पर चार प्रश्न (2, 2, 3, 3 अंक) आ सकते हैं।

तीन प्रतीक।

  • *भेड़ें:* भोली, बहुसंख्यक जनता।
  • *भेड़िये:* शोषक और सत्ता के लोभी नेता।
  • *बूढ़ा सियार और उसके साथी:* चालाक चापलूस प्रचारक, जो झूठ को सच बनाकर बेचते हैं।

कथा का क्रम।
1. वन के पशु प्रजातंत्र लाने का निश्चय करते हैं; प्रतिनिधि कानून बनाएँगे।
2. भेड़ें प्रसन्न होती हैं, क्योंकि संख्या में वे सबसे अधिक हैं।
3. भेड़िये चिंतित होते हैं कि अब उनका भोजन रुक जाएगा।
4. बूढ़ा सियार उपाय बताता है: भेड़िये को साधु-संत का वेश, तिलक और मीठी, विनम्र भाषा दी जाती है।
5. अलग-अलग वेश वाले सियार प्रचारक बनकर भेड़िये की प्रशंसा करते हैं।
6. भेड़ों की सभा में भेड़िया सेवा और रक्षा का वादा करता है।
7. भेड़ें भेड़ियों को चुन लेती हैं; पहला कानून भेड़ों के ही विरुद्ध बनता है: भेड़ियों के भोजन के लिए भेड़ें नियमित रूप से दी जाएँ।

विडंबना। जिस प्रजातंत्र से भेड़ों ने सुरक्षा की आशा की, वही उनके विनाश को वैध बना देता है।

व्यंग्य के लक्ष्य। चुनावी प्रचार और झूठे वादे, ढोंगी नेता, चापलूस प्रचारक, और भोली जनता का जागरूकता से दूर रहना। संदेश: जागरूक मतदाता बनिए।

उत्तर लिखने की रीति। प्रतीक का नाम, उसका अर्थ और कथा से एक उदाहरण; योजना के प्रश्न में क्रम से तीन-चार चरण।

प्रतीक और सियार की चुनाव-योजना (भेड़ें और भेड़िये): key facts

तीन प्रतीक
  • भेड़ें = भोली जनता
  • भेड़िये = शोषक नेता
  • सियार = चापलूस प्रचारक
प्रतीक पूछने पर तीनों लिखिए।
सियार की योजना
  • साधु का वेश
  • तिलक
  • मीठी भाषा
  • प्रचारक सियार
  • भेड़ों की सभा
  • वादा
योजना का क्रम इसी तरह लिखिए।
व्यंग्य का परिणाम
  • भेड़ों का भेड़ियों को चुनना
  • पहला कानून
  • भेड़ें भोजन के लिए अर्पित
विडंबना समझाने के लिए अंत अवश्य लिखिए।

How to answer प्रतीक और सियार की चुनाव-योजना (भेड़ें और भेड़िये) questions

प्रतीक या व्यंग्य के प्रश्न को इस क्रम से हल कीजिए।

  1. 1पहले प्रतीक का नाम लिखिए।
  2. 2उसका सांकेतिक अर्थ बताइए।
  3. 3कथा की एक घटना उदाहरण के रूप में दीजिए।
  4. 4व्यंग्य का लक्ष्य स्पष्ट कीजिए।
  5. 5संदेश की एक पंक्ति से उत्तर पूरा कीजिए।

प्रतीक और सियार की चुनाव-योजना (भेड़ें और भेड़िये) in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

वेश देखकर विश्वास

मान लीजिए किसी मोहल्ले की समिति के चुनाव में एक उम्मीदवार मीठी बातें करता है, सबके घर जाता है और उसके समर्थक उसकी बड़ाई करते हैं, पर उसने पहले कभी मोहल्ले के लिए कोई काम नहीं किया।

इस उम्मीदवार को परखने के लिए मतदाता 'भेड़ें और भेड़िये' से क्या सीख सकते हैं?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. समर्थकों की प्रशंसा सियारों के प्रचार जैसी हो सकती है।
  2. मीठी भाषा चरित्र का प्रमाण नहीं है।
  3. पिछला काम और आचरण देखना चाहिए।

Answer: मतदाता को वेश और मीठी बातों के बजाय उम्मीदवार का पिछला काम और आचरण परखना चाहिए, जो परसाई का संदेश है।

Memory hook: वेश नहीं, चरित्र देखो।

Tricks to remember प्रतीक और सियार की चुनाव-योजना (भेड़ें और भेड़िये)

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • भे-भे-सि

    भेड़ = भोले मतदाता, भेड़िये = भक्षक नेता, सियार = सलाहकार प्रचारक।

    Use it when: तीनों प्रतीकों के लिए।

  • वेश-वाणी-वाहवाही

    साधु का वेश, मीठी वाणी, सियारों की वाहवाही।

    Use it when: सियार की योजना के तीन चरण।

प्रतीक और सियार की चुनाव-योजना (भेड़ें और भेड़िये): solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: प्रतीक पहचानिए · 1 mark · MCQBoard level

'भेड़ें और भेड़िये' में भेड़ें किसकी प्रतीक हैं?
(क) चालाक प्रचारकों की (ख) शोषक नेताओं की (ग) भोली जनता की (घ) साधु-संतों की

Try it first, then show the solutionSolution
  1. भेड़ें वन में बहुसंख्यक और भोली थीं (0.5)।
  2. इसलिए वे जनता का प्रतीक हैं (0.5)।

Answer: (ग) भोली जनता की।

Example 2: वन में प्रजातंत्र क्यों (2 अंक) · 2 marks · Short answerBoard level

वन के पशुओं ने प्रजातंत्र लाने का निश्चय किया तो भेड़ें प्रसन्न और भेड़िये चिंतित क्यों हुए?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. भेड़ें बहुसंख्यक होने से सुरक्षा की आशा करती थीं (1)।
  2. भेड़ियों को भोजन रुकने का भय था (1)।

Answer: भेड़ें प्रसन्न हुईं, क्योंकि वन में उनकी संख्या सबसे अधिक थी और उन्हें विश्वास था कि उनके प्रतिनिधि ऐसे कानून बनाएँगे कि कोई उन्हें खा न सके। भेड़िये चिंतित हुए, क्योंकि उन्हें लगा कि भेड़ों के प्रतिनिधि उनके भोजन पर रोक लगा देंगे।

Example 3: सियार की योजना (3 अंक) · 3 marks · Short answerHarder board level

बूढ़े सियार ने भेड़िये को चुनाव जितवाने के लिए क्या योजना बनाई?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. वेश-परिवर्तन: साधु का वेश और तिलक (1)।
  2. मीठी, विनम्र भाषा और प्रचारक सियार (1)।
  3. भेड़ों की सभा में सेवा का वादा (1)।

Answer: सियार ने भेड़िये को साधु-संत जैसा वेश दिया, माथे पर तिलक लगवाया और मीठी, विनम्र भाषा सिखाई। उसने कुछ और सियारों को अलग-अलग वेश देकर प्रचारक बनाया, जो भेड़ों के बीच भेड़िये को हितैषी और दयालु बताते थे। फिर भेड़ियों ने भेड़ों की सभा में सेवा और रक्षा करने की बात कही।

Example 4: प्रजातंत्र की विडंबना (5 अंक) · 5 marks · Long answerHarder board level

'जिस प्रजातंत्र से भेड़ों को सुरक्षा की आशा थी, वही उनके विनाश का साधन बन गया।' कथा के आधार पर इस कथन को स्पष्ट कीजिए। (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. भेड़ों की आशा (1)।
  2. प्रचार और चुनाव (2)।
  3. पहला कानून (1)।
  4. विडंबना का निष्कर्ष (1)।

Answer: भेड़ों ने सोचा था कि वे बहुसंख्यक हैं, इसलिए उनके प्रतिनिधि उनकी रक्षा के कानून बनाएँगे। परंतु साधु का वेश धरे भेड़िये और प्रचारक सियारों ने उन्हें अपने मीठे वादों से बहला लिया और भेड़ों ने भेड़ियों को ही अपना प्रतिनिधि चुन लिया। चुनाव के बाद भेड़ियों ने पहला कानून यह बनाया कि उनके भोजन के लिए नियमित रूप से भेड़ें दी जाएँ। इस प्रकार जनता की अपनी वोट-शक्ति उसी के विरुद्ध प्रयुक्त हुई। यह विडंबना है, जो लेखक के अनुसार जनता के अजागरूक होने का फल है।

Example 5: आज के संदर्भ में कथा (5 अंक) · 5 marks · Long answerHOTS / competency

'भेड़ें और भेड़िये' में लेखक ने सीधे किसी का नाम नहीं लिया, फिर भी व्यंग्य तीखा है। प्रतीकात्मक शैली के लाभ और कथा की प्रासंगिकता पर अपना मत दीजिए। (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. प्रतीक-शैली का लाभ (2)।
  2. प्रासंगिकता (2)।
  3. निष्कर्ष (1)।

Answer: प्रतीक-शैली में लेखक किसी व्यक्ति या दल पर सीधे आरोप नहीं लगाता, इसलिए व्यंग्य व्यापक हो जाता है और हर पाठक अपने आसपास की स्थिति को पहचान लेता है। पशुओं के माध्यम से कही गई बात रोचक भी रहती है और धारदार भी। कथा इसलिए प्रासंगिक है कि चुनावी प्रचार, दिखावा और चापलूसी किसी भी समय में हो सकते हैं। भेड़ों की भूल वेश पर विश्वास करना थी। इसलिए संदेश यह है कि मतदाता को वादों और वेश के बजाय उम्मीदवार का चरित्र परखना चाहिए।

Where students lose marks in प्रतीक और सियार की चुनाव-योजना (भेड़ें और भेड़िये)

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: प्रतीक का अर्थ न लिखना

    प्रश्न प्रतीक का सांकेतिक अर्थ चाहता है।

    Wrong working

    सियार एक चालाक पशु है।

    Right working

    सियार चापलूस और चालाक प्रचारकों के प्रतीक हैं।

    Do this: पहले पशु, फिर प्रतीकार्थ लिखिए।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: योजना का क्रम बिगाड़ना

    वेश, भाषा, प्रचार और सभा, चारों चरण क्रम से अपेक्षित हैं।

    Wrong working

    सियार ने भेड़िये को चुनाव में खड़ा कर दिया।

    Right working

    पहले वेश और भाषा बदली, फिर प्रचारक लगाए, फिर भेड़ों की सभा में वादा कराया।

    Do this: चरणों के सूचक शब्द पहले, फिर, अंत में लगाइए।

    Usually costs: 1 से 2 अंक

  • Mistake: व्यंग्य का लक्ष्य न बताना

    उद्देश्य के प्रश्न में किस पर व्यंग्य है, यह लिखना आवश्यक है।

    Wrong working

    लेखक पशुओं की कहानी सुनाता है।

    Right working

    लेखक चुनाव, ढोंगी नेताओं और भोली जनता पर व्यंग्य करता है।

    Do this: लक्ष्य के तीन नाम याद रखिए: चुनाव, नेता, जनता।

    Usually costs: 2 अंक

Exam tips

  • प्रतीक-प्रश्न में पशु का नाम और उसका सांकेतिक अर्थ दोनों लिखिए।
  • योजना के उत्तर में चरणों को क्रम से लिखिए।
  • उद्देश्य के प्रश्न में अंत में एक पंक्ति का संदेश अवश्य दीजिए।
  • किसी वास्तविक दल या व्यक्ति का नाम न लिखिए; कथा के प्रतीकों के आधार पर उत्तर दीजिए।

Practice questions on प्रतीक और सियार की चुनाव-योजना (भेड़ें और भेड़िये)

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    सियार किसके प्रतीक हैं?
    (क) सीधे-सादे किसानों के (ख) चापलूस प्रचारकों के (ग) ईमानदार नेताओं के (घ) रक्षकों के

    Hint

    वे भेड़िये की प्रशंसा करते थे।

    Answer

    (ख) चापलूस प्रचारकों के, जो लाभ के लिए झूठ को सच बनाकर प्रचारित करते हैं।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    भेड़ों ने भेड़ियों को अपना प्रतिनिधि क्यों चुना? (2 अंक)

    Hint

    वेश और प्रचार।

    Answer

    भेड़ें भोली थीं। भेड़िये का साधु-जैसा वेश, उसकी मीठी बातें और सियारों का प्रचार देखकर उन्हें विश्वास हो गया कि वह उनका सच्चा हितैषी है, इसलिए उन्होंने भेड़ियों को चुन लिया।

  3. Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level

    चुनाव के बाद भेड़ियों की सभा ने जो पहला कानून बनाया, उसका उल्लेख कीजिए और बताइए कि यह किस पर व्यंग्य है। (3 अंक)

    Hint

    भोजन के लिए भेड़ें।

    Answer

    पहला कानून यह था कि भेड़ियों के भोजन के लिए भेड़ें नियमित रूप से दी जाएँ। यह उन नेताओं पर व्यंग्य है जो चुनाव जीतने के बाद जनता के हित के बजाय अपने स्वार्थ के कानून बनाते हैं, और साथ ही अजागरूक जनता पर भी।

  4. Q4 · 5 marks · Long answerHarder board level

    भेड़िये के साधु-वेश में आने की घटना का महत्व बताते हुए 'ढोंग' और 'चरित्र' का अंतर स्पष्ट कीजिए। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    तिलक बदल गया, स्वभाव नहीं।

    Answer

    सियार ने भेड़िये को साधु का वेश, तिलक और मीठी भाषा दी, जिससे भेड़ें उसे सज्जन समझने लगीं। परंतु वेश बदलने से भेड़िये का स्वभाव नहीं बदला; उसका उद्देश्य अब भी भेड़ों को खाना था, जो चुनाव के बाद बने कानून से प्रकट हुआ। यही ढोंग और चरित्र का अंतर है: ढोंग बाहरी दिखावा है, चरित्र आचरण में दिखता है। लेखक पाठक को सावधान करता है कि किसी की पहचान उसके वेश से नहीं, कर्म से करनी चाहिए।

  5. Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    यदि भेड़ें प्रचारक सियारों की बातों पर विश्वास न करतीं और स्वयं भेड़िये के आचरण की जाँच करतीं, तो कथा का अंत कैसा होता? अपना मत तर्क सहित दीजिए। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    जागरूकता का महत्व।

    Answer

    यदि भेड़ें जाँच करतीं, तो उन्हें दिखता कि भेड़िये का साधु-वेश केवल दिखावा है और उसने उनके लिए कभी कुछ नहीं किया। तब वे अपने बीच से ही किसी भरोसेमंद प्रतिनिधि को चुनतीं और ऐसे कानून बनते जो उनकी रक्षा करते। इस प्रकार वही प्रजातंत्र, जो उनके विनाश का साधन बना, उनकी सुरक्षा का साधन बनता। इससे सिद्ध होता है कि लोकतंत्र की सफलता जनता की जागरूकता पर निर्भर है, और यही कथा का संदेश है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.इस व्यंग्य कथा के लेखक कौन हैं?Show answer

    हरिशंकर परसाई।

  2. 2.पाठ किस पुस्तक में निर्धारित है?Show answer

    साहित्य सागर (कहानियाँ)।

  3. 3.भेड़ें किसकी प्रतीक हैं?Show answer

    भोली जनता की।

  4. 4.भेड़िये किसके प्रतीक हैं?Show answer

    शोषक, सत्ता-लोलुप नेताओं के।

  5. 5.भेड़िये को सलाह किसने दी?Show answer

    बूढ़े सियार ने।

  6. 6.पहला कानून किसके विरुद्ध था?Show answer

    भेड़ों के ही विरुद्ध।

प्रतीक और सियार की चुनाव-योजना (भेड़ें और भेड़िये): frequently asked questions

भेड़ें और भेड़िये की विधा क्या है?

यह प्रतीकात्मक व्यंग्य कथा है।

कथा का मुख्य संदेश क्या है?

जनता को जागरूक रहकर वेश नहीं, चरित्र देखना चाहिए।

खंड ख में इससे कैसे प्रश्न आते हैं?

प्रतीकों, पात्रों की चालाकी और व्यंग्य के लक्ष्य पर अवतरण-आधारित प्रश्न (2, 2, 3, 3 अंक)।