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HindiICSE Class 10 · बड़े घर की बेटी

बड़े घर की बेटी (प्रेमचंद): आनंदी का चरित्र और शीर्षक की सार्थकता

Updated 17 October 2026 · Fact-checked

आनंदी ने ससुराल की सादगी में स्वयं को ढाल लिया था, घी वाली घटना में उसका अनजाने में किया गया खर्च झगड़े की जड़ बना, पर अंत में उसने लालबिहारी को रोककर और पति से क्षमा करवाकर टूटता परिवार बचा लिया। इसीलिए 'बड़े घर की बेटी' शीर्षक पहले ताने में और अंत में प्रशंसा में प्रयुक्त है: बड़प्पन धन में नहीं, उदार मन में है।

Notice how one small act of Anandi turns a family breaking apart into a united one, so the title moves from taunt to praise.

Illustration drawn for QuestionBuddy.

Understand आनंदी का चरित्र और शीर्षक की सार्थकता (बड़े घर की बेटी)

कहानी और पाठ्यक्रम। 'बड़े घर की बेटी' प्रेमचंद की कहानी है, जो साहित्य सागर (कहानियाँ) में निर्धारित है। खंड ख में एक अवतरण पर चार प्रश्न (2, 2, 3, 3 अंक, कुल 10) आते हैं। इस पृष्ठ पर आनंदी, झगड़े का क्रम और शीर्षक की सार्थकता, तीनों एक साथ तैयार करें, क्योंकि अवतरण-प्रश्न प्रायः इन्हीं तीन में से पूछे जाते हैं।

आनंदी कौन है। गौरीपुर के ज़मींदार बेनीमाधव सिंह के बड़े बेटे श्रीकंठ सिंह की पत्नी और एक छोटी रियासत के ताल्लुकेदार भूपसिंह की बेटी। वह संपन्न घर में लाड़-प्यार से पली थी, पर ससुराल की सादगी में उसने स्वयं को शीघ्र ढाल लिया।

झगड़े का क्रम (कारण से परिणाम तक)।
1. लालबिहारी दो चिड़ियाँ लाया और भाभी से पकाने को कहा।
2. आनंदी ने हाँडी का लगभग सारा घी मांस में डाल दिया; दाल के लिए घी न बचा।
3. भोजन पर दाल में घी न देखकर लालबिहारी क्रोधित हुआ और उसने आनंदी के मायके पर ताना कसा।
4. आनंदी ने अपने मायके की संपन्नता का उत्तर दिया; क्रोध में लालबिहारी ने खड़ाऊँ फेंकी। आनंदी ने हाथ से रोका, उँगली में चोट आई।
5. शनिवार को श्रीकंठ के आने पर आनंदी ने रोकर सब बताया; श्रीकंठ ने पिता से कहा कि अब वे लालबिहारी के साथ नहीं रहेंगे।
6. लालबिहारी को पछतावा हुआ; वह घर छोड़कर जाने लगा। तब आनंदी ने उसे रोका और पति से क्षमा करवाई।

आनंदी के चरित्र की चार विशेषताएँ (हर एक के साथ घटना लिखें)।

  • *व्यवहार-कुशल:* नए वातावरण में स्वयं को ढालना।
  • *स्वाभिमानी:* ताने का उत्तर देना, अपमान चुपचाप न सहना।
  • *उदार और क्षमाशील:* लालबिहारी का हाथ पकड़कर उसे रोकना।
  • *परिवार जोड़ने वाली:* अपनी शिकायत से घर टूटता देख उसने उसे वापस जोड़ा।

शीर्षक के दो अर्थ। (1) *व्यंग्यपूर्ण:* 'बड़े घर की बेटी, किफ़ायत क्या जाने': संपन्न घर में पली होने के कारण उसे घी की कमी का अनुमान नहीं था, और लालबिहारी ने भी 'बड़े घर' का ताना दिया। (2) *प्रशंसापरक:* अंत में बेनीमाधव सिंह कहते हैं कि बड़े घर की बेटियाँ बिगड़ता काम बना लेती हैं। इस प्रकार 'बड़ा घर' धन से नहीं, संस्कार और उदारता से बड़ा बनता है।

उत्तर लिखने की रीति। 'क्यों' वाले प्रश्न में कारण और परिणाम दोनों लिखें; चरित्र-चित्रण में विशेषता + घटना; शीर्षक में दोनों अर्थ + संदेश।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • बड़े घर की बेटी, किफ़ायत क्या जाने।

    लेखक (कथावाचक): आनंदी हाँडी का सारा घी मांस में डाल देती है।

    झगड़े की जड़ और शीर्षक का पहला, व्यंग्यपूर्ण अर्थ।

  • मैं ईश्वर की साक्षी देकर कहती हूँ, कि तुम्हारी ओर से मेरे मन में तनिक भी मैल नहीं है।

    आनंदी: घर छोड़कर जाते लालबिहारी का हाथ पकड़कर उसे रोकते समय।

    आनंदी की उदारता; इसी से परिवार टूटने से बचता है।

  • बड़े घर की बेटियाँ ऐसी ही होती हैं। बिगड़ता हुआ काम बना लेती हैं।

    बेनीमाधव सिंह: कहानी का अंत।

    शीर्षक का प्रशंसापरक अर्थ।

आनंदी का चरित्र और शीर्षक की सार्थकता (बड़े घर की बेटी): key facts

झगड़े का क्रम
  • दो चिड़ियाँ
  • सारा घी मांस में
  • दाल में घी नहीं
  • ताना
  • खड़ाऊँ
  • शिकायत
  • अलग होने का निर्णय
  • पछतावा
  • क्षमा
'कारण और परिणाम' वाले प्रश्न में यही क्रम लिखें।
आनंदी की विशेषताएँ
  • व्यवहार-कुशल
  • स्वाभिमानी
  • उदार
  • क्षमाशील
  • परिवार को जोड़ने वाली
हर विशेषता के साथ एक घटना जोड़ें।
शीर्षक के दो अर्थ
व्यंग्य (किफ़ायत न जानना) | प्रशंसा (बिगड़ा काम बनाना)
दोनों अर्थ लिखने पर ही पूरे अंक मिलते हैं।

How to answer आनंदी का चरित्र और शीर्षक की सार्थकता (बड़े घर की बेटी) questions

चरित्र-चित्रण या शीर्षक के प्रश्न के लिए यह क्रम अपनाइए।

  1. 1पात्र का नाम, संबंध और परिचय की एक पंक्ति लिखिए।
  2. 2दो या तीन विशेषताएँ चुनिए।
  3. 3हर विशेषता के साथ कहानी की एक घटना लिखिए।
  4. 4शीर्षक का प्रश्न हो तो दोनों अर्थ बताइए।
  5. 5अंत में एक पंक्ति का निष्कर्ष या संदेश लिखिए।

आनंदी का चरित्र और शीर्षक की सार्थकता (बड़े घर की बेटी) in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

छोटी बात का बड़ा झगड़ा

मान लीजिए एक संयुक्त परिवार में रात के खाने के लिए रखी चीनी नाश्ते में ख़त्म हो गई। छोटा भाई चिढ़कर भाभी को ताना देता है, और भाभी भी पलटकर उसके स्वभाव पर कुछ कह देती हैं।

इस स्थिति में झगड़ा बढ़ने से रोकने के लिए 'बड़े घर की बेटी' से कौन-सी सीख ली जा सकती है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. झगड़ा वस्तु का नहीं, अहं का है।
  2. कहानी में आनंदी ने पहले उत्तर दिया, पर अंत में आगे बढ़कर क्षमा दी।
  3. पहल करने वाला सम्बन्ध बचा लेता है।

Answer: सीख यह है कि छोटी बात पर अहं टकराने से परिवार टूटता है, और उदारता से आगे बढ़कर क्षमा देने वाला व्यक्ति ही 'बड़ा' कहलाता है, जैसे आनंदी।

Memory hook: घी की बूँद से नहीं, अहं से घर टूटता है।

Tricks to remember आनंदी का चरित्र और शीर्षक की सार्थकता (बड़े घर की बेटी)

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • घी-ताना-खड़ाऊँ-क्षमा

    चार शब्द क्रम से: घी, ताना, खड़ाऊँ, क्षमा।

    Use it when: झगड़े का क्रम और अंत।

  • दो 'बड़े'

    पहला बड़ा = धन का ताना, दूसरा बड़ा = मन की उदारता।

    Use it when: शीर्षक के दोनों अर्थ।

आनंदी का चरित्र और शीर्षक की सार्थकता (बड़े घर की बेटी): solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: झगड़े की जड़ · 1 mark · MCQBoard level

आनंदी और लालबिहारी के झगड़े की जड़ क्या थी?
(क) खेत का बँटवारा (ख) हाँडी का सारा घी मांस में डाल देना (ग) श्रीकंठ का देर से आना (घ) चिड़ियाँ न पकाना

Try it first, then show the solutionSolution
  1. लालबिहारी चिड़ियाँ लाया था (0.5)।
  2. घी मांस में चला गया, दाल बिना घी रही (0.5)।

Answer: (ख) हाँडी का सारा घी मांस में डाल देना।

Example 2: पात्र-परिचय (2 अंक) · 2 marks · Short answerBoard level

आनंदी कौन है? उसके पिता का नाम और उसके ससुराल के गाँव का नाम लिखिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. आनंदी श्रीकंठ सिंह की पत्नी (1)।
  2. पिता भूपसिंह; ससुराल गौरीपुर (1)।

Answer: आनंदी श्रीकंठ सिंह की पत्नी है। वह छोटी रियासत के ताल्लुकेदार भूपसिंह की बेटी है और उसकी ससुराल गौरीपुर गाँव में है।

Example 3: झगड़ा क्यों हुआ और क्या परिणाम निकला (3 अंक) · 3 marks · Short answerHarder board level

आनंदी और लालबिहारी में झगड़ा क्यों हुआ? उसका तात्कालिक परिणाम क्या निकला?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. कारण: घी का मांस में खप जाना और दाल का फीकी रहना (1)।
  2. ताना और खड़ाऊँ (1)।
  3. परिणाम: श्रीकंठ का अलग होने का निर्णय (1)।

Answer: आनंदी ने हाँडी का लगभग सारा घी मांस में डाल दिया, इसलिए दाल में घी नहीं बचा। लालबिहारी ने क्रोध में आनंदी के मायके पर ताना कसा, आनंदी ने उत्तर दिया और उसने क्रोध में खड़ाऊँ फेंकी, जिससे आनंदी की उँगली में चोट आई। शनिवार को श्रीकंठ के आने पर आनंदी की शिकायत सुनकर उन्होंने कह दिया कि वे अब लालबिहारी के साथ इस घर में नहीं रहेंगे।

Example 4: आनंदी का चरित्र-चित्रण (5 अंक) · 5 marks · Long answerHarder board level

'बड़े घर की बेटी' कहानी के आधार पर आनंदी के चरित्र की चार विशेषताएँ घटनाओं सहित लिखिए। (लगभग 120 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. परिचय की एक पंक्ति (1)।
  2. चार विशेषताएँ, हर एक घटना सहित (3)।
  3. निष्कर्ष (1)।

Answer: आनंदी श्रीकंठ की पत्नी और भूपसिंह की बेटी है। वह व्यवहार-कुशल है, क्योंकि बड़े घर में पली होने पर भी उसने ससुराल की सादगी में स्वयं को शीघ्र ढाल लिया। वह स्वाभिमानी है; लालबिहारी के ताने पर उसने अपने मायके की संपन्नता का उत्तर दिया और अपमान चुपचाप नहीं सहा। वह उदार और क्षमाशील है; जब लालबिहारी पछताकर घर छोड़ने लगा तो उसने उसका हाथ पकड़कर उसे रोका। वह परिवार को जोड़ने वाली भी है, क्योंकि अपनी शिकायत से घर टूटता देख उसने पति से देवर को क्षमा करने को कहा। इस प्रकार वह सच्चे अर्थ में 'बड़े घर की बेटी' सिद्ध होती है।

Example 5: शीर्षक का दूसरा पक्ष (5 अंक) · 5 marks · Long answerHOTS / competency

एक विद्यार्थी का कहना है कि शीर्षक 'बड़े घर की बेटी' केवल आनंदी की प्रशंसा है। क्या आप सहमत हैं? कहानी के आधार पर तर्क दीजिए। (लगभग 120 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. मत स्पष्ट करना (1)।
  2. व्यंग्यपूर्ण पक्ष: घी और ताना (2)।
  3. प्रशंसापरक पक्ष: अंतिम कथन (1)।
  4. निष्कर्ष (1)।

Answer: मैं आंशिक रूप से ही सहमत हूँ। कहानी के अंत में बेनीमाधव सिंह यह कहकर प्रशंसा करते हैं कि बड़े घर की बेटियाँ बिगड़ता काम बना लेती हैं। पर आरंभ में शीर्षक व्यंग्यपूर्ण है: लेखक कहता है कि बड़े घर की बेटी किफ़ायत क्या जाने, क्योंकि आनंदी ने सारा घी मांस में डाल दिया था, और लालबिहारी ने भी 'बड़े घर' का ताना दिया। इसलिए शीर्षक के दो अर्थ हैं, ताना और प्रशंसा। कहानी दिखाती है कि 'बड़ा घर' धन से नहीं, उदारता और संस्कार से पहचाना जाता है। अतः शीर्षक केवल प्रशंसा नहीं, व्यंग्य से प्रशंसा तक की यात्रा है।

Where students lose marks in आनंदी का चरित्र और शीर्षक की सार्थकता (बड़े घर की बेटी)

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: झगड़े का कारण अधूरा लिखना

    कारण में घी और ताना दोनों आवश्यक हैं।

    Wrong working

    आनंदी और लालबिहारी में झगड़ा घी के कारण हुआ।

    Right working

    सारा घी मांस में चला जाने से दाल फीकी रही, फिर ताना और खड़ाऊँ से झगड़ा बढ़ा।

    Do this: कारण को घटना-क्रम में लिखिए।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: शीर्षक का केवल एक अर्थ लिखना

    शीर्षक व्यंग्य और प्रशंसा दोनों है।

    Wrong working

    बड़े घर की बेटी का अर्थ धनी घर की बेटी है।

    Right working

    आरंभ में यह ताना है, अंत में आनंदी के बड़प्पन की प्रशंसा।

    Do this: दोनों अर्थ लिखिए।

    Usually costs: 1 से 2 अंक

  • Mistake: पात्रों के नाम या संबंध गलत लिखना

    परीक्षक पात्र-परिचय में सही संबंध की अपेक्षा करते हैं।

    Wrong working

    लालबिहारी आनंदी का पति है।

    Right working

    लालबिहारी श्रीकंठ का छोटा भाई और आनंदी का देवर है।

    Do this: संबंध-वृक्ष एक बार बनाकर याद कीजिए।

    Usually costs: 1 अंक

Exam tips

  • पात्र-परिचय में नाम, संबंध और एक-दो विशेषताएँ लिखिए।
  • 'क्यों' वाले उत्तर में कारण के साथ परिणाम भी लिखिए।
  • शीर्षक के प्रश्न में दोनों अर्थ और संदेश लिखिए।
  • अपने शब्दों में लिखिए; पाठ की पंक्तियाँ उतारने से बचिए।

Practice questions on आनंदी का चरित्र और शीर्षक की सार्थकता (बड़े घर की बेटी)

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    श्रीकंठ सिंह के विषय में कौन-सा कथन सही है?
    (क) वे निरक्षर किसान थे (ख) वे बी.ए. पास थे और नौकरी करते थे (ग) वे ज़मींदार थे (घ) वे आनंदी के भाई थे

    Hint

    वे शनिवार को घर आते थे।

    Answer

    (ख) वे बी.ए. पास थे और नौकरी करते थे, तथा शनिवार को घर आते थे।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    लालबिहारी को पछतावा क्यों हुआ और उसने क्या निश्चय किया? (2 अंक)

    Hint

    वह भैया का आदर करता था।

    Answer

    लालबिहारी अपने भाई का बहुत आदर करता था; जब उसने सुना कि श्रीकंठ उसके साथ नहीं रहना चाहते, तो उसे गहरा पछतावा हुआ। उसने निश्चय किया कि वह घर छोड़कर चला जाएगा।

  3. Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level

    आनंदी ने लालबिहारी को रोकने के बाद श्रीकंठ से क्या कहा और उसका क्या फल हुआ? (3 अंक)

    Hint

    क्षमा और भाइयों का मिलन।

    Answer

    आनंदी ने लालबिहारी का हाथ पकड़कर उसे रोक लिया और पति से कहा कि वे उसे क्षमा कर दें। इस पर दोनों भाई गले मिले, परिवार टूटने से बच गया और बेनीमाधव सिंह प्रसन्न हुए।

  4. Q4 · 5 marks · Long answerHarder board level

    आनंदी के उदार स्वभाव का परिचय देने वाले प्रसंग का वर्णन कीजिए और बताइए कि इससे परिवार को क्या लाभ हुआ। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    द्वार पर खड़े लालबिहारी का दृश्य।

    Answer

    जब लालबिहारी ने यह सुना कि भैया उसका मुँह नहीं देखना चाहते, तो वह पछताता हुआ भाभी के द्वार पर पहुँचा, भैया को प्रणाम कहलवाया और घर छोड़कर जाने लगा। यह देखकर आनंदी का हृदय पिघल गया। उसे लगा कि उसकी शिकायत से घर टूट रहा है। उसने आगे बढ़कर लालबिहारी का हाथ पकड़ा, उसे रोका और पति से क्षमा करने को कहा। परिणामस्वरूप दोनों भाई गले मिले और परिवार टूटने से बच गया। इससे सिद्ध होता है कि आनंदी अपमान के बाद भी परिवार की भलाई को अपने अहं से ऊपर रखती है।

  5. Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    यदि आनंदी ने लालबिहारी को न रोका होता, तो कहानी का अंत कैसा होता और उसका परिवार पर क्या प्रभाव पड़ता? कहानी की घटनाओं के आधार पर अपना मत दीजिए। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    श्रीकंठ का निर्णय और गाँव वालों का तमाशा।

    Answer

    यदि आनंदी लालबिहारी को न रोकती, तो श्रीकंठ का अलग होने का निर्णय बना रहता और लालबिहारी घर छोड़कर चला जाता। बेनीमाधव सिंह का परिवार टूट जाता और गाँव के लोग, जो पहले ही कलह का तमाशा देख रहे थे, इसे और बढ़ाते। भाइयों के बीच दूरी स्थायी हो सकती थी। आनंदी के क्षमा करने से यह सब रुक गया। इसलिए कहानी का मूल संदेश यह है कि संयुक्त परिवार को बचाने के लिए किसी एक को उदारता से पहल करनी पड़ती है, और आनंदी ने वही पहल की।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.बेनीमाधव सिंह किस गाँव के ज़मींदार थे?Show answer

    गौरीपुर।

  2. 2.आनंदी के पिता कौन थे?Show answer

    भूपसिंह, छोटी रियासत के ताल्लुकेदार।

  3. 3.लालबिहारी कौन है?Show answer

    श्रीकंठ का छोटा भाई।

  4. 4.झगड़ा किस वस्तु को लेकर हुआ?Show answer

    दाल में घी न होने को लेकर।

  5. 5.श्रीकंठ घर कब आते थे?Show answer

    शनिवार को।

  6. 6.कहानी के लेखक कौन हैं?Show answer

    प्रेमचंद।

आनंदी का चरित्र और शीर्षक की सार्थकता (बड़े घर की बेटी): frequently asked questions

बड़े घर की बेटी किसकी कहानी है?

प्रेमचंद की; यह साहित्य सागर (कहानियाँ) में कक्षा दसवीं के लिए निर्धारित है।

खंड ख में इस कहानी से कैसे प्रश्न आते हैं?

एक अवतरण पर चार प्रश्न (2, 2, 3, 3 अंक): पात्र-परिचय, घटना का कारण, चरित्र और उद्देश्य।

कहानी का संदेश क्या है?

उदारता और क्षमा से टूटता परिवार बचाया जा सकता है; बड़प्पन धन से नहीं, व्यवहार से मिलता है।