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HindiISC Class 12 · दासी – जयशंकर प्रसाद

दासी (जयशंकर प्रसाद): फिरोज़ा का चरित्र, कथा-क्रम और शीर्षक की सार्थकता (ISC कक्षा 12)

Updated 18 October 2026 · Fact-checked

'दासी' में तुर्क दासी फिरोज़ा अल्हड़, हँसमुख और परोपकारी है: वह बलराज को आत्महत्या से रोकती है, पाँच दिरम देती है, इरावती को अहमद से बचाती है और अंत में अपने प्रेम की 'समाधि' की आजीवन दासी बन जाती है। शीर्षक इसलिए सार्थक है कि इरावती और फिरोज़ा, दोनों दासी हैं और फिरोज़ा अंत में स्वेच्छा से प्रेम की दासी बनती है।

Irawati is a slave by sale, but Firoza chooses to serve love, so the title 'Dasi' fits both women.

Illustration drawn for QuestionBuddy.

Understand दासी (जयशंकर प्रसाद): फिरोज़ा का चरित्र, बलराज-इरावती और शीर्षक की सार्थकता

पृष्ठभूमि। कहानी जयशंकर प्रसाद के संग्रह 'आँधी' में है और सार्वजनिक क्षेत्र में है। गद्य संकलन के छापे में वर्तनी (फ़ीरोज़ा/फिरोज़ा) कुछ भिन्न हो सकती है। यह कहानी सुल्तान मसऊद के समय गजनी, काशी और पंजाब में घटती है।

1. कथा-क्रम।

1. *गजनी नदी का किनारा*: अपमान से दुखी हिंदू सैनिक बलराज आत्महत्या करने जा रहा है। तुर्क दासी फिरोज़ा उसकी कलाई पकड़कर कहती है: 'सुख जीने में है बलराज!' वह उसे पाँच दिरम देकर हिंदुस्तान लौटने को कहती है। राजा तिलक उसे थैली देकर लाहौर जाने वाले दल के साथ भेजते हैं और फिरोज़ा को बिना दाम लिए अहमद के पास जाने देते हैं; वे बताते हैं कि उनकी एक छोटी बहन इरावती हिंदुस्तान में है।
2. *काशी का मंदिर*: बलराज अपनी वाग्दत्ता इरावती से मिलता है। इरावती मुलतान की लूट में पकड़ी गई, कन्नौज के चौराहे पर बेची गई और काशी के एक महाजन ने पाँच सौ दिरम में उसे दासी बना लिया। उसने लिखकर स्वीकार किया है कि कभी नहीं भागेगी, इसलिए वह बलराज के साथ नहीं जा सकती।
3. *बनारस का बाज़ार*: झगड़े में इरावती एक जौहरी को बचाने के लिए तलवार के सामने आ जाती है; बलराज नियाल्तगीन की कलाई पकड़ लेता है। फिरोज़ा इरावती को साथ ले लेती है।
4. *चंद्रभागा का तट*: इरावती फिरोज़ा से कहती है कि वह बिकी हुई दासी है और बलराज को उसके 'पहले अमीर बनने, फिर प्रेम का दान करने' के लिए ताना देती है।
5. *अहमद का महल*: अहमद के दुर्व्यवहार के प्रयास पर फिरोज़ा उसे फटकारती है और इरावती को लेकर महल छोड़ देती है।
6. *अंत*: बलराज जाटों का सरदार बनकर उन्हें पराधीनता से मुक्ति का संदेश दे चुका है। जंगल में युद्ध होता है; बलराज का भाला अहमद की छाती में उतर जाता है। गजनी की सेना के साथ तिलक पहुँचते हैं, अपनी बहन को पहचानकर क्षमा माँगते हैं। वहीं फिरोज़ा की प्रसन्नता की समाधि बन गई और 'उस समाधि की वह आजीवन दासी बनी रही।'

2. फिरोज़ा का चरित्र। अल्हड़ और हँसमुख; जीवन-प्रेमी ('सुख जीने में है'); उदार और परोपकारी (अपने दिरम बलराज को देती है); साहसी और न्यायप्रिय (अहमद को फटकारती है); निःस्वार्थ और त्यागमयी (अपने प्रेम की बलि देकर बलराज-इरावती को मिलाती है)।

3. बलराज और इरावती। बलराज स्वाभिमानी पर आवेशी और अहंकारी भी है; इरावती दासता में भी वचन निभाने वाली स्वाभिमानी और मर्यादा-प्रिय है।

4. शीर्षक की सार्थकता। (क) इरावती 'पाँच सौ दिरम' पर बिकी दासी है। (ख) फिरोज़ा सुल्तान के यहाँ की तुर्क दासी है। (ग) अंत में फिरोज़ा स्वेच्छा से अपने प्रेम की समाधि की आजीवन दासी बनती है; यह बंधन प्रेम और त्याग का है, ज़ोर-ज़बरदस्ती का नहीं। इस प्रकार शीर्षक दासता के दो रूपों, विवशता और स्वेच्छा के प्रेम-समर्पण, को सामने रखता है।

5. केंद्रीय प्रश्न। बलराज का प्रश्न 'पशुओं के समान मनुष्य भी बिक सकते हैं?' कहानी का नैतिक प्रश्न है।

6. एक गणना (काल्पनिक संख्याओं पर नहीं, कहानी की संख्याओं पर)। इरावती को पाँच सौ दिरम में दासी बनाया गया और फिरोज़ा ने बलराज को पाँच दिरम दिए। 500 ÷ 5 = 100, यानी इरावती की कीमत फिरोज़ा के उस दान की सौ गुना थी; पर दान ने बलराज को जीवन दिया, जो कीमत से नहीं आँका जा सकता।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • सुख जीने में है बलराज!

    फिरोज़ा: बलराज को आत्महत्या से रोकते समय।

    फिरोज़ा की जीवन-दृष्टि और परोपकार।

  • पशुओं के समान मनुष्य भी बिक सकते हैं?

    बलराज: इरावती के दासी होने की बात सुनकर।

    दासता की मूल नैतिक आपत्ति।

  • उस समाधि की वह आजीवन दासी बनी रही।

    लेखक: कहानी का अंत।

    शीर्षक की सार्थकता और फिरोज़ा का त्याग।

दासी (जयशंकर प्रसाद): फिरोज़ा का चरित्र, बलराज-इरावती और शीर्षक की सार्थकता: key facts

फिरोज़ा के गुण
  • हँसमुख
  • जीवन-प्रेमी
  • उदार
  • साहसी
  • न्यायप्रिय
  • निःस्वार्थ
  • त्यागमयी
हर गुण के साथ घटना लिखें।
शीर्षक के तीन आधार
  • इरावती दासी
  • फिरोज़ा दासी
  • फिरोज़ा प्रेम की समाधि की दासी
तीनों लिखें।
पात्र और संबंध
  • बलराज - इरावती (वाग्दत्ता)
  • तिलक - इरावती (भाई-बहन)
  • फिरोज़ा - दोनों की सहायिका
संबंध उलटे न लिखें।

How to answer दासी (जयशंकर प्रसाद): फिरोज़ा का चरित्र, बलराज-इरावती और शीर्षक की सार्थकता questions

चरित्र-चित्रण या शीर्षक वाले प्रश्न के लिए यह क्रम अपनाएँ।

  1. 1पात्र का परिचय एक वाक्य में दें।
  2. 2पाँच-छह गुण लिखें और हर एक के साथ घटना दें।
  3. 3उद्धरण का सही वक्ता लिखकर उसे प्रसंग से जोड़ें।
  4. 4शीर्षक के प्रश्न में तीनों आधार लिखें।
  5. 5निष्कर्ष में त्याग या मानवीय मूल्य का संकेत दें।

दासी (जयशंकर प्रसाद): फिरोज़ा का चरित्र, बलराज-इरावती और शीर्षक की सार्थकता in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

निःस्वार्थ सहायता

मान लीजिए एक युवती अपने मोहल्ले के निराश लड़के को परीक्षा में असफल होने पर पढ़ाई छोड़ने से रोकती है, उसे अपनी बचत से किताबें दिलाती है और बदले में कुछ नहीं माँगती।

यह व्यवहार फिरोज़ा से कैसे जुड़ता है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. दोनों निराश व्यक्ति को जीवन की ओर लौटाती हैं।
  2. दोनों अपनी चीज़ें देकर सहायता करती हैं और बदले में कुछ नहीं चाहतीं।

Answer: फिरोज़ा की तरह वह युवती भी निःस्वार्थ भाव से किसी को जीवन की ओर लौटाती है।

Memory hook: सुख जीने में है।

Tricks to remember दासी (जयशंकर प्रसाद): फिरोज़ा का चरित्र, बलराज-इरावती और शीर्षक की सार्थकता

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • ग-का-बा-चं-अ-अं

    गजनी, काशी, बाज़ार, चंद्रभागा, अहमद का महल, अंत।

    Use it when: कथा-क्रम।

  • तीन दासियाँ

    इरावती बिकी दासी, फिरोज़ा तुर्क दासी, फिरोज़ा प्रेम की दासी।

    Use it when: शीर्षक की सार्थकता।

दासी (जयशंकर प्रसाद): फिरोज़ा का चरित्र, बलराज-इरावती और शीर्षक की सार्थकता: solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: किसने कहा · 1 mark · MCQBoard level

'सुख जीने में है बलराज!' किसका कथन है?
(क) इरावती
(ख) फिरोज़ा
(ग) तिलक
(घ) अहमद

Try it first, then show the solutionSolution
  1. यह फिरोज़ा का कथन है, जब वह बलराज की कलाई पकड़ती है।

Answer: (ख) फिरोज़ा।

Example 2: इरावती कौन थी · 2 marks · Short answerBoard level

इरावती कौन थी और वह दासी कैसे बनी? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. बलराज की वाग्दत्ता और राजा तिलक की छोटी बहन।
  2. मुलतान की लूट में पकड़ी गई, बेची गई और काशी के महाजन ने पाँच सौ दिरम में दासी बनाया।

Answer: इरावती बलराज की वाग्दत्ता और तिलक की छोटी बहन थी। मुलतान की लूट में वह पकड़ी गई, कन्नौज में बेची गई और काशी के एक महाजन ने उसे पाँच सौ दिरम में दासी बना लिया।

Example 3: दिरम का अनुपात · 3 marks · Short answerHarder board level

इरावती को पाँच सौ दिरम में दासी बनाया गया और फिरोज़ा ने बलराज को पाँच दिरम दिए। अनुपात ज्ञात कीजिए और बताइए कि कहानी की दृष्टि से यह छोटा दान क्यों महत्त्वपूर्ण है।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अनुपात = 500 ÷ 5 = 100 : 1।
  2. दान ने बलराज को आत्महत्या से रोककर जीवन की ओर लौटाया।
  3. दान का महत्त्व राशि में नहीं, उसकी भावना और परिणाम में है।

Answer: इरावती की कीमत फिरोज़ा के दान की सौ गुना थी (100 : 1), पर पाँच दिरम ने बलराज को जीवन दिया। दान की राशि नहीं, उसकी भावना और परिणाम महत्त्वपूर्ण है।

Example 4: फिरोज़ा का चरित्र (5 अंक) · 5 marks · Long answerHarder board level

फिरोज़ा का चरित्र-चित्रण कीजिए। (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. अल्हड़, हँसमुख, जीवन-प्रेमी (1)।
  2. उदार: पाँच दिरम देना (1)।
  3. साहसी और न्यायप्रिय: अहमद को फटकारना, इरावती को बचाना (1.5)।
  4. त्यागमयी: प्रेम की समाधि की आजीवन दासी (1.5)।

Answer: फिरोज़ा अल्हड़ और हँसमुख तुर्क दासी है जो जीवन-प्रेमी है; बलराज को आत्महत्या से रोकते हुए वह कहती है, 'सुख जीने में है बलराज!' वह उदार है और अपने पाँच दिरम उसे दे देती है। साहसी और न्यायप्रिय होने के कारण वह अहमद को फटकारकर इरावती को महल से निकाल ले जाती है। अंत में वह अपने प्रेम की बलि देकर बलराज-इरावती को मिलाती है और अपनी प्रसन्नता की समाधि की आजीवन दासी बन जाती है। इस प्रकार वह निःस्वार्थ और त्यागमयी नारी है।

Example 5: शीर्षक की सार्थकता (10 अंक) · 10 marks · Long answerHOTS / competency

'दासी' शीर्षक कहानी के लिए कितना सार्थक है? फिरोज़ा और इरावती के उदाहरण देकर लगभग 200 शब्दों में समझाइए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. शीर्षक का आशय (1)।
  2. इरावती की दासता और उसका वचन-पालन (3)।
  3. फिरोज़ा की दासता और उसका स्वेच्छा से प्रेम की दासी बनना (4)।
  4. केंद्रीय प्रश्न 'पशुओं के समान मनुष्य भी बिक सकते हैं?' से संबंध (1)।
  5. निष्कर्ष और भाषा (1)।

Answer: 'दासी' शीर्षक कहानी की दासता और त्याग दोनों धाराओं को समेटता है। इरावती मुलतान की लूट में पकड़ी जाकर पाँच सौ दिरम में बिकी दासी है; उसने लिखकर वचन दिया है कि कभी नहीं भागेगी और इसी कारण वह बलराज के साथ नहीं जा पाती। फिरोज़ा सुल्तान के यहाँ की तुर्क दासी है, पर उसका स्वभाव स्वतंत्र, हँसमुख और उदार है। अंत में बलराज और इरावती के मिलन के बाद वह अपने प्रेम का दावा छोड़ देती है और वहीं बनी अपनी प्रसन्नता की समाधि की आजीवन दासी बन जाती है। यह दासता विवशता की नहीं, स्वेच्छा से किए गए त्याग की है। बलराज का प्रश्न 'पशुओं के समान मनुष्य भी बिक सकते हैं?' कहानी का नैतिक आधार है: जहाँ मनुष्य बिकते हैं, वहाँ भी प्रेम और त्याग उन्हें मुक्त और महान बना सकते हैं। इस प्रकार शीर्षक सार्थक है, क्योंकि वह बंधन के दो रूपों, कठोर विवशता और ऊँचे प्रेम-समर्पण, को सामने रखकर पाठक को सोचने पर विवश करता है।

Where students lose marks in दासी (जयशंकर प्रसाद): फिरोज़ा का चरित्र, बलराज-इरावती और शीर्षक की सार्थकता

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: वक्ता और पात्र उलटना

    तिलक, अहमद और नियाल्तगीन के नामों में भ्रम आम है।

    Wrong working

    अहमद को इरावती का भाई लिखना।

    Right working

    इरावती के भाई राजा तिलक हैं; अहमद पंजाब का शासक है।

    Do this: पात्र-सूची बनाएँ।

    Usually costs: 1-2 अंक।

  • Mistake: शीर्षक के लिए केवल एक आधार

    दासी शब्द कई स्तरों पर सार्थक है।

    Wrong working

    इरावती दासी थी, इसलिए शीर्षक ठीक है।

    Right working

    इरावती, फिरोज़ा और फिरोज़ा की प्रेम-समाधि की दासता, तीनों।

    Do this: तीन आधार।

    Usually costs: 2-3 अंक।

  • Mistake: सार लिखना, समीक्षा नहीं

    विद्यार्थी प्रायः प्रश्न की माँग के बजाय पूरी कहानी का सार लिख देते हैं।

    Wrong working

    पूरी कहानी का सार।

    Right working

    प्रश्न के अनुसार चरित्र या शीर्षक का विश्लेषण।

    Do this: प्रश्न के शब्द रेखांकित करें।

    Usually costs: 3-4 अंक।

Exam tips

  • अपने वर्ष के ISC पाठ्यक्रम में निर्धारित गद्य संकलन से पुष्टि करें।
  • उद्धरण सार्वजनिक क्षेत्र के पाठ से हैं, पर वर्तनी अपनी पाठ्यपुस्तक से मिलाएँ।
  • रचनाकार का नाम (जयशंकर प्रसाद) अवश्य लिखें।
  • शीर्षक के प्रश्न में तीन आधार दें।

Practice questions on दासी (जयशंकर प्रसाद): फिरोज़ा का चरित्र, बलराज-इरावती और शीर्षक की सार्थकता

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · Very short answerBoard level

    'दासी' कहानी किस संग्रह में है?

    Hint

    प्रसाद का कहानी-संग्रह।

    Answer

    'आँधी' में।

  2. Q2 · 2 marks · Short answerBoard level

    बलराज ने आत्महत्या करने का निश्चय क्यों किया था?

    Hint

    सेवा से अलग किए जाने का अपमान।

    Answer

    सुल्तान ने तुर्क और हिंदू सैनिकों को नौकरी से अलग कर दिया था, इस अपमान और निराशा से बलराज आत्महत्या करने जा रहा था; उसने प्रेमिका से अमीर बनकर लौटने का वादा भी किया था।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level

    राजा तिलक का इरावती से क्या संबंध है और वह कब प्रकट होता है? (लगभग 50 शब्द)

    Hint

    अंत का दृश्य।

    Answer

    तिलक इरावती के भाई हैं। वे पहले फिरोज़ा को बताते हैं कि हिंदुस्तान में उनकी एक छोटी बहन है, और अंत में गजनी की सेना के साथ पहुँचकर घायल बलराज के पास इरावती को पहचानते हैं और क्षमा माँगते हैं।

  4. Q4 · 5 marks · Long answerHarder board level

    फिरोज़ा और इरावती के चरित्रों की तुलना कीजिए। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    स्वभाव और परिस्थिति।

    Answer

    दोनों दासी हैं, पर स्वभाव भिन्न है। फिरोज़ा अल्हड़, हँसमुख, साहसी और जीवन-प्रेमी है; वह खुलकर सहायता करती और अहमद तक को फटकारती है। इरावती गंभीर, मर्यादा-प्रिय और वचन निभाने वाली है; लिखित प्रतिज्ञा के कारण वह बलराज के साथ नहीं जाती। फिरोज़ा अंत में त्याग करती है और इरावती को सुख मिलता है।

  5. Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    एक छात्र ने लिखा कि फिरोज़ा बलराज से प्रेम की दासी इसलिए बनी कि बलराज ने उसे ठुकरा दिया। इस कथन की समीक्षा कीजिए। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    त्याग और स्वेच्छा।

    Answer

    कथन अधूरा है। कहानी में फिरोज़ा अपने प्रेम की बलि स्वेच्छा से देती है: वह इरावती को बचाती है, बलराज को उससे मिलाती है और अंत में अपनी प्रसन्नता की समाधि की आजीवन दासी बन जाती है। यह उसका त्यागमय और निःस्वार्थ प्रेम है, किसी के ठुकराने की प्रतिक्रिया नहीं। इसलिए 'ठुकराए जाने' पर बल देना उसके चरित्र की महानता को छोटा करता है।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.फिरोज़ा ने बलराज को कितने दिरम दिए?Show answer

    पाँच।

  2. 2.इरावती कितने दिरम में दासी बनी?Show answer

    पाँच सौ।

  3. 3.बलराज किसका सरदार बनता है?Show answer

    जाटों का।

  4. 4.कहानी का अंतिम वाक्य किसके बारे में है?Show answer

    फिरोज़ा के, जो समाधि की आजीवन दासी बनी रही।

दासी (जयशंकर प्रसाद): फिरोज़ा का चरित्र, बलराज-इरावती और शीर्षक की सार्थकता: frequently asked questions

क्या यह कहानी ऐतिहासिक है?

यह ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाली कहानी है, जो सुल्तान मसऊद के समय की है।

अहमद कौन है?

पंजाब का शासक अहमद नियाल्तगीन, जो इरावती से दुर्व्यवहार करना चाहता है।

उद्धरण कहाँ से मिलाएँ?

अपनी गद्य संकलन की पाठ्यपुस्तक से; इस पृष्ठ के उद्धरण सार्वजनिक पाठ से लिए गए हैं।