गौरी (सुभद्रा कुमारी चौहान): गौरी का निर्णय, साहस और त्याग
Updated 18 October 2026 · Fact-checked
कहानी का निर्णायक क्षण वह है जब गौरी अपने सारे साहस को समेटकर दृढ़ता से माँ कुंती से कहती है 'माँ, मैं कानपुर जाऊँगी'। वह जेल गए सत्याग्रही सीताराम के बच्चों की देखभाल के लिए नायब तहसीलदार के साथ सुख-सुविधा वाले वैवाहिक जीवन का अवसर छोड़ देती है, इसलिए उसका निर्णय साहस, त्याग और राष्ट्र-सेवा का प्रतीक है।
Notice that Gauri herself says 'I will go' and chooses selfless service over comfort; her sacrifice matches Sitaram's.
Illustration drawn for QuestionBuddy.
Understand गौरी का निर्णय और त्याग (गौरी, सुभद्रा कुमारी चौहान)
संदर्भ। 'गौरी' स्वतंत्रता-आंदोलन की पृष्ठभूमि में लिखी कहानी है। कहानी के अनुसार गौरी की माँ का नाम कुंती है, और सीताराम सत्याग्रही हैं जो जेल गए हैं। उनके छोटे बच्चे कानपुर में देखभाल के बिना रह गए हैं।
निर्णय का क्षण। गौरी 'सारे साहस को समेटकर दृढ़ता से' माँ से कहती है 'माँ, मैं कानपुर जाऊँगी।' कहानी के अनुसार एक युवा स्त्री के लिए यह निर्णय सरल नहीं था।
2024 की अंक-योजना से तथ्य।
- गौरी के पिता घर में नहीं थे, पर उसने उनके लौटने की प्रतीक्षा नहीं की;
- वह एक नौकर के साथ कानपुर गई और बच्चों की देखभाल करने लगी;
- हर महीने बच्चों की कुशलता का समाचार कारावास में सीताराम तक पहुँचता रहा।
त्याग। गौरी के सामने एक नायब तहसीलदार के साथ सुविधा-भरे जीवन का रास्ता था। उसे अंग्रेज़ों के इशारे पर अपने देशवासियों पर अत्याचार करने वालों से घृणा थी। उसने सुख छोड़कर निःस्वार्थ सेवा चुनी।
संदेश। स्वतंत्रता-संग्राम केवल जेल जाने वालों का नहीं था; परिवारों को सँभालने वाले भी उतने ही बड़े देशभक्त थे। गौरी का त्याग सीताराम के त्याग से कम नहीं।
सावधानी। सीताराम को वक्ता लिखना गलत है; कथन गौरी का है।
सीमा। यह पृष्ठ केवल यहाँ दिए गए तथ्यों पर आधारित है; कहानी की अन्य घटनाएँ पाठ्य-पुस्तक से पढ़ें।
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
माँ, मैं कानपुर जाऊँगी।
गौरी: अपनी माँ कुंती से।
दृढ़ निश्चय: बच्चों की सेवा के लिए घर छोड़ना।
उसने अपने सारे साहस को समेटकर दृढ़ता से कहा
लेखिका: निर्णय से ठीक पहले।
निर्णय की कठिनाई और मनोबल।
गौरी का निर्णय और त्याग (गौरी, सुभद्रा कुमारी चौहान): key facts
- निर्णय के चरण
- पिता घर में नहीं
- माँ से स्पष्ट कथन
- नौकर के साथ कानपुर
- बच्चों की देखभाल
- मासिक समाचार
- क्रम से लिखें।
- त्याग
- नायब तहसीलदार का सुखी जीवन छोड़ा
- अंग्रेज़ों के सहयोगियों से घृणा
- देशभक्त की पत्नी बनने की इच्छा
- तीनों बिंदु लिखें।
- चरित्र-गुण
- साहसी
- दृढ़-निश्चयी
- त्यागी
- सेवाभावी
- देशभक्त
- हर गुण पर एक प्रसंग।
How to answer गौरी का निर्णय और त्याग (गौरी, सुभद्रा कुमारी चौहान) questions
गौरी के निर्णय से जुड़े प्रश्न में यह क्रम अपनाएँ।
- 1वक्ता और श्रोता पहचानें।
- 2निर्णय का कारण बताएँ।
- 3साहस के शब्दों को उद्धृत करें।
- 4त्याग का विवरण दें।
- 5राष्ट्र-सेवा के संदेश से निष्कर्ष दें।
गौरी का निर्णय और त्याग (गौरी, सुभद्रा कुमारी चौहान) in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
दूसरे के परिवार की ज़िम्मेदारी निभाना
मान लीजिए किसी सैनिक की अनुपस्थिति में उसके पड़ोस की एक युवती उसके छोटे बच्चों की देखभाल का जिम्मा ले लेती है, ताकि सैनिक निश्चिंत होकर ड्यूटी कर सके।
उसका यह कदम गौरी के कदम से कैसे मिलता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- वह दूसरे के परिवार का दायित्व लेती है।
- अपना सुख पीछे रखती है।
- देश-सेवा करने वाले को निश्चिंत करती है।
Answer: गौरी की तरह वह भी त्याग और सेवा से राष्ट्र की सेवा में हाथ बँटाती है।
Memory hook: जो घर सँभाले, वह भी सेनानी।
Tricks to remember गौरी का निर्णय और त्याग (गौरी, सुभद्रा कुमारी चौहान)
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
ग-क-क
गौरी, कुंती, कानपुर।
Use it when: वक्ता, श्रोता और स्थान।
साहस समेटा, सुख छोड़ा
निर्णय के दो शब्द-युग्म।
Use it when: चरित्र का सार।
गौरी का निर्णय और त्याग (गौरी, सुभद्रा कुमारी चौहान): solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: वक्ता · 1 mark · MCQBoard level
'माँ, मैं कानपुर जाऊँगी' किसका कथन है? (क) कुंती (ख) गौरी (ग) सीताराम (घ) लेखिका
Try it first, then show the solutionSolution
- कहानी के अनुसार गौरी ही माँ से यह कहती है, इसलिए कथन गौरी का है।
Answer: (ख) गौरी।
Example 2: श्रोता · 1 mark · Very short answerBoard level
गौरी यह बात किससे कहती है?
Try it first, then show the solutionSolution
- माँ से, जिनका नाम कुंती है।
Answer: अपनी माँ कुंती से।
Example 3: निर्णय कठिन क्यों · 2 marks · Short answerHarder board level
गौरी का कानपुर जाने का निर्णय कठिन क्यों था? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- युवा स्त्री।
- पिता घर में नहीं।
Answer: उस समय एक युवा स्त्री के लिए घर छोड़कर दूर जाना सरल नहीं था, और पिता घर में नहीं थे। फिर भी गौरी ने उनके लौटने की प्रतीक्षा नहीं की और साहस समेटकर माँ से अपना निर्णय कह दिया।
Example 4: त्याग · 5 marks · Long answerHarder board level
गौरी के त्याग को स्पष्ट कीजिए। (लगभग 100 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- सुख-सुविधा वाला विवाह।
- अंग्रेज़ों के सहयोगियों से घृणा।
- निःस्वार्थ सेवा।
Answer: गौरी के सामने एक नायब तहसीलदार से विवाह का अवसर था, जिससे उसे सुख-सुविधा भरा जीवन मिलता। पर उसे अंग्रेज़ों के इशारे पर अपने ही देशवासियों पर अत्याचार करने वालों से घृणा थी। वह सीताराम जैसे देशभक्त की पत्नी बनना चाहती थी। जब जेल गए सत्याग्रही सीताराम के छोटे बच्चे कानपुर में बिना देखभाल के रह गए, तो उसने सारे साहस को समेटकर माँ कुंती से कहा 'माँ, मैं कानपुर जाऊँगी।' पिता के लौटने की प्रतीक्षा किए बिना वह नौकर के साथ कानपुर गई और निःस्वार्थ भाव से बच्चों की देखभाल करने लगी। उसने अपना सुख छोड़कर सेवा चुनी। यही उसका त्याग है, जो देश-सेवा का एक रूप है और संदेश देता है कि परिवार सँभालना भी देशभक्ति है।
Example 5: राष्ट्र-सेवा का रूप · 5 marks · Long answerHOTS / competency
'गौरी का त्याग सीताराम के त्याग से कम नहीं।' इस कथन की समीक्षा कीजिए। (लगभग 100 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- सीताराम का जेल जाना।
- गौरी का परिवार सँभालना।
- दोनों का योगदान।
Answer: सीताराम ने जेल जाकर सत्याग्रह किया, जबकि गौरी ने उनके बच्चों को सँभालकर उन्हें निश्चिंत किया। यदि बच्चे कानपुर में असहाय रहते, तो सत्याग्रह कठिन हो जाता। गौरी ने पिता की प्रतीक्षा किए बिना माँ से दृढ़ता से अपना निर्णय कहा, नौकर के साथ कानपुर गई और नायब तहसीलदार के साथ सुखी जीवन का अवसर छोड़ दिया। बच्चों की कुशलता का समाचार हर महीने कारावास में सीताराम तक पहुँचता रहा। कहानी दिखाती है कि स्वतंत्रता-संग्राम केवल जेल जाने वालों का नहीं, परिवारों को सँभालने वालों का भी था। इसलिए गौरी का त्याग सीताराम के त्याग से कम नहीं है।
Where students lose marks in गौरी का निर्णय और त्याग (गौरी, सुभद्रा कुमारी चौहान)
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: सीताराम को वक्ता लिख देना
सीताराम को वक्ता लिखना गलत है; कथन गौरी का है, क्योंकि गौरी ही माँ से यह कहती है।
Wrong working
सीताराम ने कहा कि मैं कानपुर जाऊँगा।
Right working
गौरी ने माँ से कहा।
Do this: वक्ता और श्रोता लिखें।
Usually costs: 1 से 2 अंक
Mistake: त्याग का उल्लेख न करना
मुख्य बिंदु है।
Wrong working
केवल कानपुर जाने की बात।
Right working
सुख का त्याग भी।
Do this: नायब तहसीलदार का प्रसंग लिखें।
Usually costs: 2 अंक
Mistake: पिता की प्रतीक्षा न करने का तथ्य छोड़ना
साहस का प्रमाण है।
Wrong working
पिता की अनुमति से गई।
Right working
पिता के लौटने की प्रतीक्षा नहीं की।
Do this: अंक-योजना का तथ्य लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- वक्ता और श्रोता पहले लिखें।
- साहस के शब्द उद्धृत करें।
- त्याग का प्रसंग अवश्य दें।
- राष्ट्र-सेवा के संदेश से उत्तर पूरा करें।
- उत्तर में पाठ के तथ्य ही लिखें, अपनी कल्पना से घटनाएँ न जोड़ें।
Practice questions on गौरी का निर्णय और त्याग (गौरी, सुभद्रा कुमारी चौहान)
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
सीताराम के बच्चे कहाँ थे? (क) दिल्ली (ख) कानपुर (ग) लखनऊ (घ) जबलपुर
Hint
गौरी जहाँ जाना चाहती है।
Answer
(ख) कानपुर।
Q2 · 1 mark · Very short answerBoard level
बच्चों की कुशलता का समाचार कहाँ पहुँचता था?
Hint
कारावास।
Answer
कारावास में सीताराम जी तक, हर महीने।
Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level
नायब तहसीलदार से विवाह की बात से गौरी प्रसन्न क्यों नहीं थी? (लगभग 40 शब्द)
Hint
अंग्रेज़ों के इशारे।
Answer
उसे अंग्रेज़ों के इशारे पर अपने ही देशवासियों पर अत्याचार करने वालों से घृणा थी। वह सीताराम जैसे देशभक्त की पत्नी बनना चाहती थी।
Q4 · 5 marks · Long answerHarder board level
गौरी के चरित्र की विशेषताएँ प्रसंग सहित लिखिए। (लगभग 100 शब्द)
Hint
साहस, त्याग, सेवा।
Answer
गौरी साहसी है, क्योंकि वह पिता के लौटने की प्रतीक्षा किए बिना सारे साहस को समेटकर माँ से कहती है 'माँ, मैं कानपुर जाऊँगी' और नौकर के साथ कानपुर चली जाती है। वह दृढ़-निश्चयी है, क्योंकि एक युवा स्त्री के लिए घर छोड़ना सरल न होने पर भी वह अपने निर्णय पर टिकी रहती है। वह त्यागी है, क्योंकि उसने नायब तहसीलदार के साथ सुविधा-भरे जीवन का अवसर छोड़ दिया। उसे अंग्रेज़ों के इशारे पर देशवासियों पर अत्याचार करने वालों से घृणा है। वह सेवाभावी और देशभक्त है, जो सत्याग्रही सीताराम के बच्चों की देखभाल करके उन्हें निश्चिंत करती है।
Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency
'कहानी स्त्री के आत्मनिर्णय को सम्मान देती है।' इस कथन की पुष्टि कीजिए। (लगभग 100 शब्द)
Hint
माँ से स्पष्ट कहना।
Answer
गौरी बड़े निर्णय अपने विवेक से लेती है। वह पिता के लौटने की प्रतीक्षा नहीं करती, बल्कि सारे साहस को समेटकर दृढ़ता से माँ कुंती से कहती है 'माँ, मैं कानपुर जाऊँगी।' इसके बाद वह नौकर के साथ कानपुर जाकर सत्याग्रही सीताराम के बच्चों की देखभाल करती है। वह सुख-सुविधा वाले जीवन का अवसर भी छोड़ देती है, क्योंकि उसे अंग्रेज़ों के सहयोगियों से घृणा है और वह देशभक्त की पत्नी बनना चाहती है। लेखिका उसके निर्णय को साहस, त्याग और देश-सेवा के रूप में प्रशंसनीय दिखाती हैं, इसलिए कहानी स्त्री के आत्मनिर्णय को सम्मान देती है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.गौरी की माँ का नाम क्या है?Show answer
कुंती।
2.सत्याग्रही कौन है?Show answer
सीताराम।
3.गौरी कहाँ जाती है?Show answer
कानपुर।
4.कहानी की लेखिका कौन हैं?Show answer
सुभद्रा कुमारी चौहान।
5.गौरी किसके बच्चों की देखभाल करती है?Show answer
सत्याग्रही सीताराम के बच्चों की।
गौरी का निर्णय और त्याग (गौरी, सुभद्रा कुमारी चौहान): frequently asked questions
2024 में किस पर प्रश्न आया था?
गौरी के कथन और निर्णय पर प्रश्न आया था।
कहानी की पृष्ठभूमि क्या है?
स्वतंत्रता-आंदोलन।
क्या सारी घटनाएँ इस पृष्ठ पर हैं?
नहीं, केवल अंक-योजना में दिए तथ्य हैं।