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HindiISC Class 11 · आह! धरती कितना देती है – सुमित्रानंदन पंत

आह! धरती कितना देती है (पंत): सेम के बीज और धरती की उदारता

Updated 18 October 2026 · Fact-checked

पंत की कविता में कवि बचपन में बोए पैसों के न उगने और जीवन के उत्तरार्ध में बोए सेम के बीजों के अनगिनत फलियों में बदलने का अनुभव सुनाता है। पड़ोसियों, मित्रों और मँगतों तक में फलियाँ बँटती हैं, इसलिए वह कहता है 'यह धरती कितना देती है!' और अंत में समता, क्षमता और ममता के बीज बोने का संदेश देता है।

Understand सेम के बीज और धरती की उदारता (आह! धरती कितना देती है)

प्रसंग। यह कविता ISC कक्षा 11 की काव्य मंजरी में है; इसका छंद मुक्त छंद और भाषा खड़ी बोली है। कविता का आरंभ बचपन की भूल से होता है: कवि ने पैसे बोए थे, पर बंजर धरती से एक भी अंकुर नहीं फूटा.

सेम के बीज। लगभग आधी शताब्दी बाद वर्षा-ऋतु में कौतूहल से कवि ने आँगन के कोने की गीली मिट्टी में सेम के कुछ बीज दबाए और भूल गया। एक संध्या उसने देखा कि कोने में कई नन्हे पौधे 'छोटे-छोटे छाता ताने' खड़े हैं। कवि ने उन्हें जीवन की विजय-पताकाओं या अंडे तोड़कर निकले चिड़ियों के बच्चों जैसा कहा।

फैलाव। धीरे-धीरे बेलें फैलीं, हरियाली छा गई और अनगिनत फलियाँ लगीं। फलियाँ इतनी हुईं कि सुबह-शाम घर-घर पकीं; पड़ोसियों, बंधु-बांधवों, मित्रों, अतिथियों और मँगतों ने भी खाईं।

धरती की उदारता। कवि विस्मित होकर कहता है 'यह धरती कितना देती है!'। धरती 'रत्न प्रसविनी' है और अपने पुत्रों को बिना भेदभाव के देती है।

तुलना। लोभ से बोए पैसे कुछ नहीं देते, सहज भाव से बोए बीज सबको तृप्त करते हैं। इस तुलना से श्रम, साझेदारी और समता का मूल्य उभरता है।

कला-पक्ष। उपमा/उत्प्रेक्षा ('छाता ताने खड़े', 'विजय-पताकाएँ', 'चिड़ियों के बच्चे') और मानवीकरण, पुनरावृत्ति और मुक्त छंद, खड़ी बोली।

Key quotations

Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.

  • ममता को रोपा था, तृष्णा को सींचा था!

    कवि: बचपन की भूल पर आत्म-स्वीकृति।

    गलत बीज: स्वार्थ और लालसा।

  • यह धरती कितना देती है!

    कवि: सेम की फलियों के बँटने के बाद।

    धरती की उदारता पर विस्मय; केंद्रीय भाव।

  • रत्न प्रसविनी है वसुधा, अब समझ सका हूँ।

    कवि: अंतिम अंश।

    अनुभव से मिला ज्ञान।

सेम के बीज और धरती की उदारता (आह! धरती कितना देती है): key facts

घटनाक्रम
  • बचपन में पैसे बोए
  • कुछ नहीं उगा
  • आधी शताब्दी बाद सेम बोए
  • बेलें और फलियाँ
  • घर-घर बँटीं
क्रम से लिखें।
दो प्रसंगों की तुलना
पैसे: लोभ, कुछ नहीं | सेम: सहज भाव, अनगिनत फलियाँ
तुलना से संदेश निकालें।
संदेश
  • समता
  • क्षमता
  • ममता
  • जैसा बोओगे वैसा पाओगे
तीनों दाने गिनाएँ।

How to answer सेम के बीज और धरती की उदारता (आह! धरती कितना देती है) questions

भाव-प्रश्न में यह क्रम अपनाएँ।

  1. 1बचपन की भूल को दो वाक्यों में बताएँ।
  2. 2सेम के बीज और पौधों का वर्णन करें।
  3. 3फलियों के बँटने से उदारता दिखाएँ।
  4. 4दोनों प्रसंगों की तुलना करें।
  5. 5अंतिम संदेश से निष्कर्ष दें।

सेम के बीज और धरती की उदारता (आह! धरती कितना देती है) in real life

The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.

निस्वार्थ परिश्रम का फल

मान लीजिए एक विद्यालय के छात्र खाली पड़ी ज़मीन पर सब्ज़ी की क्यारी बनाते हैं, और फसल आने पर उसे पड़ोस के परिवारों में बाँट देते हैं।

इस क्यारी का कविता के सेम के पौधों से क्या संबंध है?

Try it first, then show the solutionSolution
  1. छात्रों ने श्रम से बीज बोए।
  2. फसल सबमें बँटी।
  3. सब तृप्त हुए।

Answer: कवि की सेम की बेलों की तरह यह श्रम और साझेदारी का फल है, लोभ का नहीं।

Memory hook: जो बाँटकर बोओ, वही बहुत मिलता है।

Tricks to remember सेम के बीज और धरती की उदारता (आह! धरती कितना देती है)

Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.

  • प-स-फ-ध

    पैसे, सेम, फलियाँ, धरती।

    Use it when: कविता का क्रम।

  • ब-स

    बीज वैसा ही, फल वैसा ही।

    Use it when: अंतिम संदेश।

सेम के बीज और धरती की उदारता (आह! धरती कितना देती है): solved examples

Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.

Example 1: बचपन की भूल · 1 mark · MCQBoard level

कवि ने बचपन में धरती में क्या बोया था? (क) सेम के बीज (ख) पैसे (ग) आम की गुठली (घ) गेहूँ

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पहली पंक्ति में पैसे बोने का प्रसंग है।

Answer: (ख) पैसे।

Example 2: फलियाँ किसमें बँटीं · 1 mark · Very short answerBoard level

सेम की फलियाँ किन-किन में बँटीं? दो नाम लिखिए।

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पड़ोसी, मित्र, अतिथि, मँगते आदि।

Answer: पड़ोसियों और मित्रों में (अतिथियों और मँगतों में भी)।

Example 3: नन्हे पौधे · 2 marks · Short answerHarder board level

नन्हे पौधों के लिए कवि ने कौन-सी उपमाएँ दी हैं? (लगभग 40 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. छाता ताने खड़े।
  2. विजय-पताकाएँ या चिड़ियों के बच्चे।

Answer: कवि ने उन्हें 'छोटे-छोटे छाता ताने' खड़े बताया है और जीवन की विजय-पताकाओं या अंडे तोड़कर निकले, उड़ने को उत्सुक चिड़ियों के बच्चों जैसा कहा है। इससे नवजीवन की उमंग झलकती है।

Example 4: दो प्रसंगों की तुलना · 5 marks · Long answerHarder board level

कविता के दोनों प्रसंगों (पैसे और सेम) की तुलना कीजिए और बताइए कि कवि क्या सिखाता है। (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पैसे: लोभ, कुछ नहीं उगा।
  2. सेम: सहज बीज, अनगिनत फलियाँ।
  3. श्रम और साझेदारी का मूल्य।

Answer: बचपन में कवि ने लोभ से पैसे बोए, पर बंजर धरती से कुछ नहीं उगा; उसने 'ममता को रोपा था, तृष्णा को सींचा था'। आधी शताब्दी बाद उसने सहज कौतूहल से सेम के बीज दबाए और अनगिनत फलियाँ मिलीं, जो घर-घर बँटीं। दोनों की तुलना से कवि सिखाता है कि स्वार्थ और तृष्णा से कुछ नहीं मिलता, श्रम, सहजता और साझेदारी से धरती भरपूर देती है।

Example 5: अंतिम संदेश · 5 marks · Long answerHOTS / competency

'हम जैसा बोयेंगे वैसा ही पायेंगे', इस सूत्र की व्याख्या कविता के संदर्भ में कीजिए। (लगभग 100 शब्द)

Try it first, then show the solutionSolution
  1. पैसों से लोभ का फल।
  2. सेम से उदारता का फल।
  3. समता, क्षमता, ममता के बीज।

Answer: कविता में दो अनुभव हैं। लोभ से बोए पैसे नहीं उगे, पर सहज भाव से बोए सेम के बीज सबको तृप्त कर गए। इससे कवि निष्कर्ष निकालता है कि जो हम बोते हैं वही पाते हैं। इसलिए वह धरती में समता, क्षमता और ममता के दाने बोने की बात करता है, ताकि मानवता की सुनहली फसल उगे और जीवन श्रम से हँस उठे।

Where students lose marks in सेम के बीज और धरती की उदारता (आह! धरती कितना देती है)

The slips examiners see most often, and what to write instead.

  • Mistake: केवल घटना का सार लिखना

    भाव का प्रश्न है।

    Wrong working

    पैसे बोए, सेम बोए।

    Right working

    दोनों की तुलना और संदेश।

    Do this: अंत में संदेश लिखें।

    Usually costs: 2 से 3 अंक

  • Mistake: दो प्रसंग मिला देना

    क्रम बिगड़ता है।

    Wrong working

    सेम के बीज बचपन में बोए।

    Right working

    पैसे बचपन में, सेम आधी शताब्दी बाद।

    Do this: क्रम याद रखें।

    Usually costs: 1 अंक

  • Mistake: पंक्तियाँ गलत उद्धृत करना

    उद्धरण सही होना चाहिए।

    Wrong working

    धरती कितना देती है।

    Right working

    यह धरती कितना देती है!

    Do this: पंक्ति ठीक याद करें।

    Usually costs: 1 अंक

Exam tips

  • दोनों प्रसंगों की तुलना करें।
  • उद्धरण ठीक लिखें।
  • अंत में समता, क्षमता, ममता का संदेश दें।
  • उपमा/उत्प्रेक्षा और मानवीकरण का नाम लिखें।
  • सीमित शब्दों में उत्तर पूरा करें।

Practice questions on सेम के बीज और धरती की उदारता (आह! धरती कितना देती है)

Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.

  1. Q1 · 1 mark · MCQBoard level

    'रत्न प्रसविनी' का क्या अर्थ है? (क) रत्न चुराने वाली (ख) रत्न जन्म देने वाली (ग) रत्न माँगने वाली (घ) रत्न खाने वाली

    Hint

    'प्रसव' का अर्थ जन्म देना है।

    Answer

    (ख) रत्न को जन्म देने वाली; धरती।

  2. Q2 · 1 mark · Very short answerBoard level

    कवि ने सेम के बीज किस ऋतु में बोए थे?

    Hint

    गीली मिट्टी।

    Answer

    वर्षा-ऋतु में।

  3. Q3 · 2 marks · Short answerHarder board level

    कवि की बचपन की भूल क्या थी? (लगभग 40 शब्द)

    Hint

    गलत बीज।

    Answer

    कवि ने लोभ और स्वार्थ से पैसे बोए, यह सोचकर कि वे उगेंगे और वह सेठ बनेगा। वह अबोध था; उसने ममता को रोपा और तृष्णा को सींचा था।

  4. Q4 · 5 marks · Long answerHarder board level

    फलियों के बँटने का दृश्य लिखकर बताइए कि इससे धरती की किस विशेषता का पता चलता है। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    घर-घर, मँगते तक।

    Answer

    फलियाँ इतनी हुईं कि घर-घर पकीं और पड़ोसियों, बंधु-बांधवों, मित्रों, अतिथियों और मँगतों ने भी खाईं। इससे धरती की उदारता और निष्पक्षता का पता चलता है; वह सबको बिना भेदभाव के देती है, इसलिए कवि कहता है 'यह धरती कितना देती है!'

  5. Q5 · 5 marks · Long answerHOTS / competency

    कविता का मानवतावादी संदेश अपने शब्दों में लिखिए। (लगभग 100 शब्द)

    Hint

    समता, क्षमता, ममता।

    Answer

    कवि चाहता है कि धरती में समता, जन की क्षमता और मानव-ममता के दाने बोए जाएँ, ताकि धरती मानवता की सुनहली फसलें उगले। यह संदेश समाज में बराबरी, लोगों की शक्ति के उपयोग और प्रेम पर बल देता है, और बताता है कि सच्चा धन श्रम और ममता है, पैसा नहीं।

Test your recall

Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.

  1. 1.कविता के रचयिता कौन हैं?Show answer

    सुमित्रानंदन पंत।

  2. 2.कवि ने बचपन में क्या बोया?Show answer

    पैसे।

  3. 3.आधी शताब्दी बाद क्या बोया?Show answer

    सेम के बीज।

  4. 4.धरती को क्या कहा गया है?Show answer

    रत्न प्रसविनी।

  5. 5.कविता किस पुस्तक में है?Show answer

    काव्य मंजरी।

सेम के बीज और धरती की उदारता (आह! धरती कितना देती है): frequently asked questions

यह कविता किस कक्षा के लिए है?

ISC कक्षा 11 की काव्य मंजरी में।

कविता का छंद कौन-सा है?

मुक्त छंद, भाषा खड़ी बोली।

मुख्य संदेश क्या है?

जैसा बोयेंगे वैसा पायेंगे; समता और ममता के बीज बोएँ।