श्रम विभाजन और जाति-प्रथा: आंबेडकर के चार तर्क और उनका उत्तर लिखने की विधि (कक्षा 12)
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
आंबेडकर का मत है कि जाति-प्रथा श्रम विभाजन नहीं, श्रमिकों का विभाजन है। उनके चार तर्क हैं: (1) यह केवल काम नहीं, काम करने वालों को बाँटती है और ऊँच-नीच ठहराती है; (2) पेशा रुचि या क्षमता से नहीं, जन्म से पहले माता-पिता के सामाजिक स्तर के अनुसार तय हो जाता है; (3) पेशा बदलने की अनुमति न होने से तकनीक बदलने पर बेरोज़गारी बढ़ती है; (4) थोपे गए काम में रुचि न होने से कुशलता घटती है। इसलिए वे इसे आर्थिक दृष्टि से भी हानिकारक मानते हैं।
Understand जाति-प्रथा और श्रम विभाजन: आंबेडकर के चार तर्क
पाठ का पहला अंश तर्क-प्रधान है। आंबेडकर पहले जातिवाद के पोषकों का मत रखते हैं: सभ्य समाज में कार्य-कुशलता के लिए श्रम विभाजन आवश्यक है और जाति-प्रथा भी श्रम विभाजन का ही रूप है। फिर वे बिंदुवार इसका खंडन करते हैं।
तर्क 1: श्रमिक-विभाजन। वे कहते हैं कि जाति-प्रथा श्रम विभाजन के साथ-साथ श्रमिक-विभाजन का भी रूप लिए हुए है। श्रम विभाजन में काम बँटता है, पर यहाँ काम करने वाले मनुष्य बँटते हैं और इन वर्गों को ऊँचा-नीचा भी ठहराया जाता है; ऐसा संसार के किसी दूसरे समाज में नहीं होता।
तर्क 2: रुचि का अभाव। यह विभाजन व्यक्ति की रुचि या प्रशिक्षण पर आधारित नहीं है। लेखक के अनुसार कुशल समाज बनाने के लिए व्यक्ति की क्षमता इतनी विकसित की जानी चाहिए कि वह अपना पेशा स्वयं चुन सके; इसके विपरीत जाति-प्रथा में माता-पिता के सामाजिक स्तर के अनुसार गर्भधारण के समय से ही पेशा निर्धारित कर दिया जाता है।
तर्क 3: बेरोज़गारी। पैतृक पेशा छोड़ने की अनुमति न होने से तकनीक बदलने पर व्यक्ति के सामने भूखों मरने की स्थिति आ जाती है। इसलिए आंबेडकर इसे भारत में बेरोज़गारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण कहते हैं।
तर्क 4: अकुशलता। जब लोग थोपे गए काम को अरुचि और विवशता से करते हैं, तो वे टालू और कम काम करते हैं। न दिल लगता है, न दिमाग, तो कुशलता कैसे आए। इसलिए आर्थिक दृष्टि से भी जाति-प्रथा हानिकारक है।
उत्तर लिखते समय ध्यान रखें कि यह तर्क आंबेडकर का है; उत्तर में 'आंबेडकर के अनुसार' या 'लेखक का मत है' लिखकर तर्क को उसी के नाम से प्रस्तुत करें। भाषा संयत रहे और निष्कर्ष तर्क से निकले, भावुक टिप्पणी से नहीं। यह अंश 'जाति-भेद का उच्छेद' (मूल भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ़ कास्ट') से लिया गया है, जिसका हिंदी रूपांतर ललई सिंह यादव ने किया।
जाति-प्रथा और श्रम विभाजन: आंबेडकर के चार तर्क: key facts
- चार तर्क
- श्रमिक-विभाजन, ऊँच-नीच
- रुचि और क्षमता की अनदेखी, जन्म से पेशा
- पेशा बदलने की अनुमति नहीं, बेरोज़गारी
- अरुचि से अकुशलता
- 3 अंक के उत्तर में तीन तर्क, हर एक का एक वाक्य।
- श्रम विभाजन और जाति-प्रथा का अंतर
- श्रम विभाजन: काम का बँटवारा, रुचि पर आधारित | जाति-प्रथा: मनुष्यों का बँटवारा, जन्म पर आधारित, ऊँच-नीच
- तुलना तालिका की तरह लिखें।
- पारिभाषिक शब्द
- पूर्वनिर्धारण = पहले से तय
- श्रमिक-विभाजन = काम करने वालों का बँटवारा
- विवशता = मजबूरी
- अरुचि = रुचि का अभाव
- MCQ में शब्दार्थ पूछे जा सकते हैं।
जाति-प्रथा और श्रम विभाजन: आंबेडकर के चार तर्क in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
रुचि से चुना पेशा बनाम थोपा पेशा
मान लीजिए एक विद्यार्थी की रुचि चित्रकला में है, पर परिवार की परंपरा के कारण उसे जबरन दुकान संभालनी पड़ती है, और वह मन से काम नहीं कर पाता।
इस स्थिति को पाठ के किस तर्क से जोड़ा जा सकता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- रुचि की अनदेखी = दूसरे तर्क से मेल।
- मन न लगना = चौथे तर्क से मेल (अरुचि से अकुशलता)।
Answer: दूसरे और चौथे तर्क से; थोपा हुआ पेशा रुचि की अनदेखी करता है और कार्य-कुशलता घटाता है।
Memory hook: पेशा चुनो, थोपो मत।
तकनीक बदलने पर रोज़गार
मान लीजिए किसी इलाके में हाथ से कपड़ा बुनने वालों की माँग मशीनों के कारण घट जाती है, और परंपरागत बुनकर परिवारों को दूसरे काम सीखने का अवसर नहीं मिलता।
इसकी तुलना आंबेडकर के किस तर्क से हो सकती है और क्यों?
Try it first, then show the solutionSolution
- तकनीक बदली = उद्योग की प्रक्रिया बदल गई।
- दूसरे काम की छूट न मिलना = पेशा बदलने की अनुमति न होना।
- परिणाम बेरोज़गारी।
Answer: तीसरे तर्क से; पेशा बदलने की अनुमति न होने पर तकनीक बदलने से बेरोज़गारी फैलती है।
Memory hook: बदले तकनीक, बँधे पेशे: बेरोज़गारी।
Tricks to remember जाति-प्रथा और श्रम विभाजन: आंबेडकर के चार तर्क
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
श्र-रु-बे-अ
श्रमिक-विभाजन, रुचि, बेरोज़गारी, अकुशलता: चार तर्कों के पहले अक्षर।
Use it when: तर्क लिखिए वाले प्रश्न में।
काम बँटे या आदमी?
श्रम विभाजन में काम बँटता है, जाति-प्रथा में आदमी बँटता है।
Use it when: दोनों में अंतर वाले प्रश्न में।
जाति-प्रथा और श्रम विभाजन: आंबेडकर के चार तर्क: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: पूर्वनिर्धारण · 1 mark · MCQBoard level
आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा में किसी व्यक्ति का पेशा कब निर्धारित हो जाता है?
(क) शिक्षा पूरी होने पर
(ख) गर्भधारण के समय से ही, माता-पिता के सामाजिक स्तर के अनुसार
(ग) व्यक्ति की रुचि जानने के बाद
(घ) नौकरी मिलने पर
Try it first, then show the solutionSolution
- लेखक के अनुसार पेशा पूर्वनिर्धारित है।
- आधार माता-पिता का सामाजिक स्तर है, रुचि नहीं।
Answer: (ख) गर्भधारण के समय से ही, माता-पिता के सामाजिक स्तर के अनुसार।
Example 2: बेरोज़गारी का कारण · 2 marks · Short answerHarder board level
आंबेडकर जाति-प्रथा को बेरोज़गारी का प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण क्यों मानते हैं? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- पैतृक पेशा छोड़ने की अनुमति नहीं।
- तकनीक बदलने पर काम घटता है।
- परिणाम: भूखों मरने की स्थिति।
Answer: आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा में व्यक्ति पैतृक पेशा छोड़ नहीं सकता। उद्योगों की तकनीक बदलने पर जब पेशा बदलना ज़रूरी होता है, तब भी अनुमति न होने से वह बेरोज़गार होकर भूखों मरने की स्थिति में पहुँच जाता है, इसलिए यह बेरोज़गारी का प्रमुख कारण है।
Example 3: जाति-प्रथा श्रम विभाजन क्यों नहीं · 3 marks · Long answerHarder board level
आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा को श्रम विभाजन क्यों नहीं माना जा सकता? तीन तर्क दीजिए (लगभग 60 शब्द)।
Try it first, then show the solutionSolution
- पहला: श्रमिक-विभाजन और ऊँच-नीच।
- दूसरा: रुचि और क्षमता की अनदेखी।
- तीसरा: पेशा बदलने की अनुमति नहीं।
Answer: आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा काम का नहीं, काम करने वालों का विभाजन है और उन्हें ऊँचा-नीचा भी ठहराती है। दूसरे, यह विभाजन व्यक्ति की रुचि और क्षमता पर नहीं, माता-पिता के सामाजिक स्तर पर आधारित है और जन्म से पहले ही पेशा तय कर देता है। तीसरे, पेशा बदलने की अनुमति न होने से बेरोज़गारी बढ़ती है। इसलिए यह श्रम विभाजन नहीं है।
Example 4: आर्थिक हानि · 3 marks · Long answerHarder board level
आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा आर्थिक दृष्टि से कैसे हानिकारक है? उनके तर्क का क्रम लिखिए (लगभग 60 शब्द)।
Try it first, then show the solutionSolution
- थोपा पेशा, अरुचि।
- टालू और कम काम, मन-बुद्धि का न लगना।
- परिणाम: अकुशलता और उत्पादन में कमी।
Answer: आंबेडकर कहते हैं कि जाति-प्रथा में काम व्यक्ति पर थोपा जाता है, इसलिए वह उसे अरुचि और विवशता से करता है। ऐसे में वह टालू और कम काम करता है; न उसका दिल लगता है, न दिमाग। इससे कुशलता घटती है और उत्पादन तथा आर्थिक विकास पर बुरा असर पड़ता है, इसलिए यह आर्थिक रूप से हानिकारक है।
Example 5: जन्म से पेशा: पक्ष और विपक्ष · 3 marks · Long answerHOTS / competency
कुछ लोग तर्क देते हैं कि पैतृक पेशे में बच्चे घर पर ही सीख लेते हैं, इसलिए यह व्यवस्था कुशलता बढ़ाती है। इस तर्क पर आंबेडकर का मत क्या होगा? पाठ के आधार पर समीक्षा कीजिए (लगभग 60 शब्द)।
Try it first, then show the solutionSolution
- आंबेडकर कौशल सीखने के विरोधी नहीं हैं, चुनाव की स्वतंत्रता पर बल देते हैं।
- रुचि और क्षमता के बिना थोपा गया पेशा अकुशलता लाता है।
- तकनीक बदलने पर बदलने की अनुमति न होना बेरोज़गारी बढ़ाता है।
Answer: आंबेडकर कौशल सीखने के नहीं, पेशे को जन्म से थोपने के विरोधी हैं। उनके तर्क से घर पर सीखना तभी उपयोगी है जब व्यक्ति ने उसे रुचि और क्षमता से चुना हो। थोपा हुआ पेशा अरुचि से अकुशलता लाता है और तकनीक बदलने पर बेरोज़गारी बढ़ाता है, इसलिए वे इस तर्क से सहमत नहीं होंगे।
Where students lose marks in जाति-प्रथा और श्रम विभाजन: आंबेडकर के चार तर्क
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: तर्क को अपना मत बनाकर लिखना
पाठ आंबेडकर का है; उत्तर में तर्क उनके नाम से प्रस्तुत करना चाहिए।
Wrong working
जाति-प्रथा बहुत बुरी है और इसे खत्म करना चाहिए।
Right working
आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा श्रमिक-विभाजन भी है, इसलिए श्रम विभाजन का उचित रूप नहीं।
Do this: 'आंबेडकर के अनुसार' से वाक्य आरंभ करें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: तर्कों का क्रम बिगाड़ना
पहले श्रमिक-विभाजन, फिर रुचि, फिर बेरोज़गारी, फिर अकुशलता: क्रम में अंक मिलते हैं।
Do this: चार तर्कों का सूत्र 'श्र-रु-बे-अ' याद रखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: श्रम विभाजन का ही विरोध लिख देना
आंबेडकर श्रम विभाजन को सभ्य समाज की आवश्यकता मानते हैं; विरोध जाति-प्रथा के श्रमिक-विभाजन का है।
Do this: श्रम विभाजन की स्वीकृति और जाति-प्रथा की आलोचना दोनों लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: बेरोज़गारी के कारण में तकनीक का उल्लेख छोड़ देना
तकनीक बदलना और पेशा बदलने की अनुमति न होना दोनों कारण हैं।
Do this: दोनों बातें एक वाक्य में लिखें।
Usually costs: 1 अंक
Exam tips
- हर तर्क 'आंबेडकर के अनुसार...' से शुरू करें और उसका एक पाठ-आधारित प्रमाण दें।
- तर्कों का क्रम बनाए रखें: श्रमिक-विभाजन, रुचि, बेरोज़गारी, अकुशलता।
- श्रम विभाजन और जाति-प्रथा का अंतर दो पंक्तियों में अवश्य लिखें।
- भाषा संयत और तथ्यात्मक रखें; भावुक टिप्पणियों से बचें।
- पारिभाषिक शब्दों (पूर्वनिर्धारण, विवशता, अरुचि) का अर्थ याद रखें।
Practice questions on जाति-प्रथा और श्रम विभाजन: आंबेडकर के चार तर्क
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
जाति-प्रथा की तुलना में श्रम विभाजन में क्या अंतर है, जैसा लेखक बताते हैं?
(क) श्रम विभाजन में मनुष्य बँटते हैं; जाति-प्रथा में काम
(ख) श्रम विभाजन में काम बँटता है; जाति-प्रथा में काम करने वाले मनुष्य बँटते हैं
(ग) दोनों एक ही हैं
(घ) जाति-प्रथा में रुचि का ध्यान रखा जाता हैHint
श्रमिक-विभाजन शब्द पर ध्यान दें।
Answer
(ख) श्रम विभाजन में काम बँटता है; जाति-प्रथा में काम करने वाले मनुष्य बँटते हैं।
Q2 · 2 marks · Short answerBoard level
सक्षम श्रमिक-समाज के निर्माण के लिए लेखक किस बात को आवश्यक मानते हैं? (लगभग 40 शब्द)
Hint
पेशे का चुनाव कौन करे।
Answer
लेखक के अनुसार सक्षम श्रमिक-समाज के लिए व्यक्तियों की क्षमता इतनी विकसित की जानी चाहिए कि वे अपना पेशा या कार्य स्वयं चुन सकें। जाति-प्रथा इसके विपरीत जन्म से पेशा तय कर देती है।
Q3 · 3 marks · Long answerHarder board level
जाति-प्रथा के कारण पेशा न बदल सकने की स्थिति से व्यक्ति और समाज को क्या-क्या हानियाँ होती हैं? पाठ के आधार पर तीन हानियाँ लिखिए (लगभग 60 शब्द)।
Hint
बेरोज़गारी, अरुचि, अकुशलता।
Answer
पहली हानि बेरोज़गारी है, क्योंकि तकनीक बदलने पर भी पैतृक पेशा छोड़ने की अनुमति न होने से भुखमरी की स्थिति आ जाती है। दूसरी हानि अरुचि से किया गया काम है, जो व्यक्ति के मन और बुद्धि को नहीं जोड़ता। तीसरी हानि अकुशलता है, क्योंकि टालू और कम काम से उत्पादन और समाज की आर्थिक प्रगति घटती है।
Q4 · 3 marks · Long answerHarder board level
लेखक का यह कथन कि श्रमिकों के वर्गों को ऊँचा-नीचा ठहराना 'संसार के किसी भी समाज में नहीं पाया जाता', किस तर्क को पुष्ट करता है? उस तर्क की व्याख्या कीजिए (लगभग 60 शब्द)।
Hint
श्रमिकों को ऊँचा-नीचा ठहराना।
Answer
यह कथन पहले तर्क को पुष्ट करता है कि जाति-प्रथा श्रमिक-विभाजन भी है। लेखक के अनुसार श्रम विभाजन कई समाजों में होता है, पर श्रमिकों के वर्गों को ऊँचा और नीचा ठहराने की रीति दूसरे समाजों में नहीं मिलती। इसलिए जाति-प्रथा को साधारण श्रम विभाजन कहकर उचित ठहराना सही नहीं है।
Q5 · 3 marks · Long answerHOTS / competency
आज की शिक्षा-व्यवस्था में विद्यार्थी अपने विषय और भविष्य के पेशे का चयन अपनी रुचि से कर सकते हैं। इस स्थिति को आंबेडकर के तर्कों की दृष्टि से कितना सकारात्मक कहा जाएगा? तर्क सहित लिखिए (लगभग 60 शब्द)।
Hint
रुचि के अनुसार चुनाव का सिद्धांत।
Answer
आंबेडकर के तर्कों के अनुसार यह स्थिति सकारात्मक है, क्योंकि वे चाहते थे कि व्यक्ति की क्षमता इतनी विकसित की जाए कि वह अपना पेशा स्वयं चुन सके। रुचि से चुना पेशा कुशलता बढ़ाता और बेरोज़गारी के जोखिम को घटाता है। पर तभी, जब सभी को समान अवसर और शिक्षा मिले, वरना चुनाव की स्वतंत्रता केवल नाम की रह जाएगी।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.यह पाठ किस भाषण का अंश है?Show answer
आंबेडकर के भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ़ कास्ट' के हिंदी रूपांतर 'जाति-भेद का उच्छेद' का।
2.जाति-प्रथा किसका विभाजन करती है?Show answer
श्रमिकों का, यानी काम करने वाले मनुष्यों का।
3.जाति-प्रथा भारत में बेरोज़गारी का क्या कारण है?Show answer
प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण।
4.रूपांतरकार कौन हैं?Show answer
ललई सिंह यादव।
5.थोपे गए काम को लोग कैसे करते हैं?Show answer
अरुचि और विवशता से, टालू और कम।
जाति-प्रथा और श्रम विभाजन: आंबेडकर के चार तर्क: frequently asked questions
यह पाठ किस प्रकार का है?
तर्क पर आधारित वैचारिक निबंध (भाषण का अंश)।
आंबेडकर का जन्म-निधन वर्ष क्या है?
अध्याय के अनुसार 1891 और 1956।
क्या इस अंश में आदर्श समाज का वर्णन भी है?
हाँ, पाठ का दूसरा अंश 'मेरी कल्पना का आदर्श समाज' है; यह पृष्ठ पहले अंश के तर्कों पर है।
इस पाठ से बोर्ड में क्या पूछा जाता है?
गद्यांश पर 5 MCQ, जाति-प्रथा को श्रम विभाजन न मानने के तर्क, बेरोज़गारी और दासता की परिभाषा पर 2-3 अंक के प्रश्न।