आओ, मिलकर बचाएँ (निर्मला पुतुल): क्या-क्या बचाना है, पहचान, प्रकृति और उम्मीद
Updated 17 October 2026 · Fact-checked
कविता में निर्मला पुतुल अपने संथाली समाज से मिलकर बस्तियों को शहरी प्रभाव और हड़िया के नशे से, अपनी माटी, भाषा और जुझारूपन को खोने से और जंगल, नदियों, पहाड़ों और गीतों जैसी प्रकृति को नष्ट होने से बचाने का आह्वान करती हैं। साथ ही वे थोड़ा विश्वास, उम्मीद और सपने बचाने की बात करती हैं और कहती हैं कि अब भी बहुत कुछ बचा है।
Understand आओ, मिलकर बचाएँ: क्या-क्या बचाना है, पहचान, प्रकृति और उम्मीद
पहचान बचाना। कवयित्री चाहती हैं कि चेहरे पर संथाल परगना की माटी का रंग और भाषा में झारखंडीपन बचा रहे। बस्तियाँ शहर की आबो-हवा (दिखावा, उपभोक्तावाद और बाहरी प्रभाव) और हड़िया (चावल से बनी देसी शराब) के नशे से बची रहें। "नंगी होने से" बचाने का अर्थ है हरियाली और सांस्कृतिक पहचान का न छिनना।
गुण बचाना। ठंडी होती दिनचर्या में जीवन की गर्माहट, मन का हरापन, दिल का भोलापन और अक्खड़पन व जुझारूपन भी बचे रहें, ताकि लोग अन्याय के आगे झुकें नहीं। धनुष की डोरी, तीर का नुकीलापन और कुल्हाड़ी की धार आत्मरक्षा व संघर्ष की क्षमता के प्रतीक हैं।
प्रकृति और सहज सुख। जंगल की ताज़ा हवा, नदियों की निर्मलता, पहाड़ों का मौन, गीतों की धुन, मिट्टी की सोंधी गंध और फसलों की लहलहाहट बचानी है। साथ ही नाचने के लिए खुला आँगन, हँसने के लिए खिलखिलाहट, बच्चों के लिए मैदान, पशुओं के लिए घास और बूढ़ों के लिए पहाड़ों की शांति भी।
आशा। अंत में वे इस अविश्वास-भरे दौर में थोड़ा विश्वास, थोड़ी उम्मीद और थोड़े सपने बचाना चाहती हैं। कविता निराशा पर नहीं, "बहुत कुछ बचा है" की आशा पर समाप्त होती है। पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ अध्याय-पृष्ठ पर है।
Key quotations
Short lines worth knowing by heart: who says them, when, and why they matter.
अपनी बस्तियों को नंगी होने से
कवयित्री: कविता की शुरुआत में।
हरियाली और सांस्कृतिक पहचान के छिनने का भय।
भाषा में झारखंडीपन
कवयित्री: पहचान बचाने के प्रसंग में।
अपनी बोली और संस्कृति की रक्षा का आग्रह।
बहुत कुछ बचा है,
कवयित्री: कविता के अंत में।
निराशा के बीच आशा का स्वर।
आओ, मिलकर बचाएँ: क्या-क्या बचाना है, पहचान, प्रकृति और उम्मीद: key facts
- क्या बचाना है
- पहचान
- गुण
- प्रकृति
- सहज सुख
- उम्मीद
- पाँच वर्ग याद रखें।
- खतरे
- शहरी आबो-हवा
- हड़िया का नशा
- प्रकृति का विनाश/पहचान का क्षरण
- कविता में बताए गए संकट।
- भाव
- चिंता
- आह्वान
- आशा
- कविता का तीन-चरणीय स्वर।
आओ, मिलकर बचाएँ: क्या-क्या बचाना है, पहचान, प्रकृति और उम्मीद in real life
The idea, met in an everyday situation. Answer the question in your own words, then compare with the model answer. The one-line hook is what to remember.
अपनी बोली बचाने का संकल्प
मान लीजिए किसी गाँव के बच्चे शहर जाकर अपनी बोली बोलने में झिझकने लगे हैं, और गाँव के बड़े मिलकर बोली में गीत-प्रतियोगिता शुरू करते हैं।
यह प्रयास कविता के किस भाव से जुड़ता है?
Try it first, then show the solutionSolution
- बोली पहचान का हिस्सा है।
- मिलकर प्रयास किया जा रहा है।
- आशा बनी हुई है।
Answer: यह कविता की "भाषा में झारखंडीपन" बचाने की भावना से जुड़ता है। सामूहिक प्रयास से अपनी पहचान और संस्कृति सुरक्षित रखी जा सकती है।
Memory hook: मिलकर बचाएँ, तो बहुत कुछ बचेगा।
Tricks to remember आओ, मिलकर बचाएँ: क्या-क्या बचाना है, पहचान, प्रकृति और उम्मीद
Short memory aids. Say each one aloud once, then use it on a question the same day.
प-ग-प्र-स-उ
पहचान, गुण, प्रकृति, सहज सुख, उम्मीद।
Use it when: क्या-क्या बचाना है, इसके पाँच वर्ग।
तीर-धनुष-कुल्हाड़ी
संघर्ष की क्षमता के तीन प्रतीक।
Use it when: जुझारूपन के प्रश्न में।
आओ, मिलकर बचाएँ: क्या-क्या बचाना है, पहचान, प्रकृति और उम्मीद: solved examples
Ordered from board level to HOTS. Try each one before you open the solution.
Example 1: कवयित्री का परिचय · 1 mark · MCQBoard level
निर्मला पुतुल किस समाज से हैं?
(क) भील (ख) संथाल (ग) गोंड (घ) नागा
Try it first, then show the solutionSolution
- वे झारखंड के संथाल आदिवासी परिवार से हैं (1 अंक)।
Answer: (ख)
Example 2: हड़िया · 2 marks · Short answerBoard level
कवयित्री हड़िया से बस्तियों को क्यों बचाना चाहती हैं? (लगभग 40 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- हड़िया चावल से बनी देसी शराब है (1)।
- नशे में डूबने से समाज की प्रगति और पहचान संकट में पड़ती है (1)।
Answer: हड़िया चावल से बनी देसी शराब है। कवयित्री नहीं चाहतीं कि पूरी बस्ती नशे में डूबे, क्योंकि इससे मेहनत, चेतना और समाज की पहचान कमज़ोर होती है। वे समाज की कमी स्वीकारते हुए उसे सुधारना चाहती हैं।
Example 3: जुझारूपन · 3 marks · Short answerHarder board level
कविता में अक्खड़पन और जुझारूपन को बचाने की बात क्यों कही गई है? (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- अन्याय के आगे न झुकना (1)।
- धनुष, तीर, कुल्हाड़ी का प्रतीकात्मक अर्थ (1)।
- भाषा और शब्द-सीमा (1)।
Answer: अक्खड़पन और जुझारूपन आदिवासी समाज के स्वाभिमान की पहचान हैं। इनके बिना लोग अन्याय के आगे झुक सकते हैं। धनुष की डोरी, तीर का नुकीलापन और कुल्हाड़ी की धार आत्मरक्षा और संघर्ष की क्षमता के प्रतीक हैं, इसलिए कवयित्री इन्हें बचाना चाहती हैं।
Example 4: काव्यांश · 5 marks · Source-basedHarder board level
कविता के भाव पर आधारित अंश (अपने शब्दों में): कवयित्री चाहती हैं कि जंगल की ताज़ा हवा, नदियों की निर्मलता और पहाड़ों का मौन बचा रहे। वे यह भी चाहती हैं कि नाचने के लिए आँगन, हँसने के लिए खिलखिलाहट और बच्चों के लिए खेलने का मैदान बचा रहे।
(i) कवयित्री किसके संरक्षण की बात करती हैं
(क) केवल शहरों के (ख) प्रकृति और सहज सुखों के (ग) उद्योगों के (घ) धन के
(ii) "पहाड़ों का मौन" से भाव है
(क) शोर (ख) शांति (ग) भय (घ) उदासी
(iii) "बच्चों के लिए मैदान" बचाना क्या दर्शाता है
(क) खेल-कूद की चिंता (ख) राजनीति (ग) व्यापार (घ) युद्ध
(iv) नदियों की निर्मलता का आशय है
(क) गहराई (ख) स्वच्छता (ग) गति (घ) लंबाई
(v) इस अंश का मूल भाव है
(क) विकास का विरोध (ख) प्रकृति और जीवन के सहज रूप की रक्षा (ग) शहर की प्रशंसा (घ) निराशा
Try it first, then show the solutionSolution
- प्रत्येक उप-प्रश्न 1 अंक का है।
Answer: (i) (ख); (ii) (ख); (iii) (क); (iv) (ख); (v) (ख)।
Example 5: कविता का दृष्टिकोण · 3 marks · Short answerHOTS / competency
"कविता केवल बाहरी खतरों के बारे में है।" इस कथन की परख कीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Try it first, then show the solutionSolution
- बाहरी खतरे: शहरी प्रभाव, प्रकृति का विनाश (1)।
- भीतरी कमियाँ: हड़िया का नशा (1)।
- निष्कर्ष (1)।
Answer: यह कथन अधूरा है। कविता में शहरी आबो-हवा और प्रकृति के विनाश जैसे बाहरी खतरे हैं, पर साथ ही हड़िया के नशे जैसी समाज की अपनी कमी भी है। इसलिए कवयित्री बाहर और भीतर दोनों को सुधारने का आह्वान करती हैं।
Where students lose marks in आओ, मिलकर बचाएँ: क्या-क्या बचाना है, पहचान, प्रकृति और उम्मीद
The slips examiners see most often, and what to write instead.
Mistake: कविता को केवल पर्यावरण पर बताना
पहचान और भाषा का पक्ष भी है।
Wrong working
कविता वन-संरक्षण की है।
Right working
कविता पहचान, भाषा, प्रकृति और आशा सबकी रक्षा की है।
Do this: पाँच वर्ग लिखें।
Usually costs: 1-2 अंक
Mistake: हड़िया का अर्थ गलत लिखना
हड़िया चावल की देसी शराब है।
Wrong working
हड़िया एक भोजन है।
Right working
हड़िया चावल से बनी देसी शराब है।
Do this: अर्थ याद रखें।
Usually costs: 1 अंक
Mistake: अंत की आशा छोड़ना
कविता आशा पर समाप्त होती है।
Wrong working
कविता निराशा पर खत्म होती है।
Right working
कविता "बहुत कुछ बचा है" पर समाप्त होती है।
Do this: अंतिम पंक्ति उद्धृत करें।
Usually costs: 1-2 अंक
Exam tips
- क्या-क्या बचाना है, उसे पाँच वर्गों में बाँटकर लिखें।
- हड़िया और जुझारूपन के प्रतीकों के अर्थ याद रखें।
- कविता की आशा वाली अंतिम पंक्ति ज़रूर लिखें।
- भावार्थ में कवयित्री और संथाल समाज का नाम लिखें।
- 40 और 60 शब्दों की सीमा का ध्यान रखें।
Practice questions on आओ, मिलकर बचाएँ: क्या-क्या बचाना है, पहचान, प्रकृति और उम्मीद
Write each answer on paper first. Open the hint only if you are stuck, and the answer only when you have finished.
Q1 · 1 mark · MCQBoard level
कविता में "थोड़ा-सा" किस चीज़ को बचाने की बात आती है?
(क) विश्वास और उम्मीद (ख) धन (ग) शहर (घ) सत्ताHint
कविता के अंतिम अंश को याद कीजिए।
Answer
(क)
Q2 · 3 marks · Short answerHarder board level
"अपनी बस्तियों को नंगी होने से" बचाने का क्या आशय है? (लगभग 60 शब्द)
Hint
हरियाली और सांस्कृतिक पहचान।
Answer
इसका आशय है कि बस्तियों की प्राकृतिक हरियाली और सांस्कृतिक पहचान न छिने। जंगल कटने और बाहरी प्रभाव बढ़ने से बस्तियाँ अपना रूप खो सकती हैं। कवयित्री चाहती हैं कि लोग मिलकर इस हानि को रोकें और अपनी पहचान सुरक्षित रखें।
Q3 · 3 marks · Short answerHarder board level
कविता में सहज सुखों के कौन-से उदाहरण आए हैं और वे क्यों महत्त्वपूर्ण हैं? (लगभग 60 शब्द)
Hint
नाचने, हँसने, रोने, बच्चों और बूढ़ों के लिए बचाने की सूची।
Answer
कविता में नाचने के लिए खुला आँगन, हँसने के लिए खिलखिलाहट, रोने के लिए एकांत, बच्चों के लिए मैदान, पशुओं के लिए घास और बूढ़ों के लिए पहाड़ों की शांति के उदाहरण हैं। ये जीवन के सरल सुख हैं, जिनके बिना समाज का जीवन नीरस हो जाएगा।
Q4 · 1 mark · Assertion-reasonHarder board level
कथन (A): कविता निराशा पर समाप्त होती है। कारण (R): कवयित्री कहती हैं कि अब भी बहुत कुछ बचा है।
(क) A और R सही (ख) A गलत, R सही (ग) A सही, R गलत (घ) दोनों गलतHint
अंतिम पंक्तियों का स्वर कैसा है?
Answer
(ख)
Q5 · 3 marks · Short answerHOTS / competency
क्या आपको लगता है कि कविता की सूची केवल आदिवासी समाज पर लागू होती है? अपना मत दीजिए। (लगभग 60 शब्द)
Hint
भाषा, पर्यावरण, पहचान और आशा को व्यापक संदर्भ में देखें।
Answer
सूची मूल रूप से संथाल समाज की है, पर उसका संदेश व्यापक है। भाषा, पर्यावरण, भोलापन और आशा किसी भी समाज के लिए ज़रूरी हैं। इसलिए यह कविता किसी भी स्वस्थ सामाजिक और प्राकृतिक परिवेश की रक्षा का आह्वान है।
Test your recall
Answer in your head or on paper first, then open the card. Pulling an answer out of memory makes it stick far better than re-reading.
1.कविता किसकी है?Show answer
निर्मला पुतुल की।
2.हिंदी रूपांतर किसने किया?Show answer
अशोक सिंह ने।
3.मूल भाषा कौन-सी है?Show answer
संथाली।
4.हड़िया क्या है?Show answer
चावल से बनी देसी शराब।
5.कविता का अंत किस भाव से होता है?Show answer
आशा से।
आओ, मिलकर बचाएँ: क्या-क्या बचाना है, पहचान, प्रकृति और उम्मीद: frequently asked questions
कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
पहचान, प्रकृति और सहज जीवन को मिलकर बचाना।
कवयित्री किस समाज की हैं?
झारखंड के संथाल समाज की।
क्या कविता केवल चिंता की है?
नहीं, वह आशा के साथ समाप्त होती है।